नीतिवचन 10:13
समझवालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।
आपके मुँह के वचन बताते हैं कि आप मूर्ख हैं या बुद्धिमान। समझवाला मनुष्य बुद्धिमान के वचन बोलता है जिससे दूसरों को लाभ होता है; बिना समझवाला मनुष्य मूर्खतापूर्ण बातें बोलता है और वह किसी को लाभ नहीं पहुँचाता। आप अपनी असलियत को अधिक समय तक छुपा नहीं सकते। आप दूसरों को हमेशा धोखा नहीं दे सकते। आप कभी न कभी बेनकाब हो जायेंगे (नीतिवचन 26:26; सभोपदेशक 5:3; 10:3)। और यदि आपके मुँह के वचनों से संकेत मिल जाए कि आप मूर्ख हैं, तो परमेश्वर की बुद्धि में आपके लिए सबसे अच्छा इलाज है आपकी पीठ पर कोड़े लगाना (नीतिवचन 18: 6; 26: 3)।
इस नीतिवचन का बारीकी से परीक्षण करें। पहला खण्ड समझवाले व्यक्ति की पहचान उस व्यक्ति के रूप में करता है जो बुद्धिमानी से बोलता है। दूसरा खण्ड उस व्यक्ति को कोड़े लगानेका निर्देश देता है जिसमें कोई समझ न हो। इस नीतिवचन की समरूपता दो प्रमुख सबक सिखाती है: (1) आपकी बातें साबित करती हैं कि आप में समझ है या नहीं, और (2) मूर्खतापूर्ण बातें करनेवालों या गलत तरीके से बोलने वालों के लिए देह-शासन ही उचित है। दूसरे खंड के अंत में प्रयुक्त काकपद – गायब शब्द –”निर्बुद्धि,” को पहले खंड से समझा जा सकता है।
परमेश्वर और सुलैमान ने हमें बहुमूल्य बुद्धि दी। यहां जीवन के लिए इस बात पर सलाह दी गई है कि लोगों के मनों को कैसे परखे और उनके साथ कैसा व्यवहार करें। जिन अच्छे लोगों के मन बुद्धिमान होते हैं वे ज्ञान, धर्मी सलाह और खरी बुद्धि व्यक्त करते हैं, और इसे वे अनुग्रहपूर्ण और प्रेमपूर्ण तरीके से करते हैं। अधर्मी मनवाले मूर्ख अपनी राय और जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं के बारे में बडबड करते हैं; वे लगभग हर चीज़ के बारे में शिकायत करते हैं, और वे इसे नफ़रती और परेशान करने वाले तरीके से करते हैं।
क्या ही अनमोल बुद्धि है! मूर्ख लोग अक्सर यह कहेंगे, “तुम मेरे मन को नहीं जानते। मैं अच्छा व्यक्ति हूं। मैं समझदार हूँ।” लेकिन ये सब उनकी अधर्मी बातों और कार्यों को उचित ठहराने के लिए झूठे बहाने हैं। नीतिवचन की पुस्तक का एक मुख्य सबक है व्यक्ति की बातों से उसके चरित्र की पहचान करना (नीतिवचन 10:19,21,32; 12:13; 14:3,7; 15:7; 16:2; 17:7,27-28; 18) :7; सभोपदेशक 10:12)। यीशु और उसके प्रेरितों ने भी इस अटूट संबंध को समझाया (मत्ती 12:33-37; याकूब 3:1-12)।
पाठक! क्या आपके मुंह के वचन आपको मूर्ख व्यक्ति साबित करते हैं या बुद्धिमान व्यक्ति साबित करते हैं? यह बताना आसान है। क्या आप बाइबल के आधार पर अपने मुंह की बातों को उचित ठहरा सकते हैं? क्या आपके ज़रूरत से ज्यादा मित्र हैं? क्या दूसरे लोग आपका बहुत आदर करते हैं? क्या दूसरे अक्सर आपसे सलाह लेते हैं? यदि आप इन सभी चार प्रश्नों का सकारात्मक उत्तर दे सकते हैं, तो आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं। यदि कुछ प्रश्नों के नकारात्मक उत्तर मिलते हैं, तो आप मूर्ख हैं। परमेश्वर के सामने अपनी मूर्खता कबूल करो। अपनी जीभ पर नियंत्रण रखने उससे सहायता के लिए प्रार्थना करें।
