नीतिवचन 10:27

यहोवा का भय मानने से आयु बढ़ती है, परन्तु दुष्टों का जीवन थोड़े ही दिनों का होता है। (केजेवी)

एक लम्बी उम्र जीने के लिए आप को सर्वोत्तम सहायता कहा से मिलेगी? पोषक तत्वों से? अच्छी सेहत से? कसरत करने से? आनुवांशिक? तनाव से? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आप क्या किमत चुकाएंगे? हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने सुलैमान को प्रेरित किया कि वह इस नीतिवचन में लम्बी आयु का गुप्त सूत्र लिखे। और यह सूत्र आपके उपयोग के लिए मुफ्त ही उपलब्ध है! यदि आप इस सरल नियम की ठट्ठा उड़ाते हैं,तो आप को मृत्यु से प्रीटी रखनी चाहिए (नीति 8:36)। यदि आप बुद्धिमान हैं तो आप समझ लेंगे कि इसे कई बार दोहराया गया है, और आप इसे अपनी प्राथमिकता बनाएंगे (नीति 3:2,16; 4:10; 9:11; 28:16 )।

सुलैमान ने जीवन-मृत्यु का हिसाब लगानेवाले विशेषज्ञों की राय नहीं ली, अर्थात् सांख्यिकी विद्वान जो नश्वरता की जानकारी का संकलन करते हैं, ताकि आपकी मृत्यु कब होगी इसकी सम्भावना का गणित कर सकें। वह परमेश्वर की ओर से आनेवाले प्रकाशन और प्रेरणा से जान गया कि आप के जीवन पर किसी भी अन्य कारक से अधिक आप के नैतिक जीवन का प्रभाव पड़ता है। वह इस सत्य को बाइबल के प्रकाशन से जानता था (निर्ग. 20:12; व्यवस्था. 4:40; 5:16, 33; 6:2; 22:7; भजन. 55:23; इफि 6:1-3)। वह इस सत्य को स्वर्ग से उतर आने वाले प्रेरित-वचन से जानता था (सभोपदेशक 12:9-10; यशा. 8:20; 2 तिमु. 3:16-17; 2 पतरस 1:19-21)।

जीवन-बीमा कम्पनियां जीवन-मृत्यु का हिसाब लगानेवाले विशेषज्ञों का उपयोग करते हैं ताकि औसतन आयु का हिसाब लगा सके। वे मानव जीवन की सीमा को तय करने हज़ारों कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, और करोड़ो रूपया खर्च करती हैं। इन सब मूल्यांकनों और खर्चों के बाद, वे जीवन की औसतन अपेक्षित आयु 73 वर्ष की मानकर चलते हैं। परन्तु 3,500 वर्ष पूर्व मूसा ने लिखा कि अधिकतर लोगों की आयु 70 वर्ष और बलवान लोगों के लिए 80 वर्ष की आयु एक आदर्श रूप थी – यह औसतन 73 वर्ष है। आप इसके विषय में भजन 90:10 में पढ़ सकते हैं। मूसा ने यह कैसे जाना? परमेश्वर-प्रेरित वचन से!

73 वर्ष की अपेक्षित आयु एक औसत मूल्यांकन है। मनुष्य इसी औसतन आयु के आस-पास मरते हैं। कोई भी औसत दर्जे का नहीं है। यदि कोई धर्मी जन 90 वर्ष की आयु जीता है, और कोई रॉकस्टार नशे के पदार्थ की अधिक मात्र के कारण 56 वर्ष की आयु में मर जाता है, तो वह 73 वर्ष की औसत है। यदि धर्मी दादा-दादी 85 वर्ष तक जीते हैं, और उनके समलैंगिक पोते एड्स की बिमारी से 49 वर्ष की आयु में मर जाते हैं, तो औसत आयु 73 ही है। यदि किसी छोटी कलीसिया के सभी 50 सदस्य 75 वर्ष तक जीते हैं, किन्तु कलीसिया से निष्कासित पियक्कड़ अपने 11 वर्ष के बच्चे समेत 35 वर्ष की आयु में कार दुर्घटना में मारा जाता है, तो यह भी औसत आयु 73 ही है।

