नीतिवचन 10:1
सुलैमान के नीतिवचन। बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख पुत्र के कारण माता उदास रहती है।
यह याद रखना अच्छा है कि बुद्धि के रत्न जिन्हें नीतिवचन कहा जाता है, किसने लिखें। उसने ये नीतिवचन मुख्य रूप से अपने बेटे और जवानों को सम्बोधित किएँ, इसलिए प्रत्येक पुत्र के लिए यह समझना ज़रूरी है कि उसका अपने माता-पिता के साथ क्या रिश्ता है। जब तक वह खुद पिता नहीं बन जाता तब तक वह उस आनंद और दुःख को नहीं समझ पाएगा जो उसके जीवन में उसके फैसलों और कामों के कारण आते हैं। इसलिए प्रत्येक युवक को चाहिए कि वह अपने पिता, अपनी माता और अपने स्वर्गीय पिता, अर्थात् परमेश्वर की बातों की ओर समझ के साथ ध्यान दे।
सुलैमान ने बाइबल में नीतिवचन लिखे, जिनमें यह नीतिवचन भी शामिल है। आप कितने धन्य हैं कि दुनिया का अब तक का सबसे बुद्धिमान राजा आपका निजी सलाहकार बना है। और उसने जो तीन हज़ार नीतिवचन लिखें उनमें से परमेश्वर ने इन कुछ नीतिवचनों को उसे चुनने के लिए प्रेरित किया (1 राजा 4:32)। धर्मी लोग स्वर्ग से उतर आए इस गुप्त बुद्धि को पाकर आनन्दित हो सकते हैं जिसे संक्षिप्त रूप से परिभाषित किया गया है और उनके और उनके परिवारों के लिए छोटे छोटे खण्डों और सारगर्भित कथनों के रूप रचा गया है ताकि वे उनका व्यावहारिक लागुकरण करें। परमेश्वर, आपके दिव्य पुस्तकालय के लिए जो आपने बाइबल और नीतिवचन में दे रखी है, आपका धन्यवाद।
दुनिया जैसे चाहे वैसे बाइबल का उपहास कर सकती है और उसका मज़ाक उड़ा सकती है। इस दुनिया के दुष्ट लोग अगर बंदरों को अपने पूर्वजों के रूप में, कर्ज़ को अपनी ग़रीबी के रूप में, बिगड़े हुए अनियंत्रित बच्चों को अपने भविष्य के रूप में, आलसी कर्मचारियों को अपने मानवबल के रूप में, भ्रष्ट राजनेताओं को अपनी सरकार के रूप में, स्त्रीवादी औरतों को अपनी पत्नियों और माताओं के रूप में, ट्रांसजेंडर शरीर-विकृति को अनमोल बात के रूप में, और वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को अपने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के रूप में देखते हैं तो देखने दो। विपत्ति की लिखावट पहले से ही दीवार पर है, और यह और भी बदतर होगी। आख़िर में विश्वासियों का शासन होगा! जल्द ही (रोमियों 8:17-23; 1 कुरिन्थ 3:21-23; प्रकाशितवाक्य 22:12)!
