नीतिवचन 1:22
हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? और निंदक अपनी निंदा में आनंद करेंगे और मूढ़ ज्ञान से बैर रखेंगे?
ज्ञान की प्राप्ति के लिए आपने आज क्या किया है? अगर आपने पर्याप्त रूप से कुछ नहीं किया है, तो यह नीतिवचन आपके लिए है। क्या आप केवल मूर्ख और आलसी हैं? या आप इतने अभिमानी है कि दूसरों से कोई शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते? या सिर्फ मूर्खता से अपने आप से प्रेम करते हैं? यह नीतिवचन दिखाएगा कि इनमें से कौन सा लक्षण आपका मुख्य चरित्र-दोष है। इस नीतिवचन के प्रश्न महत्वपूर्ण हैं : क्योंकि यदि आप अपनी अज्ञानता में बने रहते हैं, तो कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि जल्द ही आपकी विपत्तियों पर हंसेगी (नीति 1:24-32)!
कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि उन लोगों को बुद्धि देना चाहती है जो इसे ग्रहण करना चाहते हैं (नीति 1:20-23)। आप बुद्धि और समझ के मुफ्त वरदान को क्यों ठुकराते हैं, जो कि जीवन के प्रमुख तत्व हैं (नीति 4:7)? आप जन्म से ही बिलकुल भोले, उपहास करने वाले व्यक्ति हैं, और ज्ञान से घृणा रखते हैं। परन्तु आपको इस बुरी अवस्था में रहने की ज़रूरत नहीं है। अपना मन फिराए, और कुलीन स्त्री नामक बुद्धि के अनुग्रहकारी वरदान को ग्रहण करें (नीति 9:1-12)।
एक भोला व्यक्ति कम बुद्धि, आलस्य और उदासीनता के मिश्रित तत्वों के कारण मूर्ख होता है। भोले लोग दिमागी काम दूसरों पर छोड़ देते हैं। भोले मनुष्य खाने, काम करने, खेलने और सोने में ही संतुष्ट रहते हैं। वे बुद्धि के मूल्य को नहीं समझ पाते। बुद्धि का पीछा करना उन्हें बहुत परिश्रमकारक लगता है, इसलिए मरते दम तक वे अपने भोलेपन में ही खुश रहते हैं।
क्या आप भोले हैं? क्या आपका जीवन केवल बिस्तर से उठना, काम पर जाना, खाना-पीना, आराम करना और फिर वापस बिस्तर पर लौट जाना इतने तक ही सिमित है? क्या तनख्वाह पाना ही आपके लिए एक वास्तविक उपलब्धि है? क्या आप दूसरों को मुद्दों का अध्ययन करने और उत्तर देने देते हैं? क्या जटिल दुविधाएं आपको डराती हैं? क्या आप पढ़ाई से ज्यादा शारीरिक व्यायाम पसंद करते हैं? यदि आपने इनमें से एक या अधिक प्रश्नों का उत्तर हां में दिया है, तो आप भोले हैं।
परन्तु कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि भोले को पुकारती है, और पूछती है, “तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोंगे? तुम मूर्खता में ही क्यों संतुष्ट रहते हो?” परमेश्वर के वचन एक भोले-भाले व्यक्ति को बुद्धिमान बना सकते हैं, यदि वह अपने भोलेपन से पश्चाताप करे, परमेश्वर से बुद्धि के लिए याचना करे, और पवित्रशास्त्र में खोज करे (नीति 1:4; भजन 19:7; 119:130)। यदि आप उसके वरदान की उपेक्षा करते हैं, तो आप अपनी भोली अवस्था में ही जिएंगे और मरेंगे और परिणाम भुगतेंगे।
ठट्ठा करने वाले घमण्डी व्यक्ति होते हैं जो उन लोगों से दूर भागते हैं जो उन में सुधार करने या उन्हें सिखाने की कोशिश करते हैं। वे घोर अभिमानी, विद्रोही और हठी होते हैं। गर्व से फूलकर, वे उन में सुधार के किसी भी प्रयास का मज़ाक उड़ाते हैं और विरोध करते हैं। वे अधिकार का घमण्डपूर्ण तरीके से अनादर करते हैं। वे नीतिवचन की पुस्तक में वर्णित सबसे घिनौने चरित्रवाले लोग हैं, जिनसे परमेश्वर और मनुष्य घृणा करते हैं (नीति 6:16-17; 9:7-8; 24:9; 26:12)।
क्या आप ठट्ठा करने वाले हैं? क्या आप आधिकारिक शिक्षकों पर आगबगुला होकर टूट पड़ते हैं, खासकर तब जब वे आप में सुधार करते हैं? क्या आप अपने विद्रोह का कोई बहाना ढूढ़ने के लिए उस व्यक्ति में दोष ढूढ़ते हैं जो आप को सुधारना चाहता है? क्या आप अपने लिए अनुयायी पाने के लिए व्यंगपूर्ण टिप्पणियां करते हैं, दूसरों पर आरोप लगते हैं, या उकसाने के लिए कलह का बीज बोतें हैं? क्या आप अधिकार और सत्ता का विरोध करते हैं, इसलिए की आप मानते हैं कि आप कम से कम उनसे ज्यादा बुद्धिमान है जिन से आप मिल चुकें हैं? क्या आप माता-पिता या शिक्षक का मज़ाक सिर्फ इसलिए उड़ा सकते हैं, कि आप उन से असहमत हैं? आप एक निंदक हैं।
