नीतिवचन 13:11

अनर्थ से प्राप्त किया गया धन घट जाएगा, परन्तु जो अपने परिश्रम से बटोरता, उसकी बढ़ती होती है।

जब बुद्धिमान व्यक्ति मूर्ख के व्यापारिक लेनदेन पर सवाल उठाता है तो वह उससे कहता है, “लेकिन यह तो काम कर गया”। इस चेक को देखो! लोग तुम्हें यूँ ही पैसे नहीं भेजते। इन गवाहियों को पढ़ो। अन्य लोग भी यही काम करके अमीर बन रहे हैं। मुझे आगे बढ़ने से हतोत्साहित करने की कोशिश करना बंद करो। यदि तुम्हें किसी दूसरे व्यक्ति के अधीन काम करना है तो तुम जाओ। मैं तो अपने सपनों को पूरे करूंगा और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनूँगा।”

हा..हा! उपदेशक सुलैमान, जो कि इस पृथ्वी पर अब तक का सबसे सफल और सबसे अमीर मनुष्य था और जो धोखाधड़ी, छल, अफवाहों और घोटालों को पहचानने में परमेश्वर से प्रेरणा पाता था, इस बात पर बहुत हंसता है। वह जानता है कि यह मूर्ख नीचे गिराया जाएगा, और जो बुद्धिमान व्यक्ति हर दिन अपनी आम-सी नौकरी पर जाता है, वह ऊपर उठाया जाएगा। वह उस मूर्ख की वित्तीय अज्ञानता पर हंसता है। हा..हा!

अभिमानी होने का अर्थ हर चीज़ के प्रति एक व्यर्थ, मूर्खतापूर्ण, लाभहीन या गलत दृष्टिकोण रखना होता है (भजन संहिता 39:5,11; 62:9; सभोपदेशक 2:11,26; 3:19; 4:7-8; 6:2; 7:6) ; यशायाह 41:29; यिर्मयाह 16:19; 51:18)। अभिमान से प्राप्त धन व्यर्थ, मूर्खतापूर्ण, लाभहीन, या गलत व्यापार या निवेश प्रथाओं का अस्थायी परिणाम होता है। सफलता का भ्रम वास्तविक नहीं होता – वह बस एक छलपूर्ण झूठ होता है। क्या आप भी इस तरह नीचे जा रहे हैं?

क्या मूर्खों की सफ़लता आपको प्रभावित करती है? इस नीतिवचन में वर्णित मूर्ख एक धनवान व्यक्ति है। व्यापार और निवेश के उसके व्यर्थ तरीके काम कर जाते हैं। उसे उनसे अच्छा परिणाम प्राप्त होता है। परंतु क्या सचमुच उसे अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं? जो सब कुछ वह सोचता है कि उसके पास है, वह उसे खो देगा और वह उस मनुष्य से नीचे और बहुत पीछे रह जाएगा जो एक वास्तविक नौकरी में कड़ा परिश्रम करता है। कभी-कभी परिणाम भ्रामक भी हो सकते हैं। क्या आप इतने बुद्धिमान हैं कि यह जान सके कि परिणामों से कुछ भी साबित नहीं होता?

क्या मूर्खों की सफ़लता आपको प्रभावित करती है? आज अब तक के प्रत्येक घोटाले की हजारों गवाहियाँ उपलब्ध हैं। हाँ, हजारों! और हाँ, हर घोटाले की! क्या आप गवाहियाँ नहीं पढ़ते? कभी भी नहीं? अद्भुत! वे वास्तव में काल्पनिक सोच, गलत जानकारी, गोदी मीडिया के एफेक्ट, असत्यापित तथ्यों, अप्रासंगिक घटनाओं से संबंधित, जनसमूह-मनोविज्ञान और झूठ का एक भ्रामक मिश्रण होती हैं। वे सभी व्यर्थ हैं।

आखिर एक साधारण नौकरी में हर दिन कड़ी परिश्रम करने की गवाही कौन पढ़ना चाहेगा? इससे मूर्खों या आलसी लोगों के कानों में जूँ भी नहीं रेंगती, है ना? आखिर अपनी जमा पूंजी को बढ़ाने के लिए अपने अहंकार को नकारने की गवाही कौन पढ़ना चाहेगा? परंतु राजा सुलैमान ये सब ज़रूर पढ़ते! धन्यवाद हो परमेश्वर का। यदि आप यहाँ सुलैमान की उस गवाही पर विश्वास नहीं करते, तो आपके आस-पास ऐसे कई घोटाले हो रहे होंगे जिनमें आप आसानी से फंस सकते हैं।

क्या मूर्खों की सफ़लता आपको प्रभावित करती है? प्रारंभिक चरणों में, खोखली योजनाएं, नेटवर्क मार्केटिंग फ़्रौड्स और ज्यादा मुनाफ़ा देनेवाली निवेश योजनाएं अस्थायी लाभ और धन उत्पन्न करते हैं। लेकिन यह सफलता ज़्यादा देर तक नहीं टिकती, और यह केवल कुछ ही प्रतिभागियों तक पहुँच पाती है। आखिर कौन स्वयं एक ऐसे व्यवसाय में जाना चाहेगा जहां सारा लाभ केवल 2% “वितरक” की जेब में जाता है? आखिर कौन इस तरह नीचे गिराया जाना चाहेगा?

