नीतिवचन 16:4
परमेश्वर ने सब कुछ अपने लिए बनाया है : हां, दुष्ट को भी विपत्ति के दिन के लिए।
यहोवा परमेश्वर को महिमा दो! स्वर्ग के राजा के सामने भूमि पर गिरो! जीवन के चार सबसे बड़े प्रश्नों के अंतिम और सच्चे उत्तर यहां दिए गए हैं: सभी चीजें कहां से आई हैं? वे क्यों अस्तित्व में हैं? सच्चा परमेश्वर कौन है? बुराई क्यों मौजूद है? यह एक वाक्य आपके वज़न के बराबर सोने से भी मूल्यवान है! स्वर्ग से प्रकाशित इस सत्य-सिद्धान्त के सामने अपने को नम्र करें और जीवन के लिए बुद्धि को सीखें!
नीतिवचन बहुत कम मूल्य के हैं, यदि आप इसे याद करते हैं। बुद्धि के आरम्भ के लिए इस नीतिवचन को समझना आवश्यक है (नीति 1:7; 9:10)। यह नीतिवचन बच्चों को कंठस्थ होना चाहिए। यहाँ बाइबल का विश्वदर्शन है। ज्ञान की इस नींव से, आप जीवन के अन्य पहलुओं के विषय में ठीक-ठीक और युक्तिपूर्वक तरीके से ख्रिश्चन विश्वास की बौद्धिक दलील प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आप यहां प्रकट सत्य की उपेक्षा करते हैं या उसे ठुकराते हैं, तो आपका जीवन भ्रांति का एक भयावह अनुभव बनकर रह जाएगा, और अन्त में आप का सामना एक क्रोधि परमेश्वर से होगा (भजन 7:11; आमोस 4:12)।
सब चीजें कहां से आईं? परमेश्वर ने सब कुछ बनाया। जीवन के उद्विकास का सिद्धान्त एक झूठ है, जो कि परमेश्वर से बैर रखने वालों का षडयंत्र है ताकि बाइबल की विश्वसनीयता को उलट दे। बाइबल कहती है: “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की” (उत्पत्ति 1:1)। यह आज तक के किसी भी तथ्य से अधिक निश्चित है। यदि आप में इस सत्य को माननेवाला विश्वास नहीं है, तो आप तर्क-विरोधी मूर्ख हैं (2 थिस्स 3:2; 1 तीमु 6:20-21)।
इस विश्व की उत्पत्ति अराजक और निरुद्देश्य गैसों के एक महाविस्फोट से होने के सिद्धांत से अपनी दलील शुरू करना पागलपन का संकेत है। वे गैसें कहाँ से आईं? कैसे एक महाविस्फोट ने एक अस्तव्यस्त तत्व से व्यवस्था और सुंदरता को बाहर निकाला? इस घटना के बाद जो परिणाम सामने आएं उनमे सब जीव अपनी-अपनी जाति के अनुसार कैसे उत्पन्न हुएं? इसका परिणाम लाखों विभिन्न प्रकारों की प्रजातियों में कैसे हुआ, जो सभी अपनी-अपनी जाति के अनुसार बहुगुणित हुए?
