नीतिवचन 10:30
धर्मी सदा अटल रहेगा, परन्तु दुष्ट पृथ्वी पर बसने न पाएँगे।
बाइबल बढ़ाचढ़ाकर बातें करनेवाली पुस्तक नहीं है। हालांकि इसमें कई बार प्रतिज्ञाओं और चेतावनियों को दोहराया गया है, फिर भी बाइबल अतिशयवादी, अतिरेक करनेवाली, या बार- बार एक ही सत्य से आपका सामना कराने की अपनी प्रणाली में निष्फल नहीं है। स्वर्ग का परमेश्वर अपने शब्दों को व्यर्थ में नहीं कहता। नीतिवचन की पुस्तक में बाइबल के सबसे महत्वपूर्ण सबकों में से एक सबक को कई बार दोहराया गया है – धर्मी आशीषित होगा और दुष्ट शापित होगा। मुद्दा यह है कि आप इस चेतावनी को किस प्रकार लेंगे।
आरंभ से अंत तक, बाइबल धर्मियों के आशीषित जीवन का वर्णन करती है। वे (धर्मी) ऐसे पुरुष और स्त्रियाँ होते हैं जो परमेश्वर का भय मानते हैं और उससे प्रेम करते हैं, अपने जीवन के हर फैसले में उसके वचन पर भरोसा रखते और उसे मानते हैं, और अपने आसपास की दुनिया की झूठी और छलपूर्ण जीवनशैली से घृणा करते हैं और उसको अपनाने से इनकार करते हैं। पुराने नियम के अब्राहम, इसहाक, याकूब, युसूफ, मूसा, रुत, दाऊद, एस्तेर और उनके जैसे अन्य कईयों, और नए नियम के जकर्याह, मरियम, शिमौन, हन्ना, लूका और गयुस पर विचार करें।
इसके बिल्कुल विपरीत, बाइबल दुष्टजनों के शापित जीवनों का भी वर्णन करती है। वे (दुष्ट) ऐसे पुरुष और स्त्रियाँ होते हैं जो मनुष्य से डरते हैं और धन से प्रेम करते हैं, संसार की युक्तियों पर विश्वास करते हैं और उनको मानते हैं, और परमेश्वर द्वारा उन्हें सृष्टि में प्रदान किए गए ज्ञान और परमेश्वर के वचन से घृणा करते हैं और उन्हें अस्वीकार करते हैं। पुराने नियम के कैन, निम्रोद, लूत, लूत की पत्नी, इस्माएल, एसाव, रूबेन, शिमशोन, शाऊल, ईज़ेबेल और अन्य पर विचार करें। नए नियम के हेरोदेस, पीलातुस, यहूदा इस्करियोती, सफीरा और देमास पर विचार करें।
यदि इस जगत और आनेवाले जगतमें आपके भविष्य की सफलता या तकलीफें दाव पर लगी हों, तो आपको कितनी बार चेतावनी दी जानी चाहिए और कितने ऊंचे स्वर से चेतावनी दी जानी चाहिए? परमेश्वर ने अपने लोगों को उनके पापों के विषय में चेतावनी देने के लिए आरंभ से ही और समय समय पर अपने भविष्यकत्ताओं को भेजा है (2 इतिहास 36:15-16; यिर्मयाह 7:25)। और उसने उन्हें उन चेतावनियों को ऊंचे स्वर में देने की आज्ञा दी है (यशायाह 40:9; 58:1)। तुम कभी भी परमेश्वर को दोष नहीं दे सकोगे, लेकिन उसकी कई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करने के लिए तुम स्वयं को दोष ज़रूर दोगे (नीतिवचन 5:7-14)।
