नीतिवचन 10:23

उत्पात करना मूर्ख के लिए खेल जान पड़ता है, परन्तु समझवाले के पास बुद्धि है।

बुद्धि कोमल, भली, दयालु और प्रेम रखने वाली होती है। दूसरों को चोट पहुँचाना कभी मनोरंजक नहीं हो सकता। आपको अपने आसपास के लोगों को धीरज, चंगाई, शांति और सुरक्षा के वचन कहने चाहिए। शब्दों या कार्यों से दूसरे को नुकसान पहुँचाना क्रूरता, मूर्खता, और दुष्टता है। बुद्धिमान लोग हमेशा दयालु और दूसरों के लिए लाभदायक होते हैं।

बुद्धि पवित्र, महान, शुद्ध और सदाचारी है। किसी भी प्रकार का पाप कभी मनोरंजक नहीं हो सकता। आपके आसपास के लोगों में आपकी पहचान एक धर्मी, न्यायप्रिय और सदाचारी मनुष्य के रूप में होनी चाहिए। मन, शब्दों या कर्म से पाप करना बुरा, दुष्टता, धूर्तता और अधर्म है। बुद्धिमान लोग हमेशा भले और मन के सीधे होते हैं।

पाप आज अधिकांश लोगों के लिए एक मज़ाक का विषय है। आज दूसरों को चोंट पहुँचाने वाली शरारत पर ख़ुशी अभिव्यक्त की जाती है। पाप के परिणामों को नज़रअंदाज़ किया जाता है, और फटकार लगानेवालों की उपेक्षा कीं जाती है। बहुत से लोग पाप में आनंद लेते हैं। वे बिना किसी डर, अपराधबोध या शर्म के दूसरों के लिए परेशानी पैदा करते हैं। वे दुष्टता का मज़ाक उड़ाते हैं और व्यंग करते हैं; वे धर्मी का उपहास करते हैं। लेकिन ऐसे लोग मूर्ख होते हैं। समझदार लोग जानते हैं कि इस तरह के दुराचारी आचरण से परमेश्वर और मनुष्य अप्रसन्न होते हैं। बुद्धिमान लोग जानते हैं कि गम्भीर स्वभाव तथा धार्मिकता के लिए सम्मान और पुरस्कार रखा है।

सुलैमान ने चेतावनी देते हुए कहा, “मूढ़ पाप को ठट्ठा समझते हैं,” और, “मूढ़ता निर्बुद्धि के लिये आनंद है” (नीति 14:9; 15:21)। यह पीढ़ी मनोरंजन के लिए पाप का उपयोग अपनी विषयवस्तु के रूप में करती है। स्कूलों में उत्पाती और शरारती लड़के अक्सर बाकीयों से ज्यादा लोकप्रिय होते हैं; ठिठ और दबंगों को बहादुर और ताकतवर माना जाता है; जंगली-पागल अभिनेताओं को चमकते सितारे कहा जाता है। तो वही कुछ ऐसे हैं जो वेश्याओं और हिंसा के बारे में क्रूरता और मूर्खता से रैप करते हैं। समझदार लोग ऐसी उत्पात पर शोक मनाते हैं।

समाज का वह वर्ग जो इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है, वह है युवा वर्ग। उनके दिलों में युवावस्था के मूर्खता की गांठ बंधी हुई होती है, लेकिन उन में उत्पात मचाने की क्षमता और स्वतंत्रता होती है। सुलैमान ने अपना भय अभिव्यक्त किया कि कही उसका पुत्र उनके आकर्षण और प्रभाव का शिकार न हो जाए (नीति 1:10-19; 2:10-22; 13:20)। पौलुस ने जवानों को एक ही सलाह के साथ चेतावनी दी जो उन्हें महान बनाएगी, यदि वे इसका पालन करते हैं, “जवान पुरुषों को भी समझाया कर कि संयमी हों” (तीत 2:6)।

अनिवार्य शिक्षा, जो सामाजिक भलाई करने वालों की एक व्यर्थ विचारधारा है, मूर्ख युवाओं को रौंद देती है, जो कक्षा में बैठकर सीखने का तिरस्कार करते हैं, जहां पहुँच के बाहर शिक्षक हास्यास्पद भिन्न-भिन्न विषयों को पेश करते हैं जिनका जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता। इसका उन युवाओं पर मुख्य प्रभाव क्या पड़ता है जो शायद किसी नियोक्ता के अधीन कोई नौकरी कर रहे होंगे? मूर्खता, हताशा, उत्पात, विद्रोह और पाप! वे एक-दूसरे को पापपूर्ण मज़ाक करने में तब तक उकसाते रहते हैं जब तक कि समाज उनके अनिष्टकारक पागलपन का शिकार नहीं हो जाता।

