नीतिवचन 1:28
तब वे मुझे पुकारेंगे, परन्तु मैं उत्तर न दूंगी; वे मुझे तड़के ढूंढ़ेंगे, परन्तु वे मुझे न पाएंगे।
कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि आपको ज्ञान, सत्य या समझ देने आपकी ऋणी नहीं है। परमेश्वर आपको आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर देने आपका ऋणी नहीं है। परमेश्वर आपके साथ उपस्थित रहे इसके लिए वह आपका ऋणी नहीं है। जब आप किसी संकट या मुसीबत में पड़ते हैं, तब परमेश्वर आपको मदद करने आपका ऋणी नहीं है। परमेश्वर ये आशिषें अपने अनुग्रह और इच्छा से देता है, और जब भी आपका आचरण उसे ठेंस पहुंचाता है, तो वह उन्हें वापस ले सकता है या रद्द कर सकता है। यदि आप पाप कर के विद्रोह करना चुनते हैं, तो आप निश्चित रूप से इन बहुमूल्य खजानों को खो देंगे (नीति 15:8; 28:9; भजन 66:18)।
पहले अध्याय के कुछ भाग में, सुलैमान ने बुद्धि को एक स्त्री के रूप में अभिव्यक्त किया (नीति 1:20-33)। एक कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि बड़ी उदारता से भोले, ठट्ठा करने वाले, और मूर्खों के सामने बुद्धि के वरदान को रखती है (नीति 1:20-23)। परन्तु वह धमकाती है और कठोर भाषा में चेतावनी देती है कि यदि वे उसके अनुग्रहकारी वरदान को ठुकराते हैं, तो जब उन पर मुसीबत आएगी तब वह उनकी मदद नहीं करेगी (नीति 1:24-31)। और अंत में वह विद्रोही पर एक विशेष न्याय और आज्ञाकारियों पर विशेष आशीषों की घोषणा करती है (नीति 1:32-33)।
हो सकता है कि आप एक गंभीर खतरे में हैं, और इसकी आपको कोई जानकारी ही नहीं हैं। हो सकता है कि आप अपना शेष जीवन मूर्खता से भरी अज्ञानता और इसके परिणामस्वरूप उभरने वाले बुरे नतीजे भुगतने की संभावना के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपको बस इतना करना है कि अपने जीवन को बड़ी आसान से लेना है और परमेश्वर के बुद्धि के वरदान की उपेक्षा करनी है। स्वर्ग का परमेश्वर मनुष्य के समान नहीं है। जब बुद्धि जैसा गंभीर मसला आता है तब वह आपको उसके साथ खिलवाड़ नहीं करने देगा। यदि आप परमेश्वर की उपेक्षा करते हैं, तो वह आपको उजाड़ देगा, अज्ञानता और अँधेरे में छोड़ देगा, और विनाश के लिए त्याग देगा!
क्या आपके हृदय में मूर्तियाँ हैं – वे चीज़ें जिन्हें आप इतना प्रेम करते हैं कि आप उन्हें परमेश्वर और बुद्धि की प्राप्ति के लिए त्याग नहीं सकते – जैसे परिवार, शौक, पैसा, परंपरा, या मित्र? क्या ऐसा कुछ है या कोई व्यक्ति है जिसे आप परमेश्वर और उसकी बुद्धि के लिए छोड़ना नहीं चाहते? तो यहाँ परमेश्वर की संप्रभु प्रतिज्ञा है जो टल नहीं सकती :
मैं उस मनुष्य के विरुद्ध होकर उसको विस्मित करूँगा, और चिह्न ठहराऊँगा; और उसकी कहावत चलाऊँगा और उसे अपनी प्रजा में से नष्ट करूँगा; तब तुम लोग जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ। यदि भविष्यद्वक्ता ने धोखा खाकर कोई वचन कहा हो, तो जानो कि मुझ यहोवा ने उस भविष्यद्वक्ता को धोखा दिया है; और मैं अपना हाथ उसके विरुद्ध बढ़ाकर उसे अपनी प्रजा इस्राएल में से नष्ट करूँगा। वे सब लोग अपने अपने अधर्म का बोझ उठाएँगे, अर्थात् जैसा भविष्यद्वक्ता से पूछनेवाले का अधर्म ठहरेगा, वैसा ही भविष्यद्वक्ता का भी अधर्म ठहरेगा। यहेजकेल 14:8-10
