नीतिवचन 1:33
परन्तु जो मेरी सुनता है सो चैन से रहेगा, और विपत्ति के भय से बचा रहेगा।
शांति और सुरक्षा, या भय और विनाश? कितना फर्क है! बुद्धि नाम की कुलीन स्त्री आप के सामने एक अच्छा और कल्याणकारी जीवन रख रही है। मनुष्यों के जीवन उनके अपने मूर्खतापूर्ण चुनाव और परमेश्वर के न्याय के कारण कितने भिन्न होते हैं यह देखना अचम्भित कर देता है। शांति और सुरक्षा अनमोल हैं – ये आज ही से आपकी हो सकती हैं।
चुनाव आपको करना है। परमेश्वर अपने वचन के द्वारा बुद्धि को आपके सामने रखता है। यदि आप इसे अनदेखा करते हैं, या देखकर भी ठुकरा देते हैं, तो जब भय और विपत्ति आप पर आ पड़ेंगे, तब वह आप पर हँसकर ठट्टा उड़ाएगा, और ये दोनों – अर्थात् भय और विपत्ति आएंगे ही। जब आप अपनी विपत्ति में उससे सहायता के लिए पुकारेंगे, तब वह आपको छोड़ देगा और आपकी पुकार को न सुनेगा (नीति 1:24-32)।
यदि आप बुद्धि से प्रीति रखते हैं, और उसे ऊंचा उठाते हैं, तो परमेश्वर आपको मन की शांति देकर आशीषित करेगा। चुनाव आपको करना है। मूर्खता के परिणाम संगीन होते हैं। बुद्धि को चुनें! नबूकदनेस्सर ने दानिय्येल की चेतावनी तो सुनी, परन्तु उसने उसे न माना; परिणामस्वरूप, उस ने सात वर्ष चरागाह में बिताए (दानिय्येल 4:27-33)। दाऊद को परमेश्वर की शांति और सुरक्षा मिली, और वह जानता था कि वे संसार की सर्वोत्तम वस्तुवों से बेहतर थीं (भजन 4:6-8)।
इस नीतिवचन का आरम्भ भेदसुचक शब्द “परन्तु” से होता है, जो कि एक विपरीत बात की ओर संकेत है। सुलैमान ने बुद्धि को एक स्त्री के रूप में प्रकट किया (नीति 1:20-23), और इस बुद्धि नामक कुलीन स्त्री ने मनुष्यों को चिताया कि बुद्धि के उसके वरदान की उपेक्षा करने का परिणाम भयानक क्लेश और विपत्ति के रूप में सामने आएगा (नीति 1:24-32)। एक बुद्धिमान व्यक्ति स्वयं ही जीवन की अधिकांश परेशानियों से अपने को बचाता है, लेकिन मूर्खों को कड़ी सजा दी जाती है, और दोहराई जातीं है (नीति 8:36; 13:15; 22:3)।
मन की शांति अनमोल है। यही अच्छा जीवन है। यह ठहराव, आनंद, शांति, और सुरक्षा है। इसका मार्ग तो एक ही है, किन्तु द्वार दो हैं। वह एक ही मार्ग बुद्धि है। केवल वे जो परमेश्वर का भय मानते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, जो कि सच्ची बुद्धि है, उन्हें ही मन की शांति मिलेगी। हम इसे दो स्रोतों से पाते हैं – पहला, सही निर्णयों से प्राप्त आशीषित नतीजे, और दूसरा, परमेश्वर का अद्भुत अनुग्रह।
इसे सोचकर समझे। यदि आप परमेश्वर के नियमों को मानकर बुद्धिमानी से विवाह करते हैं, तो फिर आपका जीवन एक कुलीन स्त्री के साथ शान्ति और सुख से गुज़रेगा, जबकि अन्य पुरुष किसी निंदनीय या व्यभिचारिणी के साथ दुख और क्लेश को भोगेंगे (नीति 12:4; 30:21-23; 31:10-31)। यदि आप परमेश्वर का सम्मान करने के लिए किसी ऐसी स्त्री से विवाह करते हैं जो परमेश्वर का भय मानती है (नीति 31:30; 1 कुरिं 7:39; 11:11), तो वह अपने ईश्वरीय सामर्थ्य से आपको और भी आशीष देगा (1 शमू 2:30; भजन 37:4; 84:11)।
