नीतिवचन 11:24

ऐसे हैं, जो छितरा देते हैं, तौभी उनकी बढ़ती ही होती है; और ऐसे भी हैं जो यथार्थ से कम देते हैं, और इस से उनकी घटती ही होती है।

भारत के क्रिश्चन समाज को सम्बोधित,

दुनिया की कोई भी बिजनेस स्कूल इतनी विकसित नहीं है कि अर्थशास्त्र के इस शक्तिशाली नियम को पढ़ा सके। न तो लंदन बिजनेस स्कूल, न ही हार्वर्ड, और न व्हार्टन जैसे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय आपको यह सिखा सकते हैं। यह नीतिवचन स्वर्ग के असीम बुद्धिमान परमेश्वर की ओर से अपने लोगों के लिए एक वित्तीय रहस्य है। अपनी आर्थिक सम्पत्ति बिखरा देने से आपकी निवल संपत्ति में वृद्धि होगी, जबकि धन को रोके रखने से निर्धनता ही बढ़ती है।

यदि आप परमेश्वर और राजा सुलैमान से धन-निर्माण का रहस्य जानना और समझना चाहते हैं, तो यहाँ वह रहस्य है। सुसमाचार प्रचार और ज़रूरतमंद विश्वासियों की आवश्यकताएं पूरी करने के नेक और धर्म-परायण कामों में पैसा बिखरा देने से आर्थिक समृद्धि आएगी, लेकिन अपने देने पर रोक लगाने से आपकी अवनति ही होगी। यहाँ आपके लिए परामर्श है, पैसा निवेश करने का परामर्श नहीं, बल्कि उसे देने का परामर्श। यह परामर्श सही है; आपने इसे सही पढ़ा; यदि आप आर्थिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं तो अपना पैसा बिखेर दें।

यह नीतिवचन पैसों के भूखे या लालची टीवी प्रचारक के दुरुपयोग के लिए एक दमदार अवसरवादी वचन नहीं है। यह अब तक के सबसे बुद्धिमान और सबसे धनवान राजा के ज्ञान का स्वयंसिद्ध सिद्धांत है। उसने एक अन्य स्थान पर शिक्षा दी कि अपनी रोटी जल के ऊपर डाल दे जो अपना धन देने के लिए सांकेतिक भाषा है, क्योंकि भविष्य में वह परमेश्वर की आशीष से कभी न कभी आपको फिर से प्राप्त होगी (सभोपदेशक 11:1-6; 2 कुरिन्थियों 9:8-11; फिलिप्पियों 4:17-) 19)।

सुलैमान ने इस नीतिवचन में दो मनुष्यों की तुलना की। एक ने अपना धन ईश्वरीय कार्यों के लिए दे कर बिखेर दिया, और वह बढ़ता गया और आर्थिक रूप से समृद्ध होता गया। उसने अपना पैसा दे दिया, इसके बावजूद उसकी वित्तीय संपत्ति बढ़ती रही। दूसरे ने जमाखोरी की और जब देने की नौबत आई तब उसने न देकर और उसे जितना देना चाहिए था उतना न देकर अपनी संपत्ति की रक्षा की, और वह गरीब और गरीब होता गया।

मूर्ख लोग परमेश्वर की बुद्धि का उपहास करते हैं, मज़ाक उड़ाते हैं। मास्टर ऑफ़ बिज़नस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री पा चुके दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षित लोग इसे बेतुके विचार कहकर उनपर हँसते हैं। भला आप कैसे अपना धन देकर अपनी संपत्ति बढ़ा सकते हैं? उनका दिमाग उनके सांसारिक शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए गणित तक ही सीमित है। याद रखें, MBA में पदवीधर ये ही अज्ञानी यह भी सोचते हैं कि विश्व की उत्पत्ति ब्रह्मांडीय गैसों के एक बड़े धमाके का परिणाम है और उनकी माताएँ लंगूर थीं। वे कल्पना भी नहीं कर सकते कि उच्च आर्थिक कानूनों की एक शिक्षा-प्रणाली भी है जिसके बारे में वे कुछ नहीं जानते!

उन्हें लगता हैं 10 – 1 = 9, जबकि वास्तव में 10 – 1 = 900 होता है! परमेश्वर का गणित सीखो! इसहाक, जो एक ऐसे परिवार से था जो परमेश्वर को अपनी संपत्ति का दसवां भाग देता था, उसने अपनी बोआई पर 10,000% का वार्षिक रिटर्न पाया (उत्पत्ति 26:12)। उसने सभी आय का दशमांश परमेश्वर को दिया, और उसने शेष 90% का निवेश किया, जो सौ गुना होकर उसके पास लौट आया। अर्थशास्त्र की मोटी मोटी किताबें पढ़नेवाले इन पढ़े-लिखे मूर्खों को ऐसा सालाना रिटर्न कभी मिला है?

