नीतिवचन 10:24
दुष्ट जन जिस विपत्ति से डरता है, वह उस पर आ पड़ती है, परन्तु धर्मियों की लालसा पूरी होती है।
इस वर्ष आपके साथ क्या होगा? क्या वे चीजें आपके साथ होंगी जिन से आप डरते हैं? या वे चीजें जो आप चाहते हैं? चुनाव आपका है। स्वर्ग का परमेश्वर पूरे वर्ष भर पुरस्कार अथवा दंड देगा। अगर आप दुष्टतापूर्वक जीवन बिता रहे हैं, तो आशा करें कि आपका डर सच हो जाएगा, और आपके जीवन को उलझा देगा। अगर आप धार्मिकता का पीछा कर रहे हैं, तो आपकी इच्छाओं के पूर्ण होने की अपेक्षा करें।
मूसा ने इस्राएल को चेतावनी दी, “और जान रखो कि तुमको तुम्हारा पाप लगेगा” (गिनती 32:23)। यह जीवन का सिद्धांत है जो हर बच्चे को सिखाया जाना चाहिए। ये आठ सरल शब्द आपके आचरण की निरंतर जांच कर सकते हैं। आप परमेश्वर से पाप नहीं छिपा सकते; वह आपके पापों को अनदेखा नहीं करेगा; वह आपकी मूर्खता का बदला आपके सिर पर डालेगा (नीति 5:22; 8:36; 11:5-6, 17, 19; भजन 7:16)।
परमेश्वर आपको आपसे बेहतर जानता है। इसके विषय में सोचे। वह जानता है कि वास्तव में आपको किस बात की आशंका या भय है, किंतु वह यह भी जानता है कि आपको कौनसी चीज आतंकित कर देगी, जिसके बारे में आपने अभी तक सोचा भी नहीं है। अगर आप मूर्खतापूर्वक या हठीलेपन से उसके विरूद्ध विद्रोह करते हैं, तो वह आपके बुरे सपने को पूरा कर देगा। दूसरी ओर, वह आपके जीवन में शांति और आनंद लाने में भी सक्षम है जो आपके पूर्व के अनुभव या आपके कुछ भी सोचने से कर्इ गुना बढ़कर होगा।
क्या आप हृदय से धर्मत्यागी हैं? क्या आप परमेश्वर और बुद्धि के प्रति अपने पहले प्रेम से फिसल गए हैं? क्या आप यीशु मसीह के प्रति अपनी भक्ति में उदासीन हैं? आप गंभीर संकट में हैं, क्योंकि प्रत्येक धर्मत्यागी अपने चालचलन का फल भोगेगा (नीति 14:14; प्रकाशित 2:4-5; 3:15-16)। अगर आप सांसारिक बातों पर मन लगाते हैं, तो आप पेट को पूजने वाले लोग बनकर यीशु मसीह के शत्रु कहलाएंगे (फिलि 3:18-19)।
आपको किसका भय है? वह आ पड़ेगा! सुलैमान ने पहले ही लिखा, “मैं ने तो पुकारा परन्तु तुम ने इनकार किया, और मैं ने हाथ फैलाया, परंतु किसी ने ध्यान न दिया, वरन तुम ने मेरी सारी सम्मति को अनसुनी किया, और मेरी ताड़ना का मूल्य न जाना; इसलिए मैं भी तुम्हारी विपत्ति के समय हंसूंगी; और जब तुम पर भय आ पड़ेगा, वरन आंधी की नार्इ तुम पर भय आ पड़ेगा, और विपत्ति बवण्डर के समान आ पड़ेगी, और तुम संकट और सकेती में फंसोगे, तब मैं ठट्ठा करूंगी” (नीति 1:24-27)।
परंतु धर्मी धन्य ठहरेगा! परमेश्वर उसके मनोरथों को पूर्ण करेगा, क्योंकि वह जीवन की मूर्ख और व्यर्थ क्षणिक बातों की बजाय परमेश्वर में आनन्दित होता है (भजन 21:1-7; 37:4; 145:19)। “धर्मी ऐसा पलटा देखकर आनन्दित होगा, वह अपने पांव दुष्ट के लोहू में धोएगा। तब मनुष्य कहने लगेंगे, निश्चय धर्मी के लिए फल है; निश्चय परमेश्वर है, जो पृथ्वी पर न्याय करता है” (भजन 58:10-11)।
आप किन अच्छी चीजों की इच्छा रखते हैं? निश्चित तौर पर आपकी इच्छा-सूची है चाहे छोटी हो या लंबी। जीवन की वास्तविक अच्छी चीजें केवल उनके लिए हैं जो सीधे चलते हैं – जैसे इस नीतिवचन का धर्मी जन। “क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है; यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा; और जो लोग खरी चाल चलते हैं; उन से वह कोर्इ अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा” (भजन 84:11)।
सुलैमान ने जीवन की इस व्यवस्था का अवलोकन किया : “चाहे पापी सौ बार पाप करे अपने दिन भी बढ़ाए, तौभी मुझे निश्चय है कि जो परमेश्वर से डरते हैं और उसको सम्मुख जानकर भय से चलते हैं, उनका भला ही होगा; परन्तु दुष्ट का भला नहीं होने का, और न उसकी जीवनरूपी छाया लम्बी होने पाएगी, क्योंकि वह परमेश्वर का भय नहीं मानता” (सभो 8:12-13)।
समाजशास्त्री, मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक और इतिहासकार मनुष्यों के मध्य मतभेदों के विषय में सब बातों का अध्ययन कर सकते हैं, लेकिन यह नीतिवचन उनके किसी भी निष्कर्ष से कही अधिक सत्य और अमूल्य है। पाठक, आप इस सबक से क्या प्रेरणा लेंगे? इसे अनदेखा करेंगे और निकट भविष्य में अपने भयों का अनुभव करेंगे? अथवा पश्चाताप करके अपने को दीन बनाएंगे और अपने मनोरथों को प्राप्त करेंगे? चुनाव आपका है।
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