नीतिवचन 12:14
सज्जन अपने वचनों के फल के द्वारा भलाई से तृप्त होता है, और जैसी जिसकी करनी वैसी उसकी भरनी होती है।
भलें वचनों और भलें कर्मों का अच्छा फल मिलता है। क्या आप अपने जीवन में इनका उपयोग करते हैं? क्या बाकि लोग आपको पीछे छोड़कर इनका सदुपयोग कर आपको पछाड़ देंगे? इस नीतिवचन का पाठ बिलकुल सरल है, लेकिन ज्यादातर लोग भूल जाते हैं कि धार्मिकता का निश्चित फल मिलता है। वे सफलता के विषय में ईद दुनिया की विचारधाराओं या अपने साथियों को खुश रखने की ज्यादा चिंता करते हैं। वे भूल जाते हैं कि आदर और सम्मान परमेश्वर और धर्मी मनुष्यों की ओर से आता है।
सही बोलना और सही करना इंसान को फलवंत बनाता है। दुनिया भले ही सद्गुणों की प्रशंसा न करे या पुरस्कृत न करे, लेकिन यह सत्य नीतिवचन अद्भुत सलाह देता है। यदि आप अपने मुंह का उपयोग अनुग्रह से भरें, आध्यात्मिक और बुद्धि के वचनों को बोलने के लिए करते हैं, तो परमेश्वर और मनुष्य आपको संतोषजनक सम्मान से पुरस्कृत करेंगे। और परमेश्वर और मनुष्य दोनों आपको आपकी दरियादिली, पवित्र आचरण, और सत्य के भले कामों का बदला अवश्य देंगे।
एकमात्र वाणी जो भली और संतोषजनक पुरस्कार दिलाती है वह शुद्ध और बुद्धि की वाणी है, जैसा कि यह नीतिवचन व्यक्त करता है। यदि आप अपने मुंह का उपयोग मूर्खतापूर्ण बातें, झूठ या शेखी बघारने के लिए करते हैं, तो इससे आप ही मुसीबत में पड़ेंगे (नीतिवचन 10:6,14,31; 12:18; 13:3; 18:6-7,21; 20:17)। यही सच्चाई कर्मों -आपके हाथों से की गई चीजों- पर भी लागू होती है। केवल अच्छे कर्म ही अच्छा प्रतिफल लाते हैं (नीतिवचन 6:17; 10:4; 26:6; यशायाह 3:10-11)।
यह दुष्ट पीढ़ी कहती है, “केवल अच्छे लोग ही भरी जवानी में मर जाते हैं।” परन्तु भलाई की उनकी परिभाषा वही है जिसे परमेश्वर दुष्टता कहता है। जेनिस, जेम्स, जिमी, जिम, मर्लिन और डायना के बारे में सोचें। यह अन्त के दिनों का विपत्तिजनक और खतरनाक समय है, जब उन लोगों से नफ़रत करना लोकप्रिय बन जाता है जो वास्तव में अच्छे हैं, विशेषकर आज के सांसारिक ख्रिश्चन लोग ऐसों से नफ़रत करते हैं (2 तीमु 3:3)। भलाई लोगों के जीवन से निकलकर उसकी जगह अब “कूल” शब्द ने ले ली है। आज भलाई का अकाल है; पाप का बोलबाला है।
परन्तु यह सब नरक का झूठ है, क्योंकि जवानी में दुष्ट लोग ही मर जाते हैं (नीतिवचन 10:27; सभो 7:17)। यदि आप एक सुखी और लंबा जीवन चाहते हैं, तो यह जो भला है वही बोलने और करने से ही संभव है (नीतिवचन 3:1-2; भजन 34:12-16; 1 पतरस 3:10-13), जिसमें अपने माता-पिता का सम्मान करना भी शामिल है (इफि 6: 2-3)। भले लोगों का तिरस्कार करने के बजाय, उनसे प्रेम रखें और उनके नक्शेकदम पर चलें (भजन 37:37; 119:63; तीतुस 1:8)।
मनोहर वचन दूसरों के लिए आशीष के वचन कहती है (नीतिवचन 24:26)। लेकिन यहां फल बोलनेवाले को मिलता है (नीतिवचन 13:2; 15:23; 18:20)। जिसके वचन मनोहर होते हैं, राजा उसका मित्र होता है (नीतिवचन 22:11)। फिरौन यूसुफ को ऊँचा स्थान देने से खुद को कैसे रोक सकता था (उत्पत्ति 41:39-45)? भला योनातान दाऊद से क्योंकर प्रेम न रखता (1 शमू 18:1-4)? नबूकदनेस्सर दानिय्येल को ऊँचा स्थान देने से खुद को कैसे रोक सकता था (दानिय्येल 2:46-49)? राजाओं का राजा उन लोगों के लिए क्या करेगा जो दूसरों को उसकी गवाही देते हैं (मलाकी 3:16-18)? इसे पढ़ें, और आनंद मनाएँ!