इसहाक के पिता अब्राहम ने अपनी बड़ी विजय के बाद परमेश्वर के याजक को सब लुट का दसवां अंश दिया (उत्पत्ति 14:20)। वह अत्यन्त धनवान मनुष्य था, घर से छह सौ मील दूर जाने के बावजूद, बिना किसी रणनीतिक योजना के, एक अजनबी देश में, जहां वह किसी को न तो जानता था और न ही एक अनजान संस्कृति का कोई ज्ञान रखता था (उत्पत्ति 13:2,6)। परन्तु वह परमेश्वर को अपना दशमांश देकर परमेश्वर का आदर करने के कारण आशीष से बढ़ता गया।

इसहाक का पुत्र, याकूब अपने हाथ में केवल एक लाठी लेकर एक नए देश में चला गया, लेकिन 20 वर्षों में वह इतना धनी हो गया था कि उसे यात्रा करने क लिए दो टोलियां बनानी ही पड़ती थी (उत्पत्ति 32:10)। और ऐसा उसके नियोक्ता द्वारा उसके साथ भेदभाव करने के बावजूद हुआ (उत्पत्ति 31:7,41)। आर्थिक सफलता का उसका रहस्य क्या था? उसने अपनी सब कमाई का दसवां भाग परमेश्वर को दिया (उत्पत्ति 28:22)। परमेश्वर की महिमा करों!

मूर्ख सोचते हैं कि उन्हें पहला स्थान स्वयं को देना चाहिए, और जो कुछ बचा है, उसमें से केवल थोड़ा सा ही परमेश्वर को देना होगा। और अगर कुछ नहीं बचा तो परमेश्वर को कुछ नहीं दिया जाता है। बुद्धिमान लोग भी प्रथम स्थान किसका है इसकी खोज करते हैं, जिसका अर्थ है स्वयं परमेश्वर को प्रथम स्थान देते हैं। वे पहले परमेश्वर को देते हैं, और जो कुछ बचता है उसी से गुजारा करते हैं। स्वर्ग का धन्य परमेश्वर ऐसे मनुष्य में भिन्न आत्मा को देखता है और उसी के अनुसार उन्हें प्रतिफल भी देता है।

मूर्ख बहस करते हैं, “मैं देने का खतरा नहीं उठा सकता। मुझे अपनी आर्थिक हालातों की रक्षा करनी है। मेरे महीने के बिल्स आ रहे हैं जिनके लिए मुझे बचाकर रखना आवश्यकता है। जब मेरी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, तब मैं दूंगा।” स्वर्ग का परमेश्वर वित्तीय सुरक्षा के इन ज्ञानशुन्य और दुष्ट विचारों से कहीं ऊपर बढ़कर कार्य करता है। ये मनुष्य ज़रूर निर्धन बनते जाएंगे। इस नीतिवचन का उल्लंघन करने से वे कभी भी आर्थिक रूप से सुधर नहीं पाएँगे। बस एक छोटा-सा सर्वेक्षण दिखाएगा कि ऐसे मनुष्य अक्सर सबसे गरीब होते हैं जिन्हें आप जानते हैं।

आप नहीं देने का खतरा नहीं उठा सकते! यदि आप अपने सृष्टिकर्ता को लूटना जारी रखते हैं, तो आपकी स्थिति बद से बदतर हो जाएगी (मलाकी 3:8-11; गलातियों 6:7)। कंजूस तरीके से परमेश्वर का दसवां भाग चुराने और विद्रोही जीवन जीने से बेहतर है कि आप दसवां भाग देकर नब्बे प्रतिशत भाग अपने पास रखकर परमेश्वर की इच्छा से पर जिएं। यदि आप उसका 10% चुराते हैं, तो उसके पास अपना 10% और आपका 90% लेने का अधिकार और सामर्थ है। आप नहीं देने का खतरा बिलकुल नहीं उठा सकते!