क्या होता है जब ये मूर्ख घर लौटते हैं? टेलीविजन परमेश्वर और दूसरों की क़ीमत पर घिनौना मनोरंजन प्रदान करता है। हास्य-विनोद और फूहड़ चिटकुलों से भरे टीवी के ये कार्यक्रम, जो लोगों की शाम बर्बाद कर देतें हैं, नरक से हैं क्योंकि उनके विचारों में परमेश्वर, नैतिकता, संयम और अन्य सद्गुणों की कोई परवाह नहीं है। यहाँ तक कि तथाकथित मासूम कार्टून भी, जिनमे दूसरों को नुकसान पहुँचाने और उनका मज़ाक उड़ाने का लगातार प्रयास किया जाता है, मूर्खतापूर्ण रूप से बुरे हैं। आप अपने बच्चों को चरित्र-भ्रष्ट करनेवाले ऐसे प्रभावों से बचाने और उनके विरोध में शिक्षा देने के लिए क्या करेंगे?

व्यभिचारी युवक लड़कियों की, उनके पिता या उनके भावी पतियों की परवाह किए बिना उनका फायदा उठाते हैं। वे लड़कियों के कौमार्य के शोषण के अपने घिनौने कारनामों पर हंसते हैं। पेटू युवा खाने की प्रतियोगिताएं करते हैं, और जब उनका प्रतियोगी अपना खाना मुँह से वापस फेंकता है, तो वे खुशी से दहाड़ते हैं। शराबी युवक इस बात पर हँसी-मज़ाक उड़ाते हैं कि उनके शराब पिने के रंगरिलेपण से सबसे ख़राब ख़ुमार किस पर चढ़ा था। कुछ युवा अपने प्रिंसिपल की गाड़ियों की पेट्रोल टैंक में चीनी डालते हैं, या बम्बर में गाज़र डालते हैं, और जब उस पर अपना इंजन बदलने की नौबत आती है तब वे जश्न मनाते हैं। परन्तु परमेश्वर को ठठ्ठो में नहीं उड़ाया जाता!

मूर्ख केवल अब की सोचते हैं; वे कल के परिणामों और मृत्यु के बाद परमेश्वर का न्याय दोनों का स्मरण रखने से चूक जाते हैं। वे न तो अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं और न ही इसके लिए कुछ करते हैं। न्यायाधीश अंततः उन्हें जेल में डाल देता है; उनके नाम सार्वजनिक स्थानों पर गुंडागर्दी में भी शामिल होते हैं; फिर जेल में एक अधेड़ उम्र का मूर्ख मनुष्य स्नानगृह में उनका शारीरिक शोषण करता है; वे आपस में अनर्थ करने पर सहमत हो जाते हैं; परन्तु मृत्यु स्वर्ग के सनातन परमेश्वर की ओर से हिसाब लेगी। क्या ही मज़ाक है, हुह? हा! हा!

किस तरह का व्यक्ति इस तरह सोचता और कार्य करता है? मूर्ख! उनकी आंखों के सामने परमेश्वर का भय नहीं है (भजन 36:1-4; 53:1; रोम 3:18)। वे बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्टों की टेढ़ी-मेढ़ी चाल से प्रसन्न होते हैं (नीति 2:13)। वे प्रत्येक राष्ट्र के लिए अभिशाप हैं, प्रत्येक पिता के लिए एक विपत्ति और दुख, प्रत्येक माँ के लिए बोझिल और शर्मिंदगी (नीति 10:1; 17:25; 19:13; 29:15)। अपने बच्चों को ऐसे चरित्र-भ्रष्ट प्रभावों से बचाने के लिए आप क्या करेंगे?

उन्हें कैसे सुधारा जाता है? आसान है! “ठठेलू के लिये दंड की आज्ञा धरी है, और मूर्खों की पीठ के लिये कोड़े” (नीति 19:29)। “घोड़े के लिये और गदहे के लिये लाठी और मूर्ख की पीठ के लिये छड़ी” (नीति 26:3)। ” जैसा कि घाव की नीलार्इ बुरार्इ को दूर करने का औषध है, वैसा कोड़ों की मार पेट की आँतों को शुद्ध करती है। ” (नीति 20:30)। अगर दुनिया में कड़ी सजा को तेजी से अंजाम दिया जाए, तो दुनिया में अनैतिक अराजकतावादियों की इतनी भरमार नहीं होगी (नीति 19:25; 21:11; सभो 8:11)।

सुलैमान ने जब गम्भीरता को बढ़ावा देने के लिए मृत्यु का उपयोग एक साधन के रूप में किया, तब उसने जवानों से कहा, “हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों में मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आँखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय परमेश्वर तेरा न्याय करेगा। अपने मन से खेद और अपनी देह से दु:ख दूर कर, क्योंकि लड़कपन और जवानी दोनों व्यर्थ हैं।” (सभोपदेशक 11:9-10)।

