नीतिवचन 11:12
जो निर्बुद्धि है वह अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता है, परन्तु समझदार पुरुष चुपचाप रहता है
आप दूसरों के बारे में किस तरह की बातें करते हैं? आपका तरीका आपके चरित्र और मन को प्रकट करता है। अपने मुँह से पाप करना आसान है, और इस पाप को करने के कई तरीके हैं। क्या आप अपने आस-पास के लोगों को तुच्छ समझना बंद कर सकते हैं और उनके बारे में आलोचनात्मक या नकारात्मक टिप्पणियां करने के बजाए चुप रह सकते हैं? एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने पड़ोसी के प्रति दया का भाव रखेगा और उसके लिए प्रार्थना करने में तत्पर रहेगा, बजाय उसके प्रति दुर्भावना या नफरती रवैया रखने के।
सुलैमान ने यहाँ अपने पड़ोसी की पीठ पीछे बुराई करने या उसका अपमान करने के खिलाफ सावधानी का इशारा दिया है। बुद्धिमान लोग घमण्ड में आकर दूसरों को अपने दिलों में या शब्दों से तुच्छ नहीं समझते। वे ऐसे शब्द बोलेंगे ही नहीं जो निर्बुद्धि या दुष्ट लोग कहने में अक्सर जल्दबाजी करते हैं। वे जानते हैं कि सब में कमज़ोरियाँ होती हैं, इसलिए एक दूसरे को लेकर अवमानना का मार्गउचित मार्ग नहीं है।
इस नीतिवचन का निकट संदर्भ अगला नीतिवचन है, जिसमें लुतराई करने की निंदा की गई है, जो कि एक और मौखिक पाप है। “जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है” (नीतिवचन 11:13)। लुतराई या पीठ पीछे किसी की बुराई करना किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में कुछ ऐसा कहना होता है, जो भले ही सच हो, लेकिन कहना आवश्यक नहीं होता है और न ही यह उनकी प्रतिष्ठा के लिए सही है। आज यह एक बहुत ही आम पाप है।
बोलने वाला व्यक्ति बुद्धिमान है या निर्बुद्धि इसका पक्का सबूत वह क्या बोलता है इससे प्रकट होता है। मनुष्य के मुँह से निकले शब्द उसके अंदरूनी मन को प्रकट करते हैं (लूका 6:45)। केवल शब्दों की मात्रा ही बुद्धिमता या निर्बुद्धिता को साबित कर सकती है। “बहुत सी बातों का बोलनेवाला मूर्ख ठहरता है” (सभोपदेशक 5:3)। बुद्धिमता का एक सरल नियम है : कम बोलना। कम बोलें, भले ही इससे आपको तकलीफ़ हो!
स्वर्ग और पृथ्वी को बनानेवाला, परमेश्वर यहोवा उन लोगों से बैर रखता है जो दूसरों के बारे में बुरी बातें बातें बोलते हैं, इसलिए उसने अपने वचन में चुगली करने, आलोचना करने, घृणा, द्वेष, दुर्भावना, गाली-गलौज, पीठ पीछे बुराई, निंदा, अहंकार, और कानाफूसी जैसे अन्य संबंधित पापों की भर्त्सना की। बेशक, आप शायद ही कभी इन पापों का नाम सार्वजनिक रूप से सुनते होंगे, इन पापों को परिभाषित कर उनकी और भर्त्सना करना तो दूर की बात है। यदि आप दूसरे से अलग हैं, तो आपको समझना चाहिए कि इस भिन्नता को परमेश्वर ने ही बनाया है (1 कुरिन्थ 4:7; 15:10)।
परमेश्वर दूसरे के बारे में बुरी बातें कहने को अपनी छठी आज्ञा, कि “तू हत्या न करना”, का उल्लंघन मानता है। यीशु ने कहा, ” “तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि ‘हत्या न करना’, और ‘जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा।’ 22परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा, और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे ‘अरे मूर्ख’ वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा ” (मत्ती 5:21-22)।
अपने पड़ोसी से प्रेम रखना दूसरी सबसे बड़ी आज्ञा है (मत्ती 22:39), जिसमें आपका पड़ोसी आपके बगल में रहने वालों से कहीं बढ़कर है, जैसा कि अच्छे सामरी ने साबित किया (लूका 10:29-37)। आपका पड़ोसी वह भी है जो किसी और के यहाँ नौकरी करता है (नीतिवचन 30:10)। और अपने शत्रुओं से प्रेम रखना इसी से संबंधित आज्ञा है (मत्ती 5:43-48)। इसलिए आपके पास दूसरों से नफरत करने या उनकी बुराई करने की कोई गुंजाइश नहीं है। सभी लोग स्वभाव ही से नफरती पैदा होते हैं और अपने जन्मजात द्वेष और ईर्ष्या के कारण एक दूसरे से नफरत करते हैं (तीतुस 3:3), लेकिन अब आपको मसीह के अनुग्रह से खुद में परिवर्तन लाना है (तीतुस 3:2; इफिसियों 4:31-32)।
