नीतिवचन 12:25
उदास मन दब जाता है, परन्तु भली बात से वह आनन्दित होता है।
सबसे सस्ती और सरलतम सौगात कौन-सी है? अनुग्रहसहित कहें दो शब्द! यह उदास मन को आनन्द दे सकता है। ऐसे प्रेम की सौगात के लिए आपको कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी। दूसरों के लिए धनवान बनने का यह कितना सस्ता तरीका है! आप किसी व्यक्ति को ख़ुशी के मारे झूमता-गाता भेज सकते हैं।
आपका मुँह सिर्फ़ भोजन चबाने और निगलने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकता है। यह उदास मन को प्रसन्न कर सकता है। अगर आपको ऐसा करना है तो आप को ऐसे शब्द सीखने होंगे जिसमें अनुग्रह का भाव, प्रशंसात्मक गुण, और सत्य के उत्साहवर्धक वचन हो। क्या आप भारी मनवाले या उदास मनवाले किसी मनुष्य को पहचान सकते हैं? क्या आप जानते हैं उसके लिए आवश्यक ऐसी भली बातें कौन-सी हो सकती हैं? क्या आप अपने जीवन में इस नीतिवचन को पूरा करने के लिए उत्साहित हैं?
ख्रिश्चन समाज के लोगों को एक दूसरे से प्रेम करना है (यूहन्ना 13:34-35)। चर्च के सदस्यों को एक दूसरे की ज़रूरतों का ख़याल रखना है (इब्रानियों 10:24; 13:3)। दोनों के एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य हैं। जुबान का उपयोग अक्सर दूसरों को काटने और फाड़ने के लिए किया जाता है, लेकिन प्रेम से कहें विचारशील वचन किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत स्वास्थ्यप्रद और चंगाई देनेवाले साबित हो सकते हैं (नीतिवचन 12:18; 16:24; 25:11; 27:9)।
क्या परमेश्वर और सुलैमान ने आपका ध्यान अपनी बात की ओर खीँच लिया है? परन्तु परमेश्वर कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बात जानता था जो सुलैमान को नहीं पता थी। वह जानता था कि आप में पहले से कहीं अधिक आसानी से अनुग्रहसहित वचन बोलने की क्षमता होगी, जो फ़ोन, ईमेल, टेक्स्ट, फ़ेसबुक, ट्वीट इत्यादि से बेहतर है। आप आज ही किसी उदास मन का उत्थान कर सकते हैं। ऐसा ही करें!
अधिकांश लोग इतने स्वार्थी होते हैं और अपने स्वयं के जीवन में इतने व्यस्त रहते हैं कि उनके पास दूसरों पर ध्यान देने के लिए कोई समय नहीं होता, और इनमें से ज्यादातर लोगों में कोई प्रेम या अपनेपन की भावना नहीं होती कि दूसरों से कुछ तरस से भरे और उपयोगी वचन कह सकें। वे इतने आलसी होते हैं कि वे न तो किसी और के बारे में चिन्ता कर सकते हैं, और न ही उनके लिए कुछ कर सकते हैं। बाकी लोग बहुत डरपोक या अज्ञानी होते हैं।
ऐसी भरी भूल करनेवाले अनुपयोगी कबाड़ी मानसिकता के लोगों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता: मसीह के पवित्र लोगों को इस पृथ्वी के सबसे प्रसन्न मनवाले लोग होना चाहिए (भजन 4:7; 63:5; 92:4; 1 पतरस 1:8)। बलवान गिरते तो हैं, लेकिन वे हार नहीं मानते (भजन 42:1-11; 2 कुरिन्थ 4:8-10)। गहरी उदासी में पड़ा उपद्रवी व्यक्ति शैतानी अभिशाप है (नीतिवचन 15:15; याकूब 3:14-16)।
