नीतिवचन 1:30

उन्होंने मेरी मंत्रणा को न माना; उन्होंने मेरी सारी ताड़ना को तुच्छ जाना।

परमेश्वर और बुद्धि आपको त्याग देंगे। जब आपको उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी, और आप उनकी मदद के लिए पुकारेंगे, तो वे जवाब नहीं देंगे और न ही आप उन्हें ढूंढ पाएंगे। क्यों? क्योंकि आपने उनकी मंत्रणा को न माना और ताड़ना को तुच्छ जाना।

कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि, जो परमेश्वर का और उस बुद्धि का प्रतिनिधित्व करती है जिसे वह पवित्र शास्त्र में आप के सामने प्रस्तुत करता है, एक अद्भुत और दयालु स्त्री है जो उस हर व्यक्ति के सामने ज्ञान और समझ को प्रस्तुत करती है जो उसके पास आते हैं। सुलैमान द्वारा बुद्धि का किया गया यह व्यक्तित्वकरण आकर्षक और मनोहारी है (नीति 8:1-5; 9:1-5)।

परन्तु परमेश्वर और बुद्धि के साथ न तो खिलवाड़ किया जाना है और न लापरवाही की जानी है! यदि आप उसे ग्रहण नहीं करते हैं, तो आप अपने ही प्राण पर उपद्रव करते हैं, और मृत्यु से प्रीति रखते हैं (नीति 8:36)। यह आपके जीवन का सबसे गंभीर मसला है, और अवश्य है कि आप इस नीतिवचन पर और इसकी चेतावनी पर बड़ी सावधानी और बारीकी से ध्यान दे (नीति 1:24-32)।

यदि आप बुद्धि को ग्रहण नहीं करते हैं, तो आप इसके परिणामस्वरूप विपत्ति को भोगेंगे। सच्चा परमेश्वर दूर नहीं है (यिर्म 23:23-24; प्रेरितों के काम 17:27)। वह किसी भी मनुष्य को बुद्धि प्रदान करता है (नीति 1:20-23)। लेकिन यहाँ जिन मूर्खों का वर्णन किया जा रहा है, उन्हें बुद्धि के द्वारा कोई मंत्रणा नहीं दी जाएगी – उनके पास न तो समय था और न ही रुचि। इन ठट्ठा करने वालों ने बुद्धि की ताड़ना को तुच्छ जाना – उन्होंने सुधार का विरोध किया। वे अवश्य ही मृत्यु से प्रीति रखते हैं (नीति 8:36)!

इस नीतिवचन में, कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि ने समझाकर बताया कि क्यों उसने कुछ मनुष्यों को आतंक और भय पर छोड़ दिया, और क्यों वह उनकी मदद की पुकार को नहीं सुनेगी (नीति 1:24-31)। बुद्धिमान बनने के लिए उनके सामने जब बुद्धि को रखा गया तब उन्होंने उसके इस अनुग्रहमय वरदान को लेने से इन्कार कर दिया, इस कारण, जब उन पर विपत्ति आ पड़ी तब उसने उनका त्याग करके उन्हें दण्ड दिया। यह सबसे न्यायोचित्त है, और आप इससे व्याकुल या हतोत्साहित होने के बजाय आपको इससे प्रेरणा मिलनी चाहिए। भले ही दूसरे उसे ग्रहण न करें, पर आप अवश्य ग्रहण करें!

