नीतिवचन 10:21
धर्मी के वचनों से बहुतों का पालन–पोषण होता है, परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं।
अज्ञानता के कारण कई लोग बेवजह मर जाते हैं। तो वही, दूसरों के साथ साझा कर सके इतना पर्याप्त ज्ञान बहुत कम लोगों के पास होता है। क्या आप मनुष्यों-मनुष्यों के बीच विद्यमान इस बड़े अंतर को पहचान सकते हैं? इन दो वर्गों में से आप कौन-से हैं? अपने वचनों से दूसरों की मदद करने की क़ाबलियत होना कितने सौभाग्य की बात है, परन्तु आपको पहले खुद बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करना होगा ताकि आप उसे दूसरों के साथ साझा कर सकें।
धर्मी लोगों के पास बुद्धि होती है, इसलिए वे जीवन की कठिनाइयों के बारे में शिक्षा और चेतावनी देकर दूसरों की मदद कर सकते हैं। परन्तु मूर्खों के पास अपने लिए पर्याप्त बुद्धि भी नहीं होती, इसलिए वे पीड़ा और परेशानी में पड़ जाते हैं, और वे समय से पहले और अकारण ही मर जाते हैं। सबसे पहले, अपने आप को बचाएं। फिर, दूसरों को बचाएं।
बुद्धि केवल आत्म-रक्षा और सफलता के लिए नहीं है। बुद्धि दूसरों को मूढ़तापूर्ण निर्णयों और उनके भयावह परिणामों से बचाने में मदद करने के लिए भी होती है। धर्मी व्यक्ति स्वार्थी नहीं होते: वे दूसरों की सेवा करने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। धर्मी मनुष्य किसी से घृणा नहीं करते: वे केवल तभी आनन्दित होते हैं जब मनुष्य सत्य पर चल रहे होते हैं (1 कुरिन्थ 13:6)। जब वे दूसरों को मूढ़ता के कारण पाप में गिरते देखते हैं तो उन्हें दुःख होता है।
क्या आप बहुतों का पालन–पोषण करते हैं? जब आपकी अंतिम यात्रा निकलेगी तब क्या आपका जनाजा उन स्नेहपूर्ण यादों से भरा होगा कि आप कैसे लोगों को खतरों और कठिनाइयों से बचाने और उन्हें सफलता की ओर ले जाने के लिए सलाह और शिक्षा दिया करते थें? या क्या आपकी अंतिम यात्रा सिर्फ़ एक बेकार मूढ़ को कब्रिस्तान में ले जाने के लिए होगी? क्या लोग आपकी मदद और बुद्धिमत्ता को प्रेमपूर्वक याद करेंगे? या आपको आपकी अज्ञानता के लिए या कैसे आपने कभी किसी की मदद नहीं की इसलिए याद रखेंगे?
जहाँ धर्मी बहुतों का पालन–पोषण करते हैं, वही मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि मरने के कई तरीकें हैं? आप मूढ़ता के कारण शारीरिक रूप से मर सकते हैं, जैसे दुर्घटनाओं, नशे, एड्स, आत्महत्या, हत्या, फाँसी, फेफड़ों के कैंसर और अन्य जानलेवा तरीकों से। परन्तु आप प्रेम, आनंद, शांति, आशा और समृद्धि के कारण भी मर सकते हैं।
तलाक एक विवाह की मृत्यु है। नौकरी से निकाला जाना नौकरी की मृत्यु है। जेल में रहना आज़ादी की मृत्यु है। एक विद्रोही बच्चा घर की शांति को मार डालता है। ग्लानि और लज्जा के कारण आनंद की मृत्यु हो जाती हैं। कड़वाहट और प्रतिशोध के कारण प्रेम की मृत्यु हो जाती हैं। कर्ज और गरीबी के कारण सफलता की मृत्यु हो जाती हैं। ये सब बातें निर्बुद्धि के कारण होती हैं। मरने के कई तरीके हैं।
क्या आपके पास इतनी बुद्धि है कि आप इन जानलेवा संकटों से बच सकें? जैसा कि नीतिवचन बार-बार घोषित करता है, बुद्धि उस हर एक मनुष्य के लिए आसानी से उपलब्ध है जो खुद को विनम्र करेगा और उसकी तलाश करेगा। वह कहाँ पाई जाती है? परमेश्वर के अनमोल वचन में, विशेष रूप से सुलैमान के इन संक्षिप्त ईश्वर-प्रेरित नीतिवचन में। नवयुवकों को बुद्धि और ज्ञान की बातें सिखाना ही उसका उद्देश्य था (नीतिवचन 1:1-4)। क्या आप बुद्धि सीख रहे हैं?
