नीतिवचन 1:6

जिससे वे नीतिवचन और उसके अर्थ को समझे; बुद्धिमानों की बातों को और उनकी रहस्यमय गुप्त बातों को समझे।

परमेश्वर ने आपके लिए नीतिवचन की पुस्तक को प्रेरित किया। भोले और युवाओं को बुद्धि की शिक्षा देने का कार्य बाइबल से ही होता है (नीति. 1:1-4)। बाइबल बुद्धिमानों को ज्ञान के नए स्तरों पर भी ले जा सकती है (नीति 1:5-6)। परन्तु अवश्य है कि नीतिवचन में दी गई बुद्धि का अध्ययन सुलैमान के संक्षिप्त, रहस्यमय गुप्त वचनों में ध्यानपूर्वक किया जाए। लापरवाह या आलसी लोग कुछ भी सीखने से पहले ही हार मान लेते हैं (2 तीमु: 3:6-7; 4:3-4)।

यहां कोई उबाऊ या घुटन भरी परिकल्पनाएं नहीं हैं जिन्हें समझना और उनका व्यवहारिक उपयोग करना मुश्किल हो। बल्कि, यहाँ जीवन के संक्षिप्त, गूढ़ अवलोकन हैं जो आपको मानवीय अनुभव और सफलता के विश्वसनीय नियमों के सन्दर्भ में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं। कुलीन और बुद्धिमान लोग इस अतुल्य उपहार को पहचान लेंगे और इतिहास के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति की इन अस्पष्ट बातों को सीखने के लिए अपने आप को समर्पित कर देंगे (नीति 1:5-6)।

राजा सुलैमान एक उपदेशक भी था – क्योंकि उसने अपने लोगों को ज्ञान सिखाने के लिए अपनी महान बुद्धि, सामाजिक प्रयोगों, और तत्वज्ञान की खोजबिनो का उपयोग किया (सभो. 12:9-11)। उसने नीतिवचनों के अपने संग्रह को एक बड़ी उपलब्धि माना। उसने इस कार्य को प्राथमिकता दी, सर्वोत्तम नीतिवचनों की पहचान की और उन्हें क्रमबद्ध किया। उसने केवल सर्वोत्तम शब्दों का उपयोग किया और उन्हें उस परम-सत्य तक सीमित कर दिया जिसकी मंजूरी परमेश्वर ने दी। उसने जो 3,000 नीतिवचन लिखे और अन्य जिनकी उसने ख़ोज की उन में से उसने नीतिवचन की पुस्तक के लिए 500 या उससे अधिक नीतिवचन चुने (नीति 30:1; 31:1; 1 राजा 4:32)।

नीतिवचन की पुस्तक से बुद्धि सीखने के लिए परिश्रम करना आवश्यक है। ये नीतिवचन राजनेताओं के शोर-शराबे, अधिकांश पुल्पिट्स पर से प्रचारित किए जाने वाले कथा-कहानियों, प्रसार माध्यमो में प्रयुक्त होने वाले सनसनीखेज शब्दों, और स्कूली पाठ्यपुस्तकों के मुर्खता से भरे शब्दों के विपरीत हैं। नीतिवचन रहस्यमय गुप्त बातें हैं : वे पहेलीनुमा दृष्टान्त हैं (यूह. 16:25, 29)। उनका सबक अस्पष्ट है। सबसे पहले, उनकी व्याख्या करने और फिर उनका व्यवहारिक लागूकरण किया जाना आवश्यक है, अन्यथा आप उस सबक से चूक जाएंगे जो इन रहस्यमय गुप्त बातों की सतह के निचे दफ़न हैं। जो लोग सुलैमान के नीतिवचनों को लगन से खोद-खोदकर ज्ञान में बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए बुद्धि का बेशकिमती ख़जाना रखा हुआ है।

आप का जन्म कई कमज़ोरियों के साथ हुआ, और अवश्य है कि आप उन पर परमेश्वर की सहायता से जय पाएं। सभी मनुष्य जन्म से ही पथ-भ्रष्ट हृदयों के होते हैं, और उनके हृदय उनसे झूठ बोलते हैं (नीति. 14:12; 28:26; यिर्म. 17:9)। इस संसार की सारी विद्या व्यर्थ है (यशा. 8:20; 1 कुरि. 1:19-20; 3:19-20; 1 तिमु. 6:20-21)। ज्ञान के बस कुछ ही शिक्षक बचे हैं (आमोस 8:11-12; 2 तीमु. 3:6-7; 4:3-4)। और आप ने एक आलसी और चंचल पीढ़ी में जन्म लिया है। एमटीवी की दीवानी इस पीढ़ी के लिए नीतिवचन समझना तो और भी ज्यादा कठिन हैं, इनमें से कईयों को वीक्षण प्रणाली या अभद्र तरीके से बोलना या पढ़ना सिखाया गया था जिसे विदेशों में एबोनिक्स प्रणाली कहा जाता है।

