नीतिवचन 22:2
धनी और निर्धन दोनों एक दूसरे से मिलते हैं; यहोवा उन दोनों का कर्ता है।
धनी (अमीर) और निर्धन (गरीब) में कई समानताएं होती हैं। दोनों का कर्ता परमेश्वर यहोवा ही है। उनके बीच कौन-सी समानताएँ हैं जानें, और उनमें से किसी से भी नफ़रत या ईर्ष्या न करें। चीजों को परमेश्वर की दृष्टि से देखना बड़ी बुद्धि और महान ज्ञान है।
जब अमीर और गरीब एक साथ आते हैं, तो अमीरों को गरीबों की उनकी गरीबी और भोलेपन के कारण घिन आती है, और गरीब अमीरों से उनकी समृद्धि और अहंकार के कारण ईर्ष्या रखते हैं। परन्तु उन दोनों का कर्ता यहोवा है, इस कारण उनके पास एक दूसरे को नापसन्द करने या कुढ़ने का कोई कारण नहीं है। क्योंकि यदि सच कहा जाए, तो वे दोनों ही इस दुनिया में नग्न और बेसहारा आए थें, और दोनों इस दुनिया से वैसे ही चले जाएंगे।
अमीर और गरीब दोनों जन्म और मृत्यु में एक दूसरे से मिलते हैं, और यह भी देखें कि दोनों ही कई महत्वपूर्ण मामलों में बिलकुल एक दूसरे से मिलते हैं। वे एक ही हालत में जन्म लेते हैं, नग्न आते हैं, बेहोश और अज्ञानी होते हैं, परमेश्वर के सामने पापी होते हैं, दोनों को एक जैसी बीमारियाँ होती हैं, एक जैसे पाप करते हैं, और अन्त में मृत्यु के बाद दोनों उसी हालत में परमेश्वर का सामना करते हैं।
अमीर और गरीब के बीच जो आर्थिक भिन्नताएं हैं, वे उनके अपने निर्णय से नहीं हैं। स्वर्ग के संप्रभु, सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने जगत की स्थापना से पहले ही हर एक मनुष्य के लिए आर्थिक माध्यमों को निर्धारित कर रखा है (प्रेरितों 15:18; 1 कुरिन्थ 4:7; दानिय्येल 4:35)। अगर आपको यह सत्य समझ में नहीं आता, और न अच्छा लगता है, तो यह आपकी दुष्टता है और आप खुद अपने विधाता बनने की हसरत रखते हैं। आप इसे बदल नहीं सकते, और उसके निर्णय पहले से ही आपके जीवन को प्रभावित करते हैं और हमेशा करते रहेंगे।
सुलैमान इस नीतिवचन में उस गरीबी या कंगाली को संबोधित नहीं कर रहा है जो हम पर हमारे मूर्खतापूर्ण कामों के कारण आ पड़ती है। जब कोई मनुष्य आलसी, फिजूलखर्ची और मूर्ख होता है, तो उसकी गरीबी उसकी अपनी गलती के कारण होती है। परमेश्वर ऐसे मनुष्यों का न्याय करता है। लेकिन यह इस नीतिवचन का सार नहीं है। कई अन्य नीतिवचन हैं जो मनुष्य के ऐसे आचरण की भर्त्सना करते हैं। इस नीतिवचन की शिक्षा का उद्देश्य उन वास्तविक और महत्वपूर्ण भेदों या फ़र्क को दिखाना है जिन्हें परमेश्वर मनुष्यों के बीच करता है।
एक प्रमुख आर्थिक माध्यम पर विचार करें। आपके माता-पिता को किसने चुना? सफल माता-पिता अपने बच्चों को विरासत में ही रूपया कमाने के विभिन्न स्त्रोत, बेहतर शिक्षा, बैंक के खातों में जमा बड़ी धनराशि, महत्वाकांक्षी लक्ष्य और उन्हें हासिल करने का आत्मविश्वास और कई अन्य लाभ देते हैं। लेकिन इसमें उनके बच्चों का कोई स्वतंत्र चुनाव नहीं था, और न उनमें यह सामर्थ्य थीं कि ऐसे विशेषाधिकार को स्वीकार करें या ठुकरा दे! न ही मानसिक रूप से विक्षिप्त माता-पिता से पैदा हुआ बच्चा अपनी आजीविका माँ के पेट से ही कमाता आ रहा था!
