नीतिवचन 12:10

धार्मिक मनुष्य अपने पशु के प्राण की भी चिन्ता करता है; पर दुर्जन की दया भी निर्दयता के समान होती है!

आप जानवरों के साथ कितना अच्छा बर्ताव करते हैं? इससे प्रगट हो सकता है कि आपका चरित्र कैसा है। धार्मिक मनुष्य दयालु होता है; वह कोमल दिलवाला और मन में दीन तथा दयालु होता है; दया और करुणा से चलना उसका सद्गुण होता है; वह मतलबी या कठोर दिल का नहीं होता। परन्तु दुर्जन निर्दयी होते हैं। यहां तक कि उनकी दया भी निर्दयता के समान होती है, क्योंकि उनमें उस कोमल, नम्र भावना की कमी होती है जो धर्मी मनुष्य की पहचान है, जो पशुओं की भी चिंता करता और उनका ख़याल रखता है। वे दयालु और कृपालु नहीं हैं; वे अपने स्वामी शैतान के समान हैं जो आरम्भ से ही झूठा और हत्यारा है।

यह नीतिवचन पशुओं की रक्षा का ढोंगी आन्दोलन चलानेवाले PETA-इन्डिया के लिए नहीं है। इस पाठ का विषय पशुओं की देखभाल का नहीं, बल्कि करुणा का चित्रण है। हालाँकि यहोवा परमेश्वर ने काम करने वाले बैल से लेकर घोंसले में रहने वाले पक्षियों तक की तरसभरी देखभाल की व्यवस्था की (व्यवस्थाविवरण 25:4; 22:6-7), फिर भी उसने मनुष्य को उनसे काम कराने, उनकी खाल पहनने, उनकी बलि चढ़ाने (केवल पुराना नियम में जो ख्रीस्ट की पूर्व-छाया थें) और उन्हें खाने का अधिकार भी दिया (उत्पत्ति 1:26-28; 3:21; 4:4; 9:1-4)। इन्सान आज भी सम्मानपूर्वक पशुओं को अपना शक्तिवर्धक आहार बना सकता है, जो कि हमारे देश में एक वास्तविकता है, परन्तु कीड़ों या पशुओं पर बचकाना अत्याचार घिनौना कृत्य है।

जब यह लेखक एक लड़का था तब उसने उत्तर-पश्चिमी पेनसिल्वेनिया में कई अमीश घोड़े और बग्गियाँ देखीं। यह नीतिवचन मनुष्यों के चरित्र के बीच के फर्क को प्रगट करता है। कुछ घोड़ों को अच्छी तरह से खाना खिलाया और तैयार किया जाता था; तो वही कुछ घोड़ों को कम चारा डाला जाता और उनकी उपेक्षा की जाती थी। गर्म दिनों में, कुछ लोग अपने घोड़ों को क्षेत्र की सबसे ऊंची और सबसे लंबी पहाड़ी तक चलाते थे; तो वही कुछ ऐसे थें जो तापमान, घोड़े की उम्र या गति की परवाह किए बिना उन पर कोड़े बरसाते थें। और ऐसे घोड़े अक्सर अधिक दयनीय हालत में होते थे!

सबक यह है: धर्मी लोग कोमल दिल के, करुणामय, दयालु और तरस से भरे होते हैं; परन्तु दुष्ट कठोर दिल के, निर्दयी, अविवेकी और क्रूर होते हैं। धर्मी मनुष्य आत्मा का फल लाएगा, जिसमें कोमलहृदयता शामिल है (गला 5:22-23; इफि 4:32; याकूब 3:17)। यदि आप शैतान के बजाय यीशु मसीह के समान बनना चाहते हैं, तो मन के कोमल और दयालु होना सीखें (2 कुरिन्थ 10:1)।

प्रिय पाठक, क्या आप परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में दयालु हैं? यहां बताया गया है कि आप की अपने चरित्र से अपने परमेश्वर और पिता के चरित्र को दिखा सकते हैं, जो अपने दुश्मनों पर भी गर्म धूप और पौष्टिक बारिश भेजता है (मत्ती 5:43-48)। यहोवा परमेश्वर, जो भले ही अपने न्याय में महान और भयानक है, करुणा और कोमल दया से भरा हुआ ईश्वर है (भजन 36:7; 103:4; 145:9; विलाप 3:22)। सब्त को लेकर पुराना नियम की उसकी आगया में काम करने वाले पशुओं के लिए विश्राम करना शामिल था (निर्ग 23:12; व्यवस्था 5:14)। कितना दयालु परमेश्वर!

