नीतिवचन 10:29

यहोवा खरे मनुष्य का गढ़ ठहरता है, परन्तु अनर्थकारियों का विनाश होता है।

जीने का एक धर्म का मार्ग है और जीने का एक कुमार्ग है। धर्म के मार्ग पर चलने से सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रसन्न होता है और वह समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद देता है। कुमार्ग, जो आमतौर पर सब मनुष्यों का पापपूर्ण मार्ग है, विनाश, दुर्बलता और मृत्यु की ओर ले जाता है। आपका जीवन किस मार्ग पर है? अभी अपना आत्म-परीक्षण करें, अपना मन दीन करें और धर्म के मार्ग पर चले कि आप आशीष पाएं।

तटस्थेश्वरवाद (कि दुनिया में होनेवाली घटनाओं में परमेश्वर सिर्फ़ एक दर्शक है) झूठा सिद्धान्त है, और जो लोग उस परमेश्वर को जिसने विधि-विधान लिखा, सब बातों को पहले से ठहराया, और जिसने ये सब अपने वचन में प्रकट किया, नहीं मानते, वे झूठे शिक्षक हैं। बाइबल में प्रकट परमेश्वर यहोवा जो कुछ भी मनुष्यों के जीवनों में होता है उसमें उसका हाथ है। सृष्टिकर्ता परमेश्वर दूर से नहीं देख रहा है, जैसे एक मूर्ख गीतकार ने अपने मतिभ्रम में लिख दिया है। वह सक्रिय रूप से उन लोगों को प्रतिफल देता है जो उसकी आज्ञा का पालन करते हैं और उन लोगों को गंभीर दण्ड देता है जो उसको मानने से इनकार करते हैं और उसकी अवज्ञा करते हैं (नीतिवचन 13:13)।

इस नीतिवचन का अर्थ समझो। अंग्रेजी बाइबल में प्रयुक्त “LORD,” जिसकी वर्तनी कैपिटल में है, प्राचीन इज़राइल के परमेश्वर का नाम है, अर्थात बाइबल का यहोवा, जो कहता है, मैं जो हूं सो हूं (निर्गमन 3:14; 6:3)। जो लोग परमेश्वर के साथ चलते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं वे यहोवा के मार्ग में सीधे मार्ग पर चल रहें हैं, और वह उनके जीवन को सामर्थ और आशीष से समृद्ध करता है। परन्तु जो लोग उसे और उसकी प्रकट इच्छा को मानने से इनकार करते हैं, वे अधर्म करनेवाले कहलाते हैं, और उसने शब्द दिया है कि वह उनके पापों के कारण उन्हें न्यायपूर्ण दण्ड देगा।

महान परमेश्वर मनुष्यों की एक एक बात को देखता और मापता है (नीतिवचन 15:3; इब्रानियों 4:12-13)। उसके धर्म का नियम यही है कि वह उन लोगों को पुरस्कृत करता है जो लगन से उसकी खीज करते हैं और उसकी आज्ञा को मानते हैं (नीतिवचन 11:18; इब्रानियों 6:10; 11:6; उत्पत्ति 15:1; भजन 18:20; 58:10-11; मत्ती 5:10-12; 6:33; प्रकाशितवाक्य 21:3-5)। और उसका एक और समतुल्य नियम है जो वैसे ही काम करता है, कि वह उन लोगों को दंडित करता है जो उसे और उसके वचन को नहीं मानते (नीतिवचन 13:13; 2 इतिहास 36:16; भजन 73:15-20; मत्ती 21:40-46; 1 कुरिन्थ 11:30; इब्रानियों 10:26-31; 12:28-29; प्रकाशितवाक्य 21:8)।

