नीतिवचन 1:27
जब तुम्हारा भय उजाड़ की नाईं, और तुम्हारा विनाश बवण्डर की नाईं आएगा; जब तुम पर संकट और क्लेश आ पड़ेगा।
भय – उजाड़ – विनाश – क्लेश! ये चारों बातें भयानक हैं। ये चारों बातें आपकी आत्मा को फाड़ सकती हैं और आपके मन को व्याकुल कर सकती हैं। वे आपकी आत्मा को यातनाएं देने के लिए पर्याप्त हैं। वे आपको कहीं पर भी खोज निकालेंगी, यहाँ तक कि नींद में भी यातनाएं देंगी। आतंक, उजाड़, शोक और निराशा भयावह दंड हैं। परमेश्वर इन संकटों को उन व्यक्तियों पर भेजता है जो उसकी बुद्धि को ग्रहण नहीं करते हैं।
सच्चा परमेश्वर आपकी सफलता और आनंद के लिए आपके सामने स्वर्ग से उतर आनेवाली बुद्धि को रखता है (नीति 1:20-23, 33; 3:13-18; 8:1-21)। सफलता और आनंद जैसी बहुमूल्य कल्याणकारी बातों को पाने के लिए बुद्धि को प्राप्त करना आपके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए (नीति 4:5-9; 18:1; 16:16)। परन्तु यदि आप उसके अनुग्रहकारी वरदान को अनदेखा करते हो, तो वह आप के विरुद्ध हो जाएगा, और फिर कोई बात आपको बचा नहीं पाएगी (नीति 1:24-32; भजन 50:22)।
यह नीतिवचन सुलैमान द्वारा किए गए बुद्धि के प्रथम व्यक्तिकरण का भाग है (नीति 1:20-33)। कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि मूर्ख मनुष्यों के सामने बुद्धि को रखती है (नीति 1:20-23, 33), किन्तु जो कोई उसके इस वरदान को तुच्छ जानता है वह उस से प्रतिशोध लेती है (नीति 1:24-32)। वह आपकी विपत्तियों पर हँसने का वादा करती है और जब आप भय से आतंकित होंगे तब वह आपकी ठट्ठा उड़ाएगी, इसलिए क्योंकि आपने उसके उदारतापूर्ण वरदान को ग्रहण नहीं किया।
बुद्धि क्या है? यह सही-सही परख करने की शक्ति है! मसला चाहे जो भी हो, बुद्धि सत्य को जानती है, और परिस्थिति चाहे जो भी हो वह सही आचरण करना जानती है। जो बातें परमेश्वर और मनुष्य दोनों ही को प्रसन्न करती हैं उन्हें वह स्पष्टतः समझती है और वैसा ही करती है। यहोवा परमेश्वर अपनी सृष्टि, और बाइबल के माध्यम से बुद्धि, समझ, ज्ञान और विवेक को आपके सामने रखता है (भजन 19:1-11; 119:128; यशा. 8:20; 2 तीमु: 3:16-17)।
परमेश्वर के सत्य को और उसकी बुद्धि को ग्रहण न करने का मनुष्यों के पास कोई बहाना नहीं है (रोमियों 1:18-20)। क्योंकि वे परमेश्वर को महिमा नहीं देते हैं और न उसको धन्यवाद देते हैं, इस कारण वह उनके मनों को अंधकारमय कर देता है (रोमियों 1:21)। क्योंकि वे मानते हैं कि वे बुद्धिमान हैं और सृष्टिकर्ता के ऊपर इस सृष्टि का सम्मान करते हैं, इस कारण वह उन्हें घृणित यौन विकृतियों के द्वारा एक दूसरे को लज्जित करने के लिए उनके विनाशकारी मनों पर छोड़ देता है (रोम 1:22-27)।
परमेश्वर को आपकी प्रार्थनाओं को सुनने या उनका उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है। वह उन लोगों की न सुनेगा और न ही उत्तर देगा जो उसके वचन के प्रचार को ग्रहण नहीं करते (नीति 28:9; भजन 66:18)। जब भय आपकी आत्मा को उजाड़ देता है, जब विनाश एक बवंडर के समान आता है, और जब संकट और क्लेश आपकी आत्मा को यातनाएं देते हैं, तो वह आपकी विपत्तियों पर हँसेगा। क्योंकि जब बुद्धि आपके सामने रखी गई तब आपने उसका मज़ाक उड़ाया, इस कारण वह यहोवा के दूत को आपका पीछा करने और आपको सताने के लिए भेजेगा (भजन 35:5-6)।
जब सच्चे सुसमाचार का प्रचार किया जाता है, तो आपको इसे खरीदने के लिए अपना सब कुछ बेच देना चाहिए (नीति 23:23; मत्ती 13:44-46)। यहूदियों ने यीशु मसीह के राज्य को हल्के से लिया और उसके प्रेरितों को सताया, परन्तु फिर इस महान पराक्रमी राजा ने सन 70 में रोमी सेनाओं द्वारा उन हत्यारों का नाश कर दिया और उनके नगर को जलवा दिया (मत्ती 22:1-7)। पाठक! आपके लिए यह बेहतर होगा कि आप उस पर गिरकर पश्चात्ताप में अपने को तोड़ दे, बजाय इसके कि वह आप पर गिरे और आपको पिसकर धूल बना दे (मत्ती 21:44)। आज ही यीशु मसीह पर विश्वास करें, अपने पापों से पश्चाताप करें और अपनी शक्ति से उसके पीछे हो ले।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।