नीतिवचन 11:11

सीधे लोगों के आशीर्वाद से नगर की बढ़ती होती है, परन्तु दुष्टों के मुँह की बात से वह ढाया जाता है।

आप अपने नगर या देश के लिए वहां के राजनेताओं से भी अधिक लाभदायक हो सकते हैं। आपकी प्रार्थनाएँ किसी भी राजनीतिक बहस या वादों से अधिक असरदार हैं। सच्चे परमेश्वर से की गई धार्मिक प्रार्थना परिस्थितियों को बदल देती हैं। आप किसी भी नगर या राष्ट्र को महान बना सकते हैं। लेकिन सांसारिक माध्यम, शिक्षा प्रणाली, या मनोरंजन उद्योग उसे नष्ट कर सकते हैं। नगर या राष्ट्र अपने धर्मी नागरिकों द्वारा संरक्षित और समृद्ध होते हैं, परंतु दुष्ट नागरिकों के कारण दुर्बल और दरिद्र हो जाते हैं।

राजनीतिक समृद्धि धर्मी मनुष्यों और उनकी प्रार्थनाओं पर निर्भर करती हैं। किसी नगर या राष्ट्र की दीर्घकालीन सफलता के लिए यह आवश्यक है कि धर्मी मनुष्य परमेश्वर से इस आशीष को मांगें। इसके विपरीत, दुष्टों के अभिमानी, मूर्ख और अशुद्ध मुँह देश को बर्बाद कर देंगे। यह राजनीतिक सिद्धान्त निश्चित और अटल है। इसे अपने स्वयं के सुख और समझ के लिए मान लें, या अपने स्वयं की अज्ञानता और जोखिम पर इसे अस्वीकार कर दें। अधर्मी माध्यमों को अपनी समझ भ्रष्ट न करने दें।

एडम स्मिथ ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि क्यों कुछ राष्ट्र धनी होते हैं और बाकी गरीब। लेकिन 1776 में प्रकाशित हुई उनकी पुस्तक “वेल्थ ऑफ नेशन्स” ने इस नीतिवचन पर विचार नहीं किया। उसने श्रम विभाजन, मजदूरी दर, ज़मीन का किराया, पूंजी निर्माण, आयात के कानून, सरकार के रूप, कृषि की भूमिका, और इस तरह के मामूली और अप्रधान कारकों के विषय में लिखने पर अधिक ध्यान दिया। सभी शिक्षित मानवतावादियों की तरह, वह भी पेड़ों के कारण जंगल नहीं देख पाए।

यह प्रभु यहोवा निर्धारित करते हैं कि कौन से नगर या राष्ट्र समृद्ध होंगे और कौन से नहीं (भजन संहिता 75:6-7)। वह उन लोगों पर अनुग्रह करते है जो उनका भय मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं। “क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है; और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिए चुन लिया हो” (भजन संहिता 33:12)। “दुष्ट अधोलोक में लौट जाएंगे, तथा वे सब जातियाँ भी जो परमेश्वर को भूल जाती हैं” (भजन संहिता 9:17)। और यहाँ जिस यहोवा परमेश्वर का उल्लेख किया जा रहा है केवल वही एकमात्र जीवित और सच्चा परमेश्वर है – बाइबल का यहोवा। वरन परमेश्वर ही सच्चा और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे। एडम स्मिथ इस समीकरण से पूरी तरह चूक गए।

“जाति की बढ़ती धर्म ही से होती है, परंतु पाप से देश के लोगों का अपमान होता है”। “ठट्ठा करने वाले लोग नगर को फूँक देते हैं परंतु बुद्धिमान लोग क्रोध को ठंडा करते हैं”। “जब धर्मी लोग शिरोमणि होते हैं, तब प्रजा आनंदित होती है, परंतु जब दुष्ट प्रभुता करता हूँ तब प्रजा हाय-हाय करती है”। “देश में पाप होने के कारण उसके हाकिम बदलते जाते हैं; परंतु समझदार और ज्ञानी मनुष्य के द्वारा सुप्रबन्ध बहुत दिन के लिये बना रहेगा” (नीतिवचन 14:34; 29:8,2; 28:2)।

