नीतिवचन 12:2
भले मनुष्य से तो यहोवा प्रसन्न होता है, परन्तु बुरी युक्ति करनेवाले को वह दोषी ठहराता है।
परमेश्वर भिखारियों को गटर की नाली से उठाकर उन्हें महिमा के सिंहासन पर बिठा सकता है, और वह विश्व के इतिहास के एक महान सम्राट को अक्षरशः पशुओं के चरागाह में डाल सकता है (2 शमूएल 7:8; दनिय्येल 4:27-33)। सच्चा परमेश्वर आपको आपके आचरण का प्रतिफल इसी जीवन में देता है – दाऊद और नबूकदनेस्सर के बारे में सोचें; और वह आनेवाले जीवन में भी उन्हीं कर्मों का प्रतिफल देता है – लाज़र और धनी व्यक्ति के बारे में सोचें (लूका 16:19-31)।
प्रिय पाठक, अगर आप हन्ना की स्तुति की प्रार्थना को पढ़ते हैं तो यह आपके लिए कल्याणकारी होगा (1 शमूएल 2:1-10)। वह जानती थी कि यहोवा ज्ञानी परमेश्वर है और वह मनुष्यों के कार्यों को तौलता है। परमेश्वर किस प्रकार एक व्यक्ति को ऊपर उठाता है और कैसे दूसरे दीन करता है उसके इस महान कार्य के लिए उसने उसकी प्रशंसा की। परमेश्वर ने उसके और उसके विरोधी के बीच एक बड़ा अंतर किया (1 शमूएल 1:4-8,17-20; 2:18-21,26)।
परमेश्वर यहोवा का आप पर प्रसन्न होना अद्भुत बात है। यह पौराणिक राजा मिडास के स्पर्श से श्रेष्ठ है, बिल गेट्स या अम्बानी के साथ मित्रता से श्रेष्ठ है, और राष्ट्रपति पदक या भारतरत्न सम्मान से भी श्रेष्ठ है। इस जगत में या आनेवाले नए जगत में ऐसा कुछ भी नहीं है जो परमेश्वर के अनुग्रह के तुल्य हो (भजन 4:6-8; 16:11)। आप कैसे मापेंगे कि परमेश्वर आपका मित्र है, आपका शान्तिदाता है, परोपकारी और आपका रक्षक है?
जब वह किसी मनुष्य पर प्रसन्न होता है तब वह उसके जीवन में परिवर्तन लाने के लिए समस्त संसार की घटनाओं में परिवर्तन ला सकता है। क्या आप इसे पूरी तरह से समझ सकते हैं? आप इसका वर्णन कैसे करेंगे? यदि वह आपकी आत्मा, आपके शरीर, आपके वैवाहिक जीवन, आपके बच्चों, आपके हाथों के कामों, और अनन्त जीवन के आपके गंतव्य को आशीषित करता है, तो और क्या चाहिए (भजन 1:1-6; 73:23-27; 128:1-6; 144:11-15)? धन्यवाद, धन्य परमेश्वर और पिता!
लेकिन उसका दोषी ठहराया जाना एक भयानक बात है। यह किसी भी व्यक्तिगत या प्राकृतिक आपदा की सीमा के पार है, क्योंकि सृष्टिकर्ता परमेश्वर आपका शत्रु बन जाता है और आपको इस जीवन में और आनेवाले जीवन में पीड़ा देगा। वह आपकी आत्मा को भय और कंपकंपी से पीड़ित कर सकता है जो अवर्णनीय है (व्यव. 28:65-68)। वह जो आपके साथ कर सकता है उससे आपको कैंसर और सर्वनाश ही राहत दे सकता है। आप यहोवा परमेश्वर की उस भयावहता को जो अनंत काल तक आपका पीछा करनेवाली है, कैसे मापेंगे (भजन 35:5-6)?
यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि पीड़ा और मृत्यु कुछ भी नहीं है। उसने पूछा कि तुम मनुष्यों से क्यों डरते हो? वे ऐसा कुछ नहीं कर सकते जिसका परिणाम गंभीर या स्थायी नुकसान हो। उसने उन्हें सिखाया कि जिस एकमात्र व्यक्ति से उन्हें सचमुच डरना चाहिए वह व्यक्ति उसका पिता था, जो इस जीवन में शरीर को मारने और फिर शरीर और आत्मा दोनों को अनन्त पीड़ा के लिए नरक में भेजने में सक्षम है। यीशु ने चेतावनी दी, कि तुम्हें उसी का भय मानना अवश्य है (लूका 12:4-5)।
कौन-सी बात इस फर्क को जन्म देती है – क्या परमेश्वर की प्रतिक्रिया इस फर्क को लाती है? यह फर्क इस बात से पड़ता है कि आज आप क्या फैसले लेते हैं। आपने सही पढ़ा! आज आप जो फैसलें लेते हैं वे उसकी दृष्टि में या तो सही होंगे, या ग़लत होंगे। क्या आपको लगता है कि आप जो मन में आये वह कर सकते हैं? क्या आपको लगता है कि आपको अपने जीवन पर अधिकार है? क्या आपको लगता है कि आप उससे अपनी रक्षा कर सकते हैं? क्या आपको लगता है कि आप अपने पाप के परिणामों से बच निकलेंगे? क्या आपको लगता है कि वह आपकी हरकतों को नहीं देखता? उसे परवाह नहीं है? फिर से सोचो, मूर्ख!