नीतिवचन को समझने में होनेवाली कठिनाई का विरोध करने के बजाय, आपको इन वचनों के बीच छिपे गुप्त ज्ञान की विशाल लूट को पाकर आनन्दित होना चाहिए (नीति. 2:4-5; भजन 119:162)। इनके अध्ययन के लिए जो आवश्यक मेहनत करनी होती है, उसपर दुखी होने के बजाय इसमें निहित बौद्धिक चुनौती और उन्हें हासिल करने तथा उन्हें अपने जीवन में लागू करने के आत्मिक लाभ के विषय में उत्साहित होईये (अय्यूब 23:12; भजन 119:96, 104, 111)। चूंकि वे कठिन हैं, इसलिए अधिकांश अन्य लोग कभी भी वह बुद्धि नहीं सीखेंगे जो आप से प्रतिस्पर्धा कर सके। इस अवसर को अपनी गिरफ़्त में ले लीजिए!

ये परमेश्वर के वचन हैं। ये अब तक के सबसे बुद्धिमान राजा और दार्शनिक के वचन हैं। ये नीतिवचन आपको आपके जीवन में आने वाले संकटों से बचाएंगे। ये नीतिवचन आनन्द और सफलता दिलाएंगे। ये नीतिवचन आपको बुद्धि सिखाएंगे – अर्थात् जीवन की उन सभी परिस्थितियों में जिनका आप सामना करेंगे आप में उनकी सही-सही परख करने की सामर्थ्य होगी। ये नीतिवचन आपको इस बात का ज्ञान देंगे कि दूसरों के साथ जो कुछ होता है वह क्यों होता हैं। आपको अन्य लोगों से अधिक समझ प्राप्त होगी। आप दूसरों को सत्य और बुद्धि की बातें सिखाने में सक्षम बन जाएंगे (नीति 11:30; 22:17-21)।

परमेश्वर ने ऐसी रहस्यमय बातों को, जिन्हें समझना कठिन है, लिखने के लिए क्यों प्रेरित किया? क्योंकि सफलता, सत्य और बुद्धि जन्मसिद्ध अधिकार नहीं हैं। वे उन लोगों के लिए परमेश्वर के अनुग्रह से प्राप्त सौभाग्य हैं जो उनका परिश्रमपूर्वक अध्ययन करने के लिए स्वयं को नम्र कर देते हैं (नीति. 1:7; 2:1-9)। बुद्धि उन लोगों का उपहास करती है जो जोशीले और सरगर्म नहीं हैं (नीति. 1:24-33; 8:36)। परन्तु बुद्धि उन लोगों के लिए अपने आप को मुफ्त ही प्रस्तुत करती है जो उसे पाने का जूनून रखते हैं (नीति. 8:17)।

यीशु ने अक्सर दृष्टान्तों में बातें की, जो कि केवल लम्बे नीतिवचन हैं। क्यों? इसलिए कि वह अपने सुननेवालों में से अधिकांश को भ्रमित करे जो सत्य सुनने के योग्य नहीं थे (मत्ती 13:10-17)। यदि आप सत्य को सीखने और बुद्धि प्राप्त करने के उसके द्वारा प्रस्तुत अवसरों की उपेक्षा करते हैं, तो स्वर्ग के महिमामयी परमेश्वर ने आप से उस छोटी सी समझ को भी, जो आपको लगता है कि आपके पास है, छीन लेने की प्रतिज्ञा की है (लूका 8:18; 66:4)।

आपको चेतावनी दी जा चुकी है। आपको प्रतिदिन एक नीतिवचन को पढ़ने की आवश्यकता है और फिर लगन से उसे समझने की कोशिश करनी है। बुद्धि उदारता से दी जाती है (नीति. 8:1-11; 9:1-12)। और बुद्धि की प्राप्ति आपके जीवन का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए (नीति. 4:5-9)। तो फिर, परमेश्वर की बुद्धि प्राप्त करने के लिए अपने आप को समर्पित करें (नीति. 18:1-2)। आप इन रहस्यमय गुप्त नीतिवचनों से प्रेम रखें और उन्हें सीखें जो विशाल मूल्य और आनंद प्रदान करते हैं (भजन 19:7-11)।

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