परमेश्वर ने खुद को भिन्न भिन्न तरीकों से प्रकट किया है – सृष्टि की रचना, जीवन में दिखाई देनेवाली उसकी देखभाल, मनुष्य का विवेक और लिखित पवित्र शास्त्र, अर्थात् केवल बाइबल। आकाश और पृथ्वी में यहोवा के रचनात्मक गुण का प्रदर्शन इतना स्पष्ट और संपूर्ण है कि मनुष्य के पास उस एकमात्र परमेश्वर पर विश्वास न करने का कोई बहाना नहीं है, और क्योंकि उन्होंने इस प्रकट सत्य और धार्मिकता में आकर उसे महिमा नहीं दी, और न उसको धन्यवाद दिया, इस कारण वह उन्हें गंभीर दण्ड देता है (भजन 19:1-6; रोमियों 1:18-32)। और उसी प्रकार, उसके लिखित वचनों का श्रद्धापूर्वक पालन किया जाना है, क्योंकि वे उनकी नैतिक इच्छा को प्रकट करते हैं (व्यवस्था 29:29; भजन 19:7-11; यशायाह 66:1-2; मत्ती 5:19-20; 2 पतरस 1:19-21)।

यदि आप अपने पापों से पश्चाताप करते हैं, तो परमेश्वर दया करता है और पापों को क्षमा करता है (नीतिवचन 28:13; 1 यूहन्ना 1:9)। लेकिन अधर्म करनेवाले लोग उसके विरुद्ध विद्रोह करने और पाप का जीवन जीने के लिए उसके धर्म के मार्ग को छोड़ देते हैं। उन लोगों पर कोई रहम नहीं किया जाएगा जो परमप्रधान परमेश्वर के विरुद्ध खड़े होते हैं। परमेश्वर उनसे बैर रखता है; उनका जीवन दुखों से भरा होगा; वे नाश पाएंगे (नीतिवचन 11:31; 13:15; भजन 5:5; 11:5; मत्ती 7:23; प्रकाशित 21:8)। यदि आपको वे कुछ समय के लिए पाप के परिणाम और दण्ड से बचते हुए दिखाई देते हैं, तो बस कुछ समय प्रतीक्षा करें (भजन 37:34-38; 49:6-14; 92:7)।

परन्तु परमेश्वर की दया की दृष्टि धर्मियों पर टिकी होती है: वह उनके जीवन को दया की दृष्टि से देखता है और उन्हें आशीर्वाद देता है (2 इतिहास 16:9; 1 पतरस 3:12)। जब वे उसके मार्ग पर चलते हैं, तो वह उन्हें दिन-प्रतिदिन सामर्थ देता है (भजन 84:5-7; यशायाह 40:31; 2 कुरिन्थ 4:16)। जब वे झूठे धर्म से अलग हो जाते हैं ताकि केवल उसी के पीछे चलें, तो वह उन्हें अपने प्रिय बेटे और बेटियों के रूप में स्वीकार करता है (2 कुरिन्थ 6:14-18)। वह उनके लिए सब बातों को स्थिर करता है, उनके रुपयों की थैलियों में पड़ें छेदों की मरम्मत करता है, जिन वर्षों को उन्होंने अपनी मूर्खता में बर्बाद कर दिया उन्हें लौटाता है, और संकटों में बचाता है (व्यवस्था 8:1-9; हाग्गै 2:15-19; योएल 2:25; 2 तीमु 4:17)। ये उसके कुछ मार्ग हैं, जिन्हें परमेश्वर का विधान कहा जाता है, और यह गुरुत्वाकर्षण से भी अधिक सत्य है।

क्या आप आज अपने मार्गों की जाँच करेंगे? इस नीतिवचन ने आपके सामने जो मार्ग रखा है क्या आप उसे समझते हैं? क्या आप धर्म के मार्ग पर जियेंगे और धन्य ठहरेंगे? या क्या आप इस संसार का मार्ग चुनोगे और नष्ट हो जाओगे? इससे पहले कि वह आपसे इस अवसर को वापस ले ले, परमेश्वर आपको अधिक समय तक उसके साथ खेलने नहीं देगा (नीतिवचन 29:1)। आज ही गंभीर हो जाओ! परमेश्वर और मनुष्य दोनों से अनुग्रह पाने के लिए परमेश्वर के मार्ग पर चलकर पृथ्वी पर एक महान और गुणी राजकुमार (या राजकुमारी) बनना चुनें।

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