धर्मी मनुष्य अपना (नीति 11:17), पशुओं का (उत्पत्ति 24:19,32; 33:13-14), अपनी पत्नी का (1 पतरस 3:7; कुलु 3:19), अपने बच्चों (भजन 103:13; कुलु 3:21), अपने मित्रों (याकूब 3:17-18), और अपने शत्रुओं (भजन 35:11-16) का भला करता है। वह मूर्खतापूर्वक उन्हें कष्ट नहीं देगा, न दण्ड नहीं देगा, और न परेशान करेगा (विलाप 3:32-33; गला 6:10)। बल्कि वह इन सबके साथ करुणा और दया का बर्ताव रखेगा। उसका प्रेम तरस से भरा होता है, ठीक वैसे ही जैसे स्वर्ग में उसका पिता तरस से भरकर प्रेम करता है (मीका 6:8; 7:18; इफि 4:32; 1 पतरस 3:8-9)।

परन्तु दुर्जन मनुष्यों का दिमाग विकृत होता है; उनकी कोमल दया भी क्रूर और कठोर हैं। वे अपने ही प्राणों की हानि करते हैं (नीति 11:17) और अपने ही शरीर की उपेक्षा करते हैं (1 तीमु 5:8)। बालाम ने बेरहमी से उसके गधे को पीटा (गिनती 22:22-32); यूसुफ के प्रति यहूदा की कोमल दया उसे बेचने के लिए थी (उत्पत्ति 37:26-28); अदोनीबेजेक की मेज़ के नीचे हाथ–पाँव के अँगूठे काटे हुए सत्तर राजा थें जो वहां टुकड़े बीनते थे (न्यायियों 1:7); नाहाश सभों की दाहिनी आँखें फोड़कर इसे सारे इस्राएल की नामधराई का कारण बनाने की शर्त पर आत्मसमर्पण के लिए मान गया (1 शमू 11:1-2); योआब ने अब्नेर और अबशालोम की बेरहमी से हत्या कर दी (2 शमू 3:39; 18:5); रहूबियाम ने अपनी ही इच्छुक जाति का मज़ाक उड़ाया (2 इति 10:1-19); इज़ेबेल ने केवल एक अंगूर की बाग़ के लिए नाबोत की हत्या कर दी (I राजा 21:1-16); पीलातुस ने निर्दोष प्रभु को छोड़ देने से पहले उसे दंडित करने की पेशकश की (लूका 23:13-16); और रोमी किसी व्यक्ति को सूली पर चढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद उसकी टाँगें तोड़ देते थें (यूहन्ना 19:31-32)!

धर्मी अय्यूब अपने नौकरों और गरीबों की करुणा से देखभाल किया करता था (अय्यूब 31:13-22), लेकिन उसकी पत्नी ने उसकी ज़रूरत के सबसे बुरे समय में क्रूरता से उस पर वार किया (अय्यूब 2:9)। दाऊद ने अपनी दया में शाऊल के जीवन को बख्श दिया (1 शमू 24:1-22), लेकिन उसकी बेटी मीकल ने दाऊद की श्रेष्ठ ईश्वर-भक्ति का मज़ाक उड़ाया (2 शमू 6:20-23)। यूसुफ ने अपनी बड़ी दया से मरियम के सम्मान और इज्ज़त की रक्षा की, हालाँकि वह बहुत आहत हुआ था (मत्ती 1:19), लेकिन यहूदा अपने उस वादे को भूल गया था जो उसके अकेली और जरूरतमंद तामार से किया था (उत्पत्ति 38:11-26)।

एक दुष्ट व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ कठोरता से व्यवहार करता है, ऑफिस या फैक्ट्री में घंटो काम करता है, बच्चों पर चिल्लाता है, छुट्टियों में अपने परिवार को किसी सस्ते होटलों में ले जाता है, घर के पालतू पशुओं को को खाना खिलाना भूल जाता है, अपने दुश्मन की निंदा करता है, पत्नी के साथ रोमांस को तुच्छ जानता है, अपने बच्चों को प्रशिक्षित करने की उपेक्षा करता है, परिवार से अपेक्षा करता है कि वे उसकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को महत्वपूर्ण समझे, दूसरों के सामने अपनी पत्नी की आलोचना करता है, अपनी माँ को खाने के लिए बाहर नहीं ले जाना, किसी सहकर्मी के बारे में कानाफूसी करता है, अपनी बेटियों को बेटों की तरह समझता है, या अपने परिवार रुसवा होकर बात करना बंद कर देता है।