सामर्थी परमेश्वर यीशु मसीह ने सब कुछ बनाया। बाइबल स्पष्ट है: “सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ, और जो कुछ उत्पन्न हुआ है उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न नहीं हुई” (यूहन्ना 1:3)। आपको अविश्वासियों के साथ सृजन बनाम उद्विकासवाद पर बहस नहीं करनी चाहिए। जब तक उनमें विश्वास न हो, वे किसी भी मूल्यवान सत्य को नहीं सीख सकते, खासकर यदि वे शिक्षित हों। एक अभिमानी व्यक्ति जो अपनी शिक्षा और डिग्री की डिंग मारता फिरता है, वह मूर्ख से भी बदतर है (नीति 26:12; 1 कुरिन्थ 1:19-20; 3:19-20; 1 तिमु 6:3-5)।
इस विश्व ने एकमात्र बड़ा महाविस्फोट अगर कभी महसूस किया तो वह परमेश्वर के वचनों की दिल दहलानेवाली शक्ति थी, “प्रकाश हो!” और प्रकाश हुआ! और वह भी तीन दिनों तक बिना सूरज, बिना चंद्रमा या बिना तारों के! उसने सब कुछ बनाया, और उसने उन्हें अर्नास्तत्व से बनाया। विश्वास से आप न केवल इस तथ्य को जान सकते हैं, वरन इसे समझ भी सकते हैं (इब्रानियों 11:3)। मनुष्य इस दिव्य कुम्हार के हाथों से बने एक बर्तन से ज्यादा कुछ नहीं है। इस पहले उत्तर को पूरा-पूरा समझ लें, और आप बुद्धि की ओर उन्नत होते जाएँगे।
विचार करें कि कौन-सी बातें एक व्यक्ति को व्यक्ति बनाती हैं। माता-पिता, ऊंचाई, राष्ट्रीयता, बुद्धि, रूप, जन्म का समय, बल, जाति, समन्वय या तालमेल, व्यक्तित्व और अवसर ये बातें मिलकर एक व्यक्ति को व्यक्ति बनाती हैं। परमेश्वर ने इनमें से हर एक को आपके लिए चुना है, और वह भी बिना आप से सम्मति या सहमती लिए। उसने आपसे आपकी पसंद के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछा। उसने उन्हें खुद अपनी मर्ज़ी से चुना! वह आपसे बिना पूछे ही आपको अस्तित्व में लेकर आया, जो बहुत ही व्यक्तिगत बात है, और उसके साथ आनेवाली पीड़ा और विपत्तियाँ भी दी। आप तो अपना वजूद भी मिटा नहीं सकते। अन्त में आपको उसका सामना करना होगा। वह परमेश्वर है।
आप भयानक और अद्भुत रीति से रचे गए थे, वरन उसकी सारी सृष्टि भी वैसी ही रची गई थी (भजन 139:14)। आप विशेष नहीं हैं। यकीन माने, आप निश्चित रूप से विशेष नहीं हैं, क्योंकि आप मानव हैं, जैसा कि मानवतावादी सुझाव देते हैं। परमेश्वर विशेष है, और जो कुछ भी आप हैं और जो कुछ भी आपके पास है, सब उसकी मेहरबानी है। स्वयं पर प्रेम करने और आत्म-सम्मान की मूर्खता को त्याग दें (2 तीमु 3:1-2)। अपनी आँखें स्वर्ग की ओर उठाएँ, और परमप्रधान को धन्य कहें और उसकी स्तुति करें। परमेश्वर से मुलाकात करने के विषय में दुनिया के सबसे महान राजा की व्यक्तिगत गवाही को पढ़ें (दानिय्येल 4:1-37)।
यदि कोई व्यक्ति यह नहीं मानता है कि परमेश्वर ने सब कुछ बनाया है, तो उसके साथ किसी भी महत्वपूर्ण बात पर चर्चा करने का कोई कारण नहीं है। उसने मानसिक विक्षिप्तता का एक ऐसा विश्वदृष्टि चुना है जिसमें वह अपनी कल्पना से एक चक्र में तर्क करता है। आप उसके साथ किसी भी नतीजे पर पहुँचकर मसले को कैसे सुलझाएंगे? उसके पास सभी सवालों का एक ही जवाब है – क्योंकि मुझे ऐसा लगता है। वह कुछ भी निश्चित रूप से नहीं जान सकता, क्योंकि उसकी नींव कल्पित मतिभ्रमों की हल्की हवा पर टिकी हुई है जिन्हें वह सिद्धांत कहता है।