परन्तु जो व्यक्ति किसी अभागी बात का शिकार होकर उचित रूप से ही उदास हो जाता है, वह आपके ध्यान और प्रेम का सबसे बड़ा पात्र है। उदास मनवाला व्यक्ति भारी बोझ से दबा होता है जो उसे झुका देता जाता है; यह चिंताओं, परिस्थितियों और परेशानियों के तले दबा हुआ व्यक्ति होता है। राजा लमूएल की माँ ने ऐसे मनुष्य की मदद के लिए दाखमधु पीने का सुझाव दिया (नीतिवचन 31:6-7)।
इस दाखमधु के बारे में सोचो! मरियम मगदलीनी, एक पापी स्त्री जिसे यीशु ने क्षमा कर दिया था, अपने प्रभु की कब्र को खाली पाकर रो रही थी। परन्तु माली प्रतीत होने वाले एक मनुष्य ने कहा, “मरियम।” इस भले वचन को सुनते ही उसे तसल्ली मिली और बोली, “प्रभु।” इस घटना के बारे में पढ़ें (यूहन्ना 20:11-18)।
इस दाखमधु के बारे में सोचो! जकर्याह उन यहूदियों को प्रोत्साहित करने वाला एक भविष्यवक्ता था जो 70 वर्षों तक बेबीलोन की कैद में रहने के बाद यरूशलेम के पुनर्निर्माण के लिए लौटे थे। उसने एक महान स्वर्गदूत का दर्शन देखा जो परमेश्वर से पूछ रहा था कि वह यरूशलेम पर कब तरस खाएगा। परमेश्वर ने “अच्छी अच्छी और शान्ति की बातें” कहकर उत्तर दिया, जिसने जकर्याह को आशा का एक महान संदेश देने उभारा (जकर्याह 1:12-17)।
उदास लोगों के आसपास नाच-गाना करना क्रूरता है। यह जाड़े के मौसम में गर्म वस्त्र छीन लेने जैसा है (नीतिवचन 25:20)। यह सस्ता प्रेम उन्नति करने के बजाए नुकसान पहुंचाता है। “खुश हो जाओ, मेरे भाई, धूप में रहो,” अच्छे शब्द हैं, लेकिन वास्तविक बोझ और उदास दिल वाले लोगों को कुछ और चाहिए होता है (नीतिवचन 14:10; 15:13; 17:22; 18:14)। नृत्य करने के बजाय उनके साथ रोएँ (रोमियों 12:15; 1 कुरिन्थ 12:26)।
बाइबल की एक किताब में अय्यूब के तीन आत्म-धर्मी दोस्तों का वर्णन किया गया है, जिनके पास उसके उदास मन को प्रसन्न करने के लिए कोई भली बात नहीं थी। इसके बजाय, उन सब ने मिलकर उस पर पाखंड का आरोप लगाया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि उसने उन्हें कहा कि “तुम सब के सब निकम्मे शान्तिदाता हो।” लेकिन कई लोग अक्सर उन से सहमत हो जाते हैं और संकट के लिए परमेश्वर के न्याय को दोष देते हैं, जबकि यह केवल एक प्रेमपूर्ण परीक्षा (आजमाईश) हो सकती है।
आपने आखिरी बार किसी की सीधे तौर पर और ईमानदारी से तारीफ कब की थी? आप कितनी बार तारीफ़ करते हैं? दूसरे के बारे में अनुग्रह से भरा ख़याल जो व्यक्त न किया गया हो – बेकार है! अगर आपके मन में किसी के बारे में कोई अच्छा विचार है तो उन्हें बताएं। दुनिया कितनी बेहतर होगी अगर लोग उन लोगों की सराहना करें जो इसके हकदार हैं? धर्मी मनुष्यों को धार्मिकता में और भी आगे बढ़ने में कितना प्रोत्साहन मिलेगा?