भला मनुष्य परमेश्वर के अनुग्रह से ही भला बनाया जाता है (भज 14:1-3; गला 5:22-23), परन्तु यहाँ परमेश्वर के अनुग्रह का उपयोग भला मनुष्य बनने के लिए किया जाना चाहिए (1 कुरिन्थियों 15:10; 2 कुरिन्थियों 6:1)। जब एक भला मनुष्य बुद्धि को दृढ़ता से थामकर उसका व्यवहारिक उपयोग करता है तब महान परमेश्वर उसपर प्रसन्न होता है (नीतिवचन 8:35)। मूर्ख मनुष्य बुद्धि को ठुकरा देता है और ऐसा करके वह अपने ही प्राण की हानि करता है और वास्तव में मृत्यु को चुन लेता है (नीतिवचन 8:36)।
इन दो मनुष्यों के बीच निर्धारक अंतर इस बात से आता है कि वे बुद्धि के प्रति कैसा व्यवहार दिखाते हैं – बुद्धि अर्थात, जीवन के लिए परमेश्वर की शिक्षा जो केवल बाइबल में पाई जाती है। पाठक, क्या आप कम से कम अब तो भी परमेश्वर के वचनों को सुनकर कांपते हैं? क्या आप इस नीतिवचन की चेतावनी को पढ़ने और उस पर विचार करने के लिए भी पर्याप्त समय देंगे? क्या आप इसके बारे में कुछ करेंगे? परमेश्वर की आज्ञा मानने के लिए आप क्या करेंगे? आज?
बुद्धि को ठुकरा दो, और परमेश्वर तुम्हें फाड़ डालेगा, और तुम्हारा कोई छुड़ानेवाला न होगा (भजन 50:22; होशे 5:14; 13:8)! वह तुम्हारे जीवन को उलट-पुलट कर देगा (भजन 146:9)। वह तुम्हारा मुँह तोड़ देगा, और तुम्हारे दांतों को तोड़ डालेगा (भजन 3:7; 58:6)। यदि तुम एक पल के लिए यह सोचते हो कि परमेश्वर बदल गया है, तो इब्रानियों 10:26-31; 12:28-29; और 13:8 पढ़कर देखो। जब वह क्रोध में आता है, तो लोग पहाड़ों को दुहाई देते हैं कि वे उनपर गिर जाएं और उन्हें छिपा लें (प्रकाशितवाक्य 6:16-17)। मूर्ख मत बनो!
सावधान, कही आप यह न सोच बैठें कि यह केवल मेरा विचार है और भला मनुष्य क्या होता है इस विषय पर यह केवल मेरी अपनी व्यक्तिगत राय है। किसी को भी, यहाँ तक कि अपनी प्रिय माँ को भी, यह सोचने के लिए मोहित मत होने दो कि तुम एक अच्छे इंसान हो। पवित्र परमेश्वर को ऐसे मूर्खतापूर्ण विचारों की कोई परवाह नहीं है। वह केवल उसी मनुष्य से प्रसन्न होता है जो उसके वचन के आगे थरथराता है और नम्र मन से उसकी आज्ञाओं का पालन करता है (भजन 112:1-4; यश 66:2)।
उनकी प्रतिक्रिया से बहुत बड़ा फर्क पड़ता है; यह अथाह है। क्या आप इसे स्पष्ट रूप से देखते हैं? वह बहुतायत से और बड़ी दया से आशीष दे सकता है, और वह अत्यंत भयानक रीति से और अत्यंत पीड़ा देकर विनाश कर सकता है।
जब परमेश्वर यूसुफ से प्रसन्न हुआ तब क्या उसके जीवन की चीजें बदल गईं? हाँ, एक अविश्वसनीय बदलाव! अब्राहम का क्या? रुथ? एस्तेर? अय्यूब? दाऊद? दनिय्येल? मरियम मगदलीनी?
जब शाऊल ने यहोवा की निंदा कीं, तब क्या उसके जीवन की चीजें बदल गईं? क्या ही कष्टदायक दुख! कैन का क्या हुआ? लूत? एली? नाबाल? यहोराम? उज्जिय्याह? यहूदा? हेरोदेस? इन सबका क्या हाल हुआ?
इसलिए अपने आप को यहोवा के सामने दीन और नम्र करो, और वह तुम्हें ऊंचा उठाएगा (याकूब 4:10)। यहोवा परमेश्वर से अनमोल अनुग्रह प्राप्त किया जाना है। कुछ लोग उसके मित्र के रूप में उसके साथ चले, तो वाही कुछ मृत्यु को चखें बिना सीधे स्वर्ग को चले गए, तो वही कुछ ऐसे भी थें जो जहां कहीं भी गए और जो कुछ भी उन्होंने किया उसमें वह उनकी देखभाल और रक्षा कर रहा था। भलाई करो, तो तुम जीवन से प्रेम करोगे और अच्छे दिन देखोगे (1 पतरस 3:10-12)!
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