नीतिवचन 11:6
सीधे लोगों का बचाव उनके धर्म के कारण होता है, परन्तु विश्वासघाती लोग अपनी ही दुष्टता में फँसते हैं।
जान लो कि आपका पाप आपको ढूंढ ही लेगा (गिनती 32:23)। धोखा मत खाओ; परमेश्वर को ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता: मनुष्य जो कुछ बोएगा, वही काटेगा (गला 6:7)। इन परमेश्वर-प्रेरित दोनों नियमों की पुष्टि इस नीतिवचन से होती है। बुद्धि धर्म का जीवन है; मूर्खता का अर्थ है दुष्टता से परमेश्वर की व्यवस्था को तोड़ना। इस नीतिवचन का पहला भाग या नियम छुटकारे की ओर ले जाता है; तो दूसरा नियम पीड़ा और संकट को ले आता है।
बुद्धि की महान नीतियों में से एक यह है कि धार्मिकता और दुष्टता दोनों के अटल और सुनिश्चित नतीजें सामने आते हैं। सुलैमान ने अपने पुत्र और देश के नागरिकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस नियम को कई बार दोहराया। अकेले इस अध्याय में, इस नीतिवचन की उन अन्य नीतिवचनों से तुलना करें जो अपनी शब्दावली और पाठ में लगभग एक जैसे हैं (नीतिवचन 11:3,4,5,7,8,10,12,19,20,21,23,27,28,31)।
एक जैसी शब्दावली और विषय वस्तु का यह दोहराव व्यर्थ में नहीं है। प्रिय पाठक, अपने मन का परिक्षण करें। क्या आपका मन यह सोचने की प्रवृत्ति रखता है कि सुलैमान के नीतिवचन तो बहुत उबाऊ हैं? क्या आप इन नीतिवचनों के बजाए प्रेम कहानियां, व्यवसाय के पैंतरे, रिश्तों को कैसे विकसित करें, या कम समय में थोड़ी मेहनत से धन कैसे कमाए जैसे विषयों पर बेकार की किताबे पढ़ना और उन पर विचार करना अधिक पसंद करेंगे? सावधान हो जाएँ। इन नीतिवचनों का अपने शब्दों का चुनाव एवं दोहराव भी ईश्वरीय बुद्धि से ही है। उपरोक्त नियम को बार बार दोहराना ज़रूरी है।
यदि आप बुद्धि से धार्मिकता का जीवन जिएंगे तो प्रेम, व्यवसाय, रिश्ते और धन अपने आप चले आएंगे। आपके देह में अब भी पाप बसता है, इस कारण आपका मन धार्मिकता के प्रति ठंडा है। और शैतान स्वयं आपको सीखने और धार्मिकता में बढ़ने से विचलित करने के लिए दुनियादारी की बातों में उलझा सकता है। इसके अलावा, यह दुनिया केवल दुष्टता को उकसाती है और बेचती है; यह पापी दुनिया कभी भी धार्मिकता की प्रशंसा नहीं करती। यह तीन –आपका मन, शैतान, और संसार- ऐसे शत्रु हैं जो आपका नाश करने की साजिश रचते हैं। सुलैमान अति करनेवाले शब्दों का उपयोग नहीं कर रहा है।
जो मनुष्य सीधा है और खराई पर चलता है वह हर समय और पूरी लगन से वही करता है जो परमेश्वर की परिभाषा के अनुसार सही है। यही धार्मिकता है। ऐसे मनुष्य को पाप के दर्दनाक परिणामों और संकटों से छुटकारा मिल जाता है और बचाया जाएगा, इस दुनिया में भी, और आनेवाले नए जगत में भी। विश्वासघाती वह दुष्ट है जो परमेश्वर की व्यवस्था को तोड़ता है, और अपने अधर्म को पीता है और अंत में अपने दुर्भाग्यपूर्ण चुनाओं के परिणामस्वरूप विनाश पाता है, इस दुनिया में भी और आनेवाली अगली दुनिया में भी।
इस संसार पर विचार करें। सीधा मनुष्य परमेश्वर के धर्मी व्यवस्था को सीखता है और अपने जीवन में उसका व्यावहारिक उपयोग करता है। परमेश्वर और मनुष्य उस पर प्रसन्न होते हैं, और वह जीवन में समृद्ध और सफल होता है, वह उन सब भ्रमों और दुष्क्रियताओं से मुक्त हो जाता है जिनमें बाकी सब फँसकर मर जाते हैं (नीतिवचन 3:1-4; यहोशू 1:7-9; भजन 1:1-6; लूका 2:52)। लेकिन विश्वासघाती जो अपनी ही दुष्टता में फँस जाता है, वह हर तरह की मुसीबत में पड़ जाता है, क्योंकि परमेश्वर, मनुष्य और प्राकृति के नियम उसे इसके परिणामों से कुचलने के लिए एक साथ आक्रमण करते हैं (नीतिवचन 1:31; 8:36; 13:15)।