लगभग 4000 साल पहले, यहोवा ने प्रत्यक्ष भोगविकृति के कारण सदोम और अन्य नगरों के पूर्णतया विनाश के विषय में अब्राहम से चर्चा की थी (उत्पत्ति 18:20-33)। अब्राहम ने तर्क दिया कि धर्मी को दुष्टों के साथ नष्ट नहीं किया जाना चाहिए और यह कि एक पवित्र परमेश्वर नगर में धर्मी लोगों के प्रति दया दर्शाएगा। यहोवा केवल दस धर्मियों के लिए नगर को बख्शने के लिए तैयार हो गए। वहाँ दस धर्मी तक नहीं मिले, इस कारण पूरा नगर ही आग से भस्म कर दिया गया।

“सीधे लोगों का आशीर्वाद” क्या है जिससे नगर की बढ़ती होती है? नीतिवचन में तुलना करने के लिए अक्सर दो वाक्यखण्ड होते हैं। दूसरा वाक्यखण्ड इंगित करता है कि यह दुष्टजनों के मुंह की बातें होती है जो नगरों का विनाश कर देती है। उनकी मूर्खतापूर्ण बातें नगर में बुद्धि को घटा देती हैं, और उनकी घमंड भरी बातें परमेश्वर से दंड को ले आती हैं। अत: निष्कर्ष यह है कि धर्मी जन अपनी भली बातों और उत्कट प्रार्थनाओं के द्वारा नगर को ऊँचा उठाते हैं। ज्ञानपूर्ण सीख और पवित्र सलाह से, वे नगर की शोभा बढ़ाते हैं। धर्मी हृदयों की उत्कट प्रार्थनाओं के द्वारा परमेश्वर की आशीषें आती हैं जिससे नगर की बढ़ती होती है।

इतिहास इस नीतिवचन के सच्चाई की पुष्टि करता है। बाबुल एक पूर्वकालीन राज्य था, परंतु परमेश्वर ने उसके रहवासियों की अहंकारपूर्ण बातों के कारण उनके निर्माण कार्य को विफल कर दिया (उत्पत्ति 10:10;11:1-9)। फिरौन के पितोम और रामसेस नामक भंडारवाले नगर उसके अहंकारपूर्ण विद्रोह के कारण भीतर और बाहर दोनों से तबाह हो गए (निर्गमन 1:11; 5:2: 10:7)। बेबीलोन ने सोचा था कि वह सदैव के लिए स्वामिनी बनकर सिंहासन पर बैठेगी, लेकिन फारसियों ने उसे एक रात में ही उठा लिया, और वह अंततः अपनी वर्तमान स्थिति में सिमट कर मिट्टी का ढेर बन गई (यशायाह 47:115)। यरुशलेम के शासकों ने यीशु को क्रूस पर चढ़ाया, और उसने (यीशु) उनके नगर को मिट्टी में मिला दिया (लूका 19:42-44)।

इस नीतिवचन के सच्चाई की पुष्टि करता है। सिकंदर महान ने 330 ईसा पूर्व में फारसी नगर पर्सेपुलिस के विशाल नगर को लूटा और फिर नष्ट कर दिया। एथेंस और अलेक्ज़ेंड्रिया के आज के संस्करणों की तुलना उन नगरों से करें जो वे कभी थे। यूनान को उखाड़ फेंक दिया गया था! आज नीनवे और सोर के विशाल नगरों के क्या कोई अवशेष बचे हैं? रोमी साम्राज्य कहाँ है? इटली की तो किसी से तुलना ही नहीं। मायन और एज़्टेक के नगरों का क्या हुआ? इन सभी नगरों में क्या समानता थी? वे दुष्टता से अपनी योग्यताओं पर और अपने मूर्तिरूपी देवताओं पर घमंड करते थे।

आधुनिक इतिहास भी इस नीतिवचन के सच्चाई की पुष्टि करता है। एक छोटे से द्वीप पर बसे एक मामूली देश के बारे में ऐसा कैसे कहा जा सकता है कि, “ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी अस्त नहीं होता”? क्योंकि इंग्लैंड में किसी भी अन्य जगह की तुलना में कहीं अधिक परमेश्वर का भय मानने वाले लोग थे, और उसकी सरकार ने बाइबल के अब तक के सबसे महान अनुवाद को अधिकृत किया था। KJV बाइबल के आरंभ में लिखे लोकार्पण या प्रस्तावना को पढ़ें। किसी देश की प्रतिबद्धता को समझने के लिए गाय फ़ौक्स दिवस के बारे में जानें, और आपको आश्चर्य नहीं होगा कि स्पेनी आर्माडा क्यों इतनी बुरी तरह विफल हुई। निस्संदेह, उस द्वीप पर सच्चे धर्म के भारी पतन के कारण, वह अब अपने अतीत की तुलना में कुछ भी नहीं।