सब चीजें क्यों अस्तित्व में हैं? यह विश्व यहाँ क्यों है? मनुष्य यहाँ क्यों है? आप यहाँ क्यों हैं? परमेश्वर ने सब कुछ बनाया, और उसने उन्हें अपने लिए बनाया! उसकी महिमा का वर्णन करों! उसकी आराधना करों! उसकी स्तुति के गीत गाओ! ” हे हमारे प्रभु और परमेश्वर, तू ही महिमा और आदर और सामर्थ्य के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं और सृजी गईं” (प्रकाशितवाक्य 4:11)। आप जल्द ही इस धन्य और एकमात्र सर्वशक्तिमान के आगे अपने घुटने टेकेंगे (फिल 2:9-11; 1 तिमु 6:13-16)।
ये पहले दो उत्तर इतने सत्य हैं, कि आपको कहना चाहिए, “क्योंकि उसी की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है। उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे : आमीन” (रोम 11:36)। वह सभी वस्तुओं का प्रथम कारण है, और वह सभी वस्तुओं का अंतिम अंत है। सब कुछ उसके द्वारा और उसके लिए बनाया गया था (कुलु 1:16)। अब उसके सामने ज़मीन पर गिर जाओं। उसके नाम के निमित्त उसे आदर और महिमा दो।
यह विश्व इसलिए अस्तित्व में है क्योंकि परमेश्वर अपने लिए कुछ बनाना चाहता था। उसने इस जगत को मनुष्य के लिए नहीं बनाया; उसने जगत और मनुष्य को अपने लिए बनाया। आप का अस्तित्व अपने लिए नहीं हैं, न ही आपके लिए कुछ और अस्तित्व में है; आप और सभी वस्तुएं उसके आनंद के लिए हैं। यह अपने आप को दीन करने का और अपने अस्तित्व के उद्देश्य को समझने का समय है – अर्थात् परमेश्वर की महिमा। यदि आप इस तथ्य के खिलाफ विद्रोह करते हैं, या इसकी उपेक्षा भी करते हैं, तो आपको अब और आनेवाले समय में इसकी क़ीमत चुकानी होगी।
हाथियों की नाक लंबी क्यों होती है? ताकि आप परमेश्वर की उस की रचनात्मक बुद्धि के लिए स्तुति करें! जिराफ की गर्दन लंबी क्यों होती है? वही कारण है- उसकी प्रशंसा! सफेद बादलों वाला नीला आकाश और गर्म सूरज आपके मन को गाने के लिए क्यों विवश करता है? परमेश्वर की महिमा के लिए! बबून अपनी बालों वाली पैंट को ऊपर की ओर क्यों नहीं खींचते? ताकि आप परमेश्वर के साथ हंस सके! चिड़ियाघर का मूल्य क्या है? यह आप के और आपके परिवार के लिए एक आराधना का स्थान है – कि आप परमेश्वर की स्तुति करें और चार्ल्स डार्विन और स्टीफन हॉकिंग का उपहास करें।
शुतुरमुर्ग मूर्ख क्यों होते हैं? ताकि आप जान सके कि परमेश्वर ने मूर्ख वस्तुएं बनाई हैं (अय्यूब 39:13-18)! घोड़े अद्भुत क्यों हैं? ताकि परमेश्वर उनके विषय में अपनी प्रशंसा करे (अय्यूब 39:19-25)! स्त्रियाँ इतनी रूपवती क्यों होती हैं कि पुरुष को घायल कर दे (गीत 4:1-7; 7:1-9)? ताकि परमेश्वर ने पुरुष की पसली निकालकर जो रचनात्मक काम किया उसके लिए उसकी प्रशंसा हो! बादल में धनुष क्यों हैं? आपको याद दिलाने के लिए कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है (उत्पत्ति 12:9-17)! उसे महिमा दो, ख्रिश्चन पाठक। अपने अस्तित्व का उद्देश पूरा करने के लिए इसी क्षण उसकी स्तुति करें।
यदि आप नाटे, मोटे, कुरूप और मूर्ख हैं, तो परमेश्वर ने आपको अपने लिए ऐसा बनाया है। आप जानते हैं कि उसने आपको आपके लिए ऐसा नहीं बनाया है। काश आप लम्बे, पतले, आकर्षक और स्मार्ट होते। उसने अपने लिए बबून बनाया, और उसने तुम्हें अपने लिए बनाया। उसे महिमा दो! आपके जीवन में भयानक माता-पिता, तरक्की के कम अवसर और खराब स्वास्थ्य भी आपके लिए उसका चुनाव हैं। इस ज्ञान को सीखना और स्वीकार करना सुख की कुंजी है। जो कुछ तुम्हारे पास है, और जो कुछ तुम्हारे पास नहीं है, दोनों ही परमेश्वर की अपनी महिमा के लिए उसके चुनाव हैं। उसको धन्यवाद दो! उसकी आराधना करों!
