नीतिवचन 1:17
निश्चय ही किसी पक्षी के देखते जाल बिछाना व्यर्थ है।
पक्षी मूर्ख और बेअक्ल होते हैं, इतना कि उनके जीवन का भी नाश हो जाता है। जाल बिछानेवाला शिकारी उनके देखते जाल बिछाता है, परन्तु इस से उनको कोई लाभ नहीं होता। प्रलोभन के चारे का आकर्षण उन्हें आसानी से फंदे में फँसा देता है। खतरे की चेतावनी स्पष्ट है, परन्तु इस से उन की फुर्ती में कोई कमी नहीं आती है। उनकी मूर्खता और विनाश की अटलता मनुष्यों के लिए एक सबक और चेतावनी है कि वे उन पर मंडरा रहे खतरे पर ध्यान दें।
यहाँ एक उत्कृष्ट नीतिवचन है – बुद्धिमानों की एक रहस्यमय गुप्त बात, और इसे कुछ व्याख्या की आवश्यकता है (नीति 1:6)! हे यहोवा, तू ने क्या ही महिमामय पुस्तक लिखी है! प्रिय पाठक, इन चुनौतीपूर्ण शब्दों में छिपे अर्थ की खोज करने के लिए क्या आप तैयार हैं? और यह नीतिवचन, यकिनन बाकी सभी नीतिवचनों के समान, आपकी सुरक्षा के लिए और जीवन में सफलता पाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण ज्ञान और निर्देश देता है।
चिड़ीमार भोजन या खेल के लिए जंगली पक्षियों का शिकार करता है। वह एक पक्षी पकड़ने वाला चिड़ीमार होता है, और वह आम तौर पर जाल का इस्तेमाल करता है। चारे के रूप में खाने की किसी चीज़ के साथ, वह एक जाल फैलाता है जिसे आसानी से पक्षी पर गिराया जा सके या उसे फंसाने के लिए इकट्ठा किया जा सके। वह ऐसे किसी पक्षी के आने का इंतजार करता है जो आसानी से प्राप्त होनेवाली किसी खाने की चीज़ की ख़ोज में है, और फिर शिकारी उसके ऊपर जाल गिरा देता है। उड़ने में असमर्थ, चिड़ीमार के पास उसका असहाय शिकार फस जाता है।
इस नीतिवचन में व्यर्थ – एक मूर्खतापूर्ण बर्बादी क्या है? इस नीतिवचन का आरम्भ “निश्चय ही” और समापन “व्यर्थ है” से होता है। परन्तु यहाँ व्यर्थ क्या है? व्यर्थ में होनेवाली घटना क्या है? क्या पक्षी के देखते समय अपना जाल फैलाना चिड़ीमार का मूर्खतापूर्ण परिश्रम है, क्योंकि वह पक्षी अच्छी तरह से जानता है कि चारे के पास जाने में खतरा है? या फिर यह इस पक्षी के लिए व्यर्थ है कि वह चिड़ीमार को खतरनाक जाल फैलाते हुए देखता है, इसलिए कि जैसे ही शिकारी उसकी नज़रों से दूर हो जाएगा, वह फुर्ती से उस चारे के पास उड़ कर जाएगा?
इन दोनों में से कौन-सी व्याख्या सही है? इन दोनों में से दूसरी व्याख्या सही है। एक पक्षी के देखते उसके लिए एक जाल बिछाना, यकिनन उस पक्षी को कोई लाभ नहीं पहुंचाएगा, क्योंकि वह अपना प्राण दाव पर लगाकर तेजी से चारे की ओर उड़कर जाएगा। इस पक्षी का खतरे को देख लेना व्यर्थ और बेकार है, क्योंकि वह प्राणघातक जोखिम का कोई अनुमान नहीं लगा पाएगा। एक पक्षी इतना मूर्ख होता है कि वह खतरे को देख नहीं सकता, और वह चारे के लिए इतना लालची है कि वहां से उड़कर भाग नहीं सकता। इस व्याख्या को प्रकट करने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें, ताकि आप सबक सीख सकें और बुद्धि में बढ़ सकें।
यह व्याख्या संदर्भ के अनुसार सही है, क्योंकि संदर्भ ऐसे दुष्ट लोगों का वर्णन कर रहा है जो हिंसक अपराधों के लिए दौड़ते और जल्दबाजी करते हैं (नीति 1:16) जिसके परिणामस्वरूप उनके अपने जीवन का नाश होगा (नीति 1:18)। जैसा कि समस्त बाइबल में है, आपको अलग-अलग वचनों के अर्थ को निर्धारित करने के लिए संदर्भ का अध्ययन करना होता है। यहाँ पर आप सुलैमान को देखते हैं, एक सिद्ध पिता को, जो अपने पुत्र को बुरी संगति के विरुद्ध चेतावनी देकर उसे सावधान कर रहा है (नीति 1:10-19)।
साफ-साफ दिखाई देनेवाले खतरे की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद, दुष्ट लोग पापमय जीवन के पीछे भागते हैं। वे ऐसे प्रकार के अपराधियों के विषय में पढ़ते और सुनते हैं जिन्हें गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाती है; वे दूसरों को युवावस्था में भयानक मृत्यु मरते हुए देखते हैं; वे आने वाले ईश्वरीय न्याय की प्रबल चेतावनियों के विषय में सुनते हैं; और उनका विवेक उन्हें बताता है कि परमेश्वर उनके कार्यों की भर्त्सना करता है। फिर भी वे चोरी की बहुमूल्य वस्तुएं और लूट (नीति 1:13) और चोरी के अधर्मी लाभ (नीति 1:19) के लालच में उस चारे के पास उड़ कर जाते हैं।