देने से आप को लाभ ही होगा। यदि आपके वेतन में से 10% की कटौती कर दी जाती है, तो आपके पास जीने के लिए केवल कुछ चिल्लर बाकी रहेगी। सरकार आपको इसके लिए कर कटौती की सुविधा देकर आपकी कटौती को विभाजित कर देगी। आप चोरी करते हैं और झूठ बोलते हैं, जब आप कहते हैं कि आप देने में सक्षम नहीं हैं। खुद को दीन करें; बुद्धि को चुनें, और तरक्की करें।

दशमांश सीमा नहीं है, क्योंकि नए नियम की आशीषें यकीनन पुराने नियम के भिक्षुक दसवें भाग देने से कही अधिक बढ़कर देने के योग्य हैं। मसीह यीशु में आपकी आत्मिक और भौतिक आशीषें इतनी अधिक हैं जिसके बारें में इस्राएल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। आप जो कुछ भी हैं और जो आपके पास है, उसमें का सब 100% परमेश्वर ने आपको दिया है, और स्वर्ग का अनन्त जीवन आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। क्या आप केवल 10% जमा करना चाहते हैं? इसलिए 10% देने को बहुत ही मामूली कर्तव्य समझे। [पूराने नियम में दशमांश वास्तव में कुल 23 1/3% होता था, लेकिन उस दशमांश में ऐसी चीजें शामिल थीं जो अब हमारे कर और सामाजिक कल्याण प्रणालियों द्वारा पहले ही ले ली जाती हैं।]

मूर्ख यह भी तर्क देते हैं, “बाकी लोग इसलिए देते हैं क्योंकि उनके पास देने के लिए बहुत है। उन्हें वित्तीय सफलता उनके देने से नहीं मिली; वे देते हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से सफल हैं।” ये मूर्ख अपने स्वार्थी और कंजूस प्राणों की रक्षा के लिए खुद से ही झूठ बोलते हैं। वे अपनी लालची अज्ञानता का पोषण करने के लिए परमेश्वर के अचूक वचन को ठुकराते हैं। वे कभी सफल नहीं होंगे। वे नीचे अधोगति में जा रहे हैं।

इस्राएल ने सोचा कि पहले अपना घर बनाना आर्थिक रूप से बुद्धिमानीपूर्ण निर्णय था, लेकिन परमेश्वर ने उनके स्वार्थी परिश्रम को उड़ा दिया और उन थैलों में छेद कर दिएँ जहां उन्होंने अपनी कमाई रखी थी (हाग 1:1-11)। उसने उन्हें बड़ी सफलता देने की निश्चयता दी, यदि वे उसके उद्देश्य को पहला स्थान देंगे और अपने कैलेंडर को चिन्हित करेंगे (हग 2:13-19)। पाठक, क्या आपके थैले में छेद हैं? आप परमेश्वर का ऐसे उपहास नहीं कर सकते; वह आपको गरीबी की ओर ले जाएगा। क्या परमेश्वर देने को सचमुच आशीष देता है? हाँ , वह सचमुच आशीष देता है (नीतिवचन 3:9-10)

जो अपना धन देता है, उसको यहोवा कैसे बढ़ा सकता है? वह उसकी आय बढ़ा सकता है, उसके खर्चों में भारी कटौती कर सकता है, कर कानूनों में बदलाव करवा सकता है, उपहारों की व्यवस्था कर सकता है, दूसरों को आपके पक्ष में कर सकता है, कर्ज़ लेने की परिस्थितियों को टाल सकता है, संपत्ति का जीवन बढ़ा सकता है, आपके स्वास्थ्य और शक्ति को बनाए रख सकता है, नए अवसरों के द्वार खोल सकता है, आपके प्रयासों को उन्नत कर सकता है, सौदेबाजी करवा सकता है, बुद्धि दे सकता है, ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है, और भी बहुत कुछ। उसकी महिमा हो!

यह नियम कहां तक जाता है? परमेश्वर आपको चुनौती देता है कि आप उसे बढ़कर देने का प्रयास करें। उसने इस्राएल से कहा कि वह आकाश के झरोखें खोलेगा और ऐसी आशीष उण्डेलेगा जो उनके लिए अपरम्पार होगी, यदि वे केवल अपना दशमांश और भेंट उसके पास ले आते हैं (मलाकी 3:7-12)। परमेश्वर को महिमा दो! वह तुम्हें पूरा नाप दे सकता है, दबा दबाकर, हिला हिलाकर ऊपर से उण्डेल देगा (लूका 6:38)। प्रिय मसीही, वह आपको हिम्मत दिखाने के लिए कहता है। स्वर्ग का परमेश्वर तुम्हें चुनौती देता है कि तुम उसे ज़रूरत से बढ़कर देने का प्रयास करो। आमेन!

