नीतिवचन 11:25

आशीष का अंत:करण मोटा होगा और वह जो सींचता है आप भी सींचा जायगा।

उदारता फल दिलाती है! यदि आप मानते हैं कि यहोवा विश्व का परमेश्वर है और बाइबल सत्य है, तो यहाँ बुद्धि का रहस्य है। यदि आप विश्वास नहीं करते हैं, तो यह नीतिवचन आपके लिए नहीं है।

उदारता फलदायी होती है! यदि आप परमेश्वर को अपना प्रथमफल देने और गरीबों को आर्थिक सहायता देने में उदार हैं, तो वह आपको उदारता से वापस देगा। और जितनी आसानी से आप 10 – 2 बराबर 13 कह सकते हैं उस से भी अधिक आसानी से वह आपको दे सकता है।

यह नीतिवचन इसके पहले वाले नीतिवचन से बहुत निकटता से जुड़ा हुआ है, जिसमें लिखा है, “ऐसे हैं, जो छितरा देते हैं, तौभी उनकी बढ़ती ही होती है; और ऐसे भी हैं जो यथार्थ से कम देते हैं, और इस से उनकी घटती ही होती है” (नीतिवचन 11:24)। अपने रूपये – परमेश्वर के नाम पर सही कारणों के लिए – छितरा देने से बढ़ती ही होती है। देने में कंजूसी करने से आप निर्धनता में ही चले जाएँगे।

परमेश्वर मानवजाति के प्रति बहुत उदार रहा है, और वह उन लोगों को पुरस्कृत करता है जो दूसरों के प्रति उसके जैसी ही उदारता दिखाते हैं (नीतिवचन 19:17; 22:9; 28:27)। आप उदारता से देना सीखकर आर्थिक रूप से उन्नति कर सकते सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर आपको भरपूर आशीष देगा। इस नीतिवचन का यही सबक है। बेशक, दुनिया के किसी भी बिजनेस स्कूल या अर्थशास्त्र की क्लास के लिए ऐसी बुद्धि समझ से परे है, क्योंकि वे परमेश्वर के अस्तित्व और उसकी आर्थिक नीतियों पर उसके अलौकिक प्रभाव को मानने से इनकार करते हैं।

परमेश्वर ने आपको आशीष दे दीं है, इसलिए ज़रूरी है कि आप भी गरीबों को उदारता से दे, भले ही वे आपको छोड़कर जा रहे हों (व्यवस्थाविवरण 15:14)। परमेश्वर आपके देने को बारीकी से देखता है और उसी के अनुसार आपके साथ व्यवहार करेगा। पौलुस ने लिखा, “परन्तु बात यह है : जो थोड़ा बोता है, वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा” (2 कुरिंथ 9:6)। यदि आप देने में उदार हैं, तो वह आपको भरपूर प्रतिफल देने में सामर्थी है (सभोपदेशक 11:1-6; यशायाह 32:8; मलाकी 3:10; लूका 6:38)।

आर. जी. लेटूर्नेउ (1888-1969) एक आविष्कारक थे, जिनके नाम 299 अमेरिकी पेटेंट रजिस्टर्ड थे और वे धरती पर सबसे बड़े भू-संचालन उपकरण के निर्माता थे। उनकी सबसे प्रतिष्ठित पहचान एक ख्रिश्चन उद्दोगपति के रूप में है, जिन्होंने अपनी आय का 90% हिस्सा परमेश्वर को देते थें और सिर्फ़ 10% अपने लिए रखते थें। आपके सामने इस वक़्त जो नीतिवचन है उस में वर्णित आर्थिक नीति पर चलकर ही वे समृद्ध हुए। परमेश्वर से ज़्यादा देना असंभव है, उसकी दृष्टि सब बलिदानों पर रहती है, चाहे वे बड़े हों या छोटे (लूका 21:1-4)।