बुद्धि क्या है? यह सही सही विवेकशील परख करने की शक्ति है – अर्थात् ठीक ठीक समझने की क्षमता, छिपी हुई त्रुटियों या झूठी बातों को देखने की क्षमता, समतुल्य दिखाई देनेवाली बातों के मध्य बिलकुल सही सही बातों को प्राथमिकता देने की क्षमता, सही बात कहने या सही काम करने की क्षमता। विवेक, ज्ञान, बुद्धिमानी और समझ से इसका निकट सम्बंध है। बुद्धिमान लोग अपने जीवन में दुख और तकलीफों से बच सकते हैं, और इनके स्थान पर शांति और समृद्धि पा सकते हैं। बुद्धि के बिना मनुष्य अपनी ही अज्ञानता और हठीलेपन का शिकार हो जाएंगे।

कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि कैसे मंत्रणा या ताड़ना देती है? सृष्टि एक अनंत सामर्थ्यशाली सृष्टिकर्ता परमेश्वर को प्रमाणित करती है (भजन 19:1-6; रोम 1:18-21)। वह हमें अलग अलग मात्रा में बुद्धि को सिखाने के लिए माता-पिता, पति, नियोक्ता, नागरी शासक और जिस प्रकार यहाँ सुलैमान है, उपदेशक देती है (नीति 1:1-6; सभोपदेशक 12:8-10)। परन्तु उसकी बुद्धि की सबसे बड़ी प्रस्तुति बाइबल, अर्थात् परमेश्वर-प्रेरित पुस्तक में है (व्यवस्थाविवरण 4:6; भजन 1:1-3; 19:7-11; 2 तीमु: 3:16-17)।

आप किस प्रकार बुद्धि की मंत्रणा को या उसकी ताड़ना को ठुकराते या तुच्छ जानते हैं? आप अपने प्रकट सृष्टिकर्ता की उपेक्षा से भरी जीवनशैली के द्वारा उसकी मंत्रणा को या उसकी ताड़ना को ठुकराते या तुच्छ जानते हैं (भजन 10:4; 14:1; 36:1-2)। जीवन-क्रम-विकासवादी एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर से उनके विवेकशून्य और नापाक इरादों के द्वारा छुटकारा पाने का प्रयास करते हैं, इस कारण उनका विनाश कर दिया जाएगा। आप अपने माता-पिता की शिक्षा का भी तिरस्कार कर सकते हैं, जो आपकी उस सफलता को मिटा देगा जो निश्चित ही आप को मिलती यदि आप उनकी शिक्षा को मानते (इफि 6:1-3)। किसी भी माता-पिता के पास किसी एक छोटे बच्चे की तुलना में असीम रूप से अधिक ज्ञान होता है। परमेश्वर ने माता-पिता को इसी कारण से ठहराया है।

आप बुद्धि की मंत्रणा या ताड़ना को कैसे ठुकराते हैं या तुच्छ जानते हैं? यह आप बाइबल की उपेक्षा, उसका उपहास या उसकी अवज्ञा करने के द्वारा करते हैं। पवित्रशास्त्र में सबसे अद्भुत इतिहास, काव्य, व्यवस्था, और ऐसी ऐसी बातों का प्रकाशन है जिन्हें शारीरिक मन के मनुष्य नहीं जानते। पवित्र शास्त्र स्वर्ग से उतरने वाले ज्ञान से भरा है। आखरी बार आपने इसे कब पढ़ा था? इसे पढ़कर वचनों पर चिंतन-मनन किया? क्या आपको कुछ वचन याद हैं? उसके स्पष्ट और अधिकारयुक्त उपदेश को सुना है? सावधान रहें!

यह संसार बड़े ही अहंकारपूर्ण तरीके से और दुस्साहस से परमेश्वर की बुद्धि की मंत्रणा और ताड़ना को ठुकराता है। संसार के मनुष्यों को लगता है कि वे इससे बच सकते हैं। ध्यान से सुने कि परमेश्वर क्या करने जा रहा है : “यह काम तू ने किया, और मैं चुप रहा; इसलिये तू ने समझ लिया कि परमेश्वर बिलकुल मेरे समान है। परन्तु मैं तुझे समझाऊँगा, और तेरी आँखों के सामने सब कुछ अलग अलग दिखाऊँगा। हे परमेश्वर को भूलनेवालो, यह बात भली भाँति समझ लो, कहीं ऐसा न हो कि मैं तुम्हें फाड़ डालूँ, और कोई छुड़ानेवाला न हो” (भजन 50:21-22)।