देने के सम्बन्ध में परमेश्वर की भरपूर आशीष की दो शर्तें हैं – आपको उदारता से देना होगा, और आपको राज़ीखुशी संतोष से देना होगा (नीतिवचन 11:25; 2 कुरिंथ 9:6-7)। यदि आप कंजूस हैं, तो परमेश्वर आपके लिए कंजूस होगा। यदि आप उदार मन के है और दिल खोलकर देते हैं, तो वह भी आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेगा (यशायाह 32:8)। यदि आप देने में संतोषी और उत्साहित नहीं हैं, तो यह सब व्यर्थ है – क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वालों से प्रेम करता है। देना आराधना का कार्य है, और इसलिए आपको इसे हर्ष और आनंद से करना अवश्य है (व्यवस्था 28:47)।

मसीहियों, क्योंकि तुम जीवित परमेश्वर की संतान हो, मैं तुम्हें अमेरिका का उदहारण देता हूँ। अमेरिका मानव-इतिहास में किसी भी व्यक्ति द्वारा ज्ञात आशीर्वादों का सबसे बड़ा उदहारण है। और यह निश्चित रूप से इसलिए नहीं है क्योंकि अमेरिकी बेहतर लोग हैं। यह उनपर परमेश्वर की शुद्ध दया है। आप देख सकते हैं कि किस प्रकार परमेश्वर ने उन्हें समृद्ध बनाया। लेकिन क्या यह देख सकते हैं कि क्यों? इसलिए क्योंकि अमरीकी पूरी दुनिया के लिए उदारता से मसीहाई कार्य करते आये हैं। तो फिर आप अब तक के सबसे उदार दाता कैसे नहीं बन सकते? आप अपने निर्माता और उद्धारकर्ता के दूसरों से बहुत अधिक कर्ज़दार हैं।

आर.जी. लेटूर्नेउ (1888-1969), एक क्रिश्चन व्यवसायी जो ज्यादा पढ़े-लिखें नहीं थें, अमेरिका के सबसे महान आविष्कारकों में से एक थें जिनके नाम अर्थमूविंग और अन्य भारी उपकरणों के 300 पेटेंट थें। उनके कारखानों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली भारी अर्थमूविंग मशीनों का 70% उत्पादन किया। सफलता पाने का उनका नियम क्या था? उन्होंने सभी आय का 90% वापस प्रभु को दे दिया। उनका पसंदीदा वचन कौन-सा था? मत्ती 6:33! देने के बारे में उनका दर्शन और अनुभव क्या था? “मैं अपने फावड़े से धन बिखेरता हूं, और परमेश्वर अपने फावड़े से उसे मेरी ओर वापिस बिखेरता है – परन्तु फ़र्क यह है कि परमेश्वर का फावड़ा बहुत बड़ा है।”

यदि रास्तें में आपकी मुलाकात किसी ऐसे निर्धन व्यक्ति से होती है जिसकी ज़रूरतें वास्तविक हैं और आप उसे देते हैं, तो स्वर्ग का परमेश्वर आपको प्रतिफल देगा (नीतिवचन 19:17; व्यवस्था 15:10-11; भजन 41:1-2)। परन्तु यदि आप अपनी आर्थिक स्थिति की रक्षा के लिये अपना धन और सम्पत्ति रोककर रखते है, तो स्वर्ग का परमेश्वर आपको बहुत शाप देगा (नीतिवचन 28:27)। यहाँ विषमता अपेक्षा से अधिक गंभीर है, परन्तु क्या आप इतने बुद्धिमान हैं कि आप इस पर विश्वास करेंगे और इसका पालन करेंगे?

आपने चर्च के उपदेशकों को देना, जो आपको परमेश्वर का वचन सिखाते हैं, केवल एक धार्मिक परंपरा या अच्छा सुझाव मात्र नहीं है; यह परमेश्वर की नियत व्यवस्था है (1 कुरिन्थ 9:1-14; गलातियों 6:6; 1 तीमु 5:17)। अपने पास्टर को पुरस्कृत करना और परमेश्वर को प्रसन्न करना आपका सबसे बड़ा आनंद होना चाहिए। चूँकि वह परमेश्वर का राजदूत है, उसके साथ आपका व्यवहार परमेश्वर के प्रति आपके प्रेम का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है। यदि वह परमेश्वर के वचन का सच्चा प्रचारक है, तो आप आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से जितना देते हैं, उससे कहीं अधिक वह आपको दे रहा है।

