नीतिवचन 1:23
मेरी डांट सुनकर मन फिराओ : देखो, मैं अपनी आत्मा तुम पर उंडेलती, मैं तुम पर अपने वचन प्रकट करती।
आज का दिन आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है। कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि आपको अपनी शिक्षा का मुफ्त आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बुलाती है। सम्मान, धन, शांति और जीवन आपका हो सकता है, यदि आप उसके सुधार करनेवाले निमंत्रण को स्वीकार करेंगे और उस दावत का आनंद लेंगे जो उसने उन लोगों के लिए तैयार की है जो बुद्धिमान बनना चाहते हैं।
यदि आप बुद्धि की ओर फिर गए हैं, तो और भी ऊंचा स्थान है जहां पर वह आपको बुला रही है। आपके पास वह सारी बुद्धि नहीं है जिसकी आपको आवश्यकता है। आप अभी तक पूर्ण नहीं हैं। बुद्धिमान सुनकर अपनी विद्या बढ़ाएगा; और समझवाला बुद्धि की मंत्रणा प्राप्त करेगा (निति 1:5)। परमेश्वर की सामर्थ्यशाली और व्यक्तिगत उपस्थिति एक ऐसा वरदान है जिसकी कोई तुलना नहीं। और भी बड़ी बड़ी आशिषें पाने के लिए ऊपर की ओर ज़ोर लगाएं।
कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि चिल्ला-चिल्लाकर कहती है की मुर्ख अपनी मुर्खतापूर्ण और विनाशकारी जीवन के मार्गों से फिर जाएं (निति 1:20-22)। इससे पहले कि आप उसके निमंत्रण के मूल्य को समझे, आपको और कितनी पीड़ा और परेशानी से गुज़रने की आवश्यकता है? यदि आप उसके निमंत्रण को हल्के से लेते हैं, तो वह आपके वे सब सपने पूरे करेंगी जो बुरे और विनाशकारी है (निति 29:1)। वह आप पर संकट और पीड़ा लाएगी। वह आपके ज़रूरत के समय में मदद करने के बजाय, आप पर हँसेगी (निति 1:24-32)। इस पर गंभीरता से विचार करें, क्योंकि यह अटल सत्य है।
अपने मुर्खता के मार्ग से फिरने के लिए दो चीज़े आवश्यक हैं – पहली, जिस मार्ग पर आप अभी चल रहे हैं उस मार्ग पर चलना छोड़ दे, और उस ओर पीठ घुमाएँ, और दूसरी बात, नए मार्ग पर चलाना शुरू करें (रोम 12:1-2; 1 थिस्स 1:9)। आप मूर्खतापूर्ण आदतों और मार्गों को छोड़ देते हैं; आप बुद्धि और धर्म के मार्ग से आगे बढ़ना शुरू करते हैं। आप ग़लत प्रशिक्षण, परंपराओं और विचारों को ठुकराते हैं; आप सत्य और भक्ति को सिखते हैं, और उसी पर चलते हैं। आप अपने जीवन से उन चीजों को दूर करते और उन्हें मार डालते हैं जिनकी इजाज़त बुद्धि नहीं देती; आप उनके स्थान पर केवल उन बातों को मंजूरी देते हैं जो भली हैं। आप पाप को ठुकराते हैं; आप पवित्रता को चुनते हैं।
ऐसा परिवर्तन कठिन हो सकता है, और इसके लिए प्रतीति और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है; परन्तु इस परिवर्तन के लिए जो मामूली तकलीफ आप को होगी वह उस तकलीफ की तुलना में कुछ भी नहीं है जो आप को तब होगी यदि आप परिवर्तन नहीं करते हैं। यदि पुराने मित्र आपकी नई प्राथमिकताओं का मजाक उड़ाते हैं, तो उनकी अनदेखी करें और उन्हें त्याग दें। अपने परिवर्तन में कोई भी बाधा न आने दें। मनुष्यों के प्रस्तावों और प्रलोभनों के कुछ ही परिणाम होते हैं; कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि आप को जो फटकार देती है उसके कई सुखद परिणाम हैं।
बुद्धि जिसका यहां एक कुलीन स्त्री के रूप में व्यक्तिकरण किया गया है, दो चीजों की प्रतिज्ञा करती है – वह व्यक्तिगत रूप से स्वयं को आपको दे देगी, और वह आपको अपने वचनों और मार्गों का आंतरिक ज्ञान सिखाएगी। यदि आप उसके सच्चे निमंत्रण को ग्रहण करते हैं, तो वह आप का उद्धार करने और आप को सिद्ध बनाने के लिए पुरे प्रेम के साथ प्रतिक्रिया देगी। आप अपना शेष जीवन इस कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि के साथ जी सकते हैं जो आप में निवास करेगी और आपको शिक्षा देती रहेगी।
सुलैमान ने बुद्धि के व्यक्तित्वकरण के रूप में जिस अलंकारिक भाषा का प्रयोग किया है, उससे परे आपको प्रभु यीशु मसीह दिखाई देना चाहिए, जो बुद्धि और ज्ञान के सभी भण्डारों से भरा हुआ है (कुलु. 2:3; 1 कुरिं. 1:30)। वह उन पर अपना आत्मा उण्डेलेगा जो उसकी ओर फिरते हैं, और वह उन्हें सच्ची बुद्धि सिखाएगा (इफि 1:17-18; 3:14-19; कुल 1:9-11; 1 कुरिं. 2:6-16; यूहन्ना 14:15-27; 1 यूहन्ना 2:20)।
लेकिन अधिकांश मनुष्य अज्ञानता, हठ और विद्रोह में जीवन भर पागलपन की हद तक भागते-फिरते हैं; वे वर्तमान में निष्क्रिय और पीड़ा से भरे जीवन के परिणाम भुगतते हैं और आने वाले समय में अनंतकाल का दण्ड भुगतेंगे। क्यों? इसलिए क्योंकि समय-समय पर जब उनके जीवन में बुद्धि का वरदान रखा गया तब तब उन्होंने उसका मजाक उडाया, और परमेश्वर ने उनकी आंखों को अंधा कर दिया ताकि वह उनका नाश करे (रोमियों 1:18-32; 2 थिस्स 2:9-12)।
मूर्ख क्या है? उसके पास एक बेहतर योजना है; वह अपने पापों का समर्थन करता है; वह अपनी आदतों को नहीं छोड़ेगा; वह मूर्ख मित्र रखता है; वह इस संसार की मूर्खता से अपना भरण-पोषण करता है; उसे बदलाव पसंद नहीं है। बुद्धि का परमेश्वर मूर्खों को निराशाओं, टूटे हुए मनों, असफल व्यवसायों, निष्क्रिय परिवारों, प्रेमहीन विवाहों, कड़वी भावनाओं और निराशाजनक जीवनों से कुचल देता है। मूढ़ आज बुद्धि के वरदान पर हंसते हैं; परन्तु बुद्धि कल मूर्ख की दर्दनाक विपत्ति पर हंसेगी। हे प्रभु परमेश्वर तू बहुत महान हैं, और मनुष्य बहुत मूर्ख, घमंडी और हठी है!