आपका जन्म किस देश में होगा यह किसने तय किया? एक बच्चा गरीबी से जूझ रहे इथियोपिया में पैदा होता है जिसके माता पिता के पास उसे देने के लिए न कोई विरासत है, और न ही कोई अन्य सुअवसर हैं जो उसे अमीर बनाए। तो वही एक बच्चा सम्पन्न अमेरिका के किसी मध्यवर्गीय परिवार में पैदा होता है जहाँ उसके लिए हर अवसर और अन्य सब सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं। परन्तु इन दोनों देशों के शिशुओं में से किसी ने भी यह तय नहीं किया था कि वह किस देश पैदा होगा और न ही उसने पैदा होने से पहले परमेश्वर से किसी ख़ास देश की मांग कीं थी। परमेश्वर आप ही ने उनमें से प्रत्येक बच्चें के लिए फैसला लिया।
आपकी बुद्धिमत्ता और क्षमताओं को किसने चुना? एक विशाल आबादी के केवल 10% हिस्से में से एक बच्चा विशाल बुद्धिमत्ता और क्षमताओं के साथ पैदा होता है, वह मौखिक और गणितीय रूप से कुशल होता है, करिश्माई व्यक्तित्ववाला होता है, और युक्तियुक्त व प्रतीतिजनक नेतृत्व-कौशल के मानों स्वर्गीय वरदान से भरा होता है। तो वही एक अन्य बच्चा आबादी के उस निचले स्तर के 25% हिस्से में पैदा होता है, जो अच्छी तरह से पढ़ नहीं पाता, बोल नहीं पाता या गणित नहीं कर सकता, और वह एक कमज़ोर और डरपोक व्यक्तित्व का होता है। दोनों बच्चों के बीच गुणों के फ़र्क परमेश्वर ने किए, और मनुष्यों पर उसकी इस महान संप्रभुता को न देख पाना और समझने से चूक जाना जीवन की वास्तविकताओं से अनभिज्ञ होना है।
आप बड़े होकर क्या बनेंगे या कौन-सा व्यवसाय करेंगे इसका चुनाव किसने किया? एक व्यक्ति को किसी बड़ी कंपनी में जो उद्योग-जगत में बड़ी तेजी से बढ़ रही होती है, समय पर और तुरंत नौकरी मिल जाती है; एक ऐसा उद्दोग जो अपने कर्मचारियों को मुनाफ़े के अनुसार तरक्की देता है, अच्छा प्रदर्शन करनेवालों को पुरस्कृत करता है, और कर्मचारियों को स्टॉक विकल्प भी देता है। वह बीस साल के भीतर अमीर बन जाता है। तो वही एक अन्य व्यक्ति है किसी मरणासन्न कम्पनी में कम वेतन पर बीस साल तक काम करते रहता है और उसे बिना किसी पूर्व सूचना या आर्थिक लाभ के नौकरी से निकाल दिया जाता है। वह चालीस साल की उम्र में निराश्रित बन जाता है और उसके पास रहने के लिए तक कोई जगह नहीं है। इन दोनों उदाहरणों में फैसला परमेश्वर का अपना चुनाव है, और अवश्य है कि अमीर और गरीब दोनों इसे पहचाने और मान लें।
अन्य कई माध्यमों और कारकों के मामलों में ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं। परमेश्वर ने आपके जन्म से पहले ही उन महत्वपूर्ण माध्यमों और कारकों को निर्धारित कर दिया था जो आपको वित्तीय सफलता या विफलता की ओर ले जाते हैं। अमीर और गरीब दोनों का कर्ता वही है, और उसके सामने दोनों की रूह थरथरानी चाहिए और उन्हें एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान दिखाना चाहिए। कोई भी मनुष्य भविष्य नहीं जानता, लेकिन स्वर्ग का परमेश्वर जानता है, इसलिए क्योंकि उसी ने सबकुछ पूर्वनियोजित कर रखा है, और उसी के अनुसार वह मनुष्यों को आशिषें देता है या उन्हें आशिषें से वंचित रखता है। वह सभी माध्यमों और कारकों को जानता है और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार सब में बांट देता है। अहाहा! धन्य सर्वसत्ताधारी परमेश्वर!