एक दुष्ट जीवनशैली तुम्हारे जीवनकाल को घटा देगी, और यह तुम्हें अनंतकाल के लिए शापित ठहराएगी। एडोल्फ हिटलर, सिकन्दर महान, बेनिटो, डार्विन, जोसेफ, माओ, नीत्शे, सिगमंड, टेमुजिन, और अन्य अनगिनत लोग आज कहाँ है? “निश्चय ईश्वर तुझे सदा के लिये नष्ट कर देगा, वह तुझे पकड़कर तेरे डेरे से निकाल देगा; और जीवतों के लोक से तुझे उखाड़ डालेगा” (भजन संहिता 52:5)। और न्याय के महान दिन यीशु उनसे क्या कहेगा? “हे शापित लोगों, मेरे सामने से उस अनंत आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके के लिए तैयार की गई है” (मत्ती 25:41)।
एक धर्मी जीवनशैली तुम्हारे जीवन को दीर्घ कर देगी, और यह तुम्हें अनंतकाल के लिए आशीषित करेगी। यह वही आशीषें हैं जिन्हें सुलैमान ने दुष्टता के ऊपर धार्मिकता और बुद्धि को चुनने के लिए प्रेरणा के रूप मे बार-बार दोहराया। कुछ ही उदाहरणों पर विचार करें (नीतिवचन 10:6, 16, 24-25, 16, 24-25, 27-29; 11:3,5-8, 18-21, 31; 12:2-3, 7, 21; 13: 6, 9, 15, 21-22-22,25)। यदि तुम राजा सुलैमान के नीतिवचनों से बुद्धि सीखना चाहते हो, तो इस नीतिवचन में पाई जाने वाली उसकी सबसे सामान्य चेतावनी को समझें।
कुछ लोग पूछते हैं, “जो विश्वास के लिए शहीद हो गएँ उनके बारे में क्या? वे धर्मी जन थे और उनके जीवन के आरंभ में ही उनका विच्छेद कर दिया गया था, और वे भयंकर दर्दनाक मौत मरे”। आपको इसे एक व्यापक चित्र के रूप में देखना चाहिए। जितना तुम अपनी सीमित दृष्टि और बुद्धि से देख सकते हो, धन्य परमेश्वर के पास उससे अनगिनत अधिक कारक हैं जिसमें प्रत्येक मनुष्य शामिल है। जो विश्वास के लिए शहीद हो गएँ वे अपनी शारीरिक पीड़ा से कहीं अधिक आनन्द, शांति और संतोष से आशीषित पा चूके हैं। नीचे उल्लेखित दृष्टिकोण से देखने पर इस नीतिवचन को समझना आसान होगा :
“धर्मी सदा अटल रहेगा; अर्थात, वे पृथ्वी पर दीर्घ और खुशहाल जीवन पाएंगे, यदि परमेश्वर उनके लिए यही उत्तम समझता है, और फिर वे अनंतकाल के लिए स्वर्ग में रहेंगे। परंतु दुष्ट पृथ्वी पर बसने न पाएँगे; अर्थात्, उनका पृथ्वी पर भी दीर्घ और शांत समय नहीं होगा, जब तक कि परमेश्वर उनके सांसारिक जीवन को विस्तारित करने के द्वारा उन्हें श्राप और परेशानी देना न चाहें, और फिर उन्हें अनंत पीड़ा के लिए आग की झील में डाल दिया जाएगा।”
बाइबल बढ़ाचढ़ाकर बातें करनेवाली पुस्तक नहीं है। हालांकि इसमें कई बार प्रतिज्ञाओं और चेतावनियों को दोहराया गया है, फिर भी बाइबल अतिशयवादी, अतिरेक करनेवाली, या बार- बार एक ही सत्य से आपका सामना कराने की अपनी प्रणाली में निष्फल नहीं है। स्वर्ग का परमेश्वर अपने शब्दों को व्यर्थ में नहीं जाने देता। परन्तु जरा सोचकर देखें कि कितने लोगों ने इसकी दोहराई गई चेतावनियों को पढ़ा है और कितने लोगों ने परमेश्वर को प्रसन्न करने और उसकी आशीषों को प्राप्त करने के लिए अपने जीवन को बदला है। पाठक, क्या तुम अपना जीवन बदलोंगे? क्या तुम मूर्ख बनोगे और कहोगे, “मैंने यह सब पहले सुना हुआ है”? चुनाव तुम्हारा है। परंतु धन्य परमेश्वर उन पर हँसेगा (भजन संहिता 59:5-8)।
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