नीतिवचन 11:7
जब दुष्ट मनुष्य मरता है, उसकी आशा मिट जाएगी : और अधर्मियों की आशा मिट जाती है। (केजेवी)
पापीजन जीवन का थोड़ा-बहुत आनंद लेते हैं – जब वे जिंदा होते हैं। वे विलासिता और अपनी भावी पीढ़ी के लिए बड़ी बड़ी योजनाएँ बनाते हैं। वे दूसरों से बड़े बड़े और बेहतर काम करने की अपेक्षा और उम्मीद रखते हैं। और वे सारी योजनाएं ऐसी बनाते हैं कि सबकुछ परिपूर्ण हो। फिर वे मर जाते हैं। उसके बाद उनके पास कुछ नहीं है। अब वे कुछ भी नहीं हैं।
मृत्यु सबसे बड़ी निर्णायक है। वह धनवानों का सब धन लूट लेती है; वह बलवानों से उनका सब छीन लेती है; वह सुंदर चेहरे, सुडौल शरीर, और लम्बे-घने बालों को सडा देती है; यह बुद्धिमानों की समझ और उनकी स्मृतियों को मिटा देती है; वह नेताओं के अधिकार और सामर्थ्य को निष्क्रिय कर देती है; वह माता-पिता से उनके प्रिय बच्चों को छीन लेती है; वह उन्हें बेघर कर देती है जो अपने आलिशान घरों से प्रेम करते थे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुष्ट क्या उम्मीद करता है या क्या करने की आशा करता है, आतंक का राजा सब कुछ ले लेता है।
यीशु ने एक धनवान व्यक्ति के विषय में बताया, जिसने अपनी विशाल धन-दौलत रखने के लिए नए गोदाम बनाने की योजना बनाई, और उसने अपने आप से कहा, “प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत सम्पत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह।।” परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा, “हे मूर्ख! इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा; तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है वह किसका होगा?” (लूका 12:16-21)।
सांसारिक मन के लोग नग्न और अज्ञानी अवस्था में इस दुनिया में आते हैं, और वे उसी असहाय अवस्था में इस दुनिया से चले जाते हैं। फिर भी वे उन लक्ष्यों का पीछा करते हुए अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं जो एक पल में लुप्त हो जाते हैं – अर्थात् वह पल जब वे मर जाते हैं। वे दूसरों को मरते हुए और खाली हाथ इस दुनिया से जाते हुए देखते हैं, फिर भी वे महत्वाकांक्षा, लालच और लोभ की बेरहम चक्की पर जितनी तेजी से हो सके दौड़ते हैं, और तब तक दौड़ते रहते हैं जब तक कि वह उन्हें मृत्यु और नरक में उछालकर नहीं फेंक देती। क्या ही मूर्ख हैं! फिर उनके पास कुछ नहीं रहता। वे मिट जाते हैं।
क्या ऐसे शब्द सुनने बहुत कठोर हैं? वे नरक में के सबसे पहले झटके की तुलना में कुछ भी नहीं हैं। समझ के एक भयानक क्षण में, प्रत्येक पापी जान जाएगा कि एक परमेश्वर है, कि पृथ्वी पर का उसका सारा जीवन व्यर्थ था, और यह कि अब आगे उसे अनंतकाल के लिए असहनीय पीड़ा भोगनी है। वह एक पल के लिए भी पृथ्वी पर अपनी बड़ी बड़ी योजनाओं के बारे में नहीं सोचेगा, क्योंकि वे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी। आपको ऐसा क्यों लगता है कि ऐसे भविष्य के बारे में कड़ी चेतावनियाँ कठोर हैं? क्या आप ने भी धोखा खाया हैं?
यह संसार बावला है। लोग उच्च वेतन, प्रतिष्ठित पदों, बड़े और आलीशान घरों, महंगी कारों, आकर्षक कपड़ों, अपने बच्चों के लिए सबसे महंगे स्कूलों, और अन्य हास्यास्पद महत्वाकांक्षाओं के लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उन में से कुछ कहते हैं, “जो सबसे अधिक सम्पत्ति छोड़कर मरता है, उसका जीवन सफल है।” वह यह सुनिश्चित करने के लिए अपने पड़ोसियों का प्रतिदिन पीछा करते हैं कि विलासिता की वस्तुओं को बटोरने और सुख हासिल करने की इस पागलपंती की होड़ में वे पीछे न रह जाए। फिर वह क्षण आता है जब वे सब कुछ खो बैठते हैं।
ध्यान दें कि दाऊद ने भजन 39 में इस पागलपन के विषय में क्या लिखा। उसने लिखा, “सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा!” (भजन 39:6)। सुलैमान ने जितना आप सोच भी नहीं सकते उससे भी अधिक प्रयोग करने के बाद, यह सारांश लिखा : “मैं ने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो, वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।” (सभोपदेशक 1:14)। इस पर विश्वास करो!