यदि आपके परिवार के सदस्य जरूरतमंद हैं, और आप उन्हें आर्थिक रूप से कोई सहायता नहीं देते हैं तो आपने मसीही धर्म से इनकार कर दिया है (1 तीमु 5:4,8)। यदि आप दादा-दादी हैं या बाल-बच्चों वाले माता-पिता हैं, तो आपको उन्हें विरासत में संपत्ति देनी चाहिए (नीतिवचन 13:22; 2 कुरिन्थियों 12:14)। क्या आप केवल अपने लिए बचाकर रख रहें हैं जैसा कि यीशु के दिनों में फरीसी किया करते थें (मरकुस 7:9-13)? आप निर्धनता में जा रहे हैं!

आपको सबसे पहले परमेश्वर को देना अवश्य है, क्योंकि यह सुलैमान के द्वारा प्रकाशित परमेश्वर का नियम है (नीतिवचन 3:9-10)। ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए जिससे आप इसके पालन में देरी करें या इसे भ्रष्ट करें। तथापि, आपको बाइबल में सिखाए गए अन्य वित्तीय कर्तव्यों का भी पालन करना अवश्य है। यदि आप परमेश्वर को देते हैं और वह आपके इस नेक-नियत फैसले का आदर करता हैं, लेकिन आप उसके द्वारा तय किए अन्य वित्तीय कर्तव्यों का उल्लंघन करते हैं, जिनमें से अधिकांश नियम बाइबल की इस पुस्तक में सिखाए गए हैं, तो आप कई तरह से पाप करते हैं, क्योंकि आप उसी के खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से पाप करते हैं जिसका आप सम्मान करने का दिखावा कर रहे हैं।

क्या आपने कभी कामना की है कि काश आप पतरस के साथ पानी पर चलते? यहाँ आपका अवसर है। पतरस को अपनी नाव के बाहर पाँव रखकर विश्वास के द्वारा पानी पर उतरना था, और आप विश्वास के द्वारा अपना पैसा बिखेर सकते हैं। इसका लाभ उठाएं! लहरों को मत देखो। इस नीतिवचन की प्रतिज्ञा और यहाँ अन्य जो जो वचन सम्मिलित किये गए हैं वे सब बिलकुल वैसे ही हैं जैसे प्रभु ने पतरस से कहा, “आ।”

क्या आप बाइबल पर विश्वास करते हैं? फिर वही करो जो बाइबल कहती है। जो तुम्हारे पास है उसका कुछ हिस्सा दे दो। ऐसा ही करें। परमेश्वर और मनुष्यों को अपना विश्वास दिखाएं। इस नीतिवचन को परख कर तो देखें। और फिर देखें कि आप तरक्की करते हैं या नहीं। परमेश्वर सच्चा, और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे। यह नीतिवचन सच है। सफलता का यह नियम स्वर्ग से है, और यह कभी असफल नहीं हुआ। यदि यह नीतिवचन वास्तव में सत्य नहीं है, तो बाइबल अन्य नीतिवचन भी सत्य नहीं हैं।

परमेश्वर की ओर से एक स्वर्ण पैराशूट के द्वारा अनेक लाभ आते रहते हैं। उदारता और हर्ष से देना न्याय के दिन के लिए आपकी आत्मा को एक अच्छी नींव प्रदान करता है (1 तीमु 6:17-19; मत्ती 10:42; 25:40; फिल 4:14-19; इब्र 6:10)। यह सत्य देने के प्रोत्साहन के लिए एक अद्भुत अतिरिक्त लाभ है जिसे अधिकांश क्रिश्चन लोग नहीं समझते हैं। देना सीखने के लिए आपको और क्या चाहिए, पाठक?

देना आपके हृदय में परमेश्वर के अनुग्रह को दर्शाता है और आपको उसके करीब लाता है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप देने में कितनी उन्नति करते हैं, यीशु मसीह आज भी बेजोड़ दाता है। उसने स्वर्ग के धन को छोड़ दिया ताकि आपको अनन्त दरिद्रता से छुड़ाने के लिए और अनन्त धन की निश्चयता देने के लिए अपने जीवन का सबसे बड़ा बलिदान दे सके (यूहन्ना 3:16; रोमियों 6:23; 2 कुरिन्थियों 8:9; 9:15)। अपने पापों से छुटकारा पाने और उस एकमात्र परमेश्वर के सामने, जो मंदिरों और मूर्तियों में नहीं रहता, धर्मी ठहराए जाने के लिए कि आप अनंत जीवन पाए, आज ही प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखें।

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