नीतिवचन की व्याख्या

1. मेरे बेटे यदि तू अपने मित्र का ज़मानतदार हुआ हो, यदि तू ने परदेसी से हाथ मिलाया है,

2. तो तू अपने ही मुँह के वचनों से फँसा, और अपने ही मुँह की बातों से पकड़ा गया।

3. इसलिये हे मेरे पुत्र, एक काम कर अर्थात् तू जो अपने पड़ोसी के हाथ में पड़ चुका है, तो जा, अपने को दीन करके उसे मना ले।

4. तू न तो अपनी आँखों में नींद, और न अपनी पलकों में झपकी आने दे;

5. और अपने आप को हरिणी के समान शिकारी के हाथ से, और चिड़िया के समान चिड़ीमार के हाथ से छुड़ा।

6. हे आलसी, चींटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो।

7. उनके न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करनेवाला,

9. हे आलसी तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? (केजेवी)

10. कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना,

12. बिगड़ा हुआ व्यक्ति, और दुष्टजन, हठीली बातें बकता फिरता है। (केजेवी)

14. उसके मन में उलट–फेर की बातें रहतीं, वह लगातार बुराई गढ़ता है और झगड़ा–रगड़ा उत्पन्न करता है।

15. इस कारण उस पर विपत्ति अचानक आ पड़ेगी, वह पल भर में ऐसा नष्ट हो जाएगा, कि बचने का कोई उपाय न रहेगा।

16. परमेश्वर इन छः बातों से बैर रखता है : हां, सात से उसका प्राण घृणा करता है : (केजेवी)

17. घमण्ड से चढ़ी हुई आँखें, झूठ बोलनेवाली जीभ, और निर्दोष का लहू बहानेवाले हाथ

19. झूठ बोलनेवाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करनेवाला मनुष्य।

20. हे मेरे पुत्र, अपने पिता की आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा को न तज।

21. इन को अपने हृदय में सदा गांठ बाँधे रख; और अपने गले का हार बना ले।

23. क्योंकि आज्ञा तो एक दीपक है; और व्यवस्था उजियाला है; और उपदेश की दपट जीवन के मार्ग।

24. ताकि तुझ को बुरी स्त्री से बचाए और पराई स्त्री की चिकनी–चुपड़ी बातों से बचाए।

25. उसकी सुन्दरता देखकर अपने मन में उसकी वासना न कर; न ही वह तुझे अपने कटाक्ष से फँसाने पाए;

26. क्योंकि वेश्यागमन के कारण मनुष्य टुकड़ों का भिखारी हो जाता है, परन्तु व्यभिचारिणी अनमोल जीवन का अहेर कर लेती है।

27. क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें?

28. क्या हो सकता है कि कोई अंगारे पर चले, और उसके पाँव न झुलसें?

29. जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है; वरन् जो कोई उसको छूएगा वह दण्ड से न बचेगा।

31. तौभी यदि वह पकड़ा जाए, तो उसको सातगुणा भर देना पड़ेगा; वरन् अपने घर का सारा धन देना पड़ेगा।

32. परन्तु जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है; जो अपने प्राणों को नष्ट करना चाहता है, वही ऐसा करता है।

33. उसको घायल और अपमानित होना पड़ेगा, और उसकी नामधराई कभी न मिटेगी।

34. क्योंकि जलन से पुरुष बहुत ही क्रोधित हो जाता है, और पलटा लेने के दिन वह कुछ कोमलता नहीं दिखाता।

35. वह घूस पर दृष्टि न करेगा, और चाहे तू उसको बहुत कुछ दे, तौभी वह न मानेगा।

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