नीतिवचन 12:12
दुष्ट जन बुरे लोगों के जाल की अभिलाषा करते हैं, परन्तु धर्मियों की जड़ फल लाती है।
आप दूसरों के लिए क्या कामनाएँ करते हैं? दूसरों के जीवन पर आपका क्या प्रभाव पड़ता है? जो दुष्ट होता है वह अपनी स्वार्थी और दुर्भावनापूर्ण महत्वाकांक्षा को हासिल करने के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाता है, और वह उन लोगों से ईर्ष्या करता है जो ऐसा खेल खेलने में कुशल और माहिर हैं। लेकिन धर्मी व्यक्ति के दिल में दूसरों के लिए प्रेम होता है, और वह प्रेम से ही संचालित रहता है, जो दूसरों के जीवन में भलाई का फल उत्पन्न करता है। जिस प्रकार दुष्ट लोग दूसरों को सिर्फ़ नष्ट करने और मारने की अभिलाषा करते हैं, वैसे ही धर्मी लोग दूसरों की सहायता करने और पालन-पोषण करने की अभिलाषा करते हैं।
जो परमेश्वर से जन्मता है उस का सबसे बड़ा प्रमाण और माप यह है कि वह दूसरों से कितना प्रेम रखता है। प्रेम विश्वास से श्रेष्ठ है (1 कुरिन्थ 13:13), और केवल विश्वास, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव डालता है वह किसी भी चीज से मूल्यवान है (गला 5:6; याकूब 2:14-26)। दूसरों के लिए आपका प्रेम प्रमाणित करता है कि आप परमेश्वर से प्रेम रखते हैं और आप में अनन्त जीवन है (यूहन्ना 13:35; 1 यूहन्ना 2:7-11; 3:14-19; 4:7-8,12,16,20-21; 5:1-3 )। यह दूसरी आज्ञा है और इसमें परमेश्वर की समस्त व्यवस्था शामिल हैं (मत्ती 22:40; गलातियों 5:14)।
सभी मनुष्य दुष्ट स्वभाव के साथ पैदा होते हैं – ईर्ष्या, द्वेष और घृणा से भरे हुए (इफि 2:1-3; तीतुस 3:3)। लेकिन परमेश्वर ने अपने लोगों को पाप के इस बन्धन से मुक्ति दिलाने के लिए चुना है और उन्हें नया मन दिया है जो अपने भाई, पड़ोसी और यहाँ तक कि अपने शत्रु से प्रेम रखता है (कुलुस्सियों 3: 8-15; 1 थिस्स 4: 9-10)। जब वे आत्मा में चलते हैं और अपने होने का उद्देश्य को पूरा करते हैं, वे जोशिलें प्रेम के साथ दूसरों की सेवा करते हैं (प्रेरितों 20:35; गलातियों 5:22-26)।
दुष्ट व्यक्ति लालची और स्वार्थी होता है, जो अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दूसरे लोगों का उपयोग करने पर आमादा होता है (नीतिवचन 1:10-16; भजन 10:2-11)। जब वह अन्य दुष्टों को अपने शिकार को पकड़ते और उसका उपयोग करते हुए देखता है तो उसे मज़ा आता है, और वह उनके तरीकों को सीखना और उनमें महारत हासिल करना चाहता है (नीतिवचन 4:14-17; 24:1-2)। वह दूसरों को नुकसान पहुंचाने और उनके पास जो कुछ है उसे छीनने के लिए लगातार नए तरीके सोचता रहता है (भजन 140:1-5)।