आपको परमेश्वर की संप्रभुता के बारे में अपने किसी भी प्रश्न का समाधान इन्हीं माध्यमों और कारकों में अवश्य ढूँढना चाहिए। सुलैमान ने यह स्वयंसिद्ध कथन कहा: “फिर मैं ने धरती पर देखा कि न तो दौड़ में वेग दौड़नेवाले और न युद्ध में शूरवीर जीतते; न बुद्धिमान लोग रोटी पाते न समझवाले धन, और न प्रवीणों पर अनुग्रह होता है; वे सब समय और संयोग के वश में हैं” (सभो 9:11)। इस वचन में उल्लेखित ‘समय और संयोग’ के लिए कौन जिम्मेदार है? सुलैमान ने हमारे लिए यह नीतिवचन लिखा, कि “चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है” (नीतिवचन 16:33)।
एक अन्य परिस्थिति है जिसमें धनी और निर्धन दोनों एक दूसरे से मिलते हैं। वे आर्थिक गतिविधियों में एक जैसे हैं जो अटल है, क्योंकि एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं है। गरीब अमीरों को भोजन, सेवा और विलासिता की आपूर्ति करने के लिए अपना परीश्रम, अपनी सेवा देते और व्यापार को अगले स्तर पर ले जाने में अपना योगदान देते हैं; तो वही अमीर गरीबों को रोजगार और मजदूरी देते हैं, और उनसे रोजमर्रा की चीजें खरीदते हैं।
यदि सब मनुष्य धनवान या सब के सब गरीब होते, तो दुनिया की उन्नत अर्थव्यवस्थाएं चरमरा जातीं और सब तरफ़ हाहाकार मच जाता। यदि सभी गरीब होंगे तो पूंजी कौन उपलब्ध कराएगा? यदि सभी अमीर होते तो श्रम कौन उपलब्ध कराता? अमीर और गरीब एक दूसरे से मिलते हैं, क्योंकि उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरत होती है। और यह परस्पर सुखदायक संबंध चर्च में भी है, जहां उन विश्वासियों को जो आत्मिक दान-वरदानों से युक्त हैं, कम प्रतिभाशाली विश्वासियों का तिरस्कार नहीं करना चाहिए (1 कुरिन्थ 12:21)।
क्योंकि अमीर और गरीब एक-दूसरे मिलते हैं, अत: अमीर को गरीबों की देखभाल करनी चाहिए और गरीबों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी प्रचुरता में से कुछ भाग देने के लिए तत्पर रहना चाहिए, और गरीबों को भी अमीरों पर परमेश्वर के भले अनुग्रह के लिए उनका सम्मान करना चाहिए और उनके साथ उनकी समृद्धि में आनन्द मनाने तत्पर रहना चाहिए ( 1 तीमु 6:17-19; प्रेरितों 4:34-37; 2:44-45; रोम 12:15; 1 कुरिन्थ 12:26)। परमेश्वर के घर, अर्थात् चर्च में विश्वासियों के बीच आर्थिक स्थिति के आधार पर बिल्कुल भी भेदभाव नहीं होना चाहिए (याकूब 2:1-10)। सम्मान सभी का किया जाना है (याकूब 1:9-11)।