इसे सोचकर समझे। यदि आप अपने बच्चों को परमेश्वर के तरीके से प्रशिक्षित करते हैं, तो आपको एक धर्मपरायण और कुलीन परिवार के साथ शांति और आनंद की प्राप्ति होगी, जबकि अन्य मनुष्य मूर्ख और उपहास करनेवाली सन्तान के माता-पिता के रूप में अपने नाम पर कलंक लगा हुआ पीड़ादायक जीवन भुगतेंगे (नीति 10:1; 15:20; 17:21, 25; 29:15)। यदि आप उन्हें परमेश्वर के मार्ग का प्रशिक्षण देते हैं (नीति 22:6, 15; 23:13-14), तो वह उन पर अनुग्रह कर आप को भी आशीष देगा (भजन 112:1-3; 37:26; 25:12-13)।
इसे सोचकर समझे। यदि आप कड़ी मेहनत करते हैं, पैसों की लगातार बचत करते हैं, और ऐसे व्यापार या वित्तीय घोटालों से बचते हैं, तो आप समृद्ध और सफल होंगे, जबकि अन्य मनुष्यों को एक खराब कार्यकाल और ग़लत निवेश के निर्णयों के कारण भयावह परिणाम भुगतने होंगे (नीति 13:23; 14:23; 21:20; 28:19)। यदि आप परमेश्वर के नियमों का पालन करते हैं (नीति 12:24; 27:18; 30:25),तो वह आपको अलौकिक रूप से आशीष भी देगा (नीति 3:9-10; 11:24-28; 19:17)।
बुद्धि असाध्य या जटिल नहीं है। उस का आरम्भ परमेश्वर का भय मानने से होता है (नीति 1:7; 9:10)। और उसकी आज्ञाओं को मानना बुद्धि का परम लक्ष्य है (नीति 3:7; 16:6; अय्यूब 28:28; भजन 111:10; 112:1; 119:128; सभो 12:13)। परमेश्वर ने बाइबल में सिद्ध ज्ञान और बुद्धि को प्रकट किया है, और बाइबल सीखने और उसका पालन करने से मनुष्य और देश को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होगी (व्यवस्थाविवरण 4:5-6; भजन 1:1-3; 19:7-11; 144:15)।
सुलैमान ने स्वप्न में परमेश्वर से जो वरदान मांगा, उस कारण उसने उसे मन की शान्ति दी (1 राजा 3:5-15)। उसने धन, सफलता और दिर्घायु से अधिक बुद्धि को मूल्यवान जाना, इसलिए परमेश्वर ने उसे सम्मान, शांति और धन की भी आशीष दी। परन्तु राजा नबूकदनेस्सर, जो एक धनी और बहुत सफल राजा था, उसने अपनी मन की शांति खो दी, और पाप में बने रहने के कारण एक पशु में बदल गया (दानिय्येल 4:27-33)। प्रिय पाठक, चुनाव आप को करना है।
यहां बड़ी-बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं! बुद्धि आपको सुरक्षित रखेगी, और साथ ही, यह आपको ख़तरों के डर से भी बचाएगी। यह मन की परम-शांति है। आपकी नज़रों के सामने कोई ख़तरा न होगा, और न ही आप के मन या दिमाग में कोई डर होगा। आपका पूरा जीवन साहस से भरा होगा, और रात को आप चैन की नींद सोएंगे (नीति 3:21-26)। यही एक अच्छा और श्रेष्ठ जीवन है, और बुद्धि नामक कुलीन स्त्री यह आपको परमेश्वर की ओर से दे रही है।
परमेश्वर ने दाऊद को जीवनरुपी गठरी में रखा, किन्तु उसने अर्थात् परमेश्वर ने उस के शत्रुओं को मार डाला (1 शमू 25:29)। कितना फर्क है! यदि आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर अपना भरोसा रखते हैं, तो वह आपको उस हर खतरे और जोखिम से बचाएगा जिसे आप न देख सकते हैं, और न सुन सकते (भजन 91:1-16)। यह अतुल्य अद्भुत आशीष धर्मियों के साथ उन के जीवनभर रहती है। आज ही बुद्धि को गले लगाकर अपनाएं!
