नीतिवचन 1:14
हमारा साझेदार हो जा, हम सब का एक ही थैला हो।
परमेश्वर की स्वीकृति के बिना एकात्मकता कुछ भी नहीं है। वास्तव में, यह विद्रोह और परमेश्वर के विरोथ में राजद्रोह है, जब तक कि परमेश्वर ऐसी एकात्मकता की स्वीकृति न दे। पापी चाहते हैं कि पवित्रजन उनके साथ सहमत हों जाए और उनकी योजनाओं में शामिल हों जाए, लेकिन यहोवा चाहता है कि उसके बच्चे उनकी करीबी संगति से बचें रहे और उसे ठुकरा दे (नीति 1:10, 15)। पापीजन सहयोग और मित्रता के लिए बड़ा आग्रह करते हैं, परन्तु उनके मनों के उद्देश्य कुछ और ही होते हैं।
सुलैमान ने यहाँ अपने पुत्र को और सभी जवानों को पापीजनों के मित्रतापूर्ण दबाव के विरुद्ध चेतावनी दी है (नीति. 1:10-19)। उनके लक्ष्य डकैती और हत्या के थे, और निश्चित रूप से उनका नाश हो जाएगा। जो जवान यहोवा का भय मानते हैं, उन्हें उनसे दूर रहना चाहिए और उनका साझेदार बनने के उनके सब आग्रह और आकर्षण को ठुकरा देना चाहिए। पापियों के दल के साथ कदम से कदम मिलाना भक्ति के विपरीत है और दण्ड को ले आता है।
भले ही किसी मूर्खतापूर्ण या पापपूर्ण उद्यम में शामिल एक बड़ी भीड़ के साथ एकजुट होना सुरक्षित दिखाई देता हो, फिर भी परमेश्वर से प्रेरित होकर सुलैमान ने अपने पुत्र को सावधान किया कि कोई भी संयुक्त शक्ति परमेश्वर के न्याय से बचा नहीं सकती (नीति 11:21)। यह चौड़ा फाटक और एक चौड़ा मार्ग है, जिसमें बहुत से यात्री बहुमत के साथ खुशी-खुशी प्रवेश करते हैं, जो अंत में विनाश और मृत्यु की ओर ले जाता है (मत्ती 7:13-14)।
पापियों के साथ संगति करने के परिणामस्वरूप आनेवाले दंड से कोई सुरक्षा या शरणस्थान नहीं है। स्वीकृति देनेवाला परमेश्वर ही जो तब प्रसन्न होता है जब हम पाप और पापियों को ठुकरा देते हैं, एक सच्चा शरणस्थान है (यशा. 8:9-15)। जब पुराने नियम में देश-देश के लोग परमेश्वर की कलीसिया के विरोध में इकठ्ठा हुए, तब उसने उनके इन प्रयासों की ठठ्ठा की, क्योंकि वह जानता था कि वह उन देशों का नाश करने के लिए अपने लोगों को सामर्थ्य देगा (मीक 4:11-13)।
पवित्र जनों के साथ संगति और सामाजिक सम्बंध एक अद्भुत बात है (भजन 133:1; फिली 1:3-5), किन्तु जब पवित्र लोग अविश्वासियों के साथ असमान जुए में बन्ध जाते हैं तब यह एक भयानक बात है (भजन 144:11; 1 कुरिं. 5:9-11)। मसीह की कलीसियाओं में संगति और एकता महान आशीषें हैं (1 कुरिं 12:12-27), लेकिन पापियों के साथ संगति रखना विनाशकारी है (इफि 5:11-12)। फिर भी कमज़ोर चरित्रवाले कुछ अच्छे लोग दुष्ट लोगों के निमंत्रण और उनके साथ जुड़ने के दबाव का विरोध नहीं कर पाते हैं।
यहोशापात ऐसा ही एक मनुष्य था। यहोशापात, जो दाऊद का पोता और यहूदा का राजा था, वह संयुक्त योजनाओं और पारिवारिक अंतर्विवाहों में इस्राएल के राजा अहाब के निमंत्रण का विरोध नहीं कर सका (2 इति. 18:1-3)। परमेश्वर ने क्या कहा? “तब हनानी नामक दर्शी का पुत्र येहू राजा यहोशापात से भेंट करने को निकला, और उस से कहने लगा, ‘क्या तुझे दुष्टों की सहायता करनी चाहिए, और यहोवा के बैरियों से प्रेम रखना चाहिए?’ इस काम के कारण यहोवा की ओर से तुझ पर क्रोध भड़का है” (2 इति 19:2)।
