नीतिवचन 1:26
मैं भी तुम्हारी विपत्ति पर हँसुंगी; जब तुम पर भय आएगा, तब मैं ठट्ठों में उड़ाऊंगी;
बुद्धि हँसती है। हा हा हा! बुद्धि ठट्ठा उड़ाती है। हे मूर्ख तू अब इतना बलवंत या मज़बूत नहीं है! बुद्धि उन मनुष्यों पर हँसती है और उनकी ठट्ठा उड़ाती है जिन पर विपत्ति आती है और जो भय से आतंकित हो जाते हैं। यहां कोई क्रूरता नहीं है, केवल ईश्वरीय न्याय की गूंज है जो ऐसे-ऐसे मूर्खों और उपहास करने वालों का मजाक उड़ाती है जिन्होंने उसकी शिक्षा को नकारा।
वह जो अंत में हँसता है वही विजयी और सत्य ठहरता है। कुलीन स्त्री के रुप में बुद्धि और यहोवा परमेश्वर दोनों सबसे अंत में हँसते हैं, और सबसे बेहतर हँसते हैं। लेकिन यह आपके लिए हँसी की बात नहीं है, क्योंकि ये वचन बाइबल के कुछ सबसे गंभीर वचनों में से हैं। जो लोग शिक्षा को सुनने से इन्कार करते हैं, वे बिना किसी दया के नाश पाएंगे (नीति 1:20-32)। वास्तव में, कुलीन स्त्री के रुप में बुद्धि घोषित करती है कि जो लोग उसे नकारते हैं उन्हें अवश्य ही मृत्यु से प्रीति रखनी चाहिए (नीति 8:36)।
मूर्ख और ठट्ठा करने वाले लोग उन पर हँसते हैं जो उन्हें सिखाने, उन्हें सुधारने और चेतावनी देने की कोशिश करते हैं। क्योंकि वे उनकी मौज-मस्ती को खराब कर देते हैं, इसलिए वे उन से नफरत करते हैं (नीति 9:7-8)। जब उनके सिर पर एक भयानक विपत्ति आती है और दर्दनाक भय उनके मनों में भर जाता है, तो यह उचित ही है कि जब वे नाश पाते हैं तब कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि, जो उन्हें बचाना चाहती थी, उन पर जमकर हँसती है और उनका उपहास करती है।
बुद्धि, और बुद्धि के परमेश्वर को इस नज़रिए से देखना इस कायर और समझौता करने वाले युग में लोकप्रिय नहीं है (2 तीमु. 3:4-5; इब्र 12:28-29)। मूर्ख और उपहास करनेवालों पर जब भयानक पीड़ा और घिनौना भय आ पड़ता है तब उन पर हँसना और उनका मज़ाक उड़ाना न्यायोचित्त है। पाठक, क्या आप इस परमेश्वर को जानते हैं? या कही ऐसा तो नहीं कि आपको आकाश में रहनेवाले किसी ऐसे ईश्वर के बारे में दंतकथाएं सिखाई गई हो जो चीनी के समान केवल एक मीठा डैडी है, और कुछ नहीं?
फिरौन ने पूछा, यहोवा कौन है? और मूसा की मांग को ठुकरा दिया (निर्ग 5:2)। मिस्र में आई मेंढको, जुंए, और मक्खियों, और अंत में सभी मिस्रियों के पहिलौटों की मृत्यु जैसी दस भयावह पीड़ाओं के पश्चात्, उसे बताया गया कि इस्राएल ने मिस्र देश के धन का एक बड़ा हिस्सा लेकर निर्गमन किया है। जब वह क्रोध में आकर दुभागे हुए लाल समुद्र की सुखी भूमि पर तेजी से इस्राएलियों का पिछा कर रहा था तब उस समय के मिस्र के सबसे बेहतर रथों के पहिये गिली ज़मीन में धंसकर टूटने लगे और अपने टूटे रथों के विषय में सोचने के लिए भी उसे समय नहीं मिला जो और भी अधिक समुद्र के पानी के बिच लड़खड़ा रहे थे। यक़ीनन, उस दिन आकाश परमेश्वर की हँसी से गूंज उठा, और जब मिस्रियों के मृत शरीर पानी में तैर रहे थे तब वह स्वयं इस्राएलियों के साथ ठट्ठा उड़ाने वाले गीत और नृत्य में शामिल हुआ।
समय मुझे नूह के जलप्रलय पर चर्चा करने की अनुमति नहीं देता, जब नूह पर हँसने वाले और उसका मज़ाक उड़ाने वाले लोग जलप्रलय में डूबकर मर गए। यह एक विपत्ति थी! यह घटना डरावनी थी! लेकिन यह मत सोचो कि परमेश्वर और बुद्धि पछतावे में अपने हाथ मल रहे थे। डूबकर मरे ये अभागे लोग परमेश्वर के लिए असहनीय, और उस से बैर रखनेवाले दुष्ट लोग थे, और कई वर्षों से उस स्पष्ट उपदेश की अवज्ञा करते आ रहे थे जिसका प्रचार नूह उन्हें कर रहा था (इब्र 11:7; 1 पतरस 3:18-20)। प्रिय पाठक, क्या आप इस परमेश्वर को जानते हैं?
