नीतिवचन 12:17

जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है।

सच एक व्यक्ति को निर्दोष प्रमाणित करता है, और सच ही धार्मिकता के किसी भी विवाद को सुलझाने में सहायता करता है। इसलिए सच बोलने वाला व्यक्ति अदालत की कार्यवाही और मित्रता के लिए मूल्यवान होता है। जो गवाह सच को ग़लत ढंग से प्रस्तुत करता है, उसमें कपटी आत्मा होती है, और वह न्याय और धार्मिकता को बिगाड़कर मुक़दमे को प्रभावित करता है (नीतिवचन 14:5,25; 19:28; 21:28)। ऐसे मनुष्य का तिरस्कार करके उससे बचकर रहने में ही भलाई है।

सच और धर्म को एक-दूसरें से अलग नहीं किया जा सकता, वे अविभाज्य हैं। सच के बिना न्याय नहीं हो सकता, और न्याय के बिना सच नहीं हो सकता। मनुष्यों के बीच न्यायसंगत रिश्ते बनने और उन्हें कायम रखने के लिए, चाहे निजी हों या सार्वजनिक, ईमानदारी और सच्चाई दोनों ही आवश्यक हैं। यदि इन्हें खतरे में डाला जाता है, तो धार्मिकता को भी खतरे में डाला जाता है। जहाँ सच को ज़रा भी छिपाया जाता है, समझो वहाँ छल ने प्रवेश कर लिया है। आर्थिक लेन-देन से लेकर धार्मिक घोषणाओं तक धर्म सच पर निर्भर करता है।

बाइबल का परमेश्वर, जो स्वर्ग और पृथ्वी का रचयिता है, सत्य का परमेश्वर है (व्यवस्था 32:4)। वह इतना सच्चा परमेश्वर है, कि वह झूठ नहीं बोल सकता (इब्रानियों 6:18; तीतुस 1:2)। उसका पुत्र यीशु मसीह विश्वासयोग्य और सच्चा गवाह है (प्रकाशितवाक्य 3:14; 19:11)। उसका लिखित प्रकाशन, अर्थात् बाइबल, अपने हर एक शब्द और अपनी प्रत्येक घोषणा में अत्यन्त निश्चित और सत्य है (नीतिवचन 30: 5; भजन 19: 9; 93: 5; 119: 128,138)।

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। झूठे लोग पृथ्वी पर धार्मिकता को बिगाड़ देते हैं, चाहे वह निजी हो या सार्वजनिक। उनकी ग़लतबयानी लोगों को धोखा देकर उन बातों पर विश्वास करने की ओर ले जाती है जो सच नहीं हैं, जिससे निर्णय लेने की शक्ति को विकृत हो जाती है, लोग संकट में पड़ जाते हैं, निर्दोषों का लहू बह जाता है, दुष्टों की रक्षा होती है, मसीह का सुसमाचार भ्रष्ट हो जाता है, और धोखाधड़ी और घोटालें बढ़ जाते हैं। इसलिए, सब झूठे लोगों को इस जीवन के बाद आग की झील में अनंत काल की पीड़ा भुगतने के लिए डाल दिया जाएगा (प्रकाशितवाक्य 21:8)।

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। ” छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन् सात हैं जिन से उसको घृणा है……. झूठ बोलनेवाली जीभ………. झूठ बोलनेवाला साक्षी” (नीतिवचन 6: 16-19)। इसलिए, भले और ईमानदार लोग झूठ बोलने वालों से कोई मित्रता नहीं रखते! दाऊद ने कहा, ” जो छल करता है वह मेरे घर के भीतर न रहने पाएगा; जो झूठ बोलता है वह मेरे सामने बना न रहेगा” (भजन 101:7)।

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। दस आज्ञाओं में से एक आज्ञा झूठे गवाहों की भर्त्सना करती है (निर्गमन 20:16)। यहोवा ने मनुष्यों को चेतावनी दी कि वे मुक़दमे में हर एक झूठे गवाह से दूर रहे (निर्गमन 23:1-7)। यदि कोई व्यक्ति अदालत में झूठी गवाही देता, तो उसे वही सज़ा दी जाती थी जिसका षडयंत्र उसने दूसरे के लिए रचा होता था, भले ही वह मृत्युदंड ही क्यों न हो (व्यवस्था 19:16-21)। याददाश्त बढ़ाने का क्या तरीका है!