राजा अहाब के पास 400 भविष्यद्वक्ता थे, जो उसके मंत्री-संगठन से पूरी तरह से सहमत थे, लेकिन ये सब मिलकर भी उस मनुष्य के लिए जो परमेश्वर का भय मानता था और उनके साथ न हुआ, कोई मेल नहीं थे । बाइबल में सबसे दिलचस्प और शक्तिशाली घटनाओं में से एक घटनाक्रम में हम सच्चे भविष्यवक्ता मीकायाह के बारे में पढ़ते हैं, जिसने परमेश्वर के वचन की घोषणा करने के लिए एकता की उनकी दलीलों को खारिज कर दिया (1 राजा 22:1-40)। अहाब के साथ मिल जाने के कारण यहोशापात को दण्ड दिया गया, किन्तु अहाब के 400 नबियों को ललकारने के लिए मीकायाह को आशिष दी गई।
बाबेल की मीनार पृथ्वी के सभी लोगों को एकजुट करने का मनुष्य का पहला ज्ञात प्रयास था, परन्तु यहोवा ने इस काम को बीच में ही रोक दिया और इस योजना में शामिल सभी प्रतिभागियों को भ्रमित कर दिया। परमेश्वर की महिमा हो! दो हज़ार वर्षों के बाद उसी स्थान पर राजा नबूकदनेस्सर धार्मिक एकतावाद और समभाव के लिए आवेशी हुआ, किन्तु तीन विश्वासयोग्य मनुष्यों ने किसी भी कीमत पर सत्य से समझौता नहीं किया और उन्होंने धार्मिक त्योहारों को उलटकर रख दिया। सारी महिमा परमेश्वर को!
परमेश्वर के बच्चों को सच्ची शांति तभी मिल सकती है जब पवित्रता को ऊंचा किया जाता है – अर्थात् सत्य और धार्मिकता की पवित्रता। “उन में से निकलो और अलग हो जाओ,” प्रेरितों और स्वर्गदूतों की पवित्र पुकार है (2 कुरिं 6:14-17; प्रका. 18:4)। परमेश्वर की सर्वोच्च आशीषें और संगति इसकी मांग करती है (2 कुरि 6:16-7:1)। जहां पवित्रता की बलि चढ़ाई जाती है वहां कोई वास्तविक शांति निवास नहीं करती है, बल्कि केवल मृत्यु का एक सन्नाटा (नीति. 21:16)। अवश्य है कि कलीसिया किसी भी विपरीत धर्मसिद्धान्त को ठुकरा दे (रोमियों 16:17-18; तीतुस 3:10-11)।
धर्मिजन परमेश्वर का भय न माननेवालो और उसकी आज्ञाओं का पालन नहीं करने वालों से आसानी से अलग हो जाते हैं । पीनहास के समान, उन्हें इस मसले पर प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं होती है, वे उत्साह से एक भाला उठाते हैं और ऐसी संगति का अंत कर देते हैं (गिनती 25:1-15)। दाऊद नहीं चाहता था कि समझौता करनेवाला कोई भी मनुष्य उसके आस पास भी हो (भजन 101:3-8), क्योंकि वह मूर्खों और पापियों से घृणा करता था (भजन 26:5; 31:6; 139:21-22)। साथ ही, उसने सिखाया कि जो कुकर्मियों की संगति से दूर रहेंगे उन पर परमेश्वर की आशिषें बनी रहेगी (भजन 1:1-3)।
मूसा ने मसीह तथा उसकी कलीसिया के कारण दुख और निंदा भोगने के लिए मिस्र के सुखों और धन को त्याग दिया (इब्रा. 11:24-27)। क्या आप ऐसा चुनाव करेंगे? क्या आप ऐसा करेंगे? फिरौन के महल में रहने से आप को सुख और पुरस्कार, लोगों की प्रशंसा और मानव सुरक्षा मिलेगी। परन्तु महान प्रतिफल – अर्थात् मसीह का धन और उस में एक अनंतकाल की मीरास – केवल कनान, अर्थात् प्रतिज्ञा के देश में ही पाए जाते हैं, जो एक अलग होकर जीवन जीने से प्राप्त होते हैं। क्या आप यीशु मसीह के साथ अकेले जाने के लिए तैयार हैं, फिर चाहे आपको मसीही होने का दावा करनेवालों की छावनी के बाहर ही क्यों न जाना पड़े (इब्रा. 13:12-14)?
स्त्रोत : https://letgodbetrue.com
हिन्दी अनुवाद : https://fivesolasindia.com
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