पालको, अपने बच्चों को जीवन, मृत्यु, नैतिकता, पाप और दूसरों से उचित आचरण रखने के विषय में गंभीरता से सिखाओ। मूर्खतापूर्ण बातें करना, मज़ाक करना, शरारत करना, और मूर्खतापूर्ण व्यंग्य करना चोंट पहुँचाने वाली हरकतें हैं, और अनावश्यक हैं (नीति 12:18; 26:18-19), और पौलुस ने चेतावनी दी कि परमेश्वर ऐसे-ऐसे कामों के लिए इस संसार का न्याय करेगा (इफि 5:3-5)। वे भाषा का अनुचित उपयोग करते हैं; सब बातों के लिए धन्यवाद देना सर्वश्रेष्ठ है। अपने बच्चों को ऐसे कामों की अनुमति न दें, तो वे बड़े होकर महान और बुद्धिमान बनेंगे।

पालकों, सभी कमजोर चीजों के लिए, यहां तक कि घोंसले में के पक्षियों के बच्चों या कोई पशु जिसका बछड़ा छोटा है उसके लिए भी, एक मर्मस्पर्शी देखभाल विकसित कीं जानी चाहिए, परन्तु विशेष रूप से सभी मनुष्यों के साथ भलाई का व्यवहार करें (व्यवस्थाविवरण 22:6-7; निर्ग 23:19; गल 6: 10; 1 तिमु 4:10)। शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांग बच्चें, या जातपात तथा आर्थिक आधार पर भेदभाव से पीड़ित बच्चें आपकी उदारता और सुरक्षा के पात्र होने चाहिए, न कि उपहास और उत्पीड़न के। बुद्धि में ऐसी बातों के लिए दयालु और सुरक्षात्मक ख़याल शामिल है (नीति 12:10)।

इन मामलों में समझदार व्यक्ति के पास बुद्धि होती है – वह मूर्ख की मूर्खता को देखता है और सतर्क रहता है। वह जीवन के प्रति एक उत्पाती दृष्टिकोण से घृणा करता है। वह आज की मूर्खता के परिणामस्वरूप कल की आने वाली मुसीबत को देख लेता है। वह मृत्यु के पश्चात् आनेवाले न्याय को देखता है। वह धार्मिकता के लिए मिलनेवाले बड़े प्रतिफल को देखता है (नीति 21:12; अय्यूब 18:5-21; भजन 19:11; 37:34-38; 58:11)। वह जीवन के प्रति एक गम्भीर और विचारशील दृष्टिकोण को विकसित करता है। ख्रिश्चन भाईयों, बुद्धिमान बनो, और समझो!

मूसा ने प्रार्थना की, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ” (भजन 90:12)। जीवन के प्रति कितना महान दृष्टिकोण है – प्रत्येक दिन को परमेश्वर और मनुष्यों के सामने बुद्धिमानी से उपयोग करना। आपकी भी यही प्रार्थना और यही उद्यम होना चाहिए। बुद्धिमानों पर परमेश्वर की आशीष और अनुग्रह होता है, परन्तु कुकर्मियों का मार्ग मुसीबतों से भरा होता है (नीति 13:15)। जीवन छोटा है, और इसलिए अवश्य है कि आप परमेश्वर की दृष्टि में और जिस किसी से भी आप मिलते हैं उन सब की दृष्टि में इसका सबसे बेहतर रूप से उपयोग करें।

पौलुस ने चेतावनी दी, “क्योंकि अवश्य है कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए” (2 कुरिं 5:10-11)। सुलैमान ने इसी चेतावनी के साथ अपनी दर्शनशास्त्र की पुस्तक, सभोपदेशक का समापन किया (सभो 12:13-14)। जीवन गम्भीर है, और आपको मूर्खतापूर्ण चंचलता के प्रति किसी भी तरह के प्रभाव से बचना चाहिए।

यीशु ने इस जीवन की व्यर्थता को नज़रअंदाज़ कर दिया, इसके बदले, उसने अपनी आँखे उस आनंद पर लगाई जो स्वर्ग में धरा था (इब्रानियों 12:1-2; भज 16:8-11)। उसके पास बुद्धि और समझ थी कि वह यहां की मूर्खता से परे वहां के आनंद को देख सके। इसहाक वाट्स ने लिखा, “इस से पहले कि हम स्वर्गीय स्थानों में पहुंचे और वहां की सुनहरी सड़कों पर चले, सिय्योन की पहाड़ी पर एक हजार पवित्र मिठाइयां रखी हुई हैं।” केवल विश्वास रखनेवाली बुद्धि ही यहां की पवित्र मिठाइयां और वहां की सुनहरी सड़कों को देख सकती है। आज ही विश्वास और बुद्धि की अपनी आंखें खोलें कि आप उन महत्वपूर्ण, महान, और स्थायी चीजों को देख सके जो परमेश्वर की महिमा करती और उसे प्रसन्न करती हैं।

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