यहोवा का भय मानना क्या है? यह परमेश्वर से आदरयुक्त प्रेम और उसका सम्मान करना है, जो एक व्यक्ति को बाइबल अर्थात् परमेश्वर का वचन पढ़ने और आज्ञा मानने को विवश कर देता है। यही समस्त बुद्धि और आनंद की बुनियाद है (नीति 1:7; 9:10; भजन 112:1-3; 128:1-6; सभोपदेशक 12:13)। दुष्टता क्या है? यह इस संसार के तत्वज्ञान के अनुसार अपनी ही वासनाओं से प्रेरित होकर जीवन जीना है। आप कैसा जीवन जीते हैं यह आपको चुनना है। परन्तु जब आप मरते हैं तो वह परमेश्वर का चुनाव होता है, और वह अपना चुनाव इसी नीतिवचन के आधार पर करता है (सभोपदेशक 7:17)।

आयु कैसे कम होती है? पाप बुढ़ापे को तेज़ी से बढ़ाता है : यह संसार इसे “अति परिश्रमी जीवन” कहता है। शराब के अति सेवन के कारण होने वाले खराब आंत-सम्बन्धी बिमारियां और परस्त्रीगमन के कारण होनेवाले यौन रोग इस के उदाहरण हैं। पाप अपनी ही मृत्यु को पहुंचाता है जैसे कि मुर्खता या विद्रोह के कारण उभरनेवाली आत्महत्या और दुर्घटना। व्यभिचार का पाप आपके प्रेमी के जीवनसाथी के द्वारा हत्या को उकसा सकता है। पाप हत्यारों और अन्य हिंसक अपराधियों पर मृत्युदण्ड को ले आ सकता है। पाप किसी मनुष्य पर किसी भी माध्यम से या किसी भी वक्त परमेश्वर के अलौकिक न्याय को भी ले आ सकता है। यह नीतिवचन सत्य है। इस पर विश्वास रखें।

परमेश्वर ने एर और ओनान को किन्ही अन्य कारणों से मार डाला, परन्तु उन्होंने यहूदा के घराने के जीवन की उम्मीदों को बहुत ही कम कर दिया। एली अपने बेटों की तुलना में कई अधिक वर्षों तक जिया, परन्तु उसके सभी तीनों पुत्रों की पाप के कारण मृत्यु हुई। नाबाल क्यों बहुत जल्दी मर गया और अपनी विधवा को दाऊद के लिए छोड़ गया? क्योंकि वह दुष्ट था। अबशालोम बगावती देशद्रोही था, इस कारण इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि योआब ने उसे तब मार डाला जब उसका जीवन चरम उन्नति पर था। किन्तु मारे जाने से पहले उसने उसकी बहन से बलात्कार करनेवाले अपने सौतेले भाई अम्नोन की हत्या कर दी। और सुलैमान ने अपने भाई अदोनिय्याह को राजद्रोह करने के जुर्म में मौत के घाट उतार दिया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर ने इन वचनों को लिखने सुलैमान को चुना। उसने दाऊद के पुत्रों की आयु अत्यंत कम होते हुए देखी।

यह मत सोचो कि ऐसी घटनाएं केवल पुराने नियम में ही हुई। परमेश्वर कभी नहीं बदलता; और वह बदला नहीं है (मालकी 3:6; इब्रा. 13:8)। वह आज भी भयानक परमेश्वर और भस्म करनेवाली आग है (इब्रा. 10:31; 12:29)। हनन्याह सफीरा दान देने के अपने झूठ के कारण कलीसिया की आराधना के बीच ही मर पड़े। कुरिन्थ की कलीसिया के कई लोग प्रभु भोज को भ्रष्ट करने के कारण अकाल मृत्यु के शिकार हो गए। और हेरोदेस अग्रिप्पा-प्रथम अपने भाषण के बाद अपने घमण्ड के कारण मर गया। “यहोवा का भय मानने से आयु बढ़ती है, परन्तु दुष्टों का जीवन थोड़े ही दिनों का होता है” (नीतिवचन 10:27)।