नीतिवचन की पुस्तक के पहले नौ अध्याय परिचयात्मक हैं, जिनमें उस शिक्षा का आगे विस्तार से वर्णन किया गया है जो दिव्य बुद्धि को पापपूर्ण मूर्खता के ठीक विपरीत दिखाती है। इस नीतिवचन से हमें इस बात का परिचय दिया जाता है कि अधिक उचित नीतिवचन कौन-से हैं – छोटे-छोटे स्वतंत्र वाक्य जो जीवन के हर क्षेत्र के लिए गहन बुद्धि की स्थापना करते हैं। हालाँकि पूरी किताब नीतिवचन हैं, फिर भी यहाँ से आगे स्वतंत्र रूप से कुछ अलग-अलग रत्न हैं जो आपका मोहित ध्यान पाने के योग्य हैं ताकि आप उनके हर पहलू का आनंद लेने के लिए उनकी सावधानीपूर्वक जाँच कर सकें।
इस खंड में जो सबसे पहला नीतिवचन है, वह इस ओर इशारा करता है कि माता-पिता के आनन्द और मुक्ति के लिए बच्चों का भक्तिपूर्ण प्रशिक्षण कितना महत्वपूर्ण और मूल्यवान है। यदि ये नीतिवचन बच्चों को सिखायें जाते हैं और उनसे उनके पालन की मांग की जाए, तो ऐसे माता-पिता अनुभव से जान लेंगे कि भक्तिपूर्ण वंश की सिद्ध आशीष क्या होती है, जिससे परमेश्वर की महिमा होगी और खुद उन्हें भी बड़े आनन्द की प्राप्ति होगी। पर यदि इन नीतिवचनों की उपेक्षा की जाती है, तो भविष्य अंधकारमय है, आशीष और आनन्द के बजाय विपत्तिपूर्ण मन का भारीपन है।
पुत्रों, क्या तुमने आज अपने माता-पिता के बारे में सोचा? तुम्हारे जन्म से पहले ही दोनों तुम्हारे उम्र की ज़िन्दगी जी चुके हैं। उस हिसाब से, वे अब इतने बुद्धिमान हो चुकें हैं जितना तुम अब तक नहीं हो! तुम्हारे जन्म के बाद से, उन्होंने बहुत अधिक बुद्धि और अनुभव पा लिया है, जबकि तुम्हें चलना सीखने और भोजन को कान के बजाय मुंह में डालकर खाना सीखने में वर्षों लग गए। तुम इतने पीछे हो कि तुम्हें किसी भी चीज पर विचार करने तुम्हारे हाल पर छोड़ देना डरावना है। मेरी बात पर या तो विश्वास करो, या अपनी नादानी के नतिजें भुगतो।
जब आपकी प्यारी माँ आपको अपनी गोद में लेकर चलती थी तब तपती धूप से उसका सिर चकराया होगा, ठण्ड और गर्मी दोनों को सहा होगा और आपके भार से उसकी बाजुओं में अकड़न आयी होगी, पर फिर भी, वह पहले से ही आपसे प्रेम करती थी और आपके जीवन के लिए उसके मन में अद्भुत विचार थे, क्योंकि उसने घर में आपके लिए अच्छी-अच्छी सजावट की थी, और आपका बिस्तर साफ़-सुथरा रखती थी। उसके पेट में आपकी गर्भावस्था, आपका जन्म और आपको दूध पिलाने से उसके शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ा, फिर भी वह लगातार आप पर फिदा रहती थी। वह आपकी गंदगी साफ़ करती थी और आपको रोज़ कई बार खाना खिलाती थी, और आप केवल और अधिक खाने के लिए रोते थे।
बाद में, जब आप तिपहिया साइकिल के लिए रोए होंगें, फिर बड़ी साइकिल के लिए, तो आपके पिता ने अपना व्यक्तिगत समय, आपकी माँ के साथ अपना कीमती वक़्त, जीवन की ख्वाइशें, सब कुर्बान कर दी होगी, अपनी नौकरी पर ज्यादा वक़्त गुज़ारा होगा, अपना पैसा, अपना घर, अपनी कार और कई अन्य चीजों का प्रबंधन किया होगा। और यह सब सिर्फ आपके लिए। उसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हारे लिए एक भली औरत को चुना कि वह तुम्हारी माँ बने और उसका भरण-पोषण किया, और प्रतिदिन तुममें निवेश किया, एक बुद्धिमान और धर्मी पुत्र की आशा की, जो परमेश्वर और मनुष्य दोनों की कृपा में डीलडौल में बढ़ेगा।