जब दुष्टों का न्याय किया जाता है तब परमेश्वर हँसता है (भजन 37:13)। वह अन्यजातियों को ठट्ठों में उड़ाता है (भजन 59:8), और जब उसने अपने पुत्र के शत्रुओं का नाश किया तब वह उपहासपूर्ण ढ़ंग से हँसा (भजन 2:4)। उस भयावह विपत्ति में जो विनाश हुआ वह इतना अनर्थकारी था कि मनुष्य के मन भय से आतंकित हो गए (लूका 21:26)।
उसने एलिय्याह को बाल के भविष्यवक्ताओं की ठट्ठा उड़ाने के लिए भेजा (1 राजा 18:26-27) और यशायाह को भेजा, ताकि वह देवताओं की मूर्तियाँ बनाने वाले मूर्खों का उपहास उड़ाए (44:9-20)। जब दुष्टों का विनाश होता है, तब धर्मी जन अपने स्वर्गीय पिता की अगुवाई में हँसते हैं और आनन्दित होते हैं (भजन 52:5-7; 58:5)। जब परमेश्वर प्रतिशोध लेता है तब स्वर्ग में वे सब पवित्र लोग आनंद मनाते हैं जिन्होंने मसीह की गवाही के लिए अपने प्राण गवाएं (प्रका. 6:9-11; 18:20; 19:1-4)।
जब कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि, जो परमेश्वर की बुद्धि का व्यक्तिकरण है, आप के सामने शिक्षा और बुद्धि को रखती है, तब बेहतर होगा कि आप इसे ग्रहण करे। यदि आप इसे ग्रहण नहीं करते है तो एक अटल और असाध्य न्याय आ रहा है जिसका कोई उपाय नहीं रहेगा (नीति 29:1)। आपको लग रहा होगा कि आप अपनी लापरवाही से बच निकल गए हैं, परन्तु परमेश्वर आपको फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर देगा (भजन 50:21-22)। उसके वचन के सामने अपने आप को दीन करें और भयकंपित हो जाए, ऐसा न हो कि आप किसी एक वचन से भी चूक जाएं!
आपको क्या करना आवश्यक है? यीशु ने इसे कई अलग-अलग तरीकों से स्पष्ट रूप से कहा, “इसलिये चौकस रहो कि तुम किस रीति से सुनते हो? क्योंकि जिसके पास है उसे दिया जाएगा, और जिसके पास नहीं है उससे वह भी ले लिया जाएगा, जिसे वह अपना समझता है” (लूका 8:18)। और, “जो इस पत्थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा; और जिस पर वह गिरेगा, उसको पीस डालेगा” (मत्ती 21:44)। और “मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूँ कि जो शरीर को घात करते हैं परन्तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते, उनसे मत डरो। मैं तुम्हें चिताता हूँ कि तुम्हें किससे डरना चाहिए, घात करने के बाद जिसको नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो; हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, उसी से डरो” (लूका 12:4-5)।
कुरनेलियुस के उदाहरण का अनुसरण करें। उसने पतरस से कैसरिया में भेंट के लिए रिश्तेदारों और मित्रों को इकट्ठा किया। उसने पतरस से स्पष्ट रूप से कहा, “तब मैं ने तुरन्त तेरे पास लोग भेजे, और तू ने भला किया जो आ गया। अब हम सब यहाँ परमेश्वर के सामने हैं, ताकि जो कुछ परमेश्वर ने तुझ से कहा है उसे सुनें” (प्रेरितों 10:33)।
जब दमिश्क के मार्ग पर तरतुस के शाऊल का सामना प्रभु यीशु मसीह से हुआ, तब उसने इस गौरवशाली राजा की दिव्य संप्रभुता को सही-सही प्रतिक्रिया दी, और कहा, और सभी समझदार पाठकों को उसके साथ मिलकर ऐसी ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए, “हे प्रभु, तू क्या चाहता है कि मैं करूं” (प्रेरितों 9:6)। आमीन।
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