शैतान को भी परमेश्वर की महिमा के लिए बनाया गया था। परमेश्वर ने अपने अनन्त उद्देश्य के एक पहलू के रूप में, उसे अहंकार में आकर विद्रोह करने दिया, ताकि वह शैतान के अनन्त दंड में अपने क्रोध और सामर्थ को प्रदर्शित कर सके। उसके विद्रोह से परमेश्वर को आश्चर्य नहीं हुआ। शैतान और उसके दूतों को अनन्तकाल की आग में डाल दिया जाएगा, जो जगत की उत्पत्ति से उनके लिये तैयार की गई थी (मत्ती 25:41)। उसकी और उसके पीछे जानेवालों की पीड़ा का धुआँ स्वर्ग में धूप के समान होगा (प्रकाशितवाक्य 14:10-11)।
फिरौन का जन्म आसानी से हुआ, शिशु रहते बच गया, और उन बीमारियों से बचा रहा जिन्होंने मिस्र के कई बच्चों की जाने ले ली। उसने अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान पर स्नातक की उपाधि प्राप्त की, सेना का नेतृत्व करते हुए कई बार जीत हासिल की, और कई भाई-बहनों में से उसे ही मिस्र का शासक बनने चुना गया। जब वह राजा था, उस दौरान मिस्र राष्ट्र समृद्ध हुआ और महाशक्ति बन गया। उसने जो भी करने की कोशिशे कीं उनमें उसे सफलता मिली। उसकी महिमा और शक्ति में वृद्धि हुई। वह पृथ्वी पर सबसे महान सम्राट बन गया। क्यों?
फिरौन कहाँ से आया? उनकी अनूठी महत्वाकांक्षा, व्यक्तित्व, सपने और सफलताओं का स्रोत क्या था? परमेश्वर ने उसे बनाया, और परमेश्वर ने उसके जीवन की घटनाओं को ठहराकर उसे मिस्र की शक्ति के शीर्ष पर पदोन्नत किया। परमेश्वर ने ऐसा क्यों किया? ताकि लाल समुद्र में उस का विनाश करके अपनी महिमा को ऊँचा उठाए (निर्ग 9:16; रोम 9:17)! परमेश्वर ने इस दुष्ट मनुष्य को खड़ा किया ताकि अपनी महिमा की प्रशंसा के लिये अद्भुत रीति से उसका नाश करे। यदि आप इन बातों को नहीं जानते हैं, तो आप बाइबल के परमेश्वर को नहीं जानते हैं।
सच्चा परमेश्वर कौन है? यहोवा उसका नाम है! यहोवा का क्या अर्थ है? यह इब्रानी के पवित्र चतुराक्षरो JHVH के लिए अंग्रेजी पदनाम है, जिसका अर्थ है मैं जो हूँ, सो हूँ (I AM THAT I AM), जिसे आप यहोवा के रूप में उच्चारण करते हैं! बाकि सब धर्मों के देवी-देवता केवल कल्पित ईश्वर हैं।
परमेश्वर यहोवा ही सच्चा परमेश्वर है। वही एकमात्र ईश्वर है। उसने अन्य देवताओं की तलाश कीं कि क्या कोई उसके तुल्य है, परन्तु उसे कोई नहीं मिला। वह अकेला ही परमेश्वर है। उसी ने आकाश, पृथ्वी, समुद्र और जो कुछ उन में है, उन सब को छ: दिनों में बनाया। वह अपने सभी सृष्ट प्राणियों से स्वतंत्र है। वह किसी भी माप से अनंत है। वह सनातन, अमर, अदृश्य, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी है।
बुराई क्यों अस्तित्व में है? कुछ लोग पहले तीन उत्तरों पर विश्वास करते हैं। उनका मानना है कि यहोवा ने सब कुछ अपने लिए बनाया है। लेकिन वे यह सुझाव देकर उसके प्रभुत्व को सीमित करते हैं कि दुष्ट लोग और उनके पापपूर्ण कार्य उसकी योजना और नियंत्रण से बाहर हैं। इस झूठी धारणा को सुधारने के लिए, सुलैमान ने तुरंत ही दुष्टों और उनके न्याय को यहोवा द्वारा अपने लिए सब कुछ बनाने की उसकी योजना में शामिल कर लिया। यहाँ तक कि दुष्ट मनुष्य और उनका अन्तिम विनाश भी परमेश्वर की महिमा के लिए है।
बुराई मौजूद है क्योंकि शैतान परमेश्वर के अभिषिक्त करूब के रूप में अपने पद से संतुष्ट रहने के बजाय, गर्व से भर गया और उसने परमप्रधान के समान होने का इरादा किया (यशा 14:12-15; यहेज 28:13-15)। परमेश्वर ने उसे विशेषाधिकार और स्वतंत्रता दी, और उसने अपने सृष्टिकर्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए इसका उपयोग किया। परन्तु धन्य परमेश्वर आश्चर्यचकित या निराश नहीं हुआ; शैतान अपने दुष्ट कार्य के लिए परमेश्वर के सामने उत्तरदायी है; परमेश्वर उसके पाप के लिए उसे अनन्तकाल का दण्ड देगा इस न्याय में वह नीतिमान है।
