नीतिवचन 10:8
जो अंत:करण का बुद्धिमान है, वह आज्ञा मानेगा, परंतु बकवादी मूर्ख मारा जाएगा।
बुद्धिमान शिक्षा पाना पसंद करते हैं। वे शिक्षा की सराहना करते और उसका मूल्य समझते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें बताया जाए कि उन्हें क्या करना चाहिए। वे सुनेंगे और जो करने के लिए उनसे कहा गया है उसे वे करेंगे। वे नम्र और आज्ञाकारी होते हैं।
लेकिन मूर्ख नहीं चाहते कि उन पर शासन किया जाए। बल्कि वे बोलना पसंद करते हैं। वे अपनी ही राय को सुनना पसंद करते हैं। वे बिना रूके अपने मुंह से मूर्खता को उगलते हैं। वे शिकायत करते हैं और आपत्ति जताते हैं। वे बड़बड़ाते हैं।
परंतु अच्छी तरह विचार करें! इस नीतिवचन में मात्र चरित्र के वर्णन से बढ़कर और भी अधिक है – यह कि बुद्धिमान लोग शिक्षा ग्रहण करेंगे; बल्कि मूर्ख लोग खुद ही बोलते जाएंगे। यहां पर सफलता और विफलता का एक नियम है। मूर्ख लोग उनके चरित्र-दोष के कारण मूर्ख होंगे और गिर जाएंगे, और बुद्धिमान शिक्षा को सुनकर उन्नति करने की उनकी इच्छा के कारण उनसे आगे बढ़ेंगे।
अच्छे लोग किसी के प्रति आभारी रहते हैं कि उन्हें बुद्धि और सत्य सिखाया गया था। लूका ने बिरीया के विश्वासियों का वर्णन कुलीन मनुष्यों के रूप में किया क्योंकि उन्होंने पौलुस की बातों को सुनकर ग्रहण किया (प्रेरितों के काम 17:11)। नहेम्याह की अधीनता में इस्राएल उन्हें सिखाया गया परमेश्वर का वचन सुनने के लिए उत्सुक और आभारी थे, भले ही उसके द्वारा एक आज्ञा प्रगट हुई जिसका हज़ार वर्षों से पालन नहीं किया गया था (नहेम्याह 8:1-18)। दोनों आत्माओं पर विचार करें।
परंतु कई मूर्ख उनकी अपनी कल्पनाओं, मतों और अनुभवों के विषय में बड़बड़ाना और बकना पसंद करेंगे। बड़बड़ाने वाला मूर्ख वह है जो बहुत अधिक बोलता है, जिसमें कोई मूल्य या लाभ नहीं होता। वे कई शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, शायद वक्तृत्वपूर्ण या परिष्कृत, परंतु उनका कोई वास्तविक या स्थायी मूल्य नहीं होता। ऐसे लोगों से दूर हो जाएं! वे गिरने वाले हैं, और वे अपने पास वालों को भी अपने साथ अधोगति में ले जाएंगे। वे कुछ नहीं जानते, परंतु उन्हें अपनी आवाज़ और शब्दों की ध्वनि पसंद है।
अभी इसी समय अपनी बुद्धि और अपने भविष्य का मूल्यांकन करें। क्या आप सिखाया जाना पसंद करते हैं, या क्या आप सिखाना चाहेंगे? आप सुनना पसंद करते हैं, या बोलना चाहेंगे? क्या आप सोचते हैं कि आप उसे अपने तरीके से करके सफल होंगे? क्या इन सवालों में आप अपने आपको धोखा देते हैं, क्योंकि आपकी समृद्धी और सफलता आपके प्रामाणिक मूल्यांकन और सबक को ग्रहण करने पर निर्भर है।
क्या दूसरों ने आपके बोलने के द्वारा उन्नति कीं, या वे बेहतर हुए, या आप अपने शोर से केवल हवा को भरते हैं? क्या आपका वार्तालाप जीवनों को बदलता है, या वह मात्र गर्म हवा का झोंका है? क्या दूसरे आपकी राय पूछते हैं, या दूसरों के न पूछने पर भी आप अपनी राय देते हैं? क्या आप बुद्धिमान हैं, या बड़बड़ाने वाले मूढ? लोग आपको जानते हैं। क्या आप स्वयं को जानते हैं? बोलना बंद करें। सुनना शुरू करें। सफलता आ रही है।