आप कहां खड़े हैं? परमेश्वर की मंत्रणा और ताड़ना बाइबल में है। दाऊद, जो इतिहास के महानतम व्यक्तियों में से एक है, उसने परमेश्वर की व्यवस्था के विषय में इस प्रकार लिखा : “इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूँ; और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूँ” (भज 119:128)। क्या ऐसा आपका मनोभाव है? यह उन मनुष्यों का मनोभाव है जिनकी सुरक्षा परमेश्वर और बुद्धि मिलकर करेंगे और उन्हें समृद्ध बनाएंगे।

आप कहां खड़े हैं? मृत्युदंड को लेकर आपका क्या पक्ष हैं? समलैंगिक विवाह पर आपका क्या पक्ष हैं? गर्भपात, बच्चों की शारीरिक सजा, पतियों का सम्मान, मनोदशा, पानी में डुबाकर किया जानेवाला बपतिस्मा, नागरी शासकों का सम्मान, अपने मनों में भी, एक कलीसिया की सेवा, व्यक्तिगत शत्रुओं को क्षमा करना, माता-पिता का आदर करना, पीठ पीछे किसी की बुराई करना, उदारता से देना, मद्यपान करना, पेटूपन, इन सब बातों के विषय में आपका क्या पक्ष हैं?

आप कहां खड़े हैं? श्रमिक संघों पर आपकी क्या राय है? क्रोध, जीवनसाथी को धोखा देना, संगीत, शासकों के लिए प्रार्थना करना, अतिथिसत्कार, एक अन्यायी स्वामी की अधिनता में रहना, विश्वासियों का बपतिस्मा, सुख-विलास से प्रीति रखना या परमेश्वर से प्रेम करना, तलाक, चोरी करना, कलीसिया में जाकर खरी धर्मशिक्षा पाना या सिनेमा हॉल में जाकर मनोरंजन, राशिफल, दैनिक प्रार्थना, पवित्र जीवन, टेलीविजन, मित्र, व्यभिचार, पैसे की बचत, कामोत्तेजक सामग्री, आत्मा से भर जाना, पवित्र शास्त्र पर सोने या मधु से भी अधिक प्रेम रखना, इन सब बातों के विषय में आपका क्या पक्ष हैं?

आप कहां खड़े हैं? यदि आप अभी अभी सूचीबद्ध किए गए किसी भी विषय में परमेश्वर और बुद्धि की मंत्रणा और ताड़ना को ठुकरा देते हैं, तो क्लेश और विपत्ति आ रहे हैं। अधिकतर मनुष्य वही करते हैं जो इस संक्षिप्त नीतिवचन में बताया गया है – वे परमेश्वर की शिक्षा को ठुकरा देते हैं और सुधार की उसकी ताड़ना के खिलाफ विद्रोह करते हैं। यदि आपके पास बाइबल के लिए समय नहीं है या उसमें रुचि नहीं है, तो नीतिवचन 1:20-33 में अपने आनेवाले कल के विषय में पढ़ें।

आप प्रभु यीशु मसीह के विश्वास के सम्बंध में कहाँ खड़े हैं? वह परमेश्वर का पुत्र है जिसे मनुष्यों के बीच परमेश्वर के राज्य को स्थापित करने के लिए लगभग 2000 वर्षों पहले इस जगत में भेजा गया था। यहूदियों ने उसे ग्रहण नहीं किया और उसे सूली पर चढ़ा दिया, इसलिए उसने इस ग्रह पर अब तक के सबसे भयानक न्याय में उनकी राजधानी यरूशलेम का विनाश कर दिया (मत्ती 24:21)। वह शीघ्र ही सारी पृथ्वी का उससे भी बद्तर हाल करने के लिए लौट कर आ रहा है। परमेश्वर के पुत्र के संबंध में आप कहां खड़े हैं? आज ही उस पर विश्वास कर के और उस से प्रीति रखकर उसे चुमे (भजन 2:10-12)।

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