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। और वह उनके झूठ को सबके सामने प्रगट करता है। सुनिश्चित करें कि आपका पाप आपको ढूंढ ही लेगा। आकान ने यरीहो की घटना में चोरी के मामले में झूठ बोला था, लेकिन उसे पकड़ लिया गया, उस पर पथराव किया गया और उसे उसके परिवार समेत जलाकर मार दिया गया (यहोशू 7:1-26)। हनन्याह और सफीरा ने अपनी संपत्ति के बारे में चर्च से झूठ बोला, और जवानों ने उन्हें उसी दिन दफनाया (प्रेरितों 5:1-11)। क्या ही वस्तुनिष्ठ पाठ है!

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। विश्व का सबसे पहला झूठा प्राणी शैतान था, जिसने हव्वा से झूठ बोला और मानव जाति को अनन्तकाल की मृत्यु के दंड का पात्र बना दिया। वह सब झूठों का पिता है, और उसमें कोई सत्य नहीं है (यूहन्ना 8:44)। जो कोई झूठ बोलता है वह उसी के दुष्ट प्रभाव से चल रहा है और प्रगत कर रहा है कि उनका मन उसके वश में है, यहां तक कि सुसमाचार के सेवक भी (2 कुरिन्थ 11: 1-4,13-15; इफि 2: 1-3)।

परमेश्वर झूठ बोलने वालों से बैर रखता है। जब मनुष्य सच के बजाए झूठ को ऊँचा उठाते हैं, तो सत्य का परमेश्वर उन्हें न्यायपूर्ण दण्ड देने के लिए झूठ भेजेगा कि वे उस पर विश्वास करें (1 राजा 22:1-40; यहेज़केल 14:6-11; 2 थिस्स 2:9-12)। जब मनुष्य सृजी हुई वस्तुओं में स्पष्ट रूप से प्रकट सत्य को मानने से इनकार करते हैं, तो वह उनके दिमागों को अंधा कर देता है और उन्हें समलैंगिकता जैसी घृणित उनकी मानसिक विकृतियों पर छोड़ देता है (भजन 19:1-6; 44:9-20; रोमियों 1:18-27)।

इसलिए, प्रत्येक पाठक सत्य के इस परमेश्वर के सामने थरथराए। इसे पढ़ने वाला प्रत्येक ख्रिश्चन पाठक झूठ बोलने, बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने, डिंग मारने, दूसरों की बदनामी करने, झूठी गवाही देने, गलत बयानी करने, हेराफेरी करने या उस हर प्रकार के धोखा देनेवाले काम से घृणा करें। प्रत्येक पाठक हमेशा ईमानदारी और सच्चाई को ऊँचा उठाएं और अपनी धार्मिकता साबित करे और दूसरों पर प्रगट होने दे, चाहे परिस्थितियाँ या हालात कुछ भी हो। वह हर समय ईमानदार और साफ़दिल रहे।

प्रत्येक माता-पिता को घर में अपने बच्चों को सच की शिक्षा दें, और उन्हें उसपर अमल करना सिखाएं, ताकि जब वे बड़े हो, तो वे भी अपने सृष्टिकर्ता के समान ही झूठ और झूठ बोलनेवालों से बैर रखें और उनसे दूर रहें। जब जब कोई नई विचारधारा जन्म ले, तब तब माता-पिता उस पर पर्याप्त शोध और विश्लेषण करें इसके पहले कि बच्चें उसे अपनाएं और नाश हो जाएं। अगर बच्चें अतिशयोक्ति करें तो उन्हें सज़ा दें। और अपराधों को अगर श्रेणीबद्ध पैमाने पर तौला जाएं, तो बच्चों को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि झूठ बोलना सबसे बुरा पाप है।

शुक्र है, सत्य के परमेश्वर ने झूठ बोलने वाले कुछ मनुष्यों को उनके पापों से बचाने के लिए अपने पुत्र को भेजा, और उसने इस उद्धार को उनके लिए अपना बहुमूल्य बलिदान देकर प्राप्त किया। और जब इसी बात का सुसमाचार का प्रचार किया जाता है, वह उनमें एक नया हृदय उत्पन्न करता है, अर्थात् एक ऐसा हृदय जो सत्य से प्रेम रखता है और झूठ से बैर रखता है (इफि 1:3-12; 2:1-10; 4:24)। यीशु मसीह का सुसमाचार, जो सिर्फ़ बाइबल में पाया जाता है, दुनिया में सच का एकमात्र स्रोत है जो एक व्यक्ति को शैतान के धोखे और हर तरफ होने वाले विनाश से बचा सकता है (1 तीमु 6: 3-5,20-21; 2 तीमु 3 :13)।

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