ऐसा कहा जाता है, कि “अगर आप दूसरों के बारें में कोई अच्छी बात नहीं कह सकते हैं, तो चुप ही रहें।” बिल्कुल सही! यह बाइबल की बुद्धि है! यह नीतिवचन इसी बात को सिखाता है! और माता-पिता को चाहिए कि वे इस नियम को अपने बच्चों पर लागू करें कि वे अपने भाई-बहनों, सहपाठियों और सम्पर्क में आने वाले किसी भी अन्य व्यक्ति के विषय में बुरी बातें न करें। दयालु और कुलीन मनुष्य दूसरों की आलोचना नहीं करते।
इस घिनौनी आदत से छुटकारा पाने का तर्क यह है कि आप अपने दिल में दूसरों को तुच्छ समझने से बचें, “राजा को मन में भी शाप न देना, न धनवान को अपने शयन की कोठरी में शाप देना ” (सभोपदेशक 10:20)। अगर आपको किसी दूसरे की गलती सुधारने की ज़रूरत भी है, तो आपको ऐसा विनम्रता और भय के साथ करना चाहिए (गलातियों 6:1; 2 तीमुथियुस 2:25; याकूब 3:13; 1 पतरस 3:15)। न तो अधिकार और न ही सच्चाई ऐसी क्रूरता को उचित ठहराती है।
जब कोई आपको शाप देता है, तो सुलैमान की सलाह याद रखें, “नि:सन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो। जितनी बातें कही जाएँ सब पर कान न लगाना, ऐसा न हो कि तू सुने कि तेरा दास तुझी को शाप देता है” (सभोपदेशक 7:20-21)। उनके शाप के बदले आशीष दें, गाली के बदले गाली न दें (1 पतरस 3:8-9)। साबित करें कि आप एक राजा की संतान है!
परमेश्वर ने आपके जीवन की बहुत-सी बुराईयों को अनदेखा किया है। उसने आप पर दया की है जैसे एक भला पिता अपने बच्चों पर दया करता है (भजन 103:13-14)। क्या आप दूसरों पर दया कर सकते हैं, उनकी गलतियों को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, और याद रख सकते हैं कि परमेश्वर ने आपके 10,000 तोड़े के कर्ज को माफ़ कर दिया है जबकि वे आपके सिर्फ़ 1 रूपये के कर्जदार हैं? क्या आप खुद को जैसा समझना चाहिए उससे बढ़कर अपने आप को न समझना सीख सकते हैं (रोमियों 12:3)?
यीशु ने फरीसी और चुंगी लेने वाले का दृष्टांत देकर उन लोगों को फटकार लगाई जो खुद को धर्मी समझते थे और दूसरों को तुच्छ समझते थे (लूका 18:9-14)। यह दुष्ट अहंकार और अभिमानपूर्ण दंभ है जो एक व्यक्ति को दूसरों को तुच्छ समझने के लिए प्रेरित करता है (रोमियों 12:16)। यह शर्म की बात है कि जो लोग दूसरों को उनकी आँख में तिनका देखकर तुच्छ समझना चाहते हैं, वे कभी भी अपने स्वयं की आँख में का लट्ठा देखने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान नहीं होते (मत्ती 7:1-5)।
ऐसे लोग हैं जिनका तिरस्कार किया जाना चाहिए, लेकिन वे आपके व्यक्तिगत शत्रु नहीं हैं – वे परमेश्वर के शत्रु हैं (भजन 139:21-22)। दाऊद न के धार्मिक चरित्र-लक्षणों की जो सूची दी है उस में अपनी नज़र में एक नीच व्यक्ति को तुच्छ समझना शामिल है (भजन 15:4)। फिर भी यह दाऊद ही था जिसने अपने सबसे बड़े व्यक्तिगत शत्रु शाऊल की सराहना आँसूओं के साथ और प्रशंसा के अनुग्रहपूर्ण शब्दों के साथ की (2 शमूएल 1:17-27)।
बाइबल में प्रकट परमेश्वर कितना दयालु है, जब वह पापी लोगों का नाम लेता है? गिदोन वीरता और विश्वास का एक शक्तिशाली व्यक्ति था। शिमशोन गवाहों के बादल में वर्णित एक नायक था। और लूत एक न्यायी और धर्मी व्यक्ति था, जो अधर्मियों के अशुद्ध चालचलन से बहुत दु:खी था (इब्रानियों 11:32; 2 पतरस 2:7-9)। यहाँ दया और करुणा है, यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जिनके व्यक्तिगत जीवन के इतिहास कलंकित हैं।
जब यीशु पर मुकद्दमा चला और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और गाली दी गई, तो उन्होंने न तो गाली दी और न ही बदले में धमकी दी, जबकि वह आसानी से और उचित रूप से उनके सांसारिक और अनंत दंड की भविष्यवाणी कर सकते थे। आपको उनके आदर्शो पर चलना चाहिए ताकि आप एक महान मसीही बन सकें और अपनी जीभ पर नियंत्रण रख सकें, तब भी जब आप दूसरों के हाथों गलत तरीके से पीड़ित हों (1 पतरस 2:18-24)।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।