मूर्ख, ठट्ठा करनेवाले और बुद्धिमान — तीनों की पहचान उनके बोलने से होती है। वाणी चरित्र को प्रकट करती है और भविष्य का संकेत देती है। किसी का मन उसकी बातें सुनकर जाना जाता है। शब्द ही सिद्ध करते हैं कि कोई सच्चा है या झूठा; वे दूसरों को चंगाई देते हैं या पीड़ा; वे घाव करते हैं या घाव भरते हैं; उन्हीं के कारण राजा आपके मित्र बन जाते हैं, या आपसे छोटे लोग भी आपको ठुकरा देते हैं। आप क्या बोलते हैं और कैसे बोलते हैं — इस पर सुलैमान के पास कहने को बहुत कुछ था!
नीतिवचन 10:19
जहाँ बहुत बातें होती हैं, वहाँ अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुँह को बन्द रखता वह बुद्धि से काम करता है।
बुद्धि का एक सीधा और सरल नियम है कि जब भी बोलो कम शब्दों में बोलो। बहुत ज़्यादा शब्द और बहुत ज़्यादा बोलने से आपके होठों से पाप होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इस ख़तरनाक जोखिम की वजह से, बुद्धि आपको अपने शब्दों की संख्या कम करने और अधिकतर समय चुप ही रहने की शिक्षा देती है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 10:32
धर्मी ग्रहणयोग्य बात समझ कर बोलता है, परन्तु दुष्टों के मुँह से उलट फेर की बातें निकलती हैं।
बोलने से पहले सोचो। क्या आपके शब्द स्थिति के अनुकूल होते हैं? क्या आपकी बातें सुननेवालों को लाभ पहुंचाएंगी और उन्हें प्रसन्न करेंगी? एक धर्मी व्यक्ति जानता है कि क्या कहना है, कब कहना है और कैसे कहना है। वह सुनिश्चित करता है कि उसके शब्द और भाषण दूसरों के लिए ग्रहणयोग्य हों, और उसकी इस संवेदनशीलतापूर्ण सुध-बुध के कारण वे उससे प्यार करते हैं।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 11:13
जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है।
अपनी ईमानदारी या विश्वासयोग्यता का परीक्षण करें। क्या आप किसी बात का भेद गुप्त रख सकते हैं? क्या आप इसे उन लोगों से छिपाएंगे जिन्हें जानने की आवश्यकता नहीं है? लुतराई करने वालों या बकवादी में कोई ईमानदारी नहीं होती है -उनके पास एक विश्वासयोग्य आत्मा नहीं होती है। यदि वे किसी दूसरे के विषय में हानिकारक जानकारी जानते हैं, तो वे इसे बताना ही चाहते हैं, वह भी जल्दी और व्यापक रूप से।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 12:18
ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच–विचार का बोलना तलवार के समान चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
यहां एक अनमोल और शक्तिशाली नीतिवचन है, और बताता है कि किस प्रकार आप दूसरों के लिए या तो एक बड़ा ख़तरा या बड़े कल्याणकारी बन सकते हैं। आपका बोलना आपके शरीर के अन्य किसी भी हिस्से की तुलना में या तो अधिक संकट या अधिक भलाई, या अधिक दर्द या अधिक लाभ का कारण बन सकता है। जो बुद्धिमान होते हैं वे अपनी जीभ को वश में रखना सीखते हैं, और केवल ऐसे वचन बोलते हैं जिनसे दूसरों की मदद हो।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 13:3
जो अपने मुँह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो होंठ बजाता है उसका विनाश हो जाता है।
आपकी जीभ के वश में जीवन और मृत्यु दोनों हैं (नीतिवचन 18:21)। आपके बात करने का तरीका आपका भविष्य तय करता है। क्या मुँह की बातें सचमुच इतनी महत्वपूर्ण हैं? हाँ! राजा सुलैमान इस मामले में आपकी सहायता करने के इरादे से आपका ध्यान अपनी शिक्षा की ओर खींचना चाहता है। क्या आप अपने प्राण की रक्षा के लिए अपने मुँह की चौकसी कर पाते हैं? या आपका मुँह आपको अपने वश में रखता है? और क्या वह आपके विनाश का कारण बनेगा?