परन्तु कुलीन स्त्री नामक बुद्धि तिरस्कार करने वालों को पुकारकर कहती है, “तुम ठट्ठा करने में कब तक प्रसन्न रहोंगे? तुम क्यों गाली-गलौच से भरी ठट्ठा करने में आनंद लेते हो?” यद्यपि बुद्धिमान मनुष्यों को सिखाया जाता है कि वे ठट्ठा करने वालों की संगति न करे, फिर भी कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि इन हिंसक पशुओं को भी बुद्धि देना चाहती है (नीति 9:7-8; मत्ती 7:6)। यदि वे उसके कृपालु वरदान को ग्रहण नहीं करेंगे तो स्वर्ग का परमेश्वर उन्हें अपने पैरों के नीचे कुचल देगा।
मुर्ख लोग हट्ठी और आलसी व्यक्ति होते हैं, हालांकि वे ठट्ठा करने वालों के समान अभिमानी और दुष्ट नहीं होते। वे अपने आप से इतना प्रेम रखते हैं कि उन्हें किसी की सुनने या अपने जीवन में बदलाव करने की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती। शिक्षा पाने के बाद वे तुरंत ही अपनी ही छांट की ओर लौट जाते हैं और मुर्खाता के कीचड़ में लोटते हैं (नीति 26:11)। उन्हें अपने ही विचारों से प्रेम होता है और इस कारण वे शिक्षा का विरोध करके ज्ञान से बैर रखते हैं (नीति 18:2)।
क्या आप एक मूर्ख हैं? क्या आपको लगता है कि आपके कंधों पर एक अच्छा दिमागवाला सिर है और इसलिए आपको शिक्षकों की आवश्यकता नहीं है? क्या आपको विश्वास हैं कि आप सही हैं? क्या आपको अपनी खुद की आवाज़ की ध्वनि पसंद है? क्या आप विनम्रता से सुननेवाले व्यक्ति के बजाय तीखी बहसबाजी और तीखे प्रत्युत्तर के लिए अधिक जाने जाते हैं? जब चीज़े आपके मन के अनुसार नहीं होती तो क्या आपको गुस्सा आता है? क्या आपको लगता है कि आप एक अच्छे शिक्षक हो सकते हैं? क्या आप एथेनियाई मूर्खों जैसी किसी नई चीज़ की तलाश में इंटरनेट पर खोजबीन करना पसंद करते हैं? यदि इन सब प्रश्नों के उत्तर हां है तो आप एक मूर्ख हैं।
परन्तु कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि मूर्खों को पुकारकर पूछती है, “तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोंगे? आप जो सही है उसे सीखने का विरोध क्यों करते हैं?” यद्यपि बुद्धिमान पुरुषों को मूर्खों को चुप कराना और उनकी उपेक्षा करना सिखाया जाता है, वह उन मूर्खों को भी बड़ी उदारता से बुद्धि देना चाहती है (नीति 14:7; 23:9; 26:4-5)। यदि वे उसके उपयोगी वरदान पर ध्यान नहीं देते हैं, तो वे बेकार का निष्क्रिय जीवन जीएंगे और निराशाजनक मौत मरेंगे।
पाठक, आप इस श्रेणी में कहां हैं? क्या आप एक बुद्धू हैं? या आप वास्तविक मूर्ख हैं? या आप एक घमण्ड से भरे ठट्ठा करने वाले हैं? यदि आपने आज बुद्धि की प्राप्ति के लिए कुछ नहीं किया है, तो आप इन तीनों में से एक हैं। आप इन तीनों में से जो भी हैं, कुलीन स्त्री के रूप में बुद्धि आपके सामने बुद्धि को रख रही है। यदि आप उसके वरदान को ठुकरा देते हैं, तो जब मुसीबतें आपके जीवन को बर्बाद करने आप पर टूट पड़ेगी तब वह आपकी मदद करने से इंकार कर देगी (नीति 1:24-28)।
जीवित परमेश्वर के वचन आप के सामने हैं। वे आपको बुद्धिमान बना सकते हैं (भजन 119:98-100; 2 तीमु 3:16-17)। लेकिन आपको बुद्धिमान बनने के लिए उसके वचनों को पढ़ना और उन पर मनन करना होगा। उसने आप के पास माता-पिता से लेकर पास्टरों तक भिन्न-भिन्न शिक्षक भेजे हैं (सभो 12:9; यिर्म 3:15; 1 थिस्स 5:20)। किन्तु अवश्य है कि आप विनम्र होकर उनकी शिक्षा में समर्पित हो जाए और उस पर व्यवहार में अमल करें। उसने उन लोगों के सामने बुद्धि और ज्ञान का वरदान रखा है जो उसके लिए नम्रतापूर्वक याचना करेंगे (1 राजा 3:5; याकूब 1:5)। आपने इसके लिए आखरी बार कब प्रार्थना की थी?
आप अपने भोले-भाले, ठट्ठापूर्ण या मूर्खतापूर्ण मार्गों में चलना क्यों जारी रख रहे हैं? आपका ध्यान खींचने के लिए क्या करना होगा? क्या करना होगा ताकि आपको अपने भोलेपन, ठट्ठापूर्ण स्वभाव, या अपनी मूर्खता को छोड़ने पर विवश किया जा सके? क्या तलाक ऐसा करेगा? एक बेकार परिवार? एक विद्रोही बच्चा? पेशेवर या आर्थिक परेशानी? कुछ समय के लिए जैलयात्रा? मित्रों और कलीसिया की ग़ैर-मौजूदगी? कोई बड़ी बिमारी या दुर्घटना ताकि आप अस्पताल में पड़े रहे? किसी प्रियजन की मृत्यु? कुलीन स्त्री के रूप बुद्धि आपके सामने बुद्धि को रख रही है। बेहतर होगा कि आप इसे ले लें।
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