बड़बड़ाने वाला मूर्ख अच्छा टायपिस्ट हो सकता है, इसलिए आपको उनसे लम्बी लम्बी और बेकार एमैल्स आती हैं, न कि उनका फोन। दोनों ही तरीकों से यह मूर्ख की ही बड़बड़ है – कई शब्द जो कुछ नहीं बोलते। स्रोत एक ही है – अपने आपसे प्रेम करने वाला हृदय, सीखने की नम्रतापूर्वक लालसा करने वाले हृदय के बजाए। परमेश्वर आपको अपने आपसे प्रेम करने वाला मनुष्य होने, या सुनने से बचाए।
माता-पिता, अपने बच्चों को उनका सही स्थान सिखाकर उन में मौज़ूद इस मूर्खतापूर्ण गुण को सुधारों। मूर्ख माता अपने बच्चों के शब्दों और राय से अत्यंत प्रेम करती है, और फिर असमंजस आती है कि उसका परिवार बड़बड़ाने वाला मूर्ख परिवार क्यों है। एक पुरानी कहावत आज भी बुद्धिमानीपूर्ण मानी जाती है – बच्चे दिखाई देने चाहिए, सुनाई नहीं देने चाहिए। उनकी राय व्यर्थ होती है; दूसरों की उपस्थिति में उनके शब्द थोड़े होने चाहिए। मनुष्य का स्वभाव चाहे जो हो, ऐसे बच्चे बड़े होने पर भी बहुत बोलेंगे।
पाठक, क्या आप बोलने में जल्दबाजी करते हैं? या आप सुनने में तत्पर हैं? क्या आप दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि वे आप पर विश्वास करें और आपकी आज्ञा मानें? क्या आप उनकी सुनने और उनका पालन करने में तत्पर हैं? यहां पर आपके चरित्र और आत्मा की महत्वपूर्ण कसौटी है। इस नीतिवचन के अर्थ के अनुसार क्या आप बुद्धिमान हैं? यदि आपको बोलना पसंद है, तो आप मुश्किल में हैं। यदि आप अपनी राय को मूल्य देते हैं, तो आप मुश्किल में हैं।
बेशक, प्रत्येक व्यक्ति सोचता है कि उसके अपने मत दूसरों के मतों से बेहतर हैं। परंतु बुद्धि जानती है कि मनुष्य की यह भ्रांति नरक से है, शैतान द्वारा प्रेरित है, और छलपूर्ण तथा अत्यंत दुष्ट मानव हृदय से फूटती है (यिर्मयाह 17:9)। पृथ्वी पर सबसे मूर्ख मनुष्य, जिसके ठीक होने की कोई आशा नहीं है, वह है जो अपने ही विचारों पर घमंड करता है (नीतिवचन 26:12; 29:20)।
बुद्धि आपके अपने ही विचारों को तुच्छ जानती है (नीतिवचन 3051-3; 1 कुरि. 3:18-20)। बुद्धि कम शब्दों में बोलती है (नीतिवचन 17:27-28; सभोपदेशक 5:2)। बुद्धि धीरे बोलती है (नीतिवचन 29:20; याकूब 1:19)। बुद्धि परमेश्वर के शिक्षकों – माता-पिता और पास्टरों द्वारा सिखाई जानी चाहती है (नीतिवचन 1:8; 4:1-4; मलाकी 257)। बुद्धि तभी बोलती है जब उसके पास मूल्यवान, सही और कहने के लिए कुछ विशिष्ट बातें हों। अन्यथा चुप रहना सुनहरी बात है।
बड़बड़ाने वाले मूर्ख को सिखाना असंभव है। आपके वाक्य या अनुच्छेद के पूरा होने से पहले ही, वे आपको स्वयं के बीस या तीस अनुच्छेद देना चाहते हैं। जब आप बोलते ही हैं, तो वे झुंझलाने लगते हैं, अपने ही विचारों में ग्रस्त होते हैं, और फिर से बोलने में सक्षम होने के लिए खीझ़ते रहते हैं। ये दुर्भागी दुष्ट लोग यह नहीं कह सकते कि उन्हें खेद है या वे गलत हैं, क्योंकि वे अपने को अचूक समझते हैं। यह कभी उनकी समझ में नहीं आता कि दूसरों को उनकी राय नहीं चाहिए, क्योंकि वे अपने को लोकप्रिय भी समझते हैं।
बड़बड़ाने वाले मूर्ख ऊंची आवाज़ में चीखने वाले सायरन की तरह साफ दिखाई देते हैं। अगर आप को बड़बड सुनाई देती है, या किसी भी विषय पर तुरंत राय सुनने में आती है, तो आपने उस पुरुष का पता लगा लिया! आपने उस स्त्री का पता लगा लिया! कुछ लोगों के पास हर एक का उत्तर होता है; कुछ लोग दूसरों से आगे बोलते हैं; कुछ लोग खामोशी में कभी विश्वास नहीं करते। वे बड़बड़ाने वाले मूर्ख हैं, और यह बुद्धिमान लोगों का पवित्र सुअवसर है कि वे उन्हें पहचानें और उनसे बचें (3 यूहन्ना 1:9-10)।