लेकिन अधिकांश बेटे इतने स्वार्थी, भविष्य के प्रति इतने अंधे, समझ में इतने मूर्ख और कामों में इतने अनाड़ी होते हैं कि उन्हें यह पता ही नहीं होता कि उनके कार्य उनके माता-पिता की प्रतिष्ठा के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। वे अगले पांच मिनट से आगे नहीं सोच पाते और उनका एकमात्र विचार उन पांच मिनटों को आनंद से भरना होता है। माता-पिता होने की जिम्मेदारी उनकी सोच और समझ से कहीं अधिक है, भले ही वे चमत्कारिक रूप से समझने का प्रयास करने की कोशिश करते हो। जब तक वे खुद एक बाप नहीं बन जाते तब तक भविष्य का कोई विचार उनके दिमाग में नहीं आएगा, और केवल बाप बनने पर ही वे चिंतन से समझ पाएंगे कि उनके माता-पिता ने उनके लिए कितना कुछ किया और वे कितने अधिकार के योग्य थे।
मूर्ख पुत्र अपने पिता के लिए विपत्ति ठहरता है (नीतिवचन 19:13)। यह उसके सबसे बुरे सपनों में से एक है। इतना समय, खर्च, कोशिश और लाड़-प्यार को बर्बाद होते देखने का दर्द उसकी आत्मा से जीवन छीन लेता है। उसकी मूर्खता उसके मन और आत्मा पर वार करता है। देखें कि दाऊद कैसे अपने मूर्ख पुत्र अबशालोम के लिये रोता है, “तब राजा बहुत उदास हुआ, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा; और चलते-चलते यह कहता गया, “हाय मेरे बेटे अबशालोम! मेरे बेटे, हाय! मेरे बेटे अबशालोम! भला होता कि मैं आप तेरे बदले मरता, हाय! अबशालोम! मेरे बेटे, मेरे बेटे!!” (2 शमू 18:33)। अविश्वासी लड़कियों से विवाह करने में एसाव ने जो मूर्खता कीं तब इसहाक और रिबका दोनों को जो दुःख हुआ उस पर विचार करें (उत्पत्ति 26:34-35; 27:46)।
यदि कोई पुत्र इन बातों पर विचार करेगा और बुद्धिमान बनेगा, तो उसका पिता उस पर आनन्दित होगा। ” हे मेरे पुत्र, बुद्धिमान होकर मेरा मन आनन्दित कर, तब मैं अपने निन्दा करनेवाले को उत्तर दे सकूँगा” (नीति 27:11)। सुलैमान एक भयानक परिवार में जन्मा था, और वह एक बुद्धिमान और चरित्रवान बेटे के कारण होनेवाले आनन्द से भलीभांति परिचित था, इसलिए उसने इस मुद्दे को बार बार उठाया (नीतिवचन 15:20; 17:21,25; 19:13; 23:15-16,24- 25; 29:3)।
यही बात आपकी माँ के मामले में है, आप उसके मन के लिए आनंद का एक बड़ा झरना बन सकते हैं (नीतिवचन 23:25)। या आप कड़वे भारीपन का एक दर्दनाक झरना बन सकते हैं (नीतिवचन 17:25; 29:15)। मनमौजी और स्वेच्छाचारी बच्चों ने कितनी माताओं का दिल दुखाया है? इतनी बड़ी संख्या केवल प्रभु ही जानता है! वह मन जो नवजात शिशु की देखभाल करते समय प्रतिदिन प्रेम और खुशी से फूट पड़ता था, एक पथभ्रष्ट पापी किशोरवयीन की क्रूर अवज्ञा और मूर्खता के कारण गहराई से टूट जाता है।
बच्चे, यदि जरूरी हो तो अपने माता-पिता के लिए जन्मदिन के कार्ड बनाना, उन्हें शादी की सालगिरह पर तोहफ़े देना और ऐसी बाकी सब चीजें भूल जा। लेकिन बुद्धि और धार्मिकता को मत त्याग – ये दो चीजें माता-पिता को कहीं अधिक खुशी और प्रसन्नता देंगी। अपने माता-पिता को रात्रिभोज पर ले जाने के बजाय, अपनी पत्नी और बच्चों को रात्रिभोज पर ले जाएं और उन्हें एक आदर्श ख्रिश्चन पति और पिता के रूप में प्यार करें। इसका अर्थ बाकी सब बातों से बढ़कर होगा।