अमेरिका के बारे में क्या? यूरोप में उत्पीड़न से बचकर भागे हुए धर्मी लोगों द्वारा स्थापित, इस देश ने दुनिया को अब तक की सबसे बड़ी धार्मिक स्वतंत्रता दी। कलीसियाएँ फली-फूली और कई गुना बढ़ीं; विभिन्न मंचों ने हर विषय पर बाइबल के सत्य की घोषणा की; सुसमाचार प्रचारवादी प्रयास पूरी दुनिया में फैल गए। सरकार ने यहोवा परमेश्वर और यीशु मसीह के धर्म का बचाव और प्रचार किया। शत्रुतापूर्ण जंगली लोगों द्वारा बसाये हुए जंगल से, यह जल्द हर तरह से पूरी दुनिया में श्रेष्ठ हो गया। पिछली शताब्दी में यह देश जैसे ही बाइबल का त्याग कर मानवतावादी बन गया, तब से यह देश अधोगति के अँधेरे में उतरने लगा है।

इससे हमें सीख क्या मिलती है? धर्मियों की राजनीतिक प्रार्थनाएँ किसी भी नगर या राष्ट्र को आशीषित कर सकती है; दुष्टों की घमंड भरी बातें नगर या राष्ट्र को नष्ट कर डालेगी (भजन संहिता 127:1)। यिर्मयाह ने बाबुल में बंदी यहूदियों को समझाया कि यदि वे बाबुल कि शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, तो वे अपने परिवारों के संग उस दुष्ट नगर में शांति का आनंद लेने पाएंगे (यिर्मयाह 29:4-7)। पौलुस ने लोगों को रोमी साम्राज्य के शासकों के लिए प्रार्थना करना सिखाते हुए इस बुद्धि की पुष्टि की (1 तीमुथियुस 2:1-2)।

यशायाह भविष्यवक्ता ने एक बार परमेश्वर की महिमा देखी, और उसने तुरंत अपने और अपने देशवासियों के होठों की अशुद्ध बोली का अंगीकार किया (यशायाह 6:1-8)। वह जानता था कि वह अपने मूर्खतापूर्ण शब्दों के कारण अधर्मी था। यहोवा ने यशायाह पर करुणा दिखायी और उसे उसके पापों से शुद्ध कर दिया। परंतु क्या आपने अपनी मूर्खता और बग़ावतपूर्ण शब्दों का अंगीकार किया है? या क्या आप मूर्खतापूर्ण यह सोचते हो कि परमेश्वर आपके मुंह की बातों को नज़रअंदाज़ कर देंगे (भजन संहिता 12:1-5)? फिर से सोच लो! केवल धर्मी जन की प्रभावी उत्कट प्रार्थना से ही परिस्थितियां और चीज़ें बदल सकती हैं (याकूब 5:16)। अपने पापों का अंगीकार करें।

मसीही पाठक, क्या आपने अपने दोनो नगरों के लिए प्रार्थना की है? पहले, यह नीतिवचन आपको उस नगर के लिए प्रार्थना करना सिखाता है जिसमें आप रहते हो, जैसे कि यिर्मयाह के समय में बेबीलोन के लिए। यह आपके नगर के संरक्षण और समृद्धि के लिए स्वर्गीय ज्ञान है। महान और भय योग्य परमेश्वर आपकी आशीष के कारण आपके नगर को बख्श सकता है। दूसरा, आपको अपने स्वर्गीय नगर, नए यरूशलेम के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, जिसके नागरिक सभी सच्चे विश्वासी हैं (भजन संहिता 122:6; इब्रानियों 12:22-24)।

चाहे भारत देश हो या अमेरिका, किसी भी राष्ट्र के लिए एकमात्र आशा यही है कि उसमे रहने वाले धर्मी अपने राष्ट्र के लिए प्रार्थना करे जैसा कि परमेश्वर ने सुलैमान से कहा था और परमेश्वर पर भरोसा रखें ताकि पौलुस के निर्देश की आशीष उन्हें मिले (1 तीमुथिसुस 2:1-2)। परमेश्वर ने सुलैमान से कहा, “यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूँगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूँगा” (2 इतिहास 7:14)। प्रार्थना परिस्थितियों और चीजों को बदलती है।

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