जिन मनोहर वचनों से फल मिलता है वे अनुग्रह सहित (कुलु 4:6), बुद्धि से भरा, और सलोना (नीतिवचन 31:26), मुसीबत में पड़े लोगों के लिए मददगार (नीतिवचन 31:8-9), सच्चे (नीतिवचन 12:22), और हमेशा धन्यवाद से भरपूर होते हैं (1 थिस्स 5:18)। मनोहर वचन (इफि 4:29), प्रतिष्ठित लोगों की बुराई नहीं करते (यहूदा 1:8), मूर्खतापूर्ण बातें नहीं करते और न दूसरों का मज़ाक उडाते है (इफि 5:3-5), चुगली नहीं करते (नीतिवचन 25:23)। मनोहर वचन शत्रुओं को भी आशीष देता है (मत्ती 5:44), दोस्तों को चेतावनी देता है (लैव्य 19:17), दुखियों को सांत्वना देता है (1 थिस्स 5:14), और माता-पिता का सम्मान करता है (व्यवस्था 27:16)।
मनोहर वचन अच्छे हृदय से आते हैं (नीतिवचन 22:11; मत्ती 12:33-37)। और एक अच्छा मन अच्छे काम भी करता है। तुम्हारा शरीर प्रभु का मंदिर है; उसने इसे बनाया, और उसने इसे खरीदा; आपका शरीर दोगुना उसका ही है (1 कुरिन्थ 6:13-20)। कोई भी परमेश्वर की सेवा “बिना लाभ के” नहीं करता (अय्यूब 1:9-10)। परिश्रम आपको राजाओं के सामने ले आएगा (नीतिवचन 22:29)। विधवाओं से भेंट करना शुद्ध धर्म है (याकूब 1:27)। मसीह के पीछे चलने से इस जीवन में और आनेवाले जीवन में प्रतिफल मिलता है (मरकुस 10:28-30)। और एक ठण्डे पानी के प्याले का भी प्रतिफल दिया जाएगा (मत्ती 10:42)!
अच्छे कर्म आत्मा का फल हैं – प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम (गला 5:22-23; इफि 5:9)। परमेश्वर के चुने हुए लोगों के अच्छे कर्म उनमें परमेश्वर की शक्तिशाली कारीगरी का परिणाम हैं जो वह उन्हें नया जन्म देकर शुरू करता है (इफि 2:10)। हम अपने अपने उद्धार का जो कार्य पूरा करते हैं, वह इसलिए क्योंकि परमेश्वर ही है जो अपनी सुइच्छा निमित्त हमारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डालता है (फिलि 2:12-13)।
बुरे कर्म सांसारिक मसीहियों के लक्षण हैं – स्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता–पिता की आज्ञा टालनेवाले, कृतघ्न, अपवित्र, दयारहित, क्षमारहित, दोष लगानेवाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी, विश्वासघाती, ढीठ, घमण्डी, और परमेश्वर के नहीं वरन् सुखविलास ही के चाहनेवाले, भक्ति का भेष तो धरने वालें, पर उसकी शक्ति को न मानने वालें (2 तीमु 3:1-5)। वे सबकुछ खो देते हैं!
मनोहर वचन और भले कर्म केवल चर्च जाना या क्रिसमस-इस्टर मनाना नहीं हैं। यशायाह 58 बाहरी धार्मिक अनुष्ठानिक कामों और दूसरों के साथ आपके संबंधों को प्रभावित करने वाली सच्ची भक्ति के बीच स्पष्ट अंतर सिखाता है। और इस परिच्छेद में सूचीबद्ध फल इस लेख से कहीं अधिक आशीर्वादों की एक अद्भुत श्रृंखला का वर्णन करते हैं।
जो मसीही विश्वासयोग्य बने रहते हैं उन के लिए अब फल हैं। सबसे पहले, जो सही है उसे कहने या करने के लिए उन्हें मन में शान्ति का फल दिया जाता है (नीतिवचन 14:14; गला 6:4)। और उसके बाद उनके जीवन में परमेश्वर की आशीषें भी आती है (भजन 37:4; 84:11)। उसके बाद लोग भी उन्हें धन्य कहते हैं (नीतिवचन 17:2; 27:18)।
जो मसीही विश्वासयोग्य बने रहते हैं उन्हें बाद में और भी बड़ा प्रतिफल मिलेगा। जब मनुष्य अच्छे आचरण के लिए पुरस्कार का वादा करते हैं, तो वे भूल सकते हैं या देने में बाधा डाल सकते हैं, लेकिन परमेश्वर के साथ ऐसा नहीं है (इब्रानियों 6:10)। हालाँकि ये पवित्र जन स्वयं न्याय के महान दिन अपने अच्छे कर्मों को भूल सकते हैं या अनदेखा कर सकते हैं, स्वर्ग का संप्रभु राजा नहीं भूलेगा (मत्ती 25:31-46)!
बाइबल सफल जीवन जीने के लिए परमेश्वर की नियमावली है, और उसमें दिखाएँ मार्गों पर चलना आपको इस दुष्ट दुनिया के संकटों से बचाएगा और समृद्धि और सफलता लाएगा (यहोशू 1:6-9; भजन 1:1-3; 19:7-11; याकूब 1:25)। लेकिन साथ ही वे पुरस्कार भी मिलेंगे जिनका ज़िक्र ऊपर किया गया हैं।
आपका लक्ष्य यीशु मसीह के समान बनना है। वह परमेश्वर और मनुष्यों की कृपा में बढ़ता गया (लूका 2:52)। उसके मनोहर वचन विश्वास से परे थें (भजन 45:2; लूका 4:22)। वह भलाई करता रहा (प्रेरितों 10:38)। वह वह उदाहरण है जिसका पौलुस ने अनुसरण किया, और हमें पौलुस का अनुसरण करना चाहिए (1 कुरिन्थ 11:1)।
लेकिन अब आप पूछेंगे कि क्या वह युवावस्था में नहीं मरा? हाँ, क्योंकि उसने अपने चुने हुए लोगों पापों का दाम चुकाने के लिए स्वेच्छा से अपना जीवन बलिदान कर दिया। उसका प्रतिफल क्या था? उसे ऊँचा उठाया गया कि वह विश्व के सिंहासन पर बैठकर हमेशा के लिए राज्य करे (फिलि 2:5-11; इफि 1:19-23; इब्रा 12:1-3)!
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