गरीबों का मजाक उड़ाना घिनौना काम है, क्योंकि ऐसा करने से आप अपने ही सृष्टिकर्ता का मज़ाक उड़ाते हैं जिसने यह भेद किया (नीतिवचन 14:31; 17:5)। यह प्रभु यहोवा ही है जो अमीर और गरीब दोनों का कर्ता है, जैसा कि हन्ना ने प्रार्थना की (1 शमू 2:7)। अय्यूब जानता था कि अमीर और गरीब दोनों परमेश्वर के हाथ से गर्भ में एक जैसे बनाए जाते हैं (अय्यूब 31:14; 34:19)। अमीरों को यह जानकर कांपना चाहिए कि परमेश्वर उन्हें एक पल में गरीबी में डाल सकता है; और गरीबों को भी यह जानकर अपनी गरीबी पर निराश नहीं होना चाहिए, कि परमेश्वर उन्हें आसानी से कभी भी समृद्ध बना सकता है।
परमेश्वर एक को गरीब और दूसरे को अमीर क्यों बनाता है? वह यहोवा है; वह मनुष्य से बड़ा है, और मनुष्यों के साथ जैसा उसे भाता है, व्यवहार करता है (अय्यूब 33:12)। लेकिन वह गरीबों को उनकी गरीबी के माध्यम से विनम्रता, संतोष, धैर्य और विश्वास सिखाता है, और अमीरों को विनम्रता, दयालुता, उदारता, प्रेम और अपनी अमीरी के लिए आभारी रहने की आवश्यकता की सिख देता है।
इस नीतिवचन को पढ़कर आपको उस महान और भयानक परमेश्वर के सामने कांपने की ज़रूरत है, जो अपनी महिमा के लिए ये सब काम करता है। वह सबका प्रभु है! आपको उस प्रत्येक आशीष के लिए आभारी होना चाहिए जिसे उसने अपनी सनातन युक्ति में आपको देने का चुनाव किया। आप उसकी आशिषों का वर्णन करते करते थक जायेंगे। अपनी आशिषों की गिनती करें! आप यह देखकर आश्चर्यचकित रह जायेंगे कि यहोवा परमेश्वर ने आपके लिए क्या क्या किया है!
यदि आप गरीब हैं, तो यह याद रखना भला है कि बाहर ऐसे लोग हैं जो आपसे भी अधिक गरीब और दरिद्री हैं। आपके जीवन में उसकी उदारता के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दें। आपकी परीस्थिति दूसरों जितनी ख़राब या उतनी बुरी नहीं है जितनी हो सकती थी। यदि आप इस दुनिया में अमीर हैं, तो यह याद रखना अच्छा है कि बाहर ऐसे लोग हैं जो आपसे भी अधिक धनवान और अमीर हैं। इस नीतिवचन में वह आपको मन का दीन होना याद दिला रहा है उसके लिए परमेश्वर को धन्यवाद दें।
भविष्यवक्ता आगुर जिसने नीतिवचन के अध्याय-30 में नीतिवचन लिखें, उसने बहुत बुद्धिमानी से प्रार्थना की कि परमेश्वर उसे न तो निर्धन करे और न धनी बनाए; बल्कि प्रतिदिन की रोटी उसे खिलाया करे (नीतिवचन 30:7-9)। आखिरी बार आपने टेलीविजन पर ऐसा प्रचार कब सुना जिसमें जीवन के प्रति इस दृष्टिकोण का प्रस्तुतीकरण किया गया था? जोएल ओस्टीन ने आखिरी बार ऐसा उपदेश कब दिया था कि आपको सफलता और धन से बचना चाहिए?