1630 के दशक में हॉलैंड के अधिकांश लोगों ने ट्यूलिप के व्यापार में निवेश किया था; जिससे कई लोग अमीर भी बन गये थे। लेकिन 1637 में वह व्यापार डूब गया और उन मूर्खों को अपने साथ ले डूबा। इंग्लैंड में कई लोगों ने साउथ सी कंपनी के स्टॉक में ट्रेडिंग करके बहुत धन कमाया, जो कि केवल आशा पर आधारित था। 1720 में उसका पूरी तरह से पतन हो गया। उभरते हुए 20वे दशक ने अमेरिकी शेयर बाज़ार को अद्भुत ऊंचाइयों तक पहुंचाया परंतु जल्द ही उसका भी पतन हो गया, जिसके कारण वह देश कई वर्षों तक मंदी में रहा। और 2000 में नए डॉटकॉम स्टॉक के बढ़ने पर, हालांकि किसी का भी कुछ लाभ नहीं हुआ, फिर भी अगले कुछ महीनों में पूरा NASDAQ स्टॉक इंडेक्स 70% से गिर गया। इससे उसमें निवेश करने वाले मूर्खों को बुरी मार पड़ी थी!

मूर्खतापूर्ण और कपटपूर्ण व्यावसायिक उद्यमों में अस्थायी सफलता की ऐसी घटनाओं को मूर्खों की समृद्धि कहा जाता है (नीतिवचन 1:32)। यह और भी मूर्खों को यही दण्ड सहने के लिए आकर्षित करता है। इस नीतिवचन में ध्यान दें कि मूर्खों को धन सच में प्राप्त होता है। परन्तु वह धन स्थायी नहीं होता, क्योंकि वह मूर्खतापूर्ण और गलत तरीकों से प्राप्त किया गया होता है, और शीघ्र ही समाप्त जाता है। न तो परमेश्वर और न ही अर्थशास्त्र और कोई वित्तिय नियम इस प्रकार के धन को कभी भी स्थायी रहने देंगे। ऐसे मूर्ख नीचे गिराए जाएंगे।

ऐसे व्यर्थ परिणाम शीघ्र ही लुप्त हो जाते हैं। वे जिस तेज़ी बिना किसी प्रयत्न के मूर्खों द्वारा कम समय में प्राप्त किए जाते हैं, उसी तेज़ी से वे चले भी जाते हैं। कई लोग कहते हैं, “जो आसानी से प्राप्त होता है, वह आसानी से चला भी जाता है”। ऐसे परिणाम एक मूर्ख व्यक्ति में सफलता की एक अवास्तविक भावना उत्पन्न करते हैं, जिससे वह आगे और अधिक मूर्खतापूर्ण निर्णय लेता है। ऐसी समृद्धि मूर्ख को दिखावा करने के लिए अत्यधिक खर्च करने पर भी मजबूर करती है। यहोवा स्वयं उनके इन प्रयत्नों पर प्रहार करेगा, क्योंकि वह मूर्खों को अपनी बुद्धि के नियमों का उल्लंघन करके अधिक समय तक सफल होने नहीं देगा।

मनुष्य ऐसे हर विचार से प्रलोभित हो जाते हैं जो उन्हें कम काम करने और अधिक कमाने का अवसर देता है। बिना कुछ कम किए, अच्छे परिणाम पाने की उम्मीद करना वास्तव दुष्ट हृदयों का कपटी स्वभाव है, विशेष रूप से इस विकारित और आलस से भरी पीढ़ी में। मनुष्यों को झूठ बहुत पसंद होता है; वे सच्चाई से दूर भागते हैं। इसी प्रलोभन के कारण, यह नीतिवचन आपको इसके विरुद्ध सचेत करता है। यदि आप आर्थिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो तुरंत अपने काम पर लग जाएं।

बचत और निवेश करने के अतिरिक्त, समय के साथ निरंतर परिश्रम करना आपको बढ़ोतरी की ओर ले जाएगा। और परमेश्वर आपके इन प्रयत्नों को कई गुना बढ़ाएगा। यही वित्तीय बुद्धिमत्ता कहलाती है। क्या आप अपने मूर्ख और कपटी हृदय पर विजय प्राप्त करके, इस बात पर अमल करने में सक्षम हैं? यह आपका विकृत शरीर ही है जो आपको कम काम करने और अधिक कमाने के लिए इच्छुक बनाता है। परंतु आप बुद्धि का चुनाव करें! वह आपको ऊपर उठाएगी। नीतिवचन 12:11 पर की गई टिप्पणियों को पढ़ें।

वित्तीय सफलता के लिए कड़ा परिश्रम और अनुशासन, भविष्य तक आपके काम आएगा, क्योंकि एक कदम आगे बढ़ने के लिए आपको जिन चारित्रिक गुणों की आवश्यकता पड़ेगी, वही आपको भविष्य में और अधिक प्रगति की ओर ले जाएंगे। इस प्रकार एक परिश्रमी मनुष्य अपने चरित्र और प्रयत्नों का लाभ उठाने के लिए, अपनी निवेश की गई पूंजी से और उत्पादक संपत्ति खरीद सकता है। नीतिवचन 14:4 पर मेरी कमेंटरी को पढ़ें।

आपको परमेश्वर मे किस प्रकार चलना चाहिए और उसे कैसे प्रसन्न करना चाहिए, यह सिखाने के लिए प्रभु यीशु की आज्ञाएँ आपको यह भी बताती है कि आपको किस प्रकार काम करना चाहिए (1 थिस्स्लुनीकियों 4:1-12)। वित्तीय अभिमान का तिरस्कार करके और एक ईमानदार और परिश्रमी कामगार बनकर, केवल वही कार्य करें जो सभी मनुष्यों की दृष्टि में निष्कपट ठहरता है (रोमियों 12:11,17; इफिसियों 4:28)। परमेश्वर और मनुष्य, दोनों ही आपके इस चरित्र का सम्मान करेंगे और आपके प्रयत्नों को पुरस्कृत करेंगे। इसके परिणामस्वरूप आप मूर्खों से कहीं अधिक उपर उठाए जाएंगे।

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