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 15:1
कोमल उत्तर सुनने से गुस्सा ठण्डा हो जाता है, परन्तु कटुवचन से क्रोध भड़क उठता है।
परमेश्वर मेल-मिलाप कराने वालों से प्रेम रखता है और उन्हें बहुतायत से आशीष देता है (मत्ती 5:9; याकूब 3:17-18; 2 कुरिन्थियों 13:11)। आप मेल-मिलाप कराने वाले बन सकते हैं। आप झगड़े, द्वेष और क्रोध का अन्त कर सकते हैं। यह संक्षिप्त नीतिवचन सुलैमान के सबसे अच्छे नीतिवचनों में से एक है। आप हर दिन परमेश्वर से आशीष पाने के लिए इसके ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग कर सकते हैं।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 15:28
धर्मी मन में सोचता है कि क्या उत्तर दूँ, परन्तु दुष्टों के मुँह से बुरी बातें उबल आती हैं।
इस उत्कृष्ट नीतिवचन में एक बेहतर वक्ता और एक बेहतर इंसान बनने के विषय में विशिष्ट सलाह दी गई है। कौन सा गुण श्रेष्ठ है? किसी प्रश्न का तुरन्त उत्तर देना ? या सही उत्तर देना? क्या आप तुरन्त उत्तर देने का दबाव महसूस करते हैं? यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप सही हैं, तुरन्त उत्तर देने की आवश्यकता के भाव को कुचल दें। एक बुद्धिमान और धर्मी व्यक्ति हमेशा उत्तर देने से पहले प्रश्न या मसले पर सावधानीपूर्वक विचार करता है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 18:21
जीवन और मृत्यु जीभ के वश में हैं; और जो उससे प्रीति रखते हैं, उसका फल खाएंगे। (केजेवी)
आपके मुंह के वचन आपकी या तो भलाई करेंगे या चोट पहुंचाएंगे (नीति 10:14; 12:14; 13:2-3; 18:6-7, 23)। यदि आप एक बड़े बुजुर्ग हैं, तो आप पहले ही से अच्छे और बुरे नतीजों से गुजर चुके हैं। कई लोगों ने अपनी जीभ को वश में न रखने के कारण अपनी ही जिंदगी बर्बाद कर ली है। तो वहीं कुछ ऐसे हैं जिन्हें उनके अच्छे वचनों और बुद्धिमान वाणी के कारण सम्मानित किया गया है। आपकी वाणी समय और अनंत काल दोनों में परमेश्वर और मनुष्य से आप पर आशीष या शाप ले आएगी। क्या आप भलाई के वचन बोलने से प्रीति रखते हैं, या बुरी वाणी से? आपके चुनाव और आदतों से आपके भविष्य पर बहुत असर पड़ेगा।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 21:23
जो मनुष्य अपने मुह में लगाम देता है, और जीभ को वश में रखता है, वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।
यहाँ बहुमूल्य बुद्धि और ज्ञान है! अगर आप बोलने में संयम रखेंगे तो आप कई विपत्तियों से बच जाएंगे। आपके दो सबसे बड़े दुश्मन आपका मुंह और जीभ ही हैं। यदि आप उन्हें वश में रखेंगे और सही समय पर सही शब्द ही बोलेंगे तो आपका जीवन धन्य हो जाएगा। यह बेक़ाबू वाणी ही है जो मनुष्यों को हर प्रकार की विपत्ति में डाल देती है। यहाँ अच्छे जीवन के लिए बुद्धि और ज्ञान है।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 22:11
जो मन की शुद्धता से प्रीति रखता है, और जिसके वचन मनोहर होते हैं, राजा उसका मित्र होता है।
यह सुलैमान के सबसे उत्कृष्ट नीतिवचनों में से एक है। इस वचन में आपकी सफलता के लिए ज्ञान दिया गया है, अर्थात आपको जीवन में सर्वोच्च स्थान पर ले जाने के लिए प्रेरित उपदेश दिया गया है। केवल इन कुछ शब्दों में, स्वर्ग के परमेश्वर ने बताया है कि कैसे कुछ विशिष्ट लोग बाकी आम लोगों से ऊपर उठकर महान बन जाते हैं। परमेश्वर और सुलैमान चाहते हैं कि आप समृद्धि प्राप्त करें।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 26:4
मूर्ख की मूर्खता भरी बातों का उत्तर मत देना; अन्यथा तू भी उसी के समान मूर्ख बन जाएगा।
मूर्ख कोई उत्तर पाने के योग्य नहीं होते हैं। उनके भद्दे, मूर्खतापूर्ण या उपहासपूर्ण, और मज़ाक उड़ानेवाले सवालों को नज़रअंदाज कर देने से आप उनके उत्तर देने में होने वाले दर्द, परेशानी और समय की बर्बादी से खुद को बचाएंगे। सत्य और ज्ञान का ऊँचा मार्ग अपनाओ, और उनके नफरती दुस्साहस या आलसी अज्ञानता के सामने मत झुको। किसी को उत्तर देने न तो कोई बाध्य है और न उत्तर पाने का किसी का कोई अधिकार है – सवालों के जवाब जानना केवल उन लोगों के लिए सौभाग्य है जो सत्य को जानने की शर्तों को पूरा करते हैं।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 26:28
जिसने किसी को झूठी बातों से घायल किया हो वह उससे बैर रखता है, और चिकनी चुपड़ी बात बोलनेवाला विनाश का कारण होता है।
ज़रूरी नहीं कि किसी के कहे अच्छे शब्द उसके नेक इरादों को साबित करें। झूठे और चापलूस लोग आपको बर्बाद करने के लिए हमेशा ताक में रहते हैं, चाहे उनके शब्द कितने भी अच्छे क्यों न हों, चाहे उनके बहाने कितने भी अच्छे क्यों न हों (नीतिवचन 26:24-25)। एक बुद्धिमान व्यक्ति दोनों चरित्र के लोगों से दूर रहता है, जैसा कि दाऊद रहता था (भजन 101:3-8)। यदि आप अपने जीवन में इन धोखेबाज लोगों को सहन करते हैं, तो वे आपको नीचे गिरा देंगे (नीतिवचन 20:19; 29:5)। उनके झूठे शब्दों के पीछे आपके लिए सिर्फ़ घृणा और विनाश के मंसूबे छिपे होते हैं, और बुद्धिमान और समझदार लोग उनसे दूर रहते हैं।
व्याख्या पढ़ेंनीतिवचन 29:20
क्या तू बातें करने में उतावली करनेवाले मनुष्य को देखता है? उससे अधिक तो मूर्ख ही से आशा है।
शांत रहें। बोलने में उतावली न करें। बोलने से पहले सोचें। सुनिश्चित करें कि आप अपना मुँह खोलने से पहले ठीक ठीक जानते हैं कि किस बारे में बातें कर रहे हैं। जो बातें करने में उतावली करता है, बार-बार बोलता है और बड़ी तेज़ी से उत्तर देता है, वह मूर्ख से भी बुरा है। अज्ञानता के कारण मूर्ख पर मुसीबत आ पड़ती है, परन्तु जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे जवाब देता है या बोलता है, उसे दंड दिया जाएगा। वह मूर्ख से भी बुरा है।
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