जब उद्धार की बात आती है, तो कोई अमीर या गरीब नहीं होता है, क्योंकि सभी मनुष्य एक जैसे नग्न होते हैं और सभी मनुष्यों को एक दिन अपने पवित्र रचियता और न्यायाधीश के सामने अपना हिसाब देने खड़े रहना होगा (रोम 3:23; गलातियों 3:28)। वह अमीर-गरीब में भेदभाव नहीं करता (प्रेरितों 10:34; अय्यूब 34:19)। वह अमीरों की दौलत से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होता। वे अपनी दौलत से अपने एक भी पाप को माफ़ कराने के लिए उसे खरीद नहीं सकते।
धनवान अपनी दौलत से अपने भाई को भी छुड़ा नहीं सकता (भजन 49:6-9)। गरीबों को उनकी गरीबी के कारण पाप के लिए दण्ड में कोई रियायत नहीं मिलेगी, अर्थात कोई गरीब यह नहीं कह सकेगा कि उसने यह अपराध अपनी गरीबी के कारण किया है। अमीर और गरीब, छोटे और बड़े दोनों, यहोवा के अंतिम फैसले को सुनने के लिए उसके भयानक न्यायासन के सामने खड़े होंगे (भजन 49:1-2; प्रकाशितवाक्य 20:12)। धनवान मनुष्य नरक में गया, और निर्धन भिखारी लाजर अब्राहम की गोद में गया (लूका 16:19-23)। यह ऐसा न्यायाधीश है जिस के लिए धन-दौलत कोई मायने नहीं रखती है। उद्धार परमेश्वर ही की ओर से है।
वास्तव में, परमेश्वर ने अपने लेपालक पुत्र और पुत्रियाँ बनने के लिए अमीरों की संख्या की तुलना में गरीबों को कहीं अधिक संख्या में चुना है (1 कुरिन्थ 1:26-29; याकूब 2:5)। इसलिए, यीशु मसीह की मण्डली में, धन, काम का ओहदा, रंग, लिंग, या उम्र के आधार पर कोई भी वर्ग भेद नहीं होना चाहिए (गलातियों 3:28; 1 कुरिन्थ 12:13; कुलुस्सियों 3:11)। अमीर और गरीब दोनों को एक समान बनाया गया है (याकूब 1:9-10)।
यद्यपि यीशु मसीह में अमीर और गरीब में कोई फ़र्क नहीं है (गलातियों 3:28), फिर भी, जीवन में उनकी अलग-अलग भूमिकाएँ और पद हैं, जिनका सम्मान चर्च का भाग होने के बावजूद भी किया जाना अवश्य है। ख्रिश्चन कर्मचारी अब भी अपने ख्रिश्चन नियोक्ता के अधीन है (1 तीमु 6:1-5)। और इन परमेश्वर-निर्धारित भेदों को कभी भी तुच्छ नहीं जानना है, या उन्हें उखाड़कर फेंकना नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा दिए गए पद, प्रतिभा, अवसरों और कर्तव्यों का परिश्रमपूर्वक उपयोग करते हुए इस दुनिया में अपनी अपनी बुलाहट का निर्वहन करना है (1 कुरिन्थ 7:24)।
यीशु मसीह के चर्च (मण्डली) के रूप में, परमेश्वर इसके सब सदस्यों का कर्ता और उद्धारकर्ता है। यीशु मसीह में कोई भेद नहीं है। सभी को एक ही उद्धार से बचाया गया है, सबके लिए एक ही आशा है, सब एक ही परीक्षा से गुज़रते हैं, और सबके लिए भविष्य की आशा भी एक ही है। एक-दूसरे के साथ परस्पर प्रेम, सम्मान और आनंद से रहना है। कोई भी अन्य रवैया, जैसे ईर्ष्या, कलह, या एक-दूसरें से नाराजगी, नरक से है। परमेश्वर की कलीसियाओं को चाहिए कि वे बिना किसी भेदभाव के आपसी प्रेम में समृद्ध होना सीखें।
ख्रिश्चन पाठक, चाहे आप इस दुनिया की चीज़ों में कितने भी गरीब क्यों न हों, प्रभु ने आपको अनन्त जीवन और अनंत धन की मीरास के लिए अपने धन्य पुत्र मसीह यीशु में चुना है। उसने आपका नाम जीवन की पुस्तक में लिखा है, और उसने आपको अनन्त महिमा और धन के लिए पहले से ठहराया है। आप यीशु मसीह के संगी-वारिस हैं। आपको हमेशा उसकी महिमा का स्तुतिगान गाने के लिए तत्पर रहना चाहिए, क्योंकि भविष्य में आपका स्वर्ग का धन इस दुनिया के दुष्टों के व्यर्थ धन से कहीं अधिक बढ़कर है।
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