नीतिवचन की व्याख्या

2. बुद्धि से चलनेवाला दास अपने स्वामी के उस पुत्र पर जो लज्जा का कारण होता है प्रभुता करेगा, और उस पुत्र के भाइयों के बीच भागी होगा।

3. चाँदी के लिये कुठाली, और सोने के लिये भट्ठी होती है, परन्तु मनों को यहोवा जाँचता है।

4. कुकर्मी अनर्थ बात को ध्यान देकर सुनता है, और झूठा मनुष्य दुष्टता की बात की ओर कान लगाता है।

5. जो निर्धन को ठट्ठों में उड़ाता है, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है; और जो किसी की विपत्ति पर हँसता है, वह निर्दोष नहीं ठहरेगा।

6. बूढ़ों की शोभा उनके नाती-पोते हैं; और बाल-बच्चों की शोभा उनके माता-पिता हैं।

7. मूढ़ के मुख से उत्तम बात फबती नहीं, और इससे अधिक प्रधान के मुख से झूठी बात नहीं फबती।

8. देनेवाले के हाथ में भेंट मोह लेनेवाले मणि का काम देता है, ऐसा पुरुष जिधर फिरता, उधर ही उसका काम सफल होता है।

9. जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता, वह प्रेम का खोजी ठहरता है, परन्तु जो बात की चर्चा बार बार करता है, वह परम मित्रों में भी फूट करा देता है।

10. एक घुड़की बुद्धिमान के मन में जितनी गड़ जाती है, उतना सौ बार मार खाना मूर्ख के मन में नहीं गड़ता।

11. बुरा मनुष्य दंगे ही का यत्न करता है, इसलिये उसके पास क्रूर दूत भेजा जाएगा।

12. बच्चा–छीनी–हुई–रीछनी से मिलना तो भला है, परन्तु मूढ़ता में डूबे हुए मूर्ख से मिलना भला नहीं।

13. जो भलाई का बदला बुराई से चुकाता है, उसके घर से विपत्ति कभी दूर न होगी। (केजेवी)

15. जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है, उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।

17. मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।

18. निर्बुद्धि मनुष्य हाथ पर हाथ मारता है, और अपने पड़ोसी के सामने उत्तरदायी होता है।

19. जो अपराध से प्रेम करता है, वह लड़ाई-झगड़े से प्रेम करता है; बढ़-बढ़कर बोलनेवाला मनुष्य अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है।

20. जो मन का टेढ़ा है, उसका कल्याण नहीं होता, और उलट–फेर की बात करनेवाला विपत्ति में पड़ता है।

22. मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं

23. दुष्ट मनुष्य न्याय को फेरने के लिए गोद से उपहार को लेता है। (केजेवी)

24. बुद्धि समझनेवाले के सामने ही रहती है, परन्तु मूर्ख की आँखें पृथ्वी के दूर दूर देशों में लगी रहती हैं।

26. फिर धर्मी से जुर्माना लेना, और प्रधानों को खराई के कारण पिटवाना, दोनों काम अच्छे नहीं हैं।

28. मूढ़ भी जब चुप रहता है, तब बुद्धिमान गिना जाता है; और जो अपना मुँह बन्द रखता वह समझवाला गिना जाता है।

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