नीतिवचन 1:16
क्योंकि उनके पांव बुराई की ओर भागते हैं, और लहू बहाने के लिए उतावली करते हैं।
मूर्ख अपनी मूर्खता नहीं छोड़ सकते। पापी पाप करना रोक नहीं सकते। वे और भी अधिक बुराई के लिए चलकर जाने के बजाय तेजी से भागते हैं। वे लालच से भरकर अपनी दुष्ट अभिलाषाओं को तृप्त करने के लिए उतावली करते हैं (इफि 4:17-19)। उनकी इसी ख़ासियत के कारण जवानों को मूर्खों और पापियों से जितना सम्भव हो उतना दूर रहना आवश्यक है।
नीतिवचन की पुस्तक का परिचय देने के बाद (नीति 1:1-9), सुलैमान ने एक दृष्टान्त लिखा और अपने पुत्र को बुरी संगतियों के गम्भीर खतरे के विषय में चेतावनी दी (नीति 1:10-19)। मूर्ख मित्र किसी भी अन्य बात की तुलना में और भी अधिक जवानों का नाश कर देते हैं। इस दृष्टांत में हत्यारों के एक ऐसे समूह का वर्णन है जो एक युवक को अपने साथ मिलाने के लिए लुभाने की कोशिश कर रहा है, और सुलैमान ने अपने पुत्र को बताया कि ऐसे मुर्खों का अंजाम क्या होनेवाला है।
हत्यारों के एक गिरोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण पाना ज्यादती दिखाई देती है, परन्तु उन प्रलोभनों पर विचार करें जो हाई स्कूल या शहर की बस्ती के गिरोह में, कॉलेज के दुराचारी मित्रों में, विध्वंसक सैन्य या राजनीतिक संगठनों में, जासूसी संस्था में, किसी राजनितिक पार्टी, मजदूर एकता यूनियनों, और लोगों के ऐसे अन्य समाजों में शामिल होने के लिए नवयुवकों के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं, और ये सभी विभिन्न क्षेत्र समान बुरे लक्ष्यों के विभिन्न प्रकारों का पीछा करते हैं।
दुष्टों के साथ संगति रखने में जो खतरा है वह यह कि वे और भी अधिक बुराई करने में पागलपन से उतावले हो जाते हैं। पाप और दुष्टता से बचने की आपकी इच्छा चाहे जो भी हो, उनके मोहक निमंत्रण और मित्रता के दबाव की ताकत का आप विरोध नहीं कर पाते हैं। आप उनके साथ इस दलदल में घुसते ही जाएंगे, और वे इस दलदल में निश्चित ही और गहराई तक घुसते जाएंगे। सुलैमान ने इस दृष्टान्त का समापन करने से पहले इसे स्पष्ट कर दिया (नीति 1:17-19)।
पाप संतोष नहीं जानता। एक पाप काफी नहीं है। परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने तथा वर्जित आनंद का फल चखने के बाद और भी ज्यादा की लालसा होती है। हृदय कठोर हो जाता है, विवेक जलकर राख़ हो जाता है, वासनाएं भड़क जाती हैं, और मन चोरी छिपे किए हुए रोमांच को भूल नहीं पाता। और फिर विनाश करनेवाली अधोगति की ओर एक दौड़ शुरू हो जाती है। क्या है जो पापी को रोकेगा?
आप दुष्ट मित्रों में कोई धर्मसुधार नहीं ला सकते, बल्कि बुरे मित्र आपके अच्छे चरित्र को भ्रष्ट कर देंगे (1 कुरिं 15:33)। बुद्धि का कवच सरल है : मूर्खों से दोस्ती करना शुरू भी न करें (नीति 1:10; 4:14-17; भज. 1:1-3)। यदि आपके कोई मूर्ख मित्र हैं, तो उनकी मित्रता को तुरंत त्याग दें (नीति 9:6; 13:20; 14:7)। यह नियम जीवित रहने और सफलता पाने के लिए निर्णायक है (नीति 2:10-22)।
केवल परमेश्वर ही मूर्खों को बदल सकता है, जो उसने तरसुस के शाऊल के मामले में शानदार ढंग से किया था (तीतुस 3:3-5)। यदि आपको लगता है कि आप उन्हें बदल सकते हैं, तो आप सरासर ग़लत हैं। धोखा न खाओ (1 कुरिं 15:33)। एक अन्य नीतिवचन का निष्कर्ष है, “यद्यपि तू मूर्ख को गेहूँ के साथ ओखली में डालकर मसल के कूटे, तौभी उसकी मूर्खता उस से दूर न होगी” (नीति 27:22)। यहाँ तक कि पौलुस भी उन लोगों से दूर रहता था जो विश्वासरहित थे और परमेश्वर का भय नहीं मानते थे (2 थिस्स 3:1-2; 2 तीमु: 3:1-5)।
इस नीतिवचन का सबक सरल और परिणामकारक है। मूर्ख मित्र किसी भी मनुष्य का नाश कर देंगे। इसलिए, सिय्योन के राजा के मित्रों, अर्थात् विश्वासियों के लिए सभी सांसारिक मित्रों का त्याग कर दे (भजन 101:1-8; 119:63, 79; 144:11-15; तीत 1:8)। वे आपको ऐसी किसी स्थानीय कलीसिया में मिलेंगे जो प्रेरितिय सिद्धांत और आचरण को ऊँचा उठाती है, जहां आप यीशु मसीह के प्रति अधिक विश्वासयोग्य और आज्ञाकारी रहने के लिए एक दूसरे को उपदेश देकर सहायता कर सकते हैं।
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