नीतिवचन की व्याख्या

सद्गुणी स्त्री अपने पति का मुकुट है, परन्तु जो लज्जित कराती है वह मानो उसकी हड्डियों में सड़न के समान है। (केजेवी)

क्या ही मूल्यवान नीतिवचन! सद्गुणी स्त्री कुलीन, परिश्रमी, कृपालु, और प्रेम करने वाली होती है। वह विश्वासयोग्यता से अपने पति का आदर करती है और उसे प्रसन्न करती है। उसका पति कृतज्ञ होता है, और ऐसी पत्नी देने के लिए वह परमेश्वर की भलाई में आनंदित होता है। परन्तु एक निंदनीय स्त्री अपने पति को लज्जित करती है, और अपने स्वार्थ, हठीलेपन, मूर्खता या बेवफाई के द्वारा उसे अन्दर ही अन्दर धीरे धीरे मृत्यु की ओर ले जाती है।

यहां प्रयुक्त शब्द “मुकुट” एक सरल रूपक है। मुकुट एक व्यक्ति का सम्मान करने के लिए उपयोग किया जाता है। राजा-महाराजा अपने पद के सम्मान में मुकुट पहनते हैं, और खिलाड़ियों को खेल में अर्जित उनकी उपलब्धियों के लिए मुकुट पहनाकर सम्मानित किया जाता था। एक महान पत्नी जो प्रसन्नता और प्रतिष्ठा अपने पति के लिए अर्जित करती है, उसके द्वारा वह उसका आदर करके उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाती है, और साथ ही वह अपनी स्वयं की अधीनता और बच्चों को भी अधीनता में लाकर अपने पति को अधिकार का मुकुट पहनाती है। मुकुट हीरे-जवाहरात से सजी एक दीप्तिमान शानदार वस्तु होती है, और एक सद्गुणी स्त्री अपने पति के लिए ऐसा ही मुकुट होती है।

उसकी “हड्डियों में सड़न” एक सरल उपमा है, एक तुलना जिसका रहस्य शब्द “समान” से प्रकट होता है। हड्डियां हमारे शरीर की रचना को आधार देती हैं, और यदि हमारी हड्डियां सड़ने लगें, तो वह हमारे शरीर के लिए एक गम्भीर खतरा उत्पन्न करता है। ल्युकेमिया या अस्थिरोग से ग्रस्त किसी से पूछकर देखिए। एक घिनौनी और निंदनीय पत्नी अपने पति के मन को बड़ा दुःख देती है, और उसके प्राण को दुर्गति में पहुंचाती है। सार्वजनिक स्थानों में उसे शर्म महसूस होती है कि वह उसका पति है, और एकान्त में उसके मन को गहरी चोट पहुंचती है। यह एक दर्दनाक पीड़ा है। एक स्त्री को यह व्यथा समझने में कठिनाई होगी, क्योंकि उसे अपने पति के लिए बनाया गया था, न कि उसके पति को उसके लिए (1 कुरिं 11:9)।

पत्नियो, आप इस नीतिवचन और उसकी चेतावनी के सामने अपने को नम्र करें। तुम स्वयं के विषय में क्या सोचती हो, उसे भूल जाओ। तुम्हारी माँ तुम से क्या कहती है, भूल जाओ। यहां तक कि तुम्हारे पतियों ने जो तुम से कहा है उसे भी भूल जाओ। उसके मुंह से आपकी प्रशंसा मापदण्ड नहीं है। यह पर्याप्त नहीं है। जो पुरुष अपने आप को विवाह के जाल में फंसा हुआ महसूस करता है, जिसके सिर पर कोई सोने का मुकुट नहीं है, वह शायद यह रोना रोएगा कि काटों का मुकुट अच्छा है, विशेषकर उस समय जब वह स्वयं को कमज़ोर समझता है, या तब जब उसे किसी बात की ज़रूरत हो, या जब उसकी स्वीकारोक्ति की अपेक्षा की जाती हो।

