नीतिवचन 1:1

दाऊद के पुत्र इस्राएल के राजा सुलैमान के नीतिवचन;

प्रिय पाठक, इन वचनों पर ध्यानपूर्वक और धीरे-धीरे विचार करें। ये अद्भुत वचन हैं। आपने राज-परिवार के एक ईश्वर-प्रेरित सदस्य के निजी ग्रन्थालय में प्रवेश किया है। ज्ञान के रहस्य आपके लिए इकट्ठा और सुरक्षित कर लिए गए हैं। सुलैमान, जो इस्राएल का धनी और बुद्धिमान राजा, और जो प्रिय राजा दाऊद का पुत्र था, वह आपको परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में महान होना सिखाएगा (नीति. 3:1-4; 10:1; 25:1)।

आप अन्य कई आशीषों के साथ-साथ ज्ञान, विवेक, सम्मान, धन और जीवन के खुले दरवाजे के सामने खड़े हैं। ये किसी मूर्तिपूजक विचारक के शब्द मात्र नहीं हैं, जिनकी बातें बहुत पहले ही झूठी साबित हो चुकि हैं। ये ऐसे वचन हैं जिन्हें संसार के सबसे बड़े विश्लेषक और दार्शनिक ने सीखा, उन्हें प्रमाणित किया, और परमेश्वर की प्रेरणा से लिखा (सभो 1:12-18; 2:1-12)।

एक नीतिवचन क्या होता है? इससे पहले कि आप इस अद्भुत पुस्तक को पढ़ें और सुलैमान के इन वचनों को समझने का प्रयास करें, अवश्य है कि आप एक नीतिवचन की परिभाषा और गुणधर्म पर विचार करें। अंग्रेजी भाषा के ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार, अंग्रेजी में प्रयुक्त शब्द प्रावर्ब्स का अर्थ निम्नलिखित है :

आम और मान्यता प्राप्त उपयोग में एक संक्षिप्त सारगर्भित कहावत या लोकोक्ति; एक संक्षिप्त वाक्य, जो अक्सर रूपक अलंकार या अनुप्रास अलंकार के रूप में होता है, जिसे अनुभव या अवलोकन द्वारा ज्ञात हो चुके कुछ सत्य को अभिव्यक्त करने के लिए अपनाया जाता है और जो सभी को सुपरिचित होता है; एक सुक्ति, एक बुद्धिजीवी का दृष्टान्त, एक मुहावरा।

अवमानना या तिरस्कार का एक सामान्य शब्द या वाक्यांश, एक प्रतिनिधिक-शब्द।

एक अलौकिक या गूढ़ कहावत जिसे व्याख्या की आवश्यकता होती है; एक रूपक, एक दृष्टान्त।

बाइबल “नीतिवचन” शब्द को इन तीनों तरीकों से प्रयुक्त करती है, और इसमें तीनों प्रकार के नीतिवचन शामिल हैं। सुलैमान के नीतिवचन की पुस्तक में तीनों प्रकार भी शामिल हैं।

नीतिवचन को समझना कठिन हो सकता है। जैसा कि परिभाषाएँ दिखाती हैं, वे अक्सर रूपक अलंकार होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे शब्दों का प्रयोग लाक्षणिक रूप से करते हैं, शाब्दिक रूप से नहीं। और वे अक्सर गूढ़ होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे जानबूझकर अस्पष्ट रूपकों या अन्य भाषालंकारों के उपयोग के द्वारा पाठक को उनके छिपे हुए सबक की खोज करने की चुनौती देने के उद्देश्य से संकलित किए गए थे। वे अपनी रचना में अस्पष्ट और पेचीदा हो सकते हैं, जो उन्हें अद्वितीय आकर्षण, सुन्दरता और बल देता है।

सुलैमान अपने परिचय में नीतिवचनों का वर्णन ऐसे करता है, जिनकी परिभाषा करना आवश्यक है और जो बुद्धिमान मनुष्यों की रहस्यमय गुप्त बातें हैं (नीति. 1:6)। आप सुलैमान को ऊपर वर्णित लगभग पहली और तीसरी परिभाषा को अपनाते हुए देख सकते हैं, क्योंकि रूपकों को व्याख्या की आवश्यकता होती है और पहेलियां वास्तव में रहस्यमय गुप्त बातें होती हैं। उसके नीतिवचन जल्दबाजी में या हल्के रूप में पढ़ें जाने के लिए नहीं हैं। वे सावधानीपूर्वक और धीमी गति से पढ़ने के लिए हैं जिसमें प्राप्त सबक या सबकों पर बहुत विचार के साथ साथ इस बात पर चिन्तन किया जाता है कि जो ज्ञान प्राप्त हुआ है उसका अपने जीवन में व्यवहारिक उपयोग कैसे करे।