ध्यान दें कि दाऊद ने भजन 49 में क्या लिखा। वहाँ यहोवा ने धनवानों के पागलपन और उनकी अभिलाषाओं का मज़ाक उड़ाया। यह सभी मनुष्यों को सांसारिक धन की व्यर्थता से सावधान करनेवाला उपदेश है। मनुष्य चाहे बुद्धिमान हो या मूर्ख, वह पशु के समान मरता है, और वह अपने साथ कुछ भी नहीं ले जा सकता। एक धनवान मनुष्य मृत्यु से बाहर निकलने का रास्ता खरीदने के लिए कुछ नहीं कर सकता। वह शीघ्र ही मिट्टी बन जाता है, जो कब्र में कचरे के समान फेंक दी गई हो, फिर भी उसके वंशज उसी भ्रम का पीछा करते हैं।
सिकंदर महान की मृत्यु मात्र 33 वर्ष की आयु से पहले ही हो गई थी। उसकी यह करने की, और वह करने की सारी घमण्डपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजनाएं पूरी तरह से लोप हो गई। उत्तराधिकार के विषय में उसके अंतिम शब्द समझ में नहीं आए, इस कारण उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं बन सका। उसके परिवार की हत्या कर दी गई थी, इस कारण उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं रहा। उसके चार सेनापतियों ने उसके साम्राज्य के टुकड़ों के लिए आपस में लड़ाईया की, और आज यूनान दुनिया में एक कहावत बन कर रह गया है, जो यूरोपीय संघ से आने वाली बड़ी आर्थिक सहायता-निधि के बिना अपना पेट भी नहीं भर सकता।
इस नीतिवचन के उदाहरण अनगिनत हैं। एडोल्फ हिटलर की भव्य योजनाओं का क्या हुआ? उसका पक्ष लेकर उसे स्मरण करना भी अधिकतर देशों में लगभग अपराध माना जाता है। उसका शत्रु कहलाने वाला यहूदी समाज आज दोबारा समाज के कई घटकों में राज्य करता है। माओत्से तुंग का क्या हुआ? उसकी मृत्यु के बाद से चीन ने जो प्रगति की है, वह मुख्य रूप से उसके विचारों को ठुकरा देने के कारण है। जोसेफ स्टालिन का क्या हुआ? जेम्स डीन? जॉन एफ कैनेडी? मैरिलिन मुनरो? जॉन लेनन? जॉन एफ कैनेडी जूनियर? इन सब का क्या हुआ?
पापी लोग जो जो करना चाहते हैं, और जो जो योजनाएं बनाते हैं उन सब का उनकी मृत्यु होने पर अंत हो जाता है। उनकी अपेक्षाएं और आशाएं मिट जाती हैं। जिन जिन बातों को उन्होंने महत्व दिया, उन सबको आतंक का राजा परमेश्वर पूरी तरह से मिटा देता है। वे फिर कभी जिंदगी का मज़ा नहीं ले पाएंगे। परंतु धर्मियों को मृत्यु के समय आशा रहती है (नीति 10:28; 14:32), क्योंकि वे एक ऐसे अन्य जगत की आशा करते हैं, जो इस वर्तमान जगत की तुलना में हर लिहाज से श्रेष्ठ है, जितनी कि ज्योति अंधकार से श्रेष्ठ रहे। परमेश्वर की महिमा करो।
सफल मसीही उद्योगपति को देखो जो अपने उद्योग को मसीह तथा अनंतकाल से ऊपर बड़ा स्थान देता है। वह चर्च में जाकर और अपनी समृद्धि का थोड़ा सा प्रसाद थाली में डालकर अपने विवेक को तसल्ली देता है। परंतु जो बात उसके जीवन को चलाती है या चालना देती है वह है आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियों के पीछे भागने की उसकी प्यास। उसे एक ही प्रतिफल मिलेगा – अधर्मियों की ओर से प्रशंसा, जो सोचते हैं कि वह सफल है। प्रभु परमेश्वर यहोवा और सब बुद्धिमान लोग जानते हैं कि वह कहां जा रहा है और उसकी अंतिम नियति क्या है, उस आग में जो बुझने कि नहीं, और जहां हर एक मनुष्य कंगाल है, जहां उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं है।
मसीही भाइयों, कल का घमंड मत करो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि कल क्या होगा (नीति 27:1)। जबकि परमेश्वर तुम्हें व्यावसायिक योजनाएं बनाने देता है, और वह चाहता है की तुम ऐसी योजनाएं विवेकपूर्ण बुद्धि के साथ बनाओ, फिर भी तुम यह भी नहीं जानते कि तुम कल जीवित रहोगे या नहीं, इसलिए तुम्हें अपनी योजनाओं को इन शब्दों में परमेश्वर की इच्छा पर सौंप देना है “यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे।” (याकूब 4:15)। किसी भी योजना को अंजाम देने के लिए आपको जीवित रहने की आवश्यकता होती है।
मसीहियों, मृत्यु जो दुष्टों से वह प्रत्येक वस्तु छीन लेती है, जिसे वे पाना चाहते थे, वही आपके लिए उससे अधिक प्रतिफल ले आती है जितना कि वे लोग हासिल भी नहीं कर सकते थे, और न ही कल्पना सकते थे। सम्पत्ति? आप विश्व के वारिस होंगे। ताकत? आप हमेशा के लिए जीवित रहेंगे। सुंदरता? आपके पास एक महिमान्वित शरीर होगा। बुद्धिमत्ता? आप सब बातें जान लेंगे। अधिकार? आप स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे। बच्चें? आपका अपने परिवार से पुनर्मिलन होगा जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। घर? राजाओं के राजा ने आपके लिए आलिशान महल बनाएं है।
मसीहियों, इस पृथ्वी पर की वस्तुओं की परवाह करके पेट के आराधक मत बनो (फिली 3:18-19)। दाऊद और पौलुस के समान बनो, जो जानते थे कि मृत्यु के बाद आनेवाला जीवन अपनी अवधि, महिमा, सुख, या किसी भी अन्य परिमाण की तुलना में पृथ्वी पर के जीवन से पूरी तरह बढ़कर हैं। यदि आपने पानी में डुबकी लगानेवाला बपतिस्मा लिया है तो आपने अपना पृथ्वी पर का जीवन पानी के नीचे गाड़ दिया है कि मसीह और स्वर्ग के लिए जिए – और बपतिस्मे का यह प्रतीक शीघ्र ही साकार रूप ले लेगा (कुलु 3:1-4)।
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