नीतिवचन की व्याख्या

क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं।

बुद्धि के ये सबक आपके जीवन के लिए बहुत ज़रूरी हैं। यदि आप उनकी खोज करते हैं और उनका व्यावहारिक सदुपयोग करते हैं, तो वे आपके जीवन में समृद्धि और सफलता लाएंगे। यदि आप उनकी खोज करते हैं और उनका व्यावहारिक सदुपयोग करते हैं, तो वे आपके व्यक्तित्व में कार्यक्षमता और जीवन-शक्ति का संचार करेंगे। इसके लिए ज़रूरी है कि आप सबसे पहले खुद को बुद्धि के निर्देशों के अधीन करें (नीतिवचन 4:20), और फिर आपको जो सिखाया गया है उसका पालन करें (नीतिवचन 4:21)।

आपने कइयों के जीवन में इतनी विपत्तियों को देखा है कि आपको लगा होगा कि मृत्यु ही उनके लिए रहम होगा। आपने कइयों के जीवन को इतनी बेकार और दर्दनाक अवस्था में देखा है कि आपको लगा होगा कि भला होता वे कभी पैदा ही न होते। आपने कइयों के जीवन को इतना व्यथित और परेशान देखा है कि उनके जीवन को धरती पर नरक के रूप में वर्णित करना आसान है। बुद्धि लोगों को ऐसे भयानक और बर्बाद जीवन से बचाती है। यह उन लोगों के लिए जीवन है जो इसे पाते हैं, क्योंकि बुद्धि एक व्यक्ति को सुख में, आनन्द में और सफलता से जीना सिखाती है।

अधिकांश लोग सोचते हैं कि कानून और नियमों को खत्म करने से उन्हें आनन्द, सुख और सफलता मिलेगी। वे मूर्खता के कारण सोचते हैं कि अपनी इच्छानुसार करने की स्वतंत्रता उनके जीवन में खुशियां ले आएगी। ऐसे लोग मूर्ख हैं। उन्हें क्या लगता है कि ऐसी कौन-सी बात है जो उनके पड़ोसी को उनकी हत्या कर उनकी पत्नियों और उनके घरों पर कब्ज़ा जमाने से रोक सकती है? उन्हें लगता है कि बाइबल के नियम बहुत कठिन और प्रतिबंधात्मक हैं, फिर भी बुद्धिमानी भरे उपदेशों और व्यवस्था के द्वारा ही लोग सबसे अधिक सुख, समृद्धि और सुरक्षा के बीच भाईचारे के साथ एक साथ रह पाते हैं।

कई लोगों को लगता है कि कानून और व्यवस्था को खत्म करने से आनन्द और सफलता मिलेगी। वे अपनी मूर्खता में यह भूल जाते हैं कि जब वे इस दुनिया में आये तब वे पूरी तरह से अज्ञानी और ऐसी दशा में पैदा हुएं थें कि खुद का ही विनाश करे बैठें। आज्ञाओं के रूप में स्वर्गीय मार्गदर्शन के बिना, वे जान ही नहीं पाते कि माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों, पड़ोसियों, मजिस्ट्रेट या नियोक्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करना है। वे जान ही नहीं पाते कि विवाह, परिवार, व्यवसाय, चर्च या समाज को कैसे चलाना है।

बुद्धि से भरे कानूनों के ज्ञान या संयम के बिना, मानवता नरभक्षण, जादू टोना, बहुपतित्व, अनाचार, बच्चों की बलि, समलैंगिकता, मूर्तिपूजा, या अन्य कई घृणित कार्यों का अभ्यास कर अपना विनाश कर बैठ सकती है, जैसा कि कई देशों में हुआ भी है, जिनके पास परमेश्वर की व्यवस्था का लिखित प्रकाशन, अर्थात् बाइबल नहीं है। यहोवा के प्रेरित इन बाइबल के वचनों में अद्भुत ज्ञान सिखाया गया है!

इन घिनौने कामों का प्रतिफल क्या है? स्वास्थ्य और आनन्द, धन और प्रगति? बिल्कुल नहीं! इन घिनौने कामों के नतीजे हैं युद्ध, बीमारी, मृत्यु, नपुंसकता, गरीबी, दुख और लापरवाही। बाइबल और इसकी शिक्षाओं से दूर रहने वाले राष्ट्र आमतौर पर तीसरी दुनिया के हैं। वे अविश्वसनीय रूप से पिछड़े और नैतिक रूप से भ्रष्ट हैं। जीवन में ज्योति और समृद्धि केवल परमेश्वर के वचन से प्राप्त होती है, और जो राष्ट्र परमेश्वर के वचन का पालन करते हैं वे वाकई में धन्य हैं (नीतिवचन 8:12-21; भजन 33:12; 144:15)।

मूसा ने इस्राएल से कहा, “जितनी बातें मैं आज तुम से चिताकर कहता हूँ उन सब पर अपना अपना मन लगाओ, और उनके अर्थात् इस व्यवस्था की सारी बातों के मानने में चौकसी करने की आज्ञा अपने बच्चों को दो। क्योंकि यह तुम्हारे लिये व्यर्थ काम नहीं, परन्तु तुम्हारा जीवन ही है, और ऐसा करने से उस देश में तुम्हारी आयु के दिन बहुत होंगे, जिसके अधिकारी होने को तुम यरदन पार जा रहे हो” (व्यवस्थाविवरण 32:46-47)। पाठक, क्या आप यह बात समझ पा रहे हैं? परमेश्वर की व्यवस्था के वचन ही आपका जीवन हैं।

परमेश्वर के वचनों के बिना अपना जीवन जीना पागलपन है, क्योंकि वर्तमान दुनिया के अधिकांश लोगों का नैतिक पतन और गिरावट आज भी स्पष्ट रूप से साबित होती है। मूसा ने अपने उत्तराधिकारी, यहोशू से कहा कि यदि वह परमेश्वर की व्यवस्था को याद रखे, उस पर मनन करे और उसका पालन करे तो वह अपने जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त कर सकता है (यहोशू 1:7-8)। यीशु मूसा से भी अधिक प्रकाशन लेकर आया, और उसने प्रतिज्ञा दीं कि जो कोई उसके वचनों को मानता है वह उसे बहुतायत का जीवन देगा (यूहन्ना 1:4,17; 10:10)।

क्या आप परमेश्वर के वचन को उत्तम सोने से अधिक मूल्यवान और मधु से अधिक मीठा मानते हैं (भजन 19:11)? क्यों नहीं? क्या आप उसके वचनों को अपने आवश्यक भोजनसत्व से भी अधिक बड़ा जीवन मानते हैं (अय्यूब 23:12)? आपको ऐसा ही मानना होगा। वे जीवित रहने का, और आपके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण हैं। अगर आपको अपना जीवन खतरे में डालना है और यदि आप विपत्ति से प्रीति रखते हैं तो ज़रूर उसके वचनों की उपेक्षा करें। लेकिन अगर आप जीवन में बड़ा आनंद और समृद्धि पाना चाहते हैं तो उसके वचन को पढ़ें और याद रखें।

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