अम्नोन जो वासना में आकर अपनी सौतेली कुँवारी बहन से यौनाचार करना चाहता था, उसने योनादाब के साथ मिलकर उसे फाँसने का जाल बिछाया (2 शमू 13:1-5)। रहूबियाम ने अपने युवा और मूर्ख मित्रों की बात सुनी, जिन्होंने उसे डराने-धमकाने का जाल बिछाने का सुझाव दिया (1 राजा 12:1-14)। देमेत्रियुस नाम के एक सुनार ने झूठे धर्म से वित्तीय लाभ के जाल का उपयोग किया और जो कभी उसके प्रतिस्पर्धी थें उन्हें प्रेरितों के ख़िलाफ़ भड़काया (प्रेरितों 19:23-28)। और यहूदियों के विभिन्न गुट उसी जाल को बिछाने की अभिलाषा कर रहें थें जिसे उनके ही साथियों ने प्रभु यीशु मसीह के विरुद्ध बिछाना चाहा था (मत्ती 12:14; 22:34)।
जो लोग खुलेआम दुष्टता करते हैं, वे बदले नहीं हैं। व्यभिचारियों से लेकर कानाफूसी करने वालों और इनके बीच आनेवाले जो भी प्रकार के लोग हैं, जैसे पापी आज भी अन्य पापियों के मार्गों की अभिलाषा करते हैं। व्यभिचार, आर्थिक घोटाले और झूठी जानकारी फैलाना आज बड़े उत्साहपूर्वक ऑनलाइन किया जा रहा है। मनोरंजन उद्योग ने दुष्टता को ग्लैमराइज कर दिया है, इसलिए पूरा देश बुरे लोगों के जाल की अभिलाषा करता है (रोमियों 1:32)।
और न ही धार्मिक कर्मकाण्ड करनेवाले दुष्ट बदले हैं। वे आज भी मनुष्यों को धर्म के जाल पकड़ने और नष्ट करने के लिए सत्य की बलि चढ़ा रहे हैं (मत्ती 23:15; रोमियों 16:17-18; 2 कुरिन्थ 2:17; 2 तीमु 2:15-18; 3:13)। कई पास्टर और चर्च किसी भी कीमत पर समकालीन ख्रिश्चन धर्म और विकास का दिखावा करके जितना संभव हो उतने लोगों को फंसाने के लिए साधक संवेदनशील गुरुओं के जाल की लालसा रखते हैं (1 तीमु 6:3-5; 2 तीमु 3:1-9; 4:1-4)।
परन्तु सत्य पर चलनेवाला मनुष्य बहुत भिन्न होता है। वह दूसरों के जीवन में शांति और धार्मिकता का फल लाता है (नीतिवचन 10:21; 11:30; याकूब 3:17-18)। और उसके जीवन की यह महत्वाकांक्षा और परिणाम उसके मन की पवित्र जड़ से आते हैं (1 यूहन्ना 3:9)। सत्य पर चलनेवाले लोग समझते हैं कि स्थानीय चर्च का उद्देश्य यही है कि हर कोई अन्य सदस्यों को आध्यात्मिक रूप से एक-दूसरे की उन्नति करे (इब्रानियों 3:12-13; 10:23-25)। और यदि वे जालों का उपयोग करते भी हैं, तो सिर्फ इसलिए कि वे यीशु मसीह की खातिर मनुष्यों के मछुआरे बन सके (मत्ती 4:19)।
पाठक, आपका फल क्या है? क्या आप दूसरों के लिए जीवन का वृक्ष हैं? क्या आपकी प्रेमपूर्ण सहायता से उन्हें लाभ होता है? क्या आपके अंतिम संस्कार के समय लोग आपको आपके आत्मिक सद्गुणों के लिए बहुत याद करेंगे? या फिर फल की कमी के कारण आपको मुश्किल से याद किया जाएगा? आज आप परमेश्वर और सभी अच्छे लोगों को यह दिखाने के लिए क्या करेंगे कि आपके पास धर्मियों की जड़ है? फ़ेबे को अपना मार्गदर्शक बनाए (रोमियों 16:1-2)।
जब सब कुछ कहा जा चूका है, तो अन्त में केवल एक ही मनुष्य ऐसा है जिसने सही मायने में सही जड़ से धर्म का फल प्राप्त किया – वह मनुष्य मसीह यीशु है। उसके पहले और बाद में जो जो आए, वे सब चोर थे: वे चोरी करने, हत्या करने और नाश करने आए थे (यूहन्ना 10:1-10; यिर्मयाह 23:1-40)। परन्तु वह अच्छा चरवाहा है जो अपनी भेड़ों की रखवाली करता है, यहाँ तक कि मृत्यु तक भी (यूहन्ना 10:11-16)।
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