पाठक! क्या दूसरे आपको दयालु व्यक्ति मानते हैं या घृणास्पद, भला व्यक्ति मानते हैं या कटु, मददगार व्यक्ति मानते हैं या आहत करने वाला, परिस्थितियों को समझनेवाला व्यक्ति मानते हैं या आलोचना करनेवाला, शांत व्यक्ति मानते हैं या ताने मारनेवाला, प्रिय व्यक्ति मानते हैं या दूसरों की मुसिबतों पर हँसने वाला, विवेकशील व्यक्ति मानते हैं या मज़ाक करने वाला? इन विरोधाभासों के सच्चे उत्तर आपके चरित्र को प्रकट करते हैं। परमेश्वर के सामने अपने को नम्र करें। अपने शब्द आधे से भी अधिक कम करें। अपनी वाणी धीमी कर दें। जब तक आपके पास कहने के लिए कोई महत्वपूर्ण बात न हो, चुप ही रहें। बोलने से पहले परिस्थिति को समझे, मामले का पता लगाएं। अपनी बातों में हमेशा अनुग्रहपूर्ण और सकारात्मक रहें। आज ही किसी की प्रशंसा करें।
आपके शब्दों से यह भी पता चलता है कि आप आप सांसारिक मन के हैं या आत्मिक मन के। यीशु मसीह का शत्रु बनना बिलकुल आसान है – आपको बस इस दुनिया की चीजों की चिंता करनी है, और आप यीशु मसीह को अपना शत्रु बना लेंगे (मत्ती 6:24; फिलिप्पियों 3:18-19; याकूब 4:4; 1 यूहन्ना 2:15-17)। आप यीशु मसीह के शत्रु को कैसे पहचान सकते हैं? बस आप व्यक्ति की बातों को सुने। वे अपनी नौकरी या व्यवसाय, स्वास्थ्य, राजनीति या वर्तमान घटनाओं के बारे में बातें करते हैं। आप कितना ही ध्यान से सुने, आप उनके मुंह से कभी मसीह की प्रशंसा, खरी धर्मशिक्षा की प्रशंसा, या हार्दिक धन्यवाद नहीं सुन पायेंगे।
इसके अलावा, आपके शब्दों से यह भी पता चलता है कि आप के मन में किस हद तक दूसरों के लिए प्रेम है या किस हद तक नफरत है। यदि आप अन्य विश्वासियों से प्रेम करते हैं, जो अनन्त जीवन का सबसे बड़ा प्रमाण है, तो आप हमेशा उनके बारें में अच्छी बातें करेंगे, और उनसे अच्छी बातें कहेंगे। जो व्यक्ति अक्सर चुगली करने, शिकायत करने, निंदा करने, पीठ पीछे बुराई करने या कानाफूसी करने का दोषी होता है, वह न केवल मूर्ख होता है, बल्कि शैतान की संतान भी होता है (यूहन्ना 8:44; 1 कुरिन्थ 3:3; तीतुस 3:3; याकूब 3: 14-18; 1 यूहन्ना 3:1-19)।
मूर्खतापूर्ण बातें करनेवाले व्यक्ति के लिए शारीरिक दंड सबसे अच्छा उपचार है (नीतिवचन 26:3)। यदि वह व्यक्ति आपका बच्चा है, तो आप को छड़ी और डांट का उपयोग करते हुए उसे उसी मार्ग की शिक्षा देनी है जिसमें उसको चलना चाहिए (नीतिवचन 22: 6; 29:15)। यदि यह आपकी होनेवाली पत्नी, या होनेवाला पति है, तो रिश्ता ख़त्म कर दें। यदि यह एक दोस्त है, तो मित्रता छोड़ दें और आप आसानी से नए और बेहतर दोस्त ढूंढ सकते हैं (नीतिवचन 9:6; 13:20; 14:7)। अपने मित्र बनने के लिए बुद्धिमान लोगों को चुनो, जिनके वचनों में बुद्धि पाई जाती है, क्योंकि ऐसे मित्र आपको भी बुद्धिमान बनाएंगे (नीतिवचन 22:11; भजन 119:63)।
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