कौन से दुर्गुण आप पर राज करते और आपको बिगाड़ते हैं? दुर्गुण वह बुरी, अनैतिक या दुष्ट आदत या व्यवहार है। सुलैमान चाहता था कि उसका पुत्र और उसकी जाति बुद्धिमान हो, इसलिये उसने उन अनेक दुर्गुणों को खोलकर बताया और उनकी निन्दा की जो मनुष्यों को दास बना लेते हैं और उनका जीवन उजाड़ देते हैं। यद्यपि आज का समाज इनकी परवाह नहीं करता और अधिकांश प्रचार-मंचों पर इनकी चर्चा तक नहीं होती, फिर भी आप इन भुलाए गए और हल्के समझे गए पापों से घृणा करना सीखिए।
नीतिवचन 5:19
वह तेरे लिए प्रिय हिरनी और सुन्दर साम्भरनी के समान हो, उसके स्तन सर्वदा तुझे संतुष्ट रखे, और उसी का प्रेम नित्य तुझे मोहित करता रहे।
अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। सुलैमान ने अपने बेटे को तीन महत्वपूर्ण विकल्प चुनने की चेतावनी दी – अपनी पत्नी को प्रेम का एक नाजुक पात्र समझकर उसके साथ कोमलता से व्यवहार करना, उसके शरीर और स्त्रीत्व की सराहना करना, और अपने पति के प्रति उसके प्रेम और उसकी भक्ति से भर उठना। इस ईश्वर-प्रेरित नीतिवचन में पतियों के लिए कुछ सबसे आवश्यक वैवाहिक सलाह शामिल है। इस बुद्धि को और कुलुस्सियों 3:19 में की बुद्धि को सीखने और उसके अनुसार करने से एक व्यक्ति बहुत अधिक लाभ प्राप्त कर सकता है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 11:13
जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है।
अपनी ईमानदारी या विश्वासयोग्यता का परीक्षण करें। क्या आप किसी बात का भेद गुप्त रख सकते हैं? क्या आप इसे उन लोगों से छिपाएंगे जिन्हें जानने की आवश्यकता नहीं है? लुतराई करने वालों या बकवादी में कोई ईमानदारी नहीं होती है -उनके पास एक विश्वासयोग्य आत्मा नहीं होती है। यदि वे किसी दूसरे के विषय में हानिकारक जानकारी जानते हैं, तो वे इसे बताना ही चाहते हैं, वह भी जल्दी और व्यापक रूप से।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 14:6
निंदक बुद्धि की खोज करता है किन्तु नहीं पाता : परन्तु ज्ञान समझदार के लिए सहज है।
एक निंदक सुधार और शिक्षा से क्रोधित होता है, और जो उसे सुधारते और निर्देश देते हैं, वह उन्हें तुच्छ जानता है। वह एक विकृत मानसिकता वाला विद्रोही है, और वह बुद्धि में नहीं बढ़ेगा। परन्तु समझदार मनुष्य, जो सुधार और शिक्षा से प्रीति रखता है, बुद्धि में आसानी से बढ़ता जाता है। मनुष्यों-मनुष्यों में क्या ही फ़र्क है! मसीही, बुद्धिमान व्यक्ति बनना आपका कर्तव्य और सौभाग्य है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 14:14
जिसका मन ईश्वर की ओर से हट जाता है, वह अपनी चालचलन का फल भोगता है, परन्तु भला मनुष्य आप ही आप सन्तुष्ट होता है।
प्रिय पाठक, सावधान हो जाइए! अपना मन ईश्वर की ओर से हटा देना एक गंभीर खतरा होता है। यह बिना किसी चेतावनी के बहुत सरलता से आपके साथ हो सकता है, परंतु इसके परिणाम बहुत भयावह होते हैं। परमेश्वर आप पर व्याकुलता और कष्ट उंडेलेगा, जो आपके बेईमानी के अनुपात और अनुरूप होगा। परंतु एक भला व्यक्ति, जो अपने हृदय की चौकसी करता है, उसके हृदय में अविरत आनंद और शांति का भोज होगा।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 14:15
भोला तो हर एक बात को सच मानता है, परन्तु चतुर मनुष्य समझ बूझकर चलता है।
इस दुनिया की हर बात पर संदेह करना एक सद्गुण है। सावधानी और सतर्कता कुलीनता का लक्षण है। सबूत मांगना चतुराई है। केवल मूर्ख और भोले लोग ही सुनी या पढ़ी हुई सब बातों पर विश्वास करते हैं। चतुर और सफल व्यक्ति निर्णय लेने से पहले चीजों की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल करता है। वह कोई भी कदम उठाने से पहले जोखिमों और प्रतिफलों को समझता है। वह इत्तफ़ाक़न और संयोगवश या मात्र आशा से कुछ नहीं करता।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 15:15
दुखियारे के सब दिन दु:ख भरे रहते हैं, परन्तु जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है।
शानदार जीवन एक चुनाव है – अपने मन को संतुष्ट और प्रसन्न रखने का फैसला लेना। मनोभाव परिस्थितियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। कोई गरीबी में भी खुश रह सकता है, तो कोई समृद्धि में भी दुखी रहता है। दु:ख भरा जीवन – अर्थात् मुसीबतों, पीड़ाओं और दुर्गति से भरा हुआ – भी एक चुनाव ही है। नकारात्मक सोच रखनेवाले और असंतुष्ट लोग अपने जीवन को परिस्थितियों या मूर्खतापूर्ण भावनाओं के द्वारा नाश होने देने का विकल्प चुनते हैं। सकारात्मक सोच रखनेवाले और संतुष्ट लोगों के लिए हर दिन आनंद और खुशियाँ मनाने का दिन होता है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 16:18
विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमण्ड आता है।
अगर गुरुत्वाकर्षण से भी अधिक शक्तिशाली कोई शक्ति है जो मनुष्य को नीचे गिरा देती है, वह है गर्व या घमण्ड! सुलैमान ने यहां एक सिद्धांत दिया जिसे सभी मनुष्यों को हर दिन याद रखना चाहिए और उस पर विचार करना चाहिए। किसी भी बात पर अहंकार करना या घमण्ड से फूल जाना ऐसा मार्ग है जो आपको निश्चित रूप से विनाश की ओर ले जाएगा। जिस प्रकार से पके फल पेड़ से गिर जाते हैं, उसी प्रकार घमंडी या अहंकारी मनुष्य नीचे गिरते जाते हैं। पाठको, आज ही अपने आप को दीन बनाओ, और अपने अहंकार का तिरस्कार करो, उसे अपना शत्रु मानो।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 16:32
क्रोध में धीमा सामर्थी से भला है; और जो अपने मन को वश में रखता है, नगर को जीतने वाले से उत्तम है।
यहाँ व्यक्तिगत महानता को प्राप्त करने का पाठ है। आप कितने सामर्थी हैं? आपने क्या हासिल किया है? चरित्र की सबसे अच्छी परीक्षा है अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना, विशेषकर क्रोध को। आपके पास सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि आप अपने आवेग को केवल उन कार्यों तक सीमित रखें जो अच्छे हों।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 19:24
आलसी अपने हाथ गोद में छिपाता है, परन्तु अपने मुंह तक कौर नहीं उठाता।
आलसी लोगों को सुख-सुविधाएँ अच्छी लगती हैं और मेहनत से वे नफरत करते हैं। वे रोटी के लिए भी काम से परहेज करते हैं। वे चाहते हैं कि आप काम करें और उन्हें खिलाएं। सुलैमान ने आलसी लोगों का उपहास करने के लिए व्यंग्यात्मक अतिशयोक्ति प्रयुक्त की है। वे अपने हाथों को काम से दूर रखने के लिए अपनी बाहों को मोड़ लेते हैं, क्योंकि वे इतने आलसी हैं कि अपने मुंह में भी निवाला नहीं डाल सकते। वे उम्मीद करते हैं कि खाना सीधे उनके मुंह में गिर जाएगा। क्या यह एक अतिशयोक्ति है? हां, बिलकुल परन्तु सुलैमान ने यहाँ एक दमदार बात कही है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 25:28
जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह घेराव करके तोड़ दी गई हो।
आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी आत्मा को वश में रखते हैं या नहीं। महान पुरुष अपनी आत्माओं को वश में रखते हैं। वे प्रतिक्रिया देने या भावना में बहकर अति अनावश्यक प्रतिक्रिया देने की परीक्षा का विरोध करते हैं। वे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हैं और भलाई के लिए उनका ठीक ठीक संचालन करते हैं। जब वे किसी अकस्मात घटनाओं के विषय में सुनते हैं, तब उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने में और उनका संचालन करने में अपनी भावनाओं और आवेग को नियंत्रण में रखते हैं।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 27:4
क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है।
क्रोध अनर्थकारी है, परन्तु जलना उससे भी ज्यादा अनर्थकारी है। क्रोधी स्वभाव थोड़े समय के लिए विनाशकारी होता है, परन्तु जलन व्यक्ति के मन में ऐसी कड़वाहट उत्पन्न करती है जो कभी मिटती नहीं। मनुष्य क्रोध के कारण अपना आपा खो सकता है, परन्तु जलन या ईर्ष्या हर चीज़ को विषैली दृष्टि से देखती है। क्रोध कुछ समय के लिए भावनाओं को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन जलन आपके प्राण को तब तक खाएगी जब तक आप मृत्यु के अधोलोक में नहीं पहुँच जाते।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 29:1
दपटा हुआ मनुष्य जो अपनी गर्दन को स्तंभित रखता है, सो आकस्मात मारा जाएगा, और वह भी बिना किसी उपाय के।
क्या आप विद्रोही और जिद्दी हैं? क्या आप सुधार या शिक्षा की उपेक्षा करते हैं? क्या परमेश्वर ने आपको अक्सर किसी ऐसी बात के लिए दोषी ठहराया है जिसे आपने बदला नहीं है? क्या आपके जीवन में अधिकारियों या शिक्षकों ने आपको किसी कर्तव्य या मामले को बार बार याद दिलाया है जिसे आप ठीक करने से इनकार करते आ रहे हैं?
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