एक-दूसरे का बोझ उठाना मसीह की व्यवस्था को पूरा करता है (गला 6:2), और यह एक उत्साहजनक बात जितना आसान हो सकता है। इसमें कमज़ोर दिमाग वाले लोगों को सांत्वना देना शामिल है, जो उदास मन के कारण मायूसी में जी रहे हो सकते हैं (भजन 38:1-22; 1 थिस्स 5:14)। यदि आप प्रभु में बलवान हैं, तो यह आपका कर्तव्य है कि आप कमजोरों की तलाश करें और उनकी मदद करें (रोमियों 15:1-3)। भली बातें कहों।
सुलैमान के नीतिवचनों को पिछले 3000 वर्षों से पढ़ा जा रहा हैं। लेकिन कोई भी इतनी आसानी से और स्वतंत्र रूप से किसी भी दूरी पर संवाद नहीं कर सकता जितना आप फोन, ईमेल, टेक्स्ट, फेसबुक, ट्वीट आदि के माध्यम से कर सकते हैं। जब आप परमेश्वर को अपने जीवन के किसी विशिष्ट पल का लेखा देंगे, तो वह आपको याद दिलाएगा (लूका 12:48; रोमियों 14:10) -12)।
जीभ के वश में जीवन और मृत्यु, दोनों हैं; धर्मपरायण पवित्र लोग अपनी जीभ का उपयोग दूसरों को चंगाई और जीवन देने के लिए करते हैं (नीतिवचन 12:18; 15:23; 16:24; 18:21; 27:9)। केवल एक चुटकी नमक – आलोचना या फटकार – में एक बुद्धिमान व्यक्ति के तरसभरे शब्दों का स्वाद होना चाहिए (इफि 4:29; कुलु 4:6)। इसका लक्ष्य एक-दूसरे की उन्नति करना, या एक-दूसरे को ढाँढ़स दिलाना होता है, जैसे योनातान ने दाऊद को ढाँढ़स दिलाया, जब वह जंगल में छिपा हुआ था (1 शमू 23:16)।
यदि आप अपनी भली बातों से किसी दुखी और उदास मन को प्रसन्न करते हैं, तो आप अनन्त जीवन के लिए एक और ईंट रखते हैं। स्वर्ग परमेश्वर के लोगों के लिए उसकी कृपा का एक मुफ्त वरदान है, लेकिन आप अपने दिल को आश्वस्त कर सकते हैं और दूसरों पर दया करके अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं (1 तीमु 6:17-19; 1 यूहन्ना 3:14-19; इब्रानियों 6:10) ।
अपने माता-पिता से भली बातें कहकर अपना जीवन बढ़ाएँ (इफि 6:2-3)। एक भली बात कहकर अपने बच्चों की आज्ञाकारिता हासिल करें (कुलु 3:21)। अपने जीवनसाथी को प्रेमपूर्ण बात कहकर अपने वैवाहिक जीवन को बढ़ाएं (उत्पत्ति 34:3)। भली बात कहकर अपने बॉस को धन्यवाद दें (1 तीमु 6:1)। एक पुलिसकर्मी को प्रोत्साहित करें (रोमियों 13:7; 1 पतरस 2:17)। अपने पास्टर को कोई भली बात कहकर उसका हौसला बढाएं (1 थिस्स 5:12-13)।
यीशु ने इस पृथ्वी पर अपने जीवन के दौरान कई लोगों को सांत्वना दी और उन्हें प्रोत्साहित किया, क्योंकि परमेश्वर ने उसे सीखनेवालों की जीभ का एक अद्भुत वरदान दिया था “कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूँ” (यशायाह 50:4)। जैसा उसने अपने पुनरुत्थान के बाद मरियम को सांत्वना देने के लिए सावधानी से शब्दों का उपयोग किया (मरकुस 16:9), वैसे ही आपको भी आज ही किसी ऐसे व्यक्ति को याद करना चाहिए जिसे आप ऊपर उठा सकते हैं।
खुद स्वर्गदूतों ने यीशु को कई बार सांत्वना दी और उसका हौसला बढ़ाया, खासकर जब गेथसमनी में उसका प्राण बहुत व्याकुल हुआ था (मरकुस 14:33-34)। वह आपको सांत्वना देने के लिए अपना आत्मा भेजता है, जब आप उसके सामने खुद को विनम्र करते हैं और मदद के लिए पुकारते हैं। उनके पवित्र उदाहरण का अनुसरण करें और कई उदास मनों को प्रसन्ना करने के लिए उसके मुँह की ही भली बातों का उपयोग करें।
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