दुख कहाँ से आता है? शैतान अपने विद्रोह को इस धरती पर ले लाया। उसने हमारे प्रथम माता-पिता, अर्थात् आदम-हव्वा से झूठ कहा, और आदम ने परमेश्वर के ऊपर अपनी मूर्ख पत्नी को चुना। यहोवा ने एक सिद्ध संसार में मनुष्य को बहुत अच्छा बनाया, परन्तु मनुष्य ने अपने रचयिता के विरुद्ध पाप करके पृथ्वी को भ्रष्ट कर दिया (उत्पत्ति 1:31; 3:16-19; सभोपदेशक 7:29)। आदम ने अपने परिवार के लिए परमेश्वर के साथ स्वर्ग में के निवास के बजाय पाप के शाप को चुना। उसके पाप के कारण समस्त सृष्टि दुख, पीड़ा और मृत्यु से कराहती है (रोमियों 5:12-14; 8:22)।
उद्विकासवादी मृत्यु के अस्तित्व का कोई स्पष्टिकरण नहीं दे सकते। इसे बहुत पहले विकसित हो जाना चाहिए था, क्योंकि यह जीवन की सबसे डरावनी और घृणास्पद बात है। यदि एक रेंगनेवाला घिनौना कीड़ा एक गंजे चील के रूप में विकसित हो सकता है, तो निश्चित रूप से मनुष्य मृत्यु का उद्विकास कर सकता है। मृत्यु तो पाप की मजदूरी है। और बाइबल इस तथ्य को स्पष्ट रूप से सिखाती है, जिसे कोई भी उद्विकासवादी कभी भी टेस्ट ट्यूब या टेलीस्कोप में नहीं पाएगा। परमेश्वर ने मृत्यु को, जिसके कई रूप हैं, पाप का दण्ड देने के लिए बनाया। इसलिए, सभी मनुष्य मर जाते हैं।
अदन की वाटिका में आदम के पाप से यहोवा चकित नहीं हुआ और न सम्भ्रम में आया। उसने मानव परिवार में पाप के प्रवेश की योजना बनाई थी, तथापि, यह आदम था जिस ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वतंत्र इच्छा से परमेश्वर के ऊपर हव्वा को चुना। अपने पाप और उसके परिणामों के लिए केवल आदम ही जिम्मेदार है। परमेश्वर ने उसे सिद्ध बनाया, उसे चेतावनी दी, और उसे केवल एक ही आज्ञा दी जिसका उसे पालन करना था। परमेश्वर ने अपना क्रोध और अपना अनुग्रह दोनों को परम रूप से दिखाने के लिए पाप के प्रवेश की योजना बनाई।
आदम के भ्रष्ट बच्चे, जो परमेश्वर और उस के नैतिक मानकों के खिलाफ पूरे मन से विद्रोह करते हैं, प्रतिदिन महापाप करते हैं। आप प्रतिदिन उनके बारे में समाचारों में सुनते और पढ़ते हैं। परन्तु न तो वे और न उनके अत्याचार, यहोवा परमेश्वर को अचम्भित या भ्रमित करते हैं। उसने उन्हें निश्चित रूप से अन्य सभी प्राणियों के समान ही बनाया। वह उनकी दुष्टता पर प्रतिबन्ध लगाता है, इसलिए वे केवल वही कर सकते हैं जिस का वह अपनी महिमा के लिए उपयोग करेगा (भजन 76:10)। वे परमेश्वर के विषय में बिल्कुल भी नहीं सोचते (भजन 10:4); वे केवल स्वयं को संतुष्ट करना चाहते हैं (याकूब 1:13-16)।
धन्य और पवित्र परमेश्वर मनुष्यों को पापी नहीं बनाता, परन्तु वह उनके पापों को नियंत्रित करता है और अपने बुद्धिमान और धार्मिक उद्देश्यों के लिए उनका उपयोग करता है। परमेश्वर पूरी तरह से पवित्र और भला है। मनुष्य सृष्टि में प्रकट ज्योति और परमेश्वर तथा मनुष्यों की चेतावनियों के बावजूद अपनी इच्छा से पाप को चुनता है। परमेश्वर कभी भी मनुष्यों में पापी अभिलाषाएँ नहीं रखता, क्योंकि उसे इसकी आवश्यकता नहीं है। वे इतनी वासना और दुष्टता से भरे हुए हैं, कि उसे केवल अपनी संयमी दया को उठाने की जरूरत है, और कोई भी व्यक्ति कुछ भी करेगा। इस पर विश्वास करो!