धर्मी जन, अर्थात जो स्वर्ग के रास्ते पर है, उस व्यक्ति का एक मज़बूत सबूत दूसरों को देने में उसकी उदार भावना है (यशायाह 58:6-12; 1 यूहन्ना 3:16-19)। अय्यूब ऐसा ही व्यक्ति था। वह अपने सेवकों की देखभाल बड़ी कोमलता और दयाभाव से किया करता था (अय्यूब 29:11-17; 31:13-22)। परमेश्वर ने उसे बहुत आशीष दीं। यदि आप उन लोगों की सुधि लेते हैं जिन्हें आर्थिक सहायता की ज़रूरत है, तो परमेश्वर आपकी सुधि लेगा (भजन 41:1-3)। बुद्धिमान लोग उदारतापूर्वक देने का मंसूबा रखकर अनंत जीवन को दृढ़ता से थामें रहते हैं (मत्ती 25:31-46; 1 तीमुथियुस 6:17-19)।

जब भी परमेश्वर को, गरीबों को देने, या आपके लिए काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को मुआवजा देने का अवसर मिले, तो इस नीतिवचन की शिक्षा को ध्यान में रखकर औसत से ज़्यादा, सामान्य से ज़्यादा, जितना आप देते, उससे ज़्यादा दें। चर्च के चढ़ावों, वेटर की टिप्स, दिहाड़ी मज़दूरों, कचरा उठानेवालों, योग्य कारणों के लिए आर्थिक मदद की ज़रूरत वाले गरीबों, प्रोत्साहित किए जाने वाले कामगारों, वचन और खरी धर्मशिक्षा के प्रचार में परिश्रम करने वाले सेवकों (1 तीमुथियुस 5:17) और इन जैसे बाकि लोगों के बारे में सोचें और उनकी सुधि लें।

कई लोग खुद से तर्क-वितर्क करते हैं कि वे देने का जोखिम नहीं उठा सकते – वे कहते हैं कि वे आर्थिक रूप से तरक्की करने के बाद दिल खोलकर देंगे – लेकिन यह विकृत मानसिकता से भरा उल्टा तर्क है। इस नीतिवचन के सच्चे नियम के आधार पर, आप आर्थिक रूप से तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे जब तक आप एक उदार दाता नहीं बन जाते। यदि आप उदारतापूर्वक देने से पहले या बिना उदारता के आगे बढ़ जाते हैं, तो संभवतः परमेश्वर आपको मूर्खों की समृद्धि देकर आपका न्याय कर रहा है (नीतिवचन 1:32)। सावधान रहें, कहीं ऐसा न हो कि वह आपको और अधिक कठोर दंड दे।

परमेश्वर आपके देने को देखने से न तो चुकता है और न भूलता है (इब्रानियों 6:10)। वह उसका प्रतिफल देगा ही। कुरिन्थियों ने अंततः उदारतापूर्वक देने का काम किया, और पौलुस ने इसके लिए उन पर परमेश्वर की आशीष का वादा किया (2 कुरिन्थियों 9:8-11)। और इसका एक और नतीजा यह हुआ था कि दान प्राप्त करने वाले लोग कुरिन्थियों के लिए परमेश्वर के बहुत शुक्रगुज़ार थें (2 कुरिन्थियों 9:12-14), जो कि उदारता का एक अच्छा प्रतिफल ही था।

दान देना आनंद की बात हो और उसे प्रसन्नतापूर्वक दिया जाएं, क्योंकि बिना इच्छा के किया गया दान मान्य नहीं होता (2 कुरिन्थियों 9:7)। परमेश्वर ने आपके छुटकारे के लिए जो बड़ी कीमत चुकाई है यदि आप उसके बारे में कुछ जानते हैं, तो दूसरों को प्रसन्नतापूर्वक देना कोई समस्या नहीं होनी चाहिए (2 कुरिन्थियों 8:9)। आप जितना अधिक उदारता से और आनंद से देंगे, उतनी ही अधिक आशीष आप पाएँगे। आज आप कौन-सा दान बड़े आनंद और मन की उदारता से देना चाहेंगे (यशायाह 32:8)?

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