नीतिवचन 11:5
खरे मनुष्य का मार्ग धर्म के कारण सीधा होता है, परन्तु दुष्ट अपनी दुष्टता के कारण गिर जाता है।
जीवन कुछ हद तक किसी खाई के समान है – जिसमें ज़ख्म या मृत्यु केवल एक कदम की दूरी पर होती है। अधिकांश लोग बिना किसी सावधानी, अनुशासन या दिशा-निर्देश के अपना जीवन अज्ञानता में भागदौड़ के साथ जीत हैं। वे लालच में आकर अपनी पापी महत्वाकांक्षाओं का पीछा करते हैं, और वे असफलता, विनाश और मृत्यु की खाई में गिर जाते हैं। हो सकता है कि आप इस वर्णन को अत्यधिक नाटकीय या अतिवादी कहकर इसका मज़ाक उड़ाएँ, लेकिन आगे पढ़ते रहें और मुद्दे पर अच्छी तरह विचार करें।
सिद्ध पुरुष और महिलाएं, जो परमेश्वर से डरते हैं और उसकी आज्ञा मानते हैं और धार्मिकता का जीवन जीते हैं, वे जीवन के खतरों से भरे रास्तों पर भी सुरक्षित रहते हैं और अपने जीवन में समय समय पर लिए उनके अच्छे और बुद्धिमान फैसलों के कारण स्वर्ग में चले जाते हैं। परमेश्वर ने सुलैमान को नीतिवचन लिखने के लिए प्रेरित किया ताकि आपको धर्म के मार्ग पर जीने और अपने जीवन को निर्देशित करने के लिए ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिल सके। यदि आप ऐसी सहायता के विरुद्ध विद्रोह करते हैं, तो आप अवश्य ही मृत्यु से प्रेम रखते हैं (नीतिवचन 8:36)।
लोग इस दुनिया में असहाय शिशुओं के रूप में जन्म लेते हैं, अत: अवश्य है कि वे दिशा-निर्देश के लिए अनुभवी शिक्षकों की सुने। उन्हें यह समझना ज़रूरी है कि उन्हें अपने खाली दिमागों को ऐसे लोगों के विचारों से भरना, जिनके अपने दिमाग खली हैं, विनाश का सूत्र है। इस पागलपन की पुष्टि हर दिन हर जगह होती रहती है। मनुष्य मूर्खता और विद्रोह का पीछा करते हैं, और उन्हें पीड़ा और संकट ही भुगतना पड़ता है। परमेश्वर या मनुष्य की परवाह किए बिना, वे सुख और प्रभुत्व की लालसा में भागते रहते हैं, लेकिन अंत में अपनी ही मूर्खता के कारण गिर जाते हैं।
खरा कौन है? वह मनुष्य जो परमेश्वर का भय मानता है और उसकी आज्ञाओं का पालन करता है! भले ही उसमें बहुत-सी खामियां होती हैं, परमेश्वर उसके पापों को क्षमा कर देता है और उसे खरे मनुष्य के रूप में देखता है (उत्पत्ति 6:9; अय्यूब 1:1; फिलि 3:15; लूका 1:6)। ऐसे व्यक्ति के जीवन में धार्मिक सोच का मार्गदर्शक संयम होता है, जो उसे अपने आसपास के परमेश्वर-द्वेषी मूर्खों के आत्म-विनाश से बचाता है। उसका जीवन हर दिन और अधिक बेहतर होता जाता है, ठीक वैसे जैसे दोपहर में सूरज चढ़ता जाता है (नीतिवचन 4:18)।
खरा मनुष्य धार्मिकता कैसे सीखता है? वह परमेश्वर का भय मानकर आरम्भ करता है, और फिर वह बाइबल और धर्मी सलाहकारों की ज्ञान की बातों को सुनता और मानता है। परमेश्वर का भय मानना जीवन के लिए बुद्धि और ज्योति है (नीतिवचन 1: 7; 9:10; 10:27; 14:27; 19:23; भजन 112: 1,3,9)। बाइबल बुद्धिमानी और धार्मिकता का जीवन जीने के लिए मार्गदर्शिका है (नीतिवचन 22:17-21; भजन 19:7-11; 119:105)। धर्मी सलाहकार वे पास्टर और मित्र होते हैं जो खुद भी परमेश्वर का भय मानते हैं (नीतिवचन 11:14; 27:9; यिर्म 3:15; 1 शमू 23:16)।
