नीतिवचन 1:24
इस कारण कि मैं ने बुलाया है, पर तुम ने इन्कार किया; मैं ने अपना हाथ बढ़ाया है, पर किसी ने परवाह नहीं की; (केजेवी)
कुछ निमंत्रण “लेना हो तो लो, नहीं तो जाने दो” जैसा प्रस्ताव नहीं होते हैं! यदि आप उनकी परवाह नहीं करते हैं या उन्हें ग्रहण नहीं करते हैं, तो आप निमंत्रण देनेवाले के क्रोध को अपने ऊपर बुला लेते हैं। यदि कोई बॉस आपको किसी बैठक में या कोई राजा रात के खाने के लिए आमंत्रित करता है, तो आप के लिए बेहतर होगा कि आप वहा जाएं। परमेश्वर का बुद्धि का निमंत्रण भी ऐसा ही है। कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि मनुष्यों को पुकारती है, और अच्छा होगा यदि वे उसके इस वरदान को ग्रहण करे, अन्यथा वह उनकी विपत्ति में उनका मजाक उड़ाएगी (निति. 1:20-33)। परमेश्वर ऐसे लोगों को जवाब देने या उनकी सहायता करने बाध्य नहीं होता है जो सच्चाई की उपेक्षा करते हैं या पाप करते रहते हैं (भजन 66:18; 9:1-2)।
सत्य और ज्ञान अधिकार नहीं हैं : वे असामान्य वरदान हैं। उसने अदन में सत्य और अनन्त जीवन देने की प्रतिज्ञा की; किन्तु आदम और हव्वा ने शैतान के झूठ और मृत्यु को चुना। उन्होंने एक भयानक चुनाव किया। परमेश्वर ने उन्हें उनके चुनाव का प्रतिफल दिया। अधिकांश लोग प्रतिदिन ऐसा ही चुनाव करते हैं – शैतान का झूठ और इससे होने वाली मृत्यु परमेश्वर के सत्य और अनन्त जीवन से बेहतर है। इसलिए, जब वह मनुष्यों से सत्य को छिपाए रखता है तब वह अपने इस निर्णय में पवित्र और न्यायपूर्ण है (आमोस 8:11-14; मत्ती 11:24-26; 13:10-17; रोम. 11:7-10; आदि)।
वह आकाश और जीवन की आशीषों के द्वारा हर दिन और रात सत्य की घोषणा करता है (भजन 19:1-6; प्रेरितों 14:17)। मनुष्य बिना किसी बहाने के हैं, क्योंकि वह स्पष्ट रूप से अपने आप को उनके मनो पर प्रकट करता है (रोमि. 1:20)। समस्या है उनका ह्रदय! वे उसके अधिकार से घृणा करते हैं और उसकी व्यवस्था का तिरस्कार करते हैं, इसलिए वे उसके सत्य को ख़ारिज करने के लिए मूर्तिपूजा और क्रमविकासवाद के विज्ञान के द्वारा उसके विरुद्ध विद्रोह करते हैं। वह उन्हें उचित ही अंधा कर देता है और उनके मनो को उलट देता है ताकि वे आपस में लैंगिक विकृतियों द्वारा एक दुसरे को अशुद्ध करें (यशा. 44:9-20; रोम 1:21-32)।
वह अपने प्रेरित धर्मग्रंथों, अर्थात् बाइबल के माध्यम से सत्य की घोषणा करता है, जिसका प्रचार चुने हुए लोगों द्वारा किया जाता है (भजन 19:7-11; यशा. 8:20; 2 तीमु: 3:16-17)। लेकिन मनुष्य उन्हीं कारणों से बाइबल से घृणा करते हैं – एक संप्रभु सृष्टिकर्ता का अधिकार और व्यवस्था जो उन वासनाओं पर प्रतिबन्ध लगाते हैं जो उनके अन्दर चीखती-चिल्लाती हैं। धर्मी न्याय में, वह उनके पास भ्रम को भेजता है कि वे झूठ पर विश्वास करें और नाश हो जाए (2 थिस्स. 2:9-12)।
राजा अहाब ने परमेश्वर के नबी मीकायाह को अस्वीकार कर दिया, इस कारण यहोवा ने उसे वही दिया जो वह चाहता था – एक चापलूसी करने वाला झूठ (1 राजा 22:1-18)। तब मीकायाह ने परमेश्वर द्वारा एक झूठ बोलने वाली आत्मा के चुनाव का चित्रमय वर्णन किया ताकि वह उसे मार डालने के लिए युद्ध में ले जाए (1 राजा 22:19-40)। परमेश्वर न्यायी है। यदि आप अपने हृदय में किसी बात को उसके सत्य से अधिक महत्व देते हैं, तो वह आप को फसायेगा (यहे 14:1-11)। यदि आप सोचते हैं कि आप उसकी बुद्धि के बिना जीवित रह सकते हैं, तो वह आपको इसके प्रति अंधा कर देगा और आपको नष्ट कर देगा (यशा. 29:9-16)।
इस्राएल के सामने पुराना नियम की आशीष और शाप दोनों रखे गए थे (व्यव. 28:1-14; 28:15-68)। और उसके सामने नया नियम की आशीष या शाप दोनों ही रखे गए (मत्ती 21:33-46; 22:1-7)। पौलुस ने इब्रानियों को चेतावनी देने के लिए इन पुराने नियम के इस्राएलियों से एक भव्य तुलना की (इब्रा. 3:7-19; 4:1-11)। खबरदार!
अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा को खोजने के लिए आप ने आज का उपयोग कैसे किया? बुद्धि इस नीतिवचन के माध्यम से और बाकी समय बाइबल के माध्यम से आपको पुकार रही है। क्या आप सीखने के लिए आज के दिन का 1% भाग, जो 14 मिनट और 24 सेकंड का समय है, देंगे? यदि नहीं, तो सावधान रहे! कल बहुत देर हो सकती है। जीवित और सच्चा परमेश्वर आपके गंभीर होने की प्रतीक्षा करने के लिए बाध्य नहीं है (निति 29:1; प्रका. 2:21-23)।
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