सम्भव है कि आपके पति ने आपको सत्य नहीं बताया है। यदि आप पूछती भी हैं, तो भी वह शायद सच न बताए। इस पर अच्छे से सोच कर देखें। अपनी पत्नी की गहरी आलोचना करना पति के लिए कठिन है, विशेषकर ऐसे मसले जो विवाह जैसे घनिष्ठ और व्यक्तिगत मामलों से सम्बंधित हैं, और आपके स्त्रीत्व से भी। इसके साथ ही, पुरुषों को घर की शान्ति भंग होने का भी डर रहता है; जाहिर बातों पर बराबर स्पष्टीकरण देना उन्हें बुरा लगता है, या फिर उनका मानना होता है कि इससे कुछ भला नहीं होगा या कोई हल निकलेगा। उसे यह सब करने से कोई खुशी नहीं मिलती, जैसा कि आप सोचती हैं।

आप एक सद्गुणी स्त्री हैं ऐसा सोचकर स्वयं को मूर्ख बनाना छोड़ दीजिए। आपके बारे में अन्य लोग बेहतर जानते हैं। सद्गुण वास्तविक और वस्तुनिष्ठ है, तथा सबको दिखाई देता है! आपकी आत्म-धर्मी और मिथ्या अभिमानी कल्पनाएं धोखेबाज हैं। यदि आप अपनी इस आलोचना को बहुत ही कठोर मानती हैं, तो तीन बातों के विषय में सोचें। पहली, घिनौनी पत्नी पुरुष के जीवन के सबसे बड़े अभिशापों में से एक है (नीति 30:21-23)। दूसरी, आन्तरिक अस्थिरोग आपका ध्यान खींचने के लिए काफी है। और तीसरी, पुरुष का जीवन बचाने के लिए कड़ा संघर्ष लगता है, विशेषकर ऐसी यातनामय हत्या को रोकने! अनुभवी सुलैमान के अनुसार, एक बुरी पत्नी मृत्यु से भी अधिक पीड़ादायक होती है (सभोपदेशक 7:26)।

चरित्र और आचरण जो एक स्त्री को सद्गुणी बनाते हैं, वे उसके बाहरी रूप के समान ही सबको दिखाई देते हैं। एक वास्तविक भली स्त्री का सब लोग सभी स्थानों और समयों पर बहुत सम्मान करते हैं (नीति 11:16)। परन्तु एक घिनौनी स्त्री की दुर्गन्ध छिपाई नहीं जा सकती, फिर चाहे वह स्वयं के विषय में जो भी सोचती हो (नीति 27:15-16 )। यद्यपि लोगों को बताया जाए कि एक सुअरी को नथुनों में 24 कैरेट के सोने की नथनी लगी है, तौभी उन्हें केवल एक रोएंदार और बदबूदार सुअरी ही दिखाई देगी (नीति 11:22 )। अपने को नम्र करें। सुलैमान आपको कुछ सिखाना चाहता है, उसे सीखें।

आप के बच्चे भी जानते हैं। जब वे छोटे बच्चे ही थे तब से ही उन्होंने आपकी मनोदशा का विश्लेषण किया हुआ है क्योंकि उन्होंने देखा है कि आप अपने पति से कैसा बर्ताव करती आई हैं। वे जानते थे कि उनका पिता एक प्रशंसनीय पत्नी के साथ खुश और संतुष्ट था या वह उपेक्षा, निराशा, तथा प्रतिरोध के कारण अंदर ही अंदर धीरे-धीरे सड़कर गल रहा था। आपको अपने पति के साथ बुरे बर्ताव की कीमत अपने बच्चों के अपनेपन को खोकर चुकानी होगी, क्योंकि वे उनके पिता को चोट पहुंचाने के कारण और वे जिस प्रकार से वैवाहिक जीवन के सपने देखते हैं उनकी कसौटी पर न उतर पाने की आपकी असफलता के कारण वे आपसे नाखुश और संताप में रहेंगे।