इन कहावतों की व्याख्या करने और उन्हें लागू करने की आवश्यकता है, जिसका उद्देश्य उसी अर्थ की खोज करना है जो अर्थ परमेश्वर और सुलैमान का था (2 पत. 1:20-21)। जैसा कि सभी उचित बाइबल अध्ययन के सम्बंध में होता है, इन वचनों को स्पष्ट रूप से पढ़ा जाना है, और फिर समझ उत्पन्न करने के लिए उचित अर्थ दिया जाना है (नेह. 8:8)। इस प्रक्रिया का बाइबल की सभी पुस्तकों में अवश्य पालन किया जाना चाहिए, परन्तु विशेष रूप से नीतिवचन में।

यीशु और उसके शिष्य नीतिवचन को समझने में होने वाली कठिनाई को आगे और भी दिखाते हैं। एक नीतिवचन के अस्पष्ट गुणधर्म को दर्शाने वाले निम्नलिखित दो वचनों पर विचार करें :

“मैं ने ये बातें तुम से दृष्टान्तों में कहीं हैं, परन्तु वह समय आता है कि मैं तुम से फिर दृष्टान्तों में नहीं कहूँगा, परन्तु खोलकर तुम्हें पिता के विषय में बताऊँगा।” यूहन्ना 16:25

“उसके चेलों ने कहा, “देख, अब तो तू खोलकर कहता है, और कोई दृष्टान्त नहीं कहता।” यूहन्ना 16:29

यीशु जानता था कि नीतिवचन सरल व्याख्यान नहीं थे, और चेले भी जानते थे कि नीतिवचन सरल व्याख्यान नहीं थे। नीतिवचन का पूर्ण और सही अर्थ तथा उनके व्यवहारिक उपयोग को जानने के लिए उनके सावधानीपूर्वक विश्लेषण और व्याख्या करने की आवश्यकता होती है। भयभीत होने के बजाय, सम्भावना पर उत्साहित होईये।

ये नीतिवचन परमेश्वर की बुद्धि के द्वारा सफलतापूर्वक जीवन जीने के लिए संक्षिप्त, मूल्यवान और चुनौतीपूर्ण नियम प्रदान करते हैं। आप सम्मान और धन का सबसे तेज तरीका सीखेंगे और आप उन गड्ढों में गिरने से बचेंगे जिनमें अन्य लोग गिर कर फँस जाते हैं। कितना रोमांचक साहित्यिक रूप है! सच बताने का क्या ही दिलचस्प तरीका है! और यह सबकुछ परमेश्वर यहोवा की दिव्य प्रेरणा से!

परन्तु ये केवल सामान्य नीतिवचन नहीं हैं, वे दाऊद के पुत्र और इस्राएल के राजा सुलैमान के नीतिवचन हैं। सुलैमान जो उस मनुष्य से जन्मा और प्रशिक्षण पाया था जो परमेश्वर के मन के अनुसार था, उसको परमेश्वर ने अन्य सभी मनुष्यों से बढ़कर विशाल हृदय और बुद्धि दी (1 राजा 3:12; 4:29-31)। एक शान्तिपूर्ण शासन के साथ राज्य कर रहें एक धनी राजा के रूप में, उसने जीवन के उद्देश्य और नियमों की इतनी खोज की जितना कि कोई अन्य व्यक्ति प्रयास भी नहीं कर सकता था, जैसा कि उसकी दार्शनिक पुस्तक सभोपदेशक में लिखा है।

परमेश्वर ने सुलैमान को कई नीतिवचन लिखने की प्रेरणा दी, जिसके द्वारा उसने लोगों को ज्ञान सिखाया और स्वीकार्य वचन, सत्य के वचन क्रमबद्ध किए (सभो. 12:9-11)। कुल तीन हज़ार नीतिवचनों (1 राजा 4:32) में से सर्वश्रेष्ठ पांच सौ नीतिवचन यहां हैं। क्या ही अद्भुत संग्रह है! आप अपने जीवन के अधिकांश क्षेत्रों से सम्बन्धित सत्य और ज्ञान सीखेंगे। सम्मान, दिर्घायु, शान्ति, समृद्धि और सुरक्षा बिलकुल आपके सामने हैं। आपका कर्तव्य बस उन्हें पढ़ना, सीखना और उनके अनुसार करना है।

बाइबल की उपस्थिति में थरथराएं – जो सिद्ध प्रकाशन का परमेश्वर का दिव्य ग्रन्थालय है- और परमेश्वर के मन और सुलैमान के अवलोकनों से आने वाली एक विशाल लूट की खोज करने के अवसर पर आनन्द मनाएं। परमेश्वर से विनती करें कि वह उसके आत्मा के द्वारा आप पर बहुमूल्य बातें प्रकट करे (भजन 119:18)। शिक्षा और आज्ञाकारिता को अपना लक्ष्य बना लें, जिसमें डिंग मारने के लिए केवल शैक्षणिक रुचि या ज्ञान का एक अंश भी न हो। परमेश्वर और मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए बुद्धि में बढ़ना ही आपकी महत्वाकांक्षा हो।