सम्भव है कि आपने इस वचन पर कई दिनों से कोई उपदेश नहीं सुना है। यदि आप उसके सामने आते हैं और इस जीवन की चीजों को दृढ़ता से थामे रहते हैं और जो सत्य उसने आपके सामने रखा है उसकी उपेक्षा करते हैं, तो परमेश्वर आपके पास झूठ को भेजेगा। आप अपनी मदद के लिए चाहे किसी भी पास्टर या शिक्षक पर भरोसा रख रहे हो, परमेश्वर उसे अंधा कर देगा और फसायेगा कि वह आप से झूठ बोले।
क्या आप सत्य से प्रेम करते हैं – और इसके लिए कोई भी कुरबानी देने के लिए तैयार हैं – या सत्य आपके लिए केवल एक नेक भावना है जिसकी आप अपने व्यस्त जीवन में उपेक्षा कर सकते हैं? तो यहाँ आपसे परमेश्वर की प्रतिज्ञा है :
इसी कारण परमेश्वर उनमें एक भटका देनेवाली सामर्थ्य को भेजेगा कि वे झूठ की प्रतीति करें, ताकि जितने लोग सत्य की प्रतीति नहीं करते, वरन् अधर्म से प्रसन्न होते हैं, वे सब दण्ड पाएँ। 2 थिस्स 2:11-12
आपने इस वचन पर भी काफी दिनों से कोई उपदेश नहीं सुना होगा, है ना? यदि आप परमेश्वर के सत्य की उपेक्षा करते हैं और पाप की विलासिता में लिपटे रहते हैं, तो परमेश्वर आपके पास झूठ को भेजेगा। वह ऐसा क्यों करेगा? क्योंकि आपने उस सत्य और बुद्धि को जिन्हें उसने आप के सामने मुफ्त में ही रखा कि आप उसे ग्रहण करें, ठुकरा दिया, इस कारण वह आपका न्याय करेगा।
अधिकांश लोग किसी कारण से निराशाजनक स्थिति में अज्ञानता के अँधेरे में ही रहते हैं। वे इतने आलसी, अभिमानी, या इतने विद्रोही होते हैं कि वे परमेश्वर के सामर्थ्यशाली हाथ के नीचे झुक नहीं सकते और न उसकी बुद्धि के अधीन हो सकते हैं। वे इतने व्यस्त हैं कि बुद्धि के लिए उनके पास समय ही नहीं हैं; उन्हें लगता है कि उन्होंने पहले से ही चीजों को समझ लिया है; यदि उनसे बदलने के लिए कहा जाए या धर्मी जीवन जीने की सलाह दी जाए तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा। परमेश्वर के वचन को पढ़ना और उसका प्रचार सुनना उनके लिए उबाऊ और थका देने वाला काम है (2 तीमुथियुस 4:3-4)। वे समय और अनंत काल दोनों ही के लिए अभिशप्त हैं!
मानव अधिकारों को ऊंचा करने के बड़े-बड़े प्रयासों के बावजूद, जब परमेश्वर के साथ व्यवहार करने की बात आती है, तब ये मनुष्य के कर्तव्य और सौभाग्य हैं, न कि अधिकार। परमेश्वर का भय मानना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना आपका कर्तव्य है, क्योंकि आप शीघ्र ही उसे अपने जीवन का लेखा-जोखा देंगे (सभोपदेशक 12:13-14)। सत्य और बुद्धि सौभाग्य हैं, और परमेश्वर इन के लिए आपका ऋणी नहीं हैं। यदि आप अपने आप को नम्र करें और उसकी आज्ञा माने तो वही इन वरदानों को आप को मुफ्त में ही दे देगा (यशा 66:1-2; यूहन्ना 7:17)। आज ही अपने आप को विनम्र करे!
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