वह अपनी स्तुति और महिमा के लिए इस विश्व में मौजूद सभी दुष्टता को नियंत्रित और निर्देशित करता है। यहाँ तक कि शैतान को भी किसी मनुष्य या सुअर को छूने की अनुमति लेनी पड़ती है (अय्यूब 1:12; 2:6; मत्ती 8:31)। वह एक राजा को एक स्त्री को छूने से रोक सकता है (उत्पत्ति 20:6), और वह अपनी महिमा के लिए अनाचार के वंश का उपयोग कर सकता है (उत्पत्ति 38:1-30)। उसने यूसुफ को मिस्र ले जाने के लिए उस के भाइयों की ईर्ष्या का उपयोग किया (उत्पत्ति 45:5; 50:20), और उसने अपने बेटे को एक क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए रोमि क्रूरता का उपयोग किया (यूहन्ना 18:31-32)।
जब परमेश्वर को पाप के विरुद्ध अपने क्रोध और सामर्थ को प्रकट करने की आवश्यकता होती है, तो वह लोगों को छोड़ देता है ताकि वे लालच में आकर उनकी अपनी वासनाओं के पीछे भागे, और फिर वह उन्हें इसके लिए दण्ड देता है। सृष्टि के लगभग 1656 वर्षों के बाद, उसने पृथ्वी को उनके पापों कारण जलप्रलय में डुबो दिया। उसने शैतान को अनुमति दीं कि दाऊद को इस्राएलियों की गिनती करने दे, और उसने उन्हें उनके पापों का दंड देने 70,000 पुरुषों को मार डाला (2 शमूएल 24:1-25)। परमेश्वर मनुष्यों के पापों और उनके दण्ड को अपनी महिमा की बड़ाई करने के लिए नियंत्रित और निर्देशित करता है।
राजा सन्हेरीब असीरियन साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था और पड़ोसी देशों को जीतना चाहता था; परमेश्वर ने विद्रोही इस्राएलियों को ताड़ना देने के लिए उसका उपयोग किया, और फिर उसने सन्हेरीब की अभिमानी कल्पना के कारण उसका विनाश कर दिया (यशा 10:5-19)। परमेश्वर ने यीशु के लिए यहूदियों की घृणा का उपयोग किया, ताकि अपने चुने हुओं के पापों के लिए अपने इकलौते पुत्र को कुचले, और फिर उसने उस भयानक अपराध के लिए केवल 40 वर्षों के बाद रोमियों द्वारा उन्हें बुरी तरह नष्ट कर दिया। यह उनके दुष्ट हाथ ही थे जिन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया, परन्तु यह सब उसके अनन्त उद्देश्य के अनुसार था (प्रेरितों के काम 2:23; 4:27-28)।
यहाँ परमेश्वर के पवित्र जनों के लिए बुद्धि है। वे दुष्ट लोगों से कभी घबराते या चकित नहीं होते। वे जानते हैं कि यहोवा ने एडॉल्फ हिटलर, जोसेफ स्टालिन, माओ त्से तुंग, पोल पॉट और ईदी अमीन को अपने लिए खड़ा किया था। उसने उनकी बुराई का उपयोग पवित्र और बुद्धिमान उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया, और फिर उसने उनकी दुष्टता के लिए उन्हें दंड दिया और न्याय के समय फिर से देगा। यदि परमेश्वर ने द्वितीय विश्व युद्ध का उपयोग जर्मनी को उसकी ऊँची आलोचनात्मक ईशनिंदा के कारण कुचलने के लिए किया, तो उसे महिमा दो। यदि उसने हिरोहितो की ईशनिंदात्मक उपासना के लिए जापान को कुचल दिया, तो उसे महिमा दो।
आप परमेश्वर के सनातन उद्देश्य की गुप्त बातों को तब तक नहीं जान सकते जब वह वह स्वयं उन्हें प्रकट नहीं करता (रोमियों 11:33-34)। इतिहास कुछ गुप्त बातों को प्रकट करता है (2 शमू 12:22-23), और इसी तरह उसके भविष्यवक्ताओं ने भी, जिन्होंने उन बातों को आपके लिए पवित्रशास्त्र में दर्ज किया (दान 2:27-30; आमोस 3:7)। उसके अधिकांश गुप्त उद्देश्य आपके जानने या समझने की क्षमता से बहुत बाहर हैं। परन्तु उसने बहुत सी बातें प्रकट की कि आप उन्हें करें, और ये आपके और आपके बच्चों के लिए हैं (व्यवस्थाविवरण 29:29)।