बड़बड़ाने वाली मूर्ख स्त्री से ब्याह करने वाला व्यक्ति अपनी पत्नी के प्रश्नों, सुझावों, सुधारों, याद दिलानेवाली बातों, कहानियों और मुंह से निकलने वाली अन्य बातों के अंतहीन शोरगुल से बचने के लिए घर की छत की ओर या जंगल में भाग जाता है (नीतिवचन 19:13; 27:15-16)। जो पुरुष महिलाओं के बारे में सबसे अधिक जानता था, उसने पुरुषों को बहुत बोलने वाली स्त्रियों से बचने के विषय चेतावनी दी (नीतिवचन 11:16; 30521-23; 31:26)। मसीही स्त्रियों, यदि आपके पास कुछ बुद्धि है, तो दीन और शांत आत्मा की लालसा करें (1 पतरस 3:3-4)। आज्ञा को प्राप्त करें!
क्या आप बुद्धिमानी के इस व्यर्थ बकवादी शत्रु के बारे में अधिक पता लगा सकते हैं? वे इन शब्दों से प्रेम करते हैं, “लेकिन”, “किन्तु”, “परन्तु”, “फिर भी”। इन शब्दों को सुनें। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या कहते हैं, वे “किन्तु-परन्तु” कहकर आपकी बात का खंडन करेंगे ही। उन्हें बातचीत के दौरान अपने दो टूक शब्द रखना ही है। पांच मिनट की व्यर्थ बकबक के बाद, आप महसूस करते हैं कि वे हमेशा दिवालिया थे, बिना किसी बुद्धि के, और आप भविष्य में उनसे बचकर रहेंगे।
आपने जो कहा है, उस पर यदि कोई चिंतन नहीं है, बल्कि आपने जो कहा है उसे बिना माने या उसे बिना ग्रहण किए, कोई अपनी स्वयं की ही तत्काल मौखिक प्रतिक्रिया देता है, तो आपको एक मूर्ख मिल गया है। सुनिश्चित करें कि आप वैसे व्यक्ति नहीं हैं, और न ही ऐसे व्यक्ति के साथ अपना समय बर्बाद करें।
अब उस बकवादी मूर्ख को भूल जाओ। वह परमप्रधान के भारी प्रहारों और सभी अच्छे लोगों की अस्वीकृति के कारण गिरने पर है। क्या आप अंत:करण में बुद्धिमान हैं? प्रिय पाठक, यह प्रश्न है। क्या आप अंत:करण में बुद्धिमान हैं? क्या आप इस नीतिवचन के पहले भाग के विवरण में ठीक-ठीक बैठतें हैं?
बुद्धिमान अंत:करण स्पष्ट दिखाई देते हैं। वे परमेश्वर की और जिन्हें उसने अधिकार के पदों पर रखा है, उनकी आज्ञाओं को ग्रहण करना पसंद करते हैं। क्या आप अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हैं और उनका आदर करते हैं? क्या आप उनकी आज्ञाओं को ग्रहण करते हैं और उनका पालन करते हैं? क्या आप प्रचार सुनना पसंद करते हैं, ताकि आप कुछ और सीख सकें जो आपको परमेश्वर और मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए करना चाहिए? क्या आप अंत:करण के बुद्धिमान हैं?
जिस प्रकार मूर्ख का विनाश उसकी शिक्षा को अस्वीकार करने का परिणाम है, वैसे ही आपका विनम्रता के साथ सुनना और निर्देशों का पालन करना परमेश्वर और मनुष्य की ओर से बढ़ौतरी ले आएगा। क्या आप यहां परमेश्वर और सुलैमान की शिक्षा को समझते हैं? नीतिवचन आपकी सफलता के लिए बुद्धि की पुस्तक है। यहां समृद्धि के लिए जीतने का सूत्र है : परमेश्वर के वचन और जो आप पर अधिकारी हैं, उन्हें सुनें और उनके श्रेष्ठ ज्ञान और सलाह का पालन करें। आपको जल्द ही प्रतिफल प्राप्त होगा।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।