वे ठीक-ठीक कौन-सी बातें हैं जो एक पुरुष को शर्मिंदा करती हैं और उसे अंदर ही अंदर सड़ाती हैं? एक बद्तमीज़ और हठीली आत्मा, नियमित यौन-सम्बंध की कमी, एक गंदा और अस्तव्यस्त पडा घर, पत्नी की बडबड, या बहुत ज्यादा बोलना, रचनात्मक यौन-सम्बंध, घर चलाने का ज़रुरत से ज्यादा बोझ, शारीरिक और मानसिक या भावनात्मक रूप से बच्चों की उपेक्षा, पत्नी का आलसीपन, एक नकारात्मक या हमेशा शिकायत करनेवाली मानसिकता, चिड-चीडापण, निष्ठा की कमी, सार्वजनिक स्थानों में अशिष्टता, एक आलोचनात्मक रवैय्या, सम्मान की कमी, अधीन न होना, यौन-सम्बंध में संकोच, पर्याप्त बातचीत न करना, अपने को धर्मी समझना, प्रसन्न मुस्कुराहट की कमी, विस्तार से ग़लतियों को सुधारने की प्रवृत्ती, बच्चों पर अंधाधुंद प्रेम, उसकी ग़लतियों को याद करना, अपनी मर्जी से घर छोडकर भाग जाना, सुधार करने पर गुस्से से फट पडना, कि उसे कोई पसंद नहीं करता, और “मैं जैसी हूँ, वैसी ही रहूंगी” का रवैय्या।

बाइबल में इन सब बातों का साफ-साफ खंडन कर उन्हें सुधारने की शिक्षा दी गई है। एक सद्गुणी स्त्री सबसे बढ़कर परमेश्वर का भय मानती है। बाइबल एक महान स्त्री के लिये जो मानक स्थापित करती है उनमें वह सबसे बेहतर बनने का यत्न करती है। नीतिवचन 31:30 पर टीका को पढ़ें। परमेश्वर ने बाइबल में जो जो वचन उसके लिए भेजे हैं उन्हें वह अच्छी तरह से जानती और समझती है। वह उनका सम्मान करती है, उन्हें मानकर चाल-चलन रखती है। इन में से कुछ वचन उत्पत्ती 3:16; 1 करिं. 7:1-5, 11:9; इफिसीयों 5:22-24, 33; तीतुस 2:3-5; 1 पतरस 3:1-6 हैं। वह प्रतिदिन अपने परमेश्वर को प्रसन्न करती है, और अपने पति को प्रसन्न करती है इससे बढ़कर उसके लिए कोई बात मायने नहीं रखती।

एक सद्गुणी पत्नी जानती है परमेश्वर ने नीतिवचन 31:10-31 और श्रेष्ठगीत की पुस्तक उसी के लिये अपनी प्रेरणा से लिखवाई है। उसे अन्य किन्हीं मतों, या महत्वाकांक्षाओं की कोई परवाह नहीं, फिर वे मत या महत्वाकांक्षाएं कहीं से भी आती हों। वह अपने पति के लिये एक उल्लसित, खुशियों से भरी, और प्रेममय साथी बनने की धुन में रहती है, वह उसकी भरोसेमंद समर्थक, उसकी अत्यंत निष्ठावान हमराज, उसकी अत्यंत उत्साही दोस्त, अति ऊर्जावान सहायक, संसार की सबसे बड़ी प्रेमिका, घर के रख-रखाव में घर की देवी, अतिथि-सत्कार और सामाजिक कार्यों में रानी और अपने पति के बच्चों के लिए एक सिद्ध माँ बनना चाहती है, जैसा कि ये दो ब्योरेदार अनुच्छेद विस्तार से बताते हैं।

पत्नियो, ऐसी सद्गुणी स्त्री बनने का केवल एक तरीका है। अपने पापों को परमेश्वर तथा अपने पति के समक्ष मान लें, सब प्रकार की कड़वाहट का त्याग करें, अपनी आत्म-धार्मिकता त्याग दें, अपनी कल्पनाओं और आदतों को छोड़ दें, बिना कोई प्रश्न उठाये परमेश्वर के वचन पर भरोसा रखें और बिना कोई समझौता किये बाइबल में स्त्रियों के लिए जो जो बातें लिखी हुई हैं बड़े हर्ष और आनंद के साथ उन सब के अनुसार करें। आप में इस बदलाव के कारण आप और आपका पति दोनों ही आपस में बड़े सुख और आनंद से रहेंगे; आपके बच्चे आनंदित रहेंगे; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा आपको प्रतिफल देगा।