जो अपराधी अपनी दुष्टता और कुकर्म के लिए कारावास की सजा भुगत रहे हैं उनकी आम जीवन की आशा की लम्बाई और उनकी संख्या की तुलना करें। हमारे देश में उम्रकैद की सजा 14 वर्ष की मानी जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। सर्वोच्च न्यायलय के 2012 के फैसले के अनुसार उम्रकैद उम्र भर के लिए होती है, अर्थात् अपराधी की अंतिम सांस तक। समज लीजिए कि किसी व्यक्ति को 25 वर्ष की उम्र में उम्रकैद हो जाए, तो जब उसकी मृत्यु होगी उसकी औसत आयु 60-70 के आस-पास होगी। जो अपनी युवावस्था में अपराध करते हैं, और भरी जवानी में ही कारागृह में भेज दिए जाते हैं, उनकी उम्र 55 तक सीमित हो जाती है। परमेश्वर सच्चा ठहरे।

क्या आप अपवादों को जानते हैं? अवश्य ही जानते हैं। सुलैमान भी जानता था (सभोपदेशक 7:15)। वह जानता था कि सनातन असीम परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कई कारणों से कई चीजे करता है, और वह जानता था कि इस तरह की अन्य सब बातें इन नियमों को बिलकुल ही रद्द नहीं कर सकती और न उन्हें प्रभावहीन कर सकती हैं (सभोपदेशक 8:12-13)। यदि आप अपवादों पर ध्यान देना चाहते हैं, और किसी व्यक्ति की जीवन-अवधि में मौजूद अन्य ईश्वरीय कारकों को सुलझाना चाहते हैं, तो आप प्रयास करके देख सकते हैं। परन्तु यदि परमेश्वर आपकी जिज्ञासा को ठट्ठा करना मानता है, तो अचम्भित मत होईए। किसी पापी मनुष्य को मूर्खों की संपत्ति के रूप में कई वर्षों की लम्बी उम्र देना, या आनेवाले संकटों से बचाने किसी धर्मी जन को कम आयु में ही इस धरती से उठा लिया जाए तो भी यह बात इस अटल सत्य को बदल नहीं सकती कि यहोवा का भय मानने से आयु बढ़ती है।

प्रिय मसीही, नश्वरता के निर्दयी तथ्यों के विषय में आप क्या करेंगे? क्या आप 73 की संख्या को छोड़कर आप एक और सांख्यिकीविद बनेंगे? स्वर्ग को बनानेवाला परमेश्वर इस नीतिवचन को जानता है, और उसने नए नियम में इसकी पुष्टि की है। वह जानता है कि उसने दीर्घायु की प्रतिज्ञा सबसे पहले कौन-सी आज्ञा को जोड़ी है – अपने माता-पिता का आदर करना (इफि 6:1-3)। यह ज्ञान आप को आज के दिन अपने माता-पिता के सम्बन्ध में एक योजना बनाने की ओर ले जाने पाए – अपने माता-पिता को फोन करना या उन्हें खत लिखना, या फिर उससे भी बेहतर, आज रात का खाना उनके साथ खाना। या फिर कही ऐसा तो नहीं कि आप विटामिन की गोलियां खाकर, कम चर्बीवाले आहार से अपने को तकलीफ देकर, और दौड़ने की मशीन पर दौड़ कर मृत्यु को पराजित करना चाहते हैं? अपने को नम्र करें। प्रभु का भय माने। अपने माता-पिता का आदर करें। परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करें।

परन्तु वास्तव में 73 वर्ष की आयु भी कम ही है। बहुत कम। अत्यंत कम। बाइबल में उसकी तुलना घास से, सुबह की भांप से, हाथभर लम्बाई से, एक दन्त-कथा से, रात की एक प्रहर से, एक तेजी से गुजरने वाले ज़हाज से, एक चील से जो अपना शिकार ढूँढता है, एक छाया से करती है। इससे पहले कि आप अपने हाथ से उसे छुए वह लोप हो जाता है। मृत्यु का एकमात्र सच्चा समाधान अनन्त जीवन का वरदान है, और यह केवल प्रभु यीशु मसीह के सिद्ध जीवन, मृत्यु, और पुनरुत्थित जीवन के द्वारा सम्प्रभु सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा मिलता है (रोमि. 6:23)। यीशु मसीह पर विश्वास रखनेवाले सच्चे विश्वासी ही अनन्तकाल में युगानुयुग जीवित रहेंगे (युहन्ना 11:25-27)।

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