धर्मीजन अपने साहस के कारण सिंह की नाई निडर होते हैं (नीति 28:1; भजन 46:1-3)। जो परमेश्वर का भय मानते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, उन्हें एक सिद्ध शांति मिलेगी जो मनुष्य की समझ से परे है (नीति 14:26; भजन 25:12-13; 112:7; यशा 26:3-4; फिली 4:6-7)। दाऊद जानता था कि परमेश्वर ने उसे उस के धर्मी जीवन के कारण उस के सभी शत्रुओं को पराजित करने की सामर्थ्य दी थी (भजन 18:16-26)।
दाऊद ने डर का मज़ाक उड़ाया। उसने बिना किसी हथियार के गोलियत को हरा दिया (1 शमू 17:31-51), और यदि कोई सेना उस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा भी करे तौभी उसे इस की कोई परवाह न थी (भजन 27:1-5)। पौलुस ने यीशु मसीह के द्वारा मृत्यु और कब्र का मज़ाक उड़ाया, और बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को आनंद से सह लिया (1 कुरिं 15:54-58; 2 कुरिं 11:23-28)। उस ने अकेले ही कैसर का सामना किया क्योंकि प्रभु यीशु उसके पक्ष में था (2 तीमु 4:16-18)। सभी मनुष्य सुरक्षा को लेकर पहले ही सावधान हो जाते हैं, लेकिन परमेश्वर केवल धर्मी लोगों को आशीष देता है (नीति 21:31; भजन 127:1-2)।
परमेश्वर ने बुद्धिमान नूह को बचाया, किन्तु नूह के चारों ओर के दुष्ट संसार को डुबो दिया। और जब परमेश्वर मूर्खों को अनंतकाल के लिए पीड़ा भोगने के लिए दण्ड देगा, तब वह बुद्धिमान लोगों को आनेवाले क्रोध के दिन वैसे ही बचाएगा, जैसे उसने सन 70 में बुद्धिमान यहूदियों को रोमियों द्वारा किए विनाश से बचाया था (मला 4:1-3; रोम 8:35-39; 1 थिस्स 1:10)। आप जितने बुद्धिमान होंगे, आपको बाहर और अंदर उतनी ही शांति मिलेगी (यूहन्ना 14:27; 16:33; 1 यूहन्ना 4:17-18)। आपको बुद्धि को अपनाने से कौन-सी बात रोक रही है?
प्रिय पाठक, क्या आप आज बुद्धि को कान लगाकर सुन रहे हैं? क्या आप बुद्धि की तलाश कर रहे हैं? उसे से प्रीति रख रहे हैं? और उसकी बात मान रहे हैं? अब परमेश्वर क्या कहता है, सुनो! “वह कौन है जो जीवन की अभिलाषा रखता है और दीर्घायु चाहता है कि भलाई देख सके? अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें बोलने से रोक रख। बुराई से दूर रह, और भलाई कर; शान्ति को ढूंढ़, और उसका पीछा कर। यहोवा की आंखें धर्मियों पर, लगी रहती हैं और उसके कान उनकी पुकार पर लगे रहते हैं। यहोवा दुष्कर्मियों के विमुख रहता है, कि उनका स्मरण भी पृथ्वी पर से मिटा डाले” (भजन 34:12-16)।
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