सबसे सुनहरी बुद्धि जिसे आप दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं वह बाइबल में पाए जानेवाले सत्य के वचन हैं (नीतिवचन 22:17-21)। परमेश्वर ने आपके लिए पूर्ण बुद्धि लिखित रूप में दे रखी है, ताकि उपदेश सुनने और बाइबल पढ़ने से आपके पास दूसरों को देने के लिए बहुत कुछ हो (भजन 19:7-11; 1 पतरस 3:15)। बाइबल की बुद्धि इतनी विशाल है, कि आपको कभी भी किसी के सामने शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा (भजन 119:46)।
क्या आप अपना मकसद पूरा कर रहे हैं? अपनी विरासत का निर्माण कर रहें हैं? ख्रिश्चन जीवन का सार इन दो कर्तव्यों के निर्वहन में प्रस्तुत किया गया है – सबसे बढ़कर अपने परमेश्वर से प्रेम रखें और अपने पडोसी से अपने समान प्रेम रखें। क्या आप चाहते हैं कि आपको अच्छी बातें सिखाई जाएं और खतरे के बारे में आगाह किया जाए? तो फिर आपको दूसरों के साथ ऐसा ही करना चाहिए। आपकी कब्र पर यह लिखा हो : वह सबसे बढ़कर परमेश्वर से प्रेम रखता था; वह सब मनुष्यों के लिए जीवन-वृक्ष था।
कौन-सी बात आपको बहुतों का पालन-पोषण करने से रोकती है? यदि आपके पास बुद्धि की कमी है, तो बाइबल का अच्छा उपदेश सुनकर और सुलैमान के नीतिवचन सीखकर बुद्धि को प्राप्त करें। यदि आप स्वार्थी है तो अपना पाप मान लें और अपने में परिवर्तन लाएं। अगर दूसरों को बेवजह पीड़ित होता देख आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता हैं, तो प्रार्थना करें कि परमेश्वर आपमें दूसरों के प्रति प्रेम को उत्पन्न करे। यदि आप प्रश्नों का उत्तर देने से डरते हैं, तो साहस रखें और देखें कि कैसे आप किसी का जीवन बचा सकते हैं।
एक समय पतरस सताव से डर गया था, इसलिए जब यीशु को गिरफ़्तार किया गया तो उस परीक्षा की घडी में उसने यीशु को जानने से इनकार कर दिया। परन्तु पिन्तेकुस्त के दिन उसने साहसपूर्वक यीशु मसीह का प्रचार करने के लिए अपना मुँह खोला और महिमा के प्रभु को क्रूस पर चढ़ाने के लिए यरूशलेम पर आने वाले न्याय के बारे में यहूदियों को चेतावनी दी (प्रेरितों 2:40)। उसके बाद वह यहूदी अधिकारियों की आज्ञा को न सुनकर कुरनेलियुस को सुसमाचार का प्रचार करने के लिए आगे बढ़ा।
आपको फिलिप्पुस के समान बनने की महत्वाकांक्षा होनी चाहिए, जो रेगिस्तान में खोजे के प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम था, जिसके चलते खोजे ने सुसमाचार पर विश्वास किया और बपतिस्मा लिया (प्रेरितों 8:26-40)। प्रिस्किल्ला और अक्विला, इस पति-पत्नी के जोड़े पर विचार करें, जिन्होनें अपुल्लोस को परमेश्वर का मार्ग और भी ठीक ठीक बताया, जबकि वह खुद एक विद्वान मनुष्य था (प्रेरितों 18:24-28)।
आवश्यकता पड़ने पर दूसरों को सुधारने के द्वारा उनसे प्रेम करना परमेश्वर की व्यवस्था है (लैव्य 19:17)। यह ख्रिश्चन समाज का कर्तव्य है कि वे उपद्रवियों को चेतावनी दें (1 थिस्स 5:14) और भाइयों को पाप करने से बचाएं (याकूब 5:19-20)। धर्मी मनुष्य जीवन के वृक्ष बनते और बहुतों के प्राण बचाते हैं (नीतिवचन 11:30; 27:9)।
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