वैसे ही, एक दुष्ट महिला यह सोचती है कि वह अपने पति से होशियार है, पड़ोसी के बारे में कानाफूसी करती है, अपनी सास की बुराई करती है, अपने पति को दैनिक यौन-संबंध से वंचित रखती है, अपने बेटों की बचकानी गतिविधियों पर पर्दा डालती है, जो जो काम पूरे करने हैं उनपर कुढ़कुढाती है, बच्चों को दंडित करने के बजाए उनका लाड़ करती है, अपने पति को बार-बार सुधारने का दुस्साहस करती है, छोटी छोटी बातों के बारे में बहुत अधिक चिंता करती है, अपने पति की उपेक्षा के लिए बच्चों की देखभाल का बहाना देती है, परिवार को शाकाहारी पिज्जा खाने के लिए मजबूर करती है, या अपने कठिन जीवन के लिए दया की भीख माँगती है।

प्रत्येक पत्थर-दिल और दूसरों को पीड़ा देनेवाले अंतर्मुखी कामुक मनुष्य इन वचनों को पढ़े: ” कृपालु मनुष्य अपना ही भला करता है, परन्तु जो क्रूर है, वह अपनी ही देह को दु:ख देता है” (नीति 11:17)। आपका आत्म-चिंतन और नकारात्मक विचार गलत और विनाशकारी हैं। ये बातें आपके चिडचिडेपन , अलगाव, बुरे रवैये, आलोचनात्मक दृष्टिकोण या कठोर शब्दों के द्वारा आपको और आपके आस-पास के लोगों का विनाश कर देती हैं।

एक “शांत दिखानेवाला मनुष्य” कितना दयालु होता है, जो चुपचाप रहता है? एक “शक्तिशाली नेता या अगुआ”, जो घर पर बार-बार चिल्लाता है? वह “विचारशील व्यक्ति”, जो दूसरों के अपराधों को याद रखता है और कड़वाहट पालता है? वह “मजाकिया व्यक्ति”, जो हर समय हंसता रहता है और केवल अपने बारे में सोचता है? “उत्साही व्यक्ति “, जो तुरंत और पूरी तरह से माफ नहीं कर सकता? ये लोग बिल्कुल भी दयालु नहीं होते हैं।

दया परमेश्वर द्वारा स्थापित मानक और नीतियों की बलि नहीं देती (1 राजा 20:31-34)। उसकी व्यवस्था में दया करना शामिल है, और आपमें इतनी बुद्धि या इतना ज्ञान नहीं है कि आप उसके द्वारा स्थापित कायदा-क़ानून में संशोधन कर सकें। दया आपके मानकों, आपकी राय, आपकी भावनाओं, आपकी आदतों और दूसरों के साथ आपके मतलबी रवैये से ऊपर है।

यदि आप दूसरों पर दया और करुणा करते हैं तो आप पर भी दया और करुणा की जाएगी, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने और दूसरों के प्रति दया और नम्रता दिखाएं (याकूब 2:13)। केवल मीठे बोल पर्याप्त नहीं हैं: आपको असली करुणा की भावना रखने (कुलु 3:12-13; 1 यूहन्ना 3:17) और उनके अनुरूप कार्य करना अवश्य है (याकूब 2:16)।

धन्य प्रभु परमेश्वर ने भूखी भीड़ से लेकर एक दुखी विधवा तक, एक अछूत कोढ़ी से लेकर निराश मरियम मगदलीनी तक, हर वर्ग के लोगों के प्रति अपनी कोमल दया दिखाई (मरकुस 8:1-2; लूका 7:11-15; मरकुस 1:40-44; यूहन्ना 20: 11-18)। और वह हर दिन आपके प्रति दयालु और करुणामय है, प्रिय ख्रिश्चन। यदि आप राजा की संतान हैं, तो अपने दयालु राजा की तरह सभी पर कोमल दया दिखाइये। अपने जीवन में उसकी कृपा को अन्य सभी पर प्रतिबिंबित करके दिखाएं।

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