आनेवाले जगत पर विचार करें। सीधा मनुष्य, जो धार्मिकता का फल लाकर अपने नए जन्म और उद्धार को प्रमाणित करता है, वह यीशु मसीह में परमेश्वर से मुफ़्त में मिले अनुग्रह से स्वर्ग में प्रवेश पा लेता है (1 थिस्स 1:2-4; 2 पतरस 1:5-11)। लेकिन विश्वासघाती विश्व के भयानक संप्रभु न्यायाधीश का सामना करेगा और उसे अपनी मूर्खता, अपने घमंड, विद्रोह और कई अन्य पापों के कारण आग की झील में अनंत काल का दण्ड पाने के लिए डाल दिया जाएगा, और कामना करेगा कि काश वह कभी पैदा न हुआ होता (सभो 12:13-14; प्रकाशित 20:11-15; 21:8)।
अपने जीवन में बिंदुओं को जोड़ना सीखें, जहां बिंदु वे हैं जब आप अपने जीवन के फैसलें लेते हैं और घटनाएं घटती हैं। यदि आप बाइबल की बुद्धि के खिलाफ़ जाकर विद्रोह करते हैं और मूर्खतापूर्वक इस संसार की चाल चलते हैं, तो आपको इसके दर्दनाक और दंडात्मक परिणाम भुगतने होंगे। यदि आप परमेश्वर से डरते हैं और बाइबल के अनुसार चाल चलते हैं, तो आप सुरक्षित और समृद्ध होंगे। अपने फैसलों और चुनाओं को उनके बाद आने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं से जोड़ना सीखें।
यूसुफ ने अपने पिता, अपने भाइयों, पोतीपर की पत्नी और फिरौन के संबंध में कई बुद्धिमानी भरे निर्णय लिए; लेकिन फिर भी उसे अपने जीवन में उन कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा, जिन्हें परमेश्वर ने तय कर रखा था। संभवतः उसने कई बार सोचा होगा कि क्या उसका धर्मी जीवन उन मुसीबतों के लायक था। लेकिन यदि आप उसके जीवन के बिंदुओं को जोड़ते हैं, तो यूसुफ का जीवन अंत में कहाँ जा पहुँचा? वह मिस्र का प्रधानमंत्री बना और अब उसमें इतनी सामर्थ्य थी कि वह अपने पूरे परिवार को बचा सका और उनका भरण-पोषण कर सका।
शिमशोन यूसुफ के समान ही एक नौजवान मनुष्य था, लेकिन उसने अपने माता-पिता की बात नहीं मानी और इस्राएल की एक सद्गुणी स्त्री से विवाह करने से इनकार किया। वह उसके बदले एक फ़िलिस्तीनी लड़की से अपने रिश्तें बनाना चाहता था। उसकी ताकत इतनी महान थी कि उसके बल पर वह अपने जीवन में अपने शत्रुओं पर कई बार विजयी हुआ। उसने शायद सोचा होगा कि वह अपने यौन पापों से बच जाएगा। लेकिन यदि आप उसके फैसलों के बिंदुओं को जोड़ते हैं, तो शिमशोन का जीवन अंत में कहाँ जा पहुँचा? उसकी आखिरी पलिश्तीनी प्रेमिका ने उसे धोखा दिया, उसकी आंखें निकाल ली गईं और अन्त में उसने आत्महत्या कर ली।
आज आप जो जो फैसले लेते हैं, आप अपने जीवन के मानचित्र पर बिंदु बना रहे हैं। यदि आप दुष्ट हैं और अपने जीवन में परमेश्वर की बुद्धि और अधिकारियों के निर्देशों को नहीं मानते, तो आपका भविष्य दर्दनाक और संकटों से भरा होगा। लोग आपके फैसलों के बिंदुओं को जोड़कर यह समझ जायेंगे कि आपके दुख और विफलता का कारण क्या है। लेकिन अगर आप आज सीधे हैं और खराई से जीवन जीते हैं, तो आपका अन्तिम प्रतिफल आशा से भरा है जो गौरवशाली होगा, और लोग जान लेंगे कि यह गौरव आपके धार्मिक जीवन का परिणाम है।
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