नीतिवचन 1:11

यदि वे कहें, कि हमारे संग चल, हम लहू बहाने के लिए घात लगाए, और अकारण ही निर्दोष के लिए घात लगाकर बैठे;

दुष्ट मित्र युवाओं के लिए एक बड़ा खतरा होते हैं। मित्रों का दबाव उन्हें, यहां तक कि बलवंत और संकल्पित लोगों को भी, बर्बाद कर देने के लिए झुका देता और आकार देता है। दाऊद ने भजन संहिता की पुस्तक की शुरुआत चेतावनी के साथ की (भजन 1:1)। सुलैमान ने नीतिवचन की पुस्तक को उसी तरीके से आरम्भ किया (नीति 1:10-19)। चेतावनी में बताया गया कि, “हे मेरे पुत्र, यदि पापी तुझे फुसलाएं, तो तू राज़ी मत होना” (नीति 1:10)। यदि आप पथभ्रष्ट किए जाने से बचना चाहते हैं, तो इस शिकंजे का तिरस्कार करें!

राजा सुलैमान, जो एक बुद्धिमान पिता था, उसने उस निमन्त्रण को, जो एक प्राण-घातक गिरोह में शामिल होने के लिए दिया जाता है, एक चित्रात्मक ढंग से प्रस्तुत करके अपनी चेतावनी को समझाया। उनकी क्रूरता और लालच की बराबरी शायद ही की जा सकती है (नीति 1:11-13); उनका विनाश जो तय है उसका उन पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता (नीति 1:17-19)। बहुत की कम लोग ऐसे होंगे जो निर्दोष लोगों की अकारण ही गुप्त रूप से हत्या करने के प्रस्ताव से फुसलाए जाएंगे। परन्तु किसी भी पापी के द्वारा फुसलाया जाना घातक है।

“हमारे संग चल।” इस निमन्त्रण में प्रयुक्त किया गया पहला शब्द “हमारे” इस मित्रता की मनोहारिता के विषय में बताता है। उस शब्द का तात्पर्य है, “हम जाने-माने लोग हैं। हम लोकप्रिय हैं। हमने बड़ी बड़ी चीजें हासिल की हैं, और हम और भी अधिक बड़ी बड़ी चीजें हासिल करने जा रहे हैं। हमारे पास शहर में सबसे तेजी से बढ़नेवाली कलीसिया है। हमारा नाम प्रतिष्ठित है। हम प्रभावशाली हैं। हम सब से पुराने और पारम्पारिक हैं। तू अपने इस छोटे दल में कुछ भी नहीं हैं।”

“हमारे संग चल।” इस निमन्त्रण में प्रयुक्त किया गया दूसरा शब्द “संग” स्वीकार किए जाने, अनुमोदन, अपनेपन, मित्रता और एकता का वर्णन करता है। “हम साथ साथ रह सकते हैं। तू मित्रों की एक मज़बूत मण्डली का हिस्सा बन सकता है। तू फिर कभी अकेला नहीं रहेगा। हम अपने कौशल और संपत्तियों को आपस में मिला देंगे; हमें कोई हरा नहीं पाएगा, मतलब हम अजेय होंगे। अकेले जीवन क्यों जीता है? तू कभी भी अकेला कुछ नहीं बन पाएगा! हम एक साथ चौड़े द्वार से प्रवेश कर सकते हैं!”

“हमारे संग चल।” इस निमन्त्रण में प्रयुक्त किया गया तीसरा शब्द “चल” अत्यन्त आकर्षक है – विरोध करने में कठिन, किन्तु अंत में विनाशकारी। “आ चल, हम ने ऐसे ऐसे काम करने की योजना बनाई है, जिन्हें करने से तू चूक गया था। आ चल, हम हमेशा ही रोमांचक कामों को करते हैं। अपने सीधे-सीधे और अनुशासित जिंदगी से इतना क्यों उबता है? करने के लिए बहुत सी चीजे और घूमने लायक बहुत सारे ठिकाने हैं जो तेरे जीवन को उत्साह और रोमांच से भर देंगे। घर पर ही क्यों रहता है? मज़ेदार बातें हो रही हैं! आ चल!”

इस निमन्त्रण में बहुत ही लुभावना चारा प्रस्तुत किया जाता है। “हमारे संग चल” इन शब्दों का विरोध कौन कर सकता है? सुलैमान ने पापियों के दुष्ट कामों को स्पष्ट रूप से उजागर करते हुए उनका पर्दाफाश किया। दुष्ट लोग शायद ही कभी ऐसे घिनौने लक्ष्यों को सामने से घोषित करते हैं, लेकिन सभी पाप और विद्रोह परमेश्वर की दृष्टि में समान हैं, चाहे वे सामाजिक रूप से कितने भी स्वीकार्य क्यों न हो। यदि ऐसा खुला निमंत्रण दिया जाए तो अधिकांश लोग ऐसे असंवेदनशील निमंत्रण को ठुकरा देंगे, पर ऐसा निमंत्रण आमतौर पर गुप्त होता है।

सांसारिक पुरुषों द्वारा बहकाई गई जवान लड़कियों ने कभी भी एक अजन्मे बच्चे को जान से मारने की योजना नहीं बनाई हो, पर फिर भी कई लड़कियाँ गर्भपात करने वाले के अवजारों का शिकार हो जाती हैं। बेतशेबा को अपने शयनकक्ष में ले जाना दाऊद को सहज लगा, लेकिन उसने कभी भी अपने सबसे वफादार दोस्तों में से एक की हत्या करने की योजना नहीं बनाई थी। कई यहूदी शासक जो यीशु मसीह पर विश्वास करते थे, आराधनालय को नहीं छोड़ सके, इसलिए वे मानव-इतिहास में हुई सबसे निर्दयी हत्या के भागीदार बनकर अपराधी बन गए (यूहन्ना 12:42-43)।

हे जवान लड़कों और जवान लड़कियों! वचन क्या कहता है, सुनो, “यदि पापी तुझे फुसलाएं, तो तू राज़ी मत होना” (नीति 1:10)। “तू मार्ग में उनके साथ मत चल; उनके पथ से अपने पावों को रोके रह” (नीति 1:15)। उनके आकर्षण, निमंत्रण या धमकियों पर ध्यान न दें। अपने आप से झूठ मत बोलो। वे तुम्हें भ्रष्ट कर देंगे (1 कुरिं 15:33)। निश्चित ही! आपके हाथों से किसी न किसी तरह से लहू बहेगा ही। दूर भागो! बहुत दूर भागो! अभी भाग जाओ (नीति 4:14-15; 9:6; 13:20; भजन 1:1-6; 26:4-5)!

स्रोत : https: //letgodbetrue.com

हिन्दी अनुवाद : https://fivesolasindia.com

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