दुष्ट लोग जीवन जीने की कला को सिखने के लिए इस दुनिया के पापपूर्ण विचारों से प्यार करते हैं, जिन्हें वे अन्य मूर्खों और उनके स्वयं के भ्रष्ट दिलों से प्राप्त करते हैं (नीतिवचन 12:15; 14:12; 16:25; 21:2)। वे अंधकार में भटकते हैं और जाल में फंस जाते हैं (नीतिवचन 4:19; 13:15; 15:19; 22:5)। जीवन के प्रति यह अज्ञानी और विद्रोही दृष्टिकोण परमेश्वर का न्याय और पाप के स्वाभाविक परिणाम दोनों लाता है। जो लोग ऐसी विचारधाराओं को मानकर चलते हैं, उनको लगनेवाली लत, अवनति, अवसाद, बीमारी, तलाक, नशा और अंत में भयावह मृत्यु पर विचार करें। वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक नहीं सीखते, क्योंकि वे अपनी मूर्खता को कायम रखते हैं और उसे और भी व्यापक रूप से फैला देते हैं।
धर्मी व्यक्ति सद्गुणी स्त्री से विवाह करता है जो परमेश्वर का भय मानती है, और वह शांति और सुकून का विवाहित जीवन जीता है। वह उसका पालन-पोषण करता है और उसकी उन्नति करता है जैसा कि बाइबल उसे बताती है, और वह प्रेम और सुख का आनंद उठाता है। दुष्ट व्यक्ति घृणित या व्यभिचारी स्त्री से विवाह करता है, और अपना वैवाहिक जीवन में नरक में जीता है या जीवन भर पीड़ा और परेशानी का सामना करने के कारण तलाक ले लेता है। खरा मनुष्य तो भलाई के मार्ग पर चलता है, परन्तु दुष्ट अपनी ही दुष्टता के कारण गिर पड़ता है। वह बाहरी रूप और खूबसूरती की लालसा में फंसकर अपनी पत्नी को चुनता है, और कब्र की ओर अपने मार्ग पर जाते जाते भयानक कीमत चुकाता है।
धर्मी मनुष्य अपने बच्चों को अथक प्रयास के साथ धर्म के मार्ग की शिक्षा देता रहता है और उनकी सब चाल-चलन पर अपनी नज़रें रखता है, खासकर जब वह लड़कियों के आसपास रहता है या जब उसके विवाह की उम्र हो जाती है। यह जानकर कि उसके बच्चों की ख़ुशी और उसका पारिवारिक वंश उच्च आध्यात्मिक रूप से विवाह करने पर निर्भर करता है, वह अपने बच्चों को ऐसे सब मित्रो की संगती से दूर रखता है जो परमेश्वर के सख्त बाइबल-सम्मत मानदंडों को पूरा नहीं कर पाते हैं, भले ही उसके बच्चे कितना भी सोचें कि वे प्यार में हैं या उसके धर्मी रणनीतिक निर्णयों के बारे में कितना भी दुखी हों।
दुनिया दुष्टता में बदतर होती जा रही है, जिसमें अधिकांश तथाकथित ईसाई भी शामिल हैं, और यह आगे भी बदतर होती ही रहेगी, भले ही वेलोग कुछ भी कल्पना करें जो सोचते हैं कि यीशु एक हज़ार वर्ष के लिए इस पृथ्वी पर अपना राज्य स्थापित करेगा या वे जो सोचते हैं कि इस दुनिया में एक हज़ार वर्ष के लिए शांति की स्थापना होगी और फिर उसके बाद यीशु का दूसरा आगमन होगा (2 तीमु 3:13; 4:3-4; प्रकाशितवाक्य 20:7-9; लूक 18: 8)। खरा मनुष्य यह जानता है, इसलिए पवित्र बाइबल के अधिक निश्चित वचनों के प्रति उसका प्रेम और भी बढ़ता जाता है और वह उसकी शिक्षा और चेतावनियों पर और भी अधिक सतर्कता से ध्यान देता है (2 पतरस 1:19-21)। वह दुनिया के विचारों की बढ़ती मूर्खता और उनके भयानक परिणामों पर हंसता है।
खरे मनुष्य की धार्मिकता उसे कहाँ तक ले जाएगी? स्वर्ग तक! कोई भी मनुष्य अपनी धार्मिकता के आधार पर स्वर्ग में प्रवेश नहीं करता है, परन्तु प्रत्येक धर्मी व्यक्ति जानता है कि स्वर्ग ही उसका गंतव्य है (भजन 112:6; सभो 64:6; 2 तीमु 4:7-8; तीतुस 3:5; इब्रानियों 11:4)। संकरा द्वार और संकरा मार्ग जो अब और आनेवाले अगले जगत में जीवन देने की प्रतिज्ञा करता है, धार्मिकता का मार्ग है, परन्तु बहुत कम हैं जो उसे ढूंढ पाते हैं, क्योंकि लोगों की एक बहुसंख्यक भीड़ विनाश की ओर यात्रा कर रही है (मत्ती 7:13-14)।
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