मसीही पुरुषो, आपके लिए अब भी आशा है, परमेश्वर का वचन आपकी हड्डियों की सड़ाहट को चंगा कर सकता है यदि आप अपनी-अपनी पत्नियों की उसके वचन पर विश्वास रखने और उसे मानने में सहायता करें। परमेश्वर ने स्त्री को आपके लिये बनाया, और उसने आपके लिये विवाह की सिद्ध नियम-पुस्तिका लिखी है ताकि आप के सिर पर शुद्ध सोने का मुकुट, जो कि आपकी पत्नी है, हो। उसे ऐसी कलीसिया में जाने की आवश्यकता है जहां परमेश्वर की समस्त मंशा का बड़ी सामर्थ और व्यावहारिक रूप से प्रचार किया जाता है। और उसे बाइबल के आज्ञापालन की ओर ले जाने, प्रोत्साहित करने और निर्देशित करने के लिए आपको हर सम्भव प्रयास करना आवश्यक है। यदि वह अब्राहम की पत्नी सारा के समान परमेश्वर से प्रेम नहीं करती और उसका भय नहीं मानती है, तो आप बड़े संकट में हैं।

यदि आप किसी सद्गुणी स्त्री से विवाहित हैं, जिसका मानक परमेश्वर के वचन में तय किया हुआ है, तो आप बड़े ही धन्य व्यक्ति हैं, क्योंकि ऐसी स्त्री स्वर्ग से प्राप्त एक दिव्य-आशिष है (नीति 14:1; 18:22; 19:14; 1 कुरिं 11:7, 11)। आपको ऐसी धीमी और दर्दनाक मृत्यु से बचाने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दें। अपने उन मित्रों के लिए प्रार्थना करने के लिए कुछ क्षण निकालें जिन्होंने अहंकारी, स्वार्थी, और हठीली स्त्रियों से विवाह किया है। आज आप अपनी पत्नी को यह अहसास दिलाने के लिए कि आप उससे कितना प्रेम करते और उसकी प्रशंसा करते हैं, क्या करेंगे?

मसीही जवानो, सड़नेवाली हड्डियों के बारे में सोचकर देखो। यदि तुम जल्दबाजी में या मूर्खता से विवाह करोगे तो तुम्हें ये सब यातनाएं होंगी। नीति 31:30 पर हमारी टीका को पढ़ें। इस हठीली और विद्रोही पीढ़ी में एक औसत स्त्री से विवाह करने की तुलना में अकेले ही रहना स्वर्ग के सुख के समान है (नीति 19:13; 21:9,19; 27:15-16)। सद्गुणी स्त्रियां दुर्लभ हैं बहुत ही दुर्लभ हैं। आपको प्रभु पर विश्वास करना होगा, दूर-दूर तक ऐसी धर्मी खानदानी स्त्री की खोज करनी होगी, उसके चरित्र का परीक्षण और परख करनी होगी, और उसे ढूंढने और साबित करने के लिए बुद्धिमान मनुष्यों पर भरोसा रखना होगा।

एक सद्गुणी स्त्री अपने प्रभु के लिए भी सिर का ताज होती है। सबसे पहले वह एक अच्छी मसीही और बाद में एक अच्छी पत्नी होती है। उसका मसीह के साथ अद्वितीय व्यक्तिगत रिश्ता होता है। वह सुसमाचार के शत्रुओं को परमेश्वर के वचन की निंदा या बदनामी करने का अवसर नहीं देती (1 तिमु 5:14; तीतु 2:5)। परन्तु मसीह के प्रति उसका यह प्रेम एक खोखला ढोंग होगा, यदि वह अपने पति से उस प्रकार प्रेम नहीं करती जैसा यीशु मसीह ने अपने वचन में उसे करना सिखाया है। प्रत्येक मसीही एक ऐसी वधू बने जो अपने प्रभु का मुकुट हो।

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