आज ही अपने पिता का सम्मान करें। उसके निर्देशों का पालन करें। उसकी आज्ञाओं को मानो। उसकी चेतावनियों पर ध्यान दें। उसके प्रश्नों का उत्तर दें। उससे खुलकर बातचीत करें। उन्हें भी आपसे मन खोलकर बातें करने दें। आप जीवन में कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिलेंगे जो आपकी उतनी ही परवाह करता हो जितनी आपके पिता आपकी परवाह करते हैं। परमेश्वर ने उसे अरबों पुरुषों में से सिर्फ आपके लिए चुना है। इस पर विश्वास करो।
आज ही अपनी मां का सम्मान कर। उसके मुंह की व्यवस्था को मान। आज ही उसके सरल अनुरोध कर कि वह तुझे कोई आदेश दे। अपना बिस्तर खुद तैयार कर। अपना कमरा खुद ही साफ कर। सद्गुणी बन। मूर्ख लड़कियों और लम्पट स्त्रियों से दूर रह। ” अपने जन्मानेवाले पिता की सुनना, और जब तेरी माता बुढ़िया हो जाए, तब भी उसे तुच्छ न जानना” (नीति 23:22)। उसने अपने जीवन का बड़ा भाग तेरे लिए ही दिया है, और अब भी वह तुझसे ही जुड़ी हुई है। इसके लिए उसके साथ अच्छा व्यवहार कर।
पिताओं, इस नीतिवचन पर तुम खुद भी विचार करो। तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों के लिए भविष्य में आनन्द मिलेगा या दिल का दर्द, यह आज काफी हद तक इस बात पर निर्भर है कि आप आज क्या फैसलें लेते हैं। क्या आप अपने बच्चों को पूरी विश्वासयोग्यता से प्रेम करते हुए उन्हें धार्मिकता में प्रशिक्षित करेंगे, या आप उनकी उपेक्षा करेंगे और अन्त में अपनी और अपनी पत्नी के दिल को छलनी करेंगे? फैसला आपका है। इस नीतिवचन की बुद्धि दोनों तरफ से बेधती है। क्या आप खुद को बुद्धिमान और विश्वासी बच्चों के पिता कहलाने के योग्य समझते हैं? या क्या आप कई अन्धकारमय वर्षों तक केवल सामाजिक शर्मिंदगी और सामाजिक उपहास के लायक हैं जो आलसी माता-पिता के रूप में आपकी पोल खोल देगा? विश्वासयोग्य शिक्षा प्रतिफल लाएगी – आने वाले समय में वे उससे दूर नहीं होंगे (नीतिवचन 22:6)।
ख्रिश्चन पाठक, क्या आप स्वर्ग में विराजमान अपने पिता का आदर करते हैं? यदि आप परमेश्वर की संतान हैं, तो वह अत्यन्त प्रेमयुक्त और व्यक्तिगत रूप से आपका पिता है। उसने आपको अपनी कृपा से अपनाया जो उसने आप पर जगत की उत्पत्ति से पहले कीं, अपने एकलौते पुत्र को आपके लिए मरने दे दिया, और उसने आपको अपने पुत्र के साथ विश्व का संगी वारिस बनाया (इफि 1: 3-6; रोमियों 8: 15-17)। आप जितनी समझदारी से इस संसार की मूर्खता का त्याग करेंगे और परमेश्वर की खोज करेंगे, वह आपसे उतना ही अधिक प्रसन्न होगा और आपके करीब आएगा (2 कुरिन्थ 6:14-18; याकूब 4:8; 1 इतिहास 28:9; 2 इतिहास 15:2; प्रकाशितवाक्य 3:20)। यदि तुम उसे कष्ट दोगे, तो वह तुम्हें कष्ट देगा (1 शमू 2:30)।
यीशु मसीह मरियम, जोसेफ और परमेश्वर के लिए आदर्श पुत्र था। बाइबल स्पष्ट रूप से हमें बताती है कि वह अपने सांसारिक माता-पिता की आज्ञा का पूरा पालन करता था (लूका 2:51)। एक स्त्री ने जब उसे देखा, तो वह तुरन्त जान गई कि मरियम एक बहुत ही धन्य माँ थी (लूका 11:27)। उसकी प्रसन्न माता उसके जीवनकाल में हमेशा उसके साथ साथ चलती थी और उसने उसे मरते हुए देखा (यूहन्ना 19:25-27)। और स्वर्ग में उसके पिता का क्या? सुनो, वह क्या कहता है, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ” (मत्ती 3:17)। उसके आदर्शों पर चलें।
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