नीतिवचन 1:19

धन के लोभी की चाल ऐसी ही होती है; लोभ अपने ही स्वामियों का प्राण ले लेता है; (केजेवी बाइबल)

पाप से भरी हिंसा निश्चित विनाश की ओर ले जाती है। क्रूर पापी नीचे की ओर अधोगति में उतरते हैं, और वे इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकते (नीति 11:21)। लालची और हत्यारे लोग अपनी ही महत्वाकांक्षा और हिंसा के द्वारा नष्ट हो जाएंगे। अन्य दुष्ट मनुष्यों को नष्ट होते हुए देखने के बावजूद, और कई बार चेतावनीयों को सुनकर भी, वे अपने ही विनाश के लिए बुराई के रास्ते पर चलते रहते हैं।

सुलैमान अपने पुत्र से प्रेम करता था और अपने राज्यकाल तथा जीवन के दौरान उसकी भलाई चाहता था, इसलिए उसने अपने पुत्र को बुरी संगति के खतरे के विषय में चेतावनी देने के लिए हत्यारों के गिरोह का एक दृष्टांत दिया (नीति 1:10-19)। अपने गिरोह में शामिल कराने के लिए, वे जिन फुसलानेवाले शब्दों का उपयोग करते हैं, उसने उन्हीं शब्दों को अपनी चेतावनी में प्रयुक्त किया, हालांकि इन शब्द-प्रयोग के माध्यम से उसने उनकी बुरी चाल की ओर इशारा दिया (नीति 1:10-14)। उसने अपने पुत्र को उन से दूर रहने की चेतावनी दी, क्योंकि वे अवश्य ही उसे संकट में डालेंगे (नीति 1:15-16)। अंत में, उसने उनके सम्पूर्ण विनाश की भविष्यवाणी की (नीति 1:17-19)।

हम इस समय नीतिवचन के जिस वचन को देख रहे हैं उसमें प्रयुक्त शब्दावली को समझने के लिए इसका सन्दर्भ मदद करता है। इस वचन के पहले के दो वचनों में वे शब्द हैं जो इस हत्यारों के गिरोह के विनाश का वर्णन करते हैं : “निश्चय ही किसी पक्षी के देखते जाल बिछाना व्यर्थ है। और वे अपने ही लहू के लिए घात लगाते हैं; वे अपने ही प्राण पर वार करने गुप्त स्थान में छिपकर बैठते हैं” (नीति 1:17-18)। ये लालची हत्यारे निर्दोष लोगों की हत्या करने, उन्हें लूटने और डकैती करने की अपनी घिनौनी और नापाक योजना के द्वारा जल्द ही अपना ही का विनाश कर लेंगे।

पक्षी मूर्ख होते हैं, और ऐसे जवान भी मूर्ख होते हैं जिन्हें लगता है कि वे मुर्खता और पाप से बच निकल सकते हैं, भले ही एक चिड़ीमार पंछी के देखते अपना जाल बिछाता है, पर फिर भी उस जाल में फसाकर रखा आकर्षक चारा बहुत ही मनमोहक और वांछनिय होता है। जिस जाल को पंछी नज़रअंदाज कर देते हैं वे उसी में फसकर जान गवा देते हैं। जवान मूर्खों को परमेश्वर और मनुष्यों के अटल न्याय के द्वारा मार दिया जाता है, ऐसा न्याय जिसे उन्होंने दूसरों के साथ होते देखा है और इसकी चेतावनियों के बारे में सुना है।

जब हत्यारे निर्दोष के लिए घात लगाकर बैठते हैं, और जब वे अपने पीड़ितों को लूटने के लिए गुप्त रूप से दुबक कर बैठते हैं, तब वे अपने अहंकार और अपनी अज्ञानता के कारण इस वास्तविकता को भूल जाते हैं कि वे अपने ही ऊपर विनाश लाएंगे। याद रखे कि आपका पाप आपको ढूंढ ही लेगा (गिन 32:23)। आतंक का राजा परमेश्वर की इच्छा और प्रकोप से उनका शिकार करेगा (अय्यू. 18:5-21)। “जो मनुष्य अंधेर से किसी को घात करता है वह भाग के गडहे में गिरेगा; उसे कोई न रोके।” (नीति 28:17)।

अटल विनाश के ये सूत्र सभी प्रकार की मूर्खता और पाप के विषय में सत्य हैं। यदि आप सुलैमान के नीतिवचन में दी गई बुद्धि के प्रतिकूल जीवन जीते हैं, तो जैसा कि बाइबल घोषित करती है अवश्य है कि आप मृत्यु से प्रीति रखें, क्योंकि यह उसी क्षण से आपका पीछा कर रही होती है (नीति 1:31; 8:36; 14:14; अय्यू. 4:8; 1 कुरिं. 16:22)। किसी भी प्रकार की शांति, सुरक्षा और समृद्धि धार्मिकता और बुद्धि के जीवन पर निर्भर करती है।

जो सबक यहाँ हैं वे एकदम सरल हैं। अपने पुत्र के लिए सुलैमान का पहला और मुख्य सबक यह था कि वह मूर्खों और दुष्टों से दूर रहे (नीति 9:6; 13:20; 1 कुरिं 15:33)। उसके लिए दूसरा सबक यह था कि वह जान ले कि मूर्ख और पापी का अंजाम वही होगा जिसकी उन्होंने दूसरों के लिए योजना बनाई थी (नीति 26:27; भजन 7:1-17)। और आखरी सबक यह कि मूर्खता और पाप के परिणाम होते हैं, इसलिए मूर्खता और पाप दोनों ही से घृणा करे (नीति 8:13; भजन 97:10)।

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