पाप धोखा देकर अंधा कर देता है। यद्यपि परमेश्वर ने आदम और हव्वा को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी, फिर भी वे वर्जित फल के चारे के लिए शैतान के जाल में बड़ी फुर्ती से चले गए। यद्यपि व्यभिचार के विरुद्ध चेतावनी दी गई है और इसके दुष्परिणाम सर्वविदित हैं, फिर भी मूर्ख पुरुष उस पराई स्त्री के पीछे उस चिड़िया के समान भागते हैं जो फन्दे की ओर वेग से उड़ती और जानती नहीं कि उसमें उसके प्राण जाएँगे” (नीति 7:22-23)।
दुष्ट लोग खतरे की परवाह किए बिना पाप का पीछा करते हैं, और तब जाल अचानक उन पर गिर पड़ता है (सभो. 9:12)। खतरा तो हमेशा से ही मौजूद था, और वह दिखाई भी दे रहा था; फिर भी वे यह सोचकर अपने आप को धोखा देते हैं कि वे पकड़े नहीं जाएंगे। वे खुद को आश्वस्त करते हैं कि वे उन नतीजो से बच निकलेंगे जिन्हें दूसरों ने सहा है। वे परमेश्वर के न्याय को जानते हैं, पर फिर भी वे पाप में और पापियों की संगति में बने रहते हैं (रोमियों 1:32)। वे इतने मूर्ख क्यों हैं? पाप का कपटपूर्ण स्वभाव और शैतान की सामर्थ्य दोनों ही उन्हें पक्षियों के समान मूर्ख और कमजोर तथा खुला शिकार बना देते हैं (यिर्म 17:9; 2 तीमु. 2:26)।
परन्तु यहोवा परमेश्वर ठट्ठों में न उड़ाया जाएगा (गल 6:7)। जाल गिर पड़ेगा। पापी पक्षी को दबोच लिया जाएगा। ईश्वरीय न्याय का जाल बिछानेवाला उसका शिकार करेगा। परमेश्वर ने दुष्टों के लिए बड़े कौशल के साथ अपना फन्दा लगाया और जाल बिछाया है (आमोस 3:1-8)। दुष्ट अपने ही हाथों के कामों में फंस जाएगा; वह अपनी ही मूर्खता में फसकर नाश हो जाएगा, जो उसके ही सिर पर गिरेगी (अय्यूब 18:5-10; भज 7:14-16; 9:15-16; 35:7-8; 57:4-6), पुत्र को चूमो (भजन 2:12)। आज ही!
हे जवान, मूर्ख पक्षी के समान मत बन। “अपने आप को हरिणी के समान शिकारी के हाथ से, और चिड़िया के समान चिड़ीमार के हाथ से छुड़ा” (नीति 6:5)। चारे के प्रलोभन से दूर भाग। तेरी आत्मा के लिए बिछाए गए जाल के खतरे से भाग। तू अपने आप को फसाने और नाश किए बिना दुष्ट पुरुषों के साथ संगति नहीं रख सकता, किसी अजनबी महिला के साथ नहीं खेल सकता। आज जवानी की वासनाओं से भाग। दूर उड़ जा! बहुत दूर!
हे माता-पिता, मूढ़ता की गाँठ आपके बच्चों के मनों में बंधी है (नीति 22:15)। यह आपका कर्तव्य है कि आप उन्हें पाप की मूर्खता के विषय में शिक्षा दे, और इस सबक को सीखने में उनकी मदद करने के लिए उन्हें छड़ी के दर्द का अहसास कराएं, कहीं ऐसा न हो कि वे चिड़ियों के समान मूर्ख हों और अपने विनाश की ओर उड़ जाएं (नीति 13:24; 22:6; 23:13-14; 29:15; इफि 6:4)। उन्हें पाप के चारे का छलावा कैसे होता है यह दिखाए और उन्हें आज्ञा न मानने के दर्दनाक परिणामों की शिक्षा दे। उन्हें याद दिलाएं कि जो पापी पाप करने में लगे रहते हैं, वे उतने ही मूर्ख हैं जितना कि एक पक्षी जो एक दिखाई देनेवाले जाल में उड़कर जा फंसता है।
मसीही पाठक, आप नरक में निवास करनेवाले चिड़ीमार अर्थात् स्वयं शैतान के द्वारा फंसाए गए थे, जिसने आपको अपनी इच्छा का बंदी बना लिया था (2 तिमु. 2:26)। आपको उसका चारा लाभदायी लगा, और आप ने स्वेच्छा से उसकी झूठी बातों का पालन किया, और अपनी आत्मा को सदा के लिए फंसा दिया (इफि 2:1-3)। क्या आप जानते हैं कि आपकी स्थिति घात करनेवाले के जाल में फंसे एक पक्षी की तरह निराशाजनक थी? परन्तु प्रभु यीशु मसीह, जो शैतान से भी अधिक बलवान है, उसने तुम्हें उसके फन्दे से छुड़ाया है (लूका 11:20-22; कुलु. 1:13)। उसके महिमामय नाम की स्तुति करो!
शैतान ने लोगों को धर्मी जनों के लिए फन्दे लगाने की प्रेरणा दी है और देता रहेगा, परन्तु यहोवा अपने पवित्र लोगों को उन सब से छुड़ाएगा (भजन 91:3; 140:5; 29:20-21; होशे 9:8; 2 तीमु 4:16-18)। “धन्य है यहोवा, जिसने हम को उनके दाँतों तले जाने न दिया! हमारा जीव पक्षी के समान चिड़ीमार के जाल से छूट गया; जाल फट गया, हम बच निकले! यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है” (भजन 124:6-8)। उसके महिमामय नाम की स्तुति करो!
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