चुनाव और उसके परिणाम बिलकुल साफ हैं। कोई भी मनुष्य, चाहे पुरुष हो या स्त्री, संकोच भी कैसे कर सकता है? पाठक, आपका हाल क्या है? अपने भविष्य से डरे बिना, इस सच्चे वरदान को सुने बिना, और प्रभु यीशु मसीह तथा स्वर्गीय बुद्धि की ओर अपने मन को पूरी तरह से फिराए बिना इन वचनों को जल्दबाजी में न पढ़े। प्रतिफल अतुल्य है, परन्तु दण्ड भी अतुल्य ही है।
यह नीतिवचन उन लोगों को सम्बोधित करता है जो प्रभु का भय मानते हैं – अर्थात् उन्हें जो सचमुच आत्मिक हैं। यद्यपि बुद्धि के नियम सभी मनुष्यों को लाभ पहुंचा सकते हैं, केवल धर्मी मनुष्य ही बुद्धि की पुकार को कान लगाकर सुन सकते हैं। केवल वही जिनके मन प्रभु ने फिराए है, वास्तव में अपनी मूर्खता से फिर सकते हैं और बुद्धि को गले लगा सकते हैं। यदि आप कायल हो गए है, तो प्रभु ने पहले ही आपका हृदय फेर दिया है (यिर्म 31:18; विलाप 5:21)। अब मन फिराए!
बुद्धि का पीछा करें। इसे खरीदें, और इसे बेचें नहीं। इसे पाने के लिए प्रार्थना करें। इसका व्यवहारिक उपयोग करे। मूर्ख मित्रों की संगति न करे। अपने पापी मार्गों से घृणा करे। सत्य से प्रीति रखे। इस संसार और उसके विचारों का तिरस्कार करें। धार्मिकता चुनें। बुरी आदतों को छोड़ दे। पहले परमेश्वर के राज्य की खोज करें। अपने शारीर की लालसाओं को मार डाले। अपने पुराने मनुष्यत्व को उतार दे, और नया मनुष्य परिधान करे। प्रभु यीशु मसीह की किसी स्थानीय कलीसिया में ज़ोरगर्मी से शामिल हो जाए।
प्रतीति को समझें और उसका मूल्य जाने – यह आपको वापस अपनी ओर खींचने का परमेश्वर का तरीका है – और आपको और जितना दूर हो सके उतना दूर और जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी इस प्रतीति के अनुसार करना चाहिए। यदि आप लंबे समय तक उसकी इस प्रतीति का विरोध करते हैं, तो वह आपको आपके अपने विचारों और जीवन शैली पर छोड़ देगा, और आप सोचेंगे कि सब कुछ ठीक है, हालांकि यह सबसे भयानक स्थिति होगी। शाऊल के विषय में सोचे। यहूदा के विषय में सोचे।
परमेश्वर के निकट आओ, और वह तुम्हारे निकट आएगा; यह उसकी प्रतिज्ञा है (याकूब 4:8)। द्वार खोलो, और प्रभु यीशु सच्चे पश्चातापी के साथ संगति करने भीतर आएगा (प्रका. 3:19-20)। स्वर्गीय बुद्धि और अनुग्रह में परमेश्वर के साथ चलना आपका चुनाव है, और एक दुख से भरा, परमेश्वर द्वारा त्यागा हुआ जीवन-संघर्ष आप का अपना विपरीत चुनाव होगा। आप किस जीवन को चुनेंगे?
सुनो, यशायाह नबी इस्राएल देश को कौन-सी चेतावनी देता है, “यहोवा कहता है, ‘आओ, हम आपस में वादविवाद करें : तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएँगे। यदि तुम आज्ञाकारी होकर मेरी मानो, तो इस देश के उत्तम उत्तम पदार्थ खाओगे; और यदि तुम न मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है’” (यशा. 1:18-20)। परमेश्वर की फटकार को सुनकर अपना मन फिराएं।
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