बुराई का एक महान दिन, न्याय का दिन आ रहा है, जिसमें सभी स्वर्गदूतों और मनुष्यों का न्याय किया जाएगा। जैसा कि नीतिवचन में कहा गया है, दुष्टों को इसी दिन के लिए बनाया गया है। यह “विपत्ति” वे दुख और पीडाएं हैं जो परमेश्वर उन पर डालेगा (अय्यूब 2:10; 45:7)। उसने सनातन काल से ठहराया है कि अपने चुने हुओं पर अपनी दया और जो विनाश के लिए ठहराए गए थे उन पर अपने क्रोध को दिखाए (1 पतरस 2:8; यहूदा 1:4)।
“क्या कुम्हार को मिट्टी पर अधिकार नहीं कि एक ही लोंदे में से एक बरतन आदर के लिये, और दूसरे को अनादर के लिये बनाए? तो इसमें कौन सी आश्चर्य की बात है कि परमेश्वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ्य प्रगट करने की इच्छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे, बड़े धीरज से सही; और दया के बरतनों पर, जिन्हें उसने महिमा के लिये पहले से तैयार किया, अपने महिमा के धन को प्रगट करने की इच्छा की? ” (रोम 9:21-24)।
उससे सवाल करने की सोचना भी मत! नबूकदनेस्सर को यह जानने में सात साल लग गए कि उस पर कोई भी प्रश्न नहीं उठा सकता (दान 4:35)। पौलुस ने उन लोगों को फटकार लगाते हुए जो परमेश्वर की पूर्ण संप्रभुता पर प्रश्नचिह्न लगा सकते हैं, यह लिखा, “नहीं, हे मनुष्य, भला तू कौन है जो परमेश्वर का सामना करता है? क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़नेवाले से कह सकती है, “तू ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?” (रोम 9:20)। आपको शिकायत या सवाल भी नहीं करना चाहिए, अगर उसने आपको बिना हाथों के बनाया है (यशा 45:9)। तर्क-वितर्क करने वाले मनुष्य अपनी शारीरिक विकलांगता के लिए अपने माता-पिता को दोष नहीं लगाते, तो फिर परमेश्वर को दोष लगाना तो रहा ही नहीं (45:10)।
आपको क्या करना चाहिये? “सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्तव्य यही है। 14क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा” (सभोपदेशक 12:13-14)। सुलैमान के पिता की बात सुनो, “काँपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो” (भज 4:4)। और, “चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ। मैं जातियों में महान् हूँ। मैं पृथ्वी भर में महान् हूँ” (भजन 46:10)।
क्या आप जानते हैं कि आप दुष्ट हैं? विपत्ति के उस महान दिन से बचने का एक ही उपाय है – प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार। परमेश्वर ने उसे अपने लोगों को उनके पापों से बचाने के लिए भेजा (मत्ती 1:21), और वह उनमें से एक को भी नहीं खोएगा (यूहन्ना 6:39; 17:2)। चुने हुए लोगों को परमेश्वर के अनुग्रह से दुष्टों में से चुना गया और अनन्त जीवन के लिए पहले से ठहराया गया (रोमियों 8:29-39; इफ 1:3-12)। सुसमाचार इन तथ्यों को प्रकाश में लाता है (2 तीमुथियुस 1:9-10)। यह जानने के लिए कि आप उसके चुने हुओं में से हैं, उसके सामने गिरें, दया की भीख माँगें, और उसके वचन का पालन करने के लिए उठें (प्